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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 हिन्दी शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- लघु उत्तरीय परीक्षा के गुण-दोषों का विवेचन कीजिए।
उत्तर-
लघु उत्तरीय परीक्षा के गुण
(1) छात्रों को पाठ्य-वस्तु के तत्त्वों का सूक्ष्म रूप से अध्ययन करना होता है।
(2) कम समय में अनेक प्रश्नों का उत्तर- देना होता है, समस्त पाठ्य वस्तु पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
(3) भाषा तथा सुलेख का प्रभाव अधिक होता है।
(4) इनके प्रश्नों की रचना में किसी प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होती पुराने प्रश्नों की सहायता से प्रश्न बनाये जा सकते हैं।
(5) छात्र पाठ्य-वस्तु के महत्त्वपूर्ण तत्त्वों का व्यापक रूप से अध्ययन करता है।
(6) लघु उत्तरीय परीक्षा द्वारा अध्यापक विद्यार्थी के अपने ज्ञान, तर्फ तथा विचारों को क्रमबद्ध रूप से प्रकट करने का मूल्यांकन कर सकता है।
(7) पाठ्य वस्तु का व्यापक रूप ही अध्ययन के लिए पर्याप्त होता है।
(8) इनका प्रयोगं ज्ञान - उद्देश्य के मापन के लिए होता है।
लघु उत्तरीय परीक्षा के दोष
(1) इस परीक्षा में विषय-वस्तु की अपेक्षा शिक्षण के व्यक्तिगत दृष्टिकोण अथवा विचारों पर बहुत जोर दिया जाता है।
(2) मूल्यांकन की प्रणाली पक्षपातपूर्ण होती है।
(3) लघु उत्तरीय परीक्षा का अंकन कठिन होता है।
(4) विषय का स्वामित्व होने पर ही अंकन किया जा सकता है।
(5) इस तरह की प्रणाली वैध नहीं होती।
(6) मानक विकसित करना कठिन होता है, प्रमाणिक नहीं बनाया जा सकता।
(7) लघु उत्तरीय परीक्षा केवल पुस्तक के ज्ञान की ही जाँच कर पाती है। इसके द्वारा विद्यार्थियों के सभी वैयक्तिक पहलुओं की जाँच नहीं हो पाती है।
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