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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- निबन्धात्मक परीक्षाओं के सुधार के लिए सुझाव बताइए।
अथवा
निबन्धात्मक परीक्षाओं के दोषों को दूर करने हेतु दिये गये सुझावों का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
निम्नलिखित सुझावों से निबन्धात्मक परीक्षाओं के दोषों को दूर किया जा सकता है-
(i) प्रश्न-पत्रों की समयावधि में सुधार - सभी छात्रों को तीन घण्टे में प्रश्न-पत्र को हल करने का समय उपयुक्त नहीं है। छात्रों की शारीरिक और मानसिक विकास की दृष्टि से प्राथमिक कक्षाओं के लिए 12 घण्टा, निम्न माध्यमिक कक्षा के लिए दो घण्टे तथा माध्यमिक तथा वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए तीन घण्टे का समय होना चाहिए।
(ii) प्रश्न-पत्रों के निर्देशन में सुधार - प्रश्न-पत्रों में दूसरी सावधानी निर्देशन देने के बारे में है। परीक्षक प्रायः अस्पष्ट और दो अर्थों वाले निर्देश दे देते हैं। इससे परीक्षार्थी भ्रम में पड़ जाते हैं। इसलिए आवश्यक बन जाता है कि निर्देशन की भाषा स्पष्ट और सरल हो।
(iii) अवसर कारक को कम करने के लिए छूट कम करना - प्रश्न-पत्रों में कम छूट होनी चाहिए और जो थोड़ी-बहुत छूट देनी भी है वह भी नियन्त्रण के साथ देनी चाहिए। जैसे प्रश्न-पत्र निर्माताओं को दो-दो या तीन-तीन प्रश्नों के जोड़े बना देने चाहिए। प्रश्न पूरे पाठ्यक्रम में से इस प्रकार फैले हुए होने चाहिए कि बिना पूरे पाठ्यक्रम को तैयार किए कोई परीक्षार्थी अच्छे अंक न प्राप्त कर सके।
(iv) प्रश्नों की रचना में सुधार - प्रश्नों की रचना को सुधारने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं-
(अ) उद्देश्यों की पूर्ति - शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान की प्राप्ति ही नहीं अपितु कौशल, रुचियों तथा अभिरुचियों में उपयुक्त विकास भी हो। इसलिए किसी स्तर के लिए प्रश्न-पत्र बनाते समय हमें उन सभी उद्देश्यों को सामने रखना चाहिए जिनकी प्राप्ति के लिये उस स्तर की परीक्षा का विधान किया गया है।
(ब) पूरे पाठ्यक्रम में से प्रश्न – प्रश्न पत्र में प्रश्न इतने और इस प्रकार पूछे जाने चाहिए कि लगभग सारे पाठ्यक्रम का प्रतिनिधित्व हो जाए। अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए परीक्षार्थियों को पूरा पाठ्यक्रम पढ़ना पड़े।
(स) कठिनता स्तर का वितरण - प्रश्न कुछ इस प्रकार के बनाने चाहिए कि उनके उत्तरोंमें विद्यार्थियों का वर्गीकरण किया जा सके कि कौन-कौन से विद्यार्थी उत्तम, मध्यम और निम्न वर्ग के हैं। इसलिए अध्यापक को चाहिए कि वह प्रश्न-पत्र में सरल और कठिन दोनों प्रकार के प्रश्न डाले।
(द) भाषा - प्रश्न सदा सरल तथा स्पष्ट भाषा में बनाने चाहिए। इसके साथ-साथ प्रश्न एकार्थी होने चाहिए।
(य) विचार प्रधान प्रश्न - प्रश्न केवल सूचनाओं से ही सम्बन्धित न हों अपितु ऐसे हों जिनका उत्तर- देने में छात्रों को विचार करना पड़े।
(v) परीक्षा व्यवस्था में सुधार - परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं-
(i) परीक्षाओं का आयोजन ऐसे समय में करना चाहिए जब न तो बहुत गर्मी हो न सर्दी।भारत. के अधिकांश भागों में नवम्बर तथा मार्च इसके लिए उपयुक्त महीने हैं।
(ii) एक परीक्षा केन्द्र में 300 से अधिक परीक्षार्थी नहीं होने चाहिए।
(iii) परीक्षाओं के दौरान वातावरण शांत हो, प्राथमिक चिकित्सा तथा ठंडे पानी का प्रावधान हो।
(vi) मूल्यांकन में सुधार-
(अ) प्रश्नों के मॉडल उत्तर- और उनके अंकन की स्कीम तैयार की जाए।
(ब) परीक्षकों को यह स्पष्ट निर्देश दिए जाएँ कि उन्हें किस उद्देश्य की दृष्टि से अंकन करना है।
(स) सबसे बढ़िया सुझाव तो यह है कि एक उत्तर--पुस्तिका दो परीक्षकों द्वारा जँचवाई जाएँ।
(vii) निबन्धात्मक परीक्षाओं के साथ-साथ लघु उत्तर- परीक्षाओं तथा वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं को जोड़ देना चाहिए।
(viii) जहाँ तक सम्भव हो प्रश्न-पत्र निर्माता और मूल्यांकनकर्ता एक ही व्यक्ति हो।
(ix) मूल्यांकन करने का कार्य केवल अनुभवी व्यक्तियों को ही देना चाहिए।
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