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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
अध्याय 11 - पाठ्यक्रम : अर्थ, संगठन एवं सिद्धान्त
(Curriculum - Meaning, Organization and Principles)
प्रश्न- वाणिज्य शिक्षण में पाठ्यक्रम या पाठ्यचर्या का क्या अर्थ है? परिभाषित कीजिए। पाठ्यचर्या और पाठ्य विवरण में अन्तर बताइए।
अथवा
पाठ्यक्रम व पाठ्यचर्या में अन्तर में लिखिये।
अथवा
पाठ्यक्रम को परिभाषित कीजिए।पाठ्यक्रम तथा पाठ्यचर्या में क्या अन्तर है?
उत्तर-
पाठ्यचर्या का अर्थ
'करीकुलम' (Curriculum) शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के शब्द 'क्यूररे' (Currere) से हुई है, जिसका अर्थ है 'Race course' (दौड़ का मैदान )।इस प्रकार पाठ्यचर्या वह दौड़ का मैदान है जिस पर बालक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दौड़ता है। इसके अर्थ को और अधिक स्पष्ट करने के लिए हम आगे कुछ परिभाषाएँ दे रहे हैं-
(क) कनिंघम के अनुसार- “पाठ्यचर्या कलाकार (शिक्षक) के हाथ में एक यन्त्र है जिसमें वह अपनी सामग्री (शिष्य) को अपने आदर्श (लक्ष्य) के अनुसार-अपने कलागृह (विद्यालय) मोड़ता है। "
(ख) क्रो व क्रो के शब्दों में - “पाठ्यचर्या में सीखने वाले या बालक के वे सभी अनुभव निहित हैं जिन्हें वह विद्यालय या उसके बाहर प्राप्त करता है। ये समस्त अनुभव एक कार्यक्रम द्वारा निहित किये जाते हैं जो उसके मानसिक, शारीरिक, संवेगात्मक, सामाजिक, आध्यात्मिक एवं नैतिक रूप से विकसित होने में सहायता देता है।"
(ग) वाल्टर के मतानुसार - “पाठ्यचर्या में वे समस्त अनुभव सम्मिलित हैं जिनको बालक विद्यालय के निर्देशन में प्राप्त करते हैं, इसके अन्तर्गत कक्षा-कक्ष की क्रियाओं तथा उनके बाहर के समस्त कार्य एवं खेल सम्मिलित हैं।"
(घ) माध्यमिक शिक्षा आयोग के अनुसार- “पाठ्यचर्या का अर्थ केवल उन सैद्धान्तिक विषयों से नहीं है, जो महाविद्यालय में परम्परागत ढंग से पढ़ाये जाते हैं, वरन् इसमें अनुभवों की वह सम्पूर्णता निहित है जिनको छात्र विद्यालय, कक्षा, पुस्तकालय, कार्यशाला, प्रयोगशाला और खेल के मैदान तथा शिक्षकों एवं शिष्यों के अगणित अनौपचारिक सम्पर्कों से प्राप्त करता है। इस प्रकार विद्यालय का सम्पूर्ण जीवन पाठ्यचर्या हो जाता है, जो छात्रों के जीवन के सभी पक्षों को प्रभावित कर सकता है और उनके सन्तुलित व्यक्तित्व के विकास में सहायता देता है।"
(ङ) शिक्षा आयोग के अनुसार- “विद्यालय के पर्यवेक्षण में उसके अन्दर तथा बाहर अनेक प्रकार के कार्यकलापों से छात्रों को विभिन्न अध्ययन-अनुभव प्राप्त होते हैं, हम विद्यालय पाठ्यचर्या को इन अध्ययन-अनुभवों की समष्टि समझते हैं। "
(च) सी. वी. गुड (C.V. Good) द्वारा सम्पादित शिक्षा कोष में पाठ्यचर्या की निम्नलिखित परिभाषाएँ दी गई हैं-
(i) अध्ययन के किसी प्रमुख क्षेत्र में उपाधि प्राप्त करने के लिए निर्धारित किये गये क्रमबद्ध विषयों अथवा विषय-समूह को पाठ्यचर्या के नाम से अभिहित किया जाता है, उदाहरणार्थ - शारीरिक शिक्षा की पाठ्यचर्या, सामाजिक अध्ययन की पाठ्यचर्या।
(ii) किसी परीक्षा को उत्तीर्ण करने अथवा किसी व्यावसायिक क्षेत्र में प्रवेश के लिए किसी विद्यालय द्वारा छात्रों के लिए प्रस्तुत पाठ्यवस्तु की समग्र योजना को पाठ्यचर्या कहते हैं।
(iii व्यक्ति को समाज में समायोजित करने के उद्देश्य से विद्यालय के निर्देशन में निर्धारित शैक्षिक अनुभवों का समूह पाठ्यचर्या कहलाती है।
पाठ्यचर्या तथा पाठ्य-विवरण में अन्तर
पाठ्यचर्या (Curriculum) की अवधारणा विस्तृत एवं व्यापक है। इसके अन्तर्गत वे सभी अनुभव आ जाते हैं जिन्हें छात्र विद्यालय के तत्त्वावधान में प्राप्त करता है और जिनमें कक्षा के अन्दर तथा बाहर दोनों ही स्थानों पर आयोजित की जाने वाली सभी पाठ्य एवं पाठ्येत्तर क्रियाएँ आ जाती हैं। इसमें सभी बौद्धिक विषय विविध कौशल अनेकानेक कार्य पढ़ना-लिखना, शिल्प खेलकूद आदि क्रियाकलाप शामिल हैं। पाठ्यचर्या को क्रिया एवं अनुभव के रूप में समझा जा सकता है। यह अर्जित ज्ञान या संगृहीत तथ्य नहीं है।कक्षा, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, क्रीड़ास्थल और विद्यालय के प्रांगण में प्राप्त किये जाने वाले समस्त अनुभवों को यह अपने आँचल में समेट लेती है। साथ ही वैयक्तिक और सामाजिक क्षेत्रों के सभी उद्योगों और व्यवसायों, कौशलों एवं अभिवृत्तियों को भी अपनी परिधि में रख लेती है।
पाठ्यचर्या शब्द का प्रयोग कभी-कभी भ्रमवश 'पाठ्य-विवरण' (Syllabus) के अर्थ में कर दिया जाता है, परन्तु पाठ्य-विवरण पाठ्यचर्या का अंश मात्र है न कि सम्पूर्ण पाठ्यचर्या।हेनरी हेरप के अनुसार- “सिलेबस (पाठ्य-विवरण) मात्र वह मुद्रित संदर्शिका है जो बताती है कि छात्र को क्या सीखना है।" हेनरी हेरप महोदय सिलेबस निर्माण को पाठ्यचर्या (Curriculum) विकास के कार्य का एक तर्कसम्मत सोपान मानते हैं।
बौद्धिक विषयों की सामग्री को पाठ्य वस्तु या अन्तर्वस्तु (Content) कहा जाता है। कक्षा के . शिक्षण की दृष्टि से शिक्षण की सुविधा के लिए जब इस विषय-वस्तु या पाठ्य वस्तु को व्यवस्थित कर लिया जाता है तो उसे हम पाठ्य-विवरण कह सकते हैं। रॉबर्ट डोटर्न ने पाठ्यचर्या तथा पाठ्य-विवरण के अन्तर को इस प्रकार स्पष्ट किया है-
“सिलेबस विद्यालय वर्ष के दौरान विभिन्न विषयों में शिक्षक द्वारा छात्रों को दिये जाने वाले ज्ञान की मात्रा के विषय में निश्चित जानकारी प्रस्तुत करता है, जबकि करीक्यूलम यह प्रदर्शित करता है कि शिक्षक किस प्रकार की शैक्षिक क्रियाओं द्वारा सिलेबस की आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा। दूसरे शब्दों में, सिलेबस शिक्षण की पाठ्य-वस्तु का निर्धारण करता है और करीक्यूलम उसे देने के लिए प्रयुक्त विधि का।"
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