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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- सतत् तथा व्यापक मूल्यांकन का क्या महत्त्व है? वर्णन कीजिए।
उत्तर-
वार्षिक परीक्षा परिणामों से छात्रों के विकास का अनुमान लगाया जा सकता है। परंतु उनके बौद्धिक ज्ञान के साथ-साथ दैनिक साप्ताहिक, मासिक गतिविधियों, सामाजिक, सामुदायिक व्यावहारिक गतिविधियों और शारीरिक उपलब्धियों का सही निरीक्षण, परीक्षण नहीं किया जा सकता है। अध्यापकों और अभिभावकों को पूरा वर्ष बीत जाने के बाद परीक्षा के परिणाम से केवल बौद्धिक उपलब्धि का ही पता चलता था।परंतु आज के वैज्ञानिक युग में बालक के सतत् और व्यापक परीक्षणों से संपूर्ण सर्वांगीण विकास का पता लगाना अनिवार्य है।
महात्मा गांधी जी की केवल शैक्षिक उपलब्धि को देखा जाय तो सामान्य ही थी, परंतु उनके व्यक्तिगत व्यक्तित्व, सामाजिक, सामुदायिक, राजनैतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यावहारिक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धियों के कारण वह विश्व के महान महापरुष और विश्व शांति के पुजारी थे। यह मूल्यांकन सतत् और व्यापक सर्वेक्षण, निरीक्षण से ही किया जा सकता है।
कल्पना चावला का लिखित परीक्षण से मूल्यांकन करना आंशिक मूल्यांकन है। परंतु उसके दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक परीक्षण की उपलब्धियों से उत्साहित होकर त्रुटियों को दूर करते हुए आगे बढ़ने के अवसर मिलने से उसका सर्वांगीण विकास हुआ, जिससे कम आयु में अंतर्राष्ट्रीय स्पर्द्धा में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त किया।
सतत् निरीक्षण से विद्यार्थियों और अध्यापकों की शैक्षिक समस्याओं, कङ्गिनाइयों को दूर करके सही दिशा और निर्देशों से सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रदर्शित किया जाता है।
मूल्यांकन से पाङ्ग्यक्रम को आवश्यकतानुसार परिवर्तन, सुधार करने के संकेत प्राप्त होते हैं, क्योंकि पाङ्ग्यक्रम तत्कालीन वातावरण, परिस्थितियों और सामाजिक, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुकूल प्रस्तुत किया जाता है।
मूल्यांकन से अध्यापकों को अध्यापन में सफलता, असफलता, त्रुटियों का आभास हो जाता इसलिए सफल अध्यापक विधियों और अनुभवों से प्रशिक्षण में सफलता प्राप्त करता है।
सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन से स्वयं विद्यार्थियों को भी सफलता और असफलता का आभास हो जाता है। विद्यार्थी भी त्रुटियों, शंकाओं को दूर करके अध्यापकों के सही मार्गदर्शन में शैक्षिक उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल होता है।
सतत् और व्यापक मूल्यांकन अभिभावकों को भी उनके बच्चों की उपलब्धि का आभास करवाता है अभिभावक अपने बच्चों के प्रति सक्रिय और जागरूक होकर बच्चों के सर्वांगीण विकास में योगदान देते हैं।
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