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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- ब्लू प्रिन्ट क्या है? इसके पद बताते हुये इसे बनाने की विधि का वर्णन कीजिए। किसी एक विषय का ब्लू प्रिन्ट भी तैयार कीजिए।
अथवा
ब्लू प्रिन्ट का अर्थ स्पष्ट करते हुये इसकी विधि का विवरण दीजिये एवं इसका प्रारूप बनाइये।
अथवा
ब्लू प्रिन्ट क्या है ? उपलब्धि परीक्षण तैयार करने में यह किस प्रकार सहायक है?
सम्बन्धित लघु उत्तरीय प्रश्न
1. ब्लू प्रिन्ट क्या है ?
2. ब्लू प्रिन्ट के पदों को बताइये।
3. किसी एक ब्लू प्रिन्ट का प्रारूप बनाइये।
उत्तर-
(Meaning of Blue Print)
ब्लू प्रिन्ट परीक्षण का ढाँचा तैयार करने के लिए विशेष उपयोगी होता है। पाठ्यवस्तु के प्रकरणों एवं प्रश्नों के प्रकारों के अनुसार-अंक वितरण तथा आन्तरिक विकल्पों एवं प्रश्नों की संख्या के निर्धारित हो जाने के उपरान्त विभिन्न लक्ष्यों और पाठ्यवस्तु में विभिन्न अनुपातिक बलों का निर्वाह करते हुए समुचित अनुपात में विभाजित करके एक त्रिस्तरीय सारणी में व्यवस्थित कर लेने को ही प्रश्नपत्र की रूपरेखा या ब्लू प्रिन्ट कहते हैं।
ब्लू प्रिन्ट का प्रारूप
(Format of Blue Print)
विषय ............................ उपविषय ............................
कक्षा ............................ प्रश्नपत्र ............................
अधिकतम अंक ............................ निर्धारित समय ............................
इकाई ............................ कुल प्रश्नों का संख्या ............................

टिप्पणी - ब्लू प्रिंट में प्रविष्टियाँ भरते समय कोष्ठक () के भीतर प्रश्नों की संख्या तथा बाहर प्रश्न* के अंक अंकित करें। वैकल्पिक प्रश्नों की प्रविष्टि को अंकित करते समय उसे तारांकित (*) कर दें, तथा इन प्रश्नों को योग में सम्मिलित न करें।
* विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों की संख्या - ........ * अति लघु उत्तरीय प्रश्नों की संख्या -
* लघु उत्तरीय प्रश्नों की संख्या - ..............* वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की संख्या - ........
(Steps of Preparing Blue Print)
इसमें निम्नलिखित सोपानों का अनुसरण किया गया है जो उपलब्धि परीक्षण तैयार करने में निम्न प्रकार सहायक है- किसी सम्प्राप्ति परीक्षण का ब्लू प्रिंट / नीलपत्र उसके प्रश्न पत्र निर्माण में आधार पत्र का कार्य करता है, नील पत्र तैयार करते समय कई पक्षों पर विचार करना होता है जिनमें सम्प्राप्ति का मूल्यांकन हेतु शिक्षण लक्ष्य, उप इकाइयाँ, पद प्रकार एवं पदों के कठिनाई स्तर का विशेष ध्यान रखना होता है। प्रश्न पत्र के पूर्णांक को ध्यान में रखते हुए उपरोक्त पक्षों में भारांकन किया जाता है। जिनका विवरण निम्नलिखित है-
(i) शिक्षण लक्ष्यों में भारांकन - एक अच्छे उपलब्धि परीक्षण की रूपरेखा पूर्व निर्धारित शिक्षण लक्ष्यों के अनुसार-तैयार की जानी चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए एक प्रश्न उसी योग्यता की जाँच करे जिसके लिए उसका निर्माण किया गया हो। ब्लू प्रिंट तैयार कर लेने से इस उद्देश्य की प्राप्ति की जा सकती है। शिक्षण लक्ष्यों में भारांकन निम्न सारणी के अनुसार-दिया जाता है-
| क्रम.सं. | शिक्षण लक्ष्य | प्रश्नों की संख्या | अंक | अनुमानित प्रतिशत |
| 1. |
ज्ञानात्मक 'K' | 6 | 7 | 35 |
| 2. |
बोधात्मक 'U' | 6 | 5 | 25 |
| 3. |
अनुप्रयोग 'A' | 1 | 6 | 30 |
| 4. |
कौशल 'S' | 1 | 2 | 10 |
| योग |
14 | 20 | 100 |
(ii) उप इकाइयों में भारांकन - इकाई हेतु सम्प्राप्ति परीक्षण बनाते समय विभिन्न उप इकाइयों को महत्व दिया जाना चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि प्रश्नों तथा भारांकन विभिन्न उप इकाइयों में आवंटित किए जाएं। उप इकाइयों में भारांकन इस प्रकार है-
| क्रम. सं. | उप इकाई / प्रकरण | अंक | अनुमानित प्रतिशत |
| 1. |
I. अम्ल | 4 | 20 |
| 2. |
II. क्षारक | 4 | 20 |
| 3. |
III. लवण | 8 | 40 |
| 4. |
IV. सयुक्त | 4 | 20 |
| योग | 20 | 100 |
(iii) विभिन्न पद प्रकार में भारांकन - सम्प्राप्ति परीक्षण में अधिकतम वैद्यता, विश्वसनीयता तथा वस्तुनिष्ठता लाने के लिए परीक्षण पदों हेतु निबन्धात्मक, लघु उत्तरीय, अति लघु उत्तरीय एवं वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का समन्वित उपयोग करना चाहिए। अतः परीक्षण निर्माता को पहले ही निर्धारित कर लेना चाहिए कि वह विभिन्न प्रकार के प्रश्नों को क्या आनुपातिक महत्व देगा ? तद्नुसार अंकों का आवंटन किया जाना चाहिए। इसका भारांकन निम्न सारणी के अनुसार-है-
| क्रम. सं. | पदों के प्रकार | पदों की संख्या | अंक | अनुमानित प्रतिशत |
| 1. |
वस्तुनिष्ठ प्रश्न 'O' | 10 | 10 | 50 |
| 2. |
लघु उत्तरीय प्रश्न 'S' | 3 | 6 | 30 |
| 3. |
विस्तृत उत्तरीय प्रश्न 'E' | 1 | 4 | 20 |
| योग | 14 | 20 | 100 |
(iv) पदों के कठिनाई स्तर में भारांकन - उपलब्धि परीक्षण के निर्माण के पूर्व ब्लू प्रिंट तैयार कर लेने से परीक्षण निर्माण कर्त्ता को परीक्षार्थी की क्षमता के अनुसार-ही पद / प्रश्न बनाने की जानकारी प्राप्त हो जाती है। परीक्षण की रूप रेखा बनाते समय सरल प्रश्न, सामान्य प्रश्न एवं कठिन प्रश्नों को 15%, 70% एवं 15% के अनुपात में रखना चाहिए। पदों के कठिनाई स्तर में भागकन निम्न सारणी के अनुसार-दिया गया है-
| क्रम. सं. | कठिनाई स्तर | प्रश्नों की संख्या | अंक | अनुमानित प्रतिशत |
| 1. |
सरल प्रश्न 'E' | 4 | 6 | 30 |
| 2. |
सामान्य प्रश्न 'A' | 5 | 6 | 30 |
| 3. |
कठिन प्रश्न 'D' | 5 | 8 | 40 |
| योग |
14 | 20 | 100 |
3. ब्लू प्रिंट तैयार करना (Preparing Blue Print) - ब्लू प्रिंट को परीक्षण निर्माण हेतु आधार पत्र के रूप में उपयोग किया जाता है। यहाँ उपरोक्त भारांकन को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित नील पत्र तैयार किया गया है।

टिप्पणी - कोष्ठक के भीतर प्रश्नों की संख्या तथा बाहर अंक अंकित हैं।
विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों की संख्या - 01 वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की संख्या - 10
लघु उत्तरीय प्रश्नों की संख्या - 03
4. परीक्षण पद बनाना एवं चयन करना (Constructing and Selecting Test Items) - ब्लू प्रिंट को आधार मानते हुए परीक्षण पदों का निर्माण किया गया। जिसमें लगभग दो गुने प्रश्न तैयार किए गए। तदुपरान्त इन प्रश्नों में से उपयुक्त 14 प्रश्नों का चयन किया गया जो निर्धारित लक्ष्यों का मूल्यांकन कर सकते थे। इन प्रश्नों का चयन बड़ी सावधानी से किया गया है।
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