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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन तथा श्रेणीकरण प्रणाली पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर-
सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन (Continuous and Comprehensive Evaluation) - सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन (सी. सी. ई.) से अभिप्राय एक ऐसी नियमित निरन्तर और व्यापक मूल्यांकन पद्धति से है जो विद्यार्थी के समग्र शैक्षिक एवं सह शैक्षिक विकास का मापन करता है। सतत् शब्द से अभिप्राय है नियमितता तथा निरन्तरता पर बल देना अर्थात् नियमित मूल्यांकन इकाई परीक्षणों की आवृत्ति, अधिगम प्रक्रिया के अन्तरालों का विश्लेषण, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को स्वमूल्यांकन के लिए जानकारी प्रदान करता है। व्यापक शब्द से अभिप्राय विद्यार्थी के विकास के दोनों पक्षों (शैक्षिक एवं सह - शैक्षिक) को सम्मिलित करना अर्थात् संज्ञानात्मक, भावात्मक तथा क्रियात्मक योग्यताओं के समस्त पक्षों का मूल्यांकन करना है। शैक्षिक शब्द में वे समस्त पक्ष शामिल होते हैं जो मस्तिष्क अथवा बौद्धिक विकास से सम्बन्धित होते हैं। इसमें विद्यार्थी के पाठ्यचर्या सम्बन्धित विषय, प्रोजेक्ट कार्य, असाइनमेंट, मौखिक तथा प्रयोगात्मक कार्य आदि सम्मिलित हैं। सह शैक्षिक शब्द में वे क्रियायें आती हैं जिनका सम्बन्ध दैहिक एवं हृदय से होता है तथा इसका अभिप्राय क्रियात्मक कौशल, जीवन कौशल, शारीरिक विकास, मूल्य, अभिवृत्ति, रुचि तथा सहपाठ्यक्रम सम्बन्धित क्रियाओं से है।
सतत् एवं व्यापक मूल्यांकन के उद्देश्य विभिन्न विषयों में निश्चित समयान्तराल पर बच्चों की प्रगति जानने हेतु, बच्चों के व्यवहार में हुये परिवर्तनों का पता लगाने हेतु, अधिक उपयुक्त तरीकों के आधार पर अध्यापन एवं सीखने की स्थितियों की योजना बनाने हेतु, कक्षा में चल रही सीखने सिखाने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने हेतु बच्चे को स्वआकलन हेतु प्रोत्साहन करना तथा सृजनशीलता को बढ़ावा देना आदि है।
श्रेणीकरण प्रणाली (Grading System) - श्रेणीकरण प्रणाली एक ऐसी प्रणाली है जिसका उपयोग किसी छात्र के शैक्षिक प्रदर्शन का आकलन करने के लिये किया जाता है जो अंकों पर आधारित होती है। कोब्से (Cobse) ने सन् 1981 में मूल्यांकन समिति का गठन किया जिसने पाँच सूत्र श्रेणीकरण प्रणाली आरम्भ करने का सुझाव दिया। इस प्रक्रिया में छात्रों के श्रेणीकरण का आधार अंक होना चाहिये। एन.सी.ई.आर.टी. ने सन् 1989 में नौ सूत्र श्रेणीकरण प्रणाली को सुझाया।
श्रेणीकरण एक प्रविधि है जिसमें व्यक्ति का वर्गीकरण पूर्व निर्धरित मानकों के आधार पर किया जाता है। श्रेणीकरण से पाठ्यचर्या की उपयुक्तता तथा क्रियान्वयन रणनीति में सुधार हेतु सुझाव मिलता है तथा यह छात्रों के विद्यालय में कक्षोन्नति को स्पष्ट करता है। ग्रेड द्वारा छात्र के विकास का स्थायी रिकार्ड प्रस्तुत करता है तथा अनुदेशन उपलब्धि के स्तर का आभास होता है। श्रेणीकरण प्रणाली द्वारा शिक्षक छात्रों को विभिन्न समूहों जैसे प्रतिभाशाली छात्र, औसत छात्र, औसत से कम छात्र में वर्गीकृत करने में सक्षम होते हैं ताकि शिक्षक औसत और औसत से कम छात्र पर ध्यान दे सकें। इसमें AF जैसे ग्रेड या 1 - 10 जैसे रेंज शामिल होते हैं।
गुण - परिणाम में सटीकता, प्रदर्शन में कमी, प्रतिस्पर्धा में कमी आदि हैं।
दोष- इस प्रणाली में छात्र की वास्तविक क्षमता के बजाय केवल छात्रों द्वारा प्राप्त ग्रेड की जानकारी मिलती है। छात्र अपना ध्यान उच्च अंक प्राप्त करने के बजाय केवल उत्तीर्ण अंक प्राप्त करने पर केन्द्रित करते हैं। इससे छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा कम होती है और उनका बौद्धिक स्तर गिरता जाता है।
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