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बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :160
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2762
आईएसबीएन :0

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बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- स्थानीय संसाधनों का क्या अर्थ है? वाणिज्य शिक्षण में प्रयुक्त होने वाले स्थानीय संसाधनों का वर्णन कीजिए।

अथवा
वाणिज्य शिक्षण में स्थानीय संसाधनों के महत्त्व का विवेचन कीजिए।

उत्तर-

समाज के संचालन में शिक्षा का महत्त्वपूर्ण स्थान है। शिक्षा एक सामाजिक प्रक्रिया है। शिक्षा से ही बालक का समाजीकरण होता है जिससे बालक समाज का एक जागरूक सदस्य बनता है। सर्वप्रथम बालक को पैसों के दैनिक लेन-देन, दैनिक उपभोग की वस्तुओं का क्रय-विक्रय, बैंकों से रुपये निकालने एवं जमा करने, विद्युत बिल, टेलीफोन एवं मोबाइल बिल आदि जमा करने, स्पीड पोस्ट, रजिस्ट्री करने, मनी आर्डर, पोस्टल आर्डर खरीदने, टेलीफोन एवं मोबाइल बिल आदि जमा करने, डाकघर से टिकट खरीदने आदि का व्यावहारिक ज्ञान करवाया जाता है। इसी ज्ञान को बालक को जितनी सुगमता से समुदाय विशेष की स्थिति और उसकी उपलब्धियों के प्रत्यक्ष निरीक्षण तथा उसकी विभिन्न वाणिज्यिक संस्थाओं एवं संगठनों में सक्रिय भाग लेने से प्राप्त किया जा सकता है, उतना अन्य किसी संसाधनों से प्राप्त नहीं किया जा सकता है। वाणिज्य शिक्षण में इन स्थानीय संसाधनों का उपभोग आसानी से किया जा सकता है, और छात्रों को वाणिज्य का सामाजिक, व्यावहारिक एवं वास्तविक - ज्ञान कराया जा सकता है।

स्थानीय संसाधनों का अर्थ - स्थानीय संसाधनों का अर्थ उन सभी वाणिज्यिक वस्तुओं, स्थानों, संस्थानों एवं क्रिया-कलापों से है, जो किसी स्थान विशेष से सम्बन्धित होते हैं या उनका सम्बन्ध स्थान विशेष से होता है। इन संसाधनों के उपभोग से वाणिज्य के छात्र वास्तविक जीवन के विषय में व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करते हैं। शिक्षा शब्दकोष में स्थानीय संसाधन के अर्थ को स्पष्ट करते हुए लिखा गया है, ” स्थानीय संसाधन शिक्षा की यथार्थ केन्द्रित अवधारणा है, जो यह मानता है कि शैक्षिक कार्यक्रम में सीखने की प्रक्रिया को सामुदायिक संसाधनों के उपयोग द्वारा सजीवता प्रदान की जाती है, कोई सामुदायिक संस्था, व्यक्ति विशेष, संगठन, सीमा चिह्न अथवा सामग्री को संसाधन के रूप में माना जा सकता है, यदि इसे छात्रों के सामाजिक अवबोध की वृद्धि में उपयोग किया जाता है।"

मुख्य स्थानीय संसाधन - वाणिज्य-शिक्षण में उपयोग किये जाने वाले मुख्य स्थानीय संसाधन निम्नलिखित हैं-

(i) वाणिज्य संग्रहालय - वाणिज्य संग्रहालय का वाणिज्य - शिक्षण के स्थानीय संसाधनों में सर्वाधिक उपयोग किया जाता है क्योंकि इसमें विभिन्न प्रकार की वाणिज्य सामग्री जैसे- कच्चे माल के नमूने, निर्मित उत्पादों के भाग और तैयार वस्तुयें तथा व्यावसायिक कार्यालयों और भण्डार गृहों में प्रयोग की गयी साधन सामग्री और व्यावसायिक आवेदन पत्रों, व्यावसायिक पत्रों और विज्ञापनो के नमूने आदि संकलित किये गये रहते हैं। जिनका प्रायः उपभोग वाणिज्य विभाग में किया जाता है। वाणिज्य शिक्षक छात्रों को संग्रहालय में ले जाकर वाणिज्यिक वस्तुओं को दिखा सकता है साथ-साथ उनकी वाणिज्यिक विशेषताओं की जानकारी प्रदान करता है।

(ii) औद्योगिक केन्द्र - वाणिज्य शिक्षण में अन्तर्विष्ट स्थानीय संसाधनों में औद्योगिक केन्द्रों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। ऐसा इसलिए है कि उद्योग ही अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।वाणिज्य शिक्षक चाहे तो छात्रों को कक्षा में इन उद्योगों से सम्बन्धित जानकारी दे सकता है और व्यावहारिक ज्ञान हेतु इनके प्रत्यक्ष निरीक्षण के लिए औद्योगिक क्षेत्र की यात्राओं का आयोजन करके उनको मौका दे सकता है। वाणिज्य शिक्षक अपने छात्रों को औद्योगिक क्षेत्रों में ले जाकर किसी औद्योगिक प्लांट, व्यापार संस्था आदि की यान्त्रिक क्रिया-प्रणाली, उपकरण, उत्पादन तथा कार्य की अवस्थाओं आदि का निरीक्षण कराकर व्यावहारिक ज्ञान प्रदान कर सकता है। जैसे-

(i) इस उद्योग में कौन से कच्चे माल को उपयोग में लाया जाता है?
(ii) इस केन्द्र से कौन-सा माल तैयार किया जाता है?
(iii) यहाँ कच्चा माल कहाँ-कहाँ उत्पन्न होता है?
(iv) यह कच्चा माल यहाँ कैसे लाया जाता है?
(v) इस तैयार किये गये माल की क्या उपयोगिता है?

(iii) वाणिज्यिक संस्थायें - वाणिज्यिक शिक्षण के स्थानीय संसाधनों में वाणिज्यिक संस्थाओं का विशेष उपयोग होता है।वाणिज्य संस्थाओं को निम्नलिखित बातों का ध्यान अवश्य देना चाहिए-

(क) किसी वाणिज्यिक केन्द्र या संस्थान के अधिकारी से निरीक्षण के लिए पूर्व अनुमति जरूर ले लेनी चाहिए।

(ख) व्यापारिक केन्द्र या संस्थान पर पहुँचने के बाद छात्र कार्यक्रम के अनुसार-उसका विधिवत् निरीक्षण करें और उसकी उपयोगिता और कार्यप्रणाली का अध्ययन करें तथा आवश्यक विषय-वस्तु को लिखते जायें। आवश्यकता पड़ने पर वहाँ के अधिकारी या उसके द्वारा निर्धारित व्यक्ति से सहयोग लिया जा सकता है।

(ग) वापस लौटने पर छात्र कक्षा में फिर से उस विषय पर अपने प्राप्त ज्ञान एवं अनुभव को प्रस्तुत करें और विचार-विमर्श करें। अन्त में उसे क्रमबद्ध रूप से लेखबद्ध कर लें।

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