बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्यसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- अनुदेशन तकनीकी से आप क्या समझते हैं? इसकी अवधारणाओं एवं विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
उत्तर-
अनुदेशन तकनीकी
अनुदेशन तकनीकी को निर्देशन तकनीकी भी कहते हैं। अनुदेशन का अर्थ उन क्रियाओं से होता है जो अधिगम में सुविधायें प्रदान करती हैं। इसमें शिक्षक और छात्र के मध्य अन्तः क्रिया आवश्यक नहीं होती। साधारणतया शिक्षण और अनुदेशन में कोई अन्तर नहीं किया जाता है। अनुदेशन और शिक्षण दोनों में छात्रों को सीखने की प्रेरणा दी जाती है। अनुदेशन का अर्थ है सूचनाएँ प्रदान करना। जबकि शिक्षण में शिक्षक और छात्रों के बीच अन्तः क्रिया का होना अति आवश्यक है। परन्तु अनुदेशन में छात्र अभिक्रमित अनुदेशन के द्वारा स्वयं सीख सकता है। शिक्षण में भी अनुदेशन का प्रयोग किया जाता है, इसीलिए शिक्षण को तो अनुदेशन कहा जा सकता है, किन्तु अनुदेशन को शिक्षण नहीं कहा जा सकता क्योंकि अनुदेशन में शिक्षक और छात्र के बीच अन्तःप्रक्रिया का होना आवश्यक नहीं है। अनुदेशन तकनीकी मशीन तकनीकी पर आधारित है। इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की दृश्य-श्रव्य सामग्री, जैसे- रेडियो, टेलीविजन, रिकॉर्ड प्लेयर, प्रोजेक्टर आदि आते हैं। इनकी सहायता से विद्यार्थियों के बड़े-बड़े समूहों को कम से कम समय तथा कम खर्च में ज्ञान दिया जा सकता है।
अनुदेशन तकनीकी की परिभाषा-
(1) "अनुदेशन तकनीकी का तात्पर्य प्रविधियों अथवा विधियों के उस समूह से है जो किन्हीं सुनिश्चित अधिगम लक्ष्यों को प्राप्त करता है।" - ए. आर. शर्मा
(2) "अनुदेशन तकनीकी शिक्षण और सीखने की समस्त प्रक्रिया को विशिष्ट उद्देश्यों के अनुसार रूपरेखा तैयार करने, चलने तथा उसका मूल्यांकन करने की एक क्रमबद्ध रीति है। यह शोधकार्य तथा मानवीय सीखने एवं आदान-प्रदान करने पर आधारित है। इसमें शिक्षण को प्रभावशाली बनाने के लिए मानवीय तथा अमानवीय साधन प्रयुक्त किये जाते हैं।" - एस. एम. मैकमूस्नि
इस परिभाषा से स्पष्ट होता है कि अनुदेशन तकनीकी में सीखने की प्रक्रिया सम्बन्धी उद्देश्यों की रूप-रेखा तैयार करने, उसको प्रेरित करने, आगे बढ़ाने एवं पाठ को प्रस्तुत करने हेतु अनेक प्रविधियाँ, विधियाँ, युक्तियों एवं दृश्य-श्रव्य सामग्री प्रयुक्त की आती है और अंत में उद्देश्यों की प्राप्ति का मूल्यांकन करके आवश्यकता के अनुरूप परिवर्तन किया जा सकता है ताकि उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके। इसके अतिरिक्त यह तकनीकी मानवीय सीखने के आदान-प्रदान सम्बन्धी शोध कार्यों पर आधारित है तथा इस तकनीकी में शिक्षण को प्रभावशाली बनाने के लिए मानवीय एवं अमानवीय दोनों प्रकार के साधन उपयोग में लाये जाते हैं।
अनुदेशन तकनीकी की अवधारणायें - अनुदेशन तकनीकी की अवधारणायें निम्नलिखित है-
(1) पाठ्यवस्तु का चुनाव उसके उद्देश्यों को ध्यान में रखकर किया जा सकता है।
(2) इस तकनीकी में पाठ्यवस्तु का प्रस्तुतीकरण स्वतंत्र रूप से तथा पाठ्यवस्तु को छोटे-छोटे तत्वों में विभाजित करके किया जा सकता है।
(3) पाठ्यवस्तु के छोटे-छोटे तत्वों की सहायता से समुचित अधिगम की परिस्थितियाँ उत्पन्न की जा सकती हैं।
(4) पाठ्यवस्तु के प्रस्तुतीकरण में अनेक विधियों, प्रविधियों तथा दृश्य-श्रव्य सामग्री की सहायता से अधिगम के उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सकता है।
(5) इस तकनीकी की मदद से विद्यार्थियों को अपनी व्यक्तिगत विभिन्नताओं के अनुसार सीखने का अवसर दिया जाता है।
(6) अनुदेशन सामग्री की सहायता से विद्यार्थियों को सीखने की दिशा तथा उनको समुचित पुनर्बलन प्रदान किया जा सकता है।
(7) अध्यापक की अनुपस्थिति में भी विद्यार्थी स्वयं अध्ययन द्वारा सीख सकता है।
(8) यह तकनीकी विद्यार्थियों में अपेक्षित व्यवहार परिवर्तन लाने में सहायता करती है।
(9) इस तकनीकी के द्वारा शिक्षण एवं सीखने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहायता मिलती है।
अनुदेशन तकनीकी की पाठ्यवस्तु - अनुदेशन तकनीकी के अंतर्गत निम्नलिखित पाठ्यवस्तु सम्मिलित की जाती है-
(1) अनुदेशन तकनीकी का अर्थ, परिभाषा एवं विकास।
(2) अभिक्रमित अनुदेशन का अर्थ एवं परिभाषा।
(3) शाखीय तथा रेखीय अभिक्रमित अनुदेशन का अर्थ, स्वरूप एवं अवधारणायें।
(4) कम्प्यूटर की सहायता द्वारा अनुदेशन।
(5) व्यक्तिगत विभिन्नता के लिये समायोजन प्रविधियाँ।
(6) नियम एवं उदाहरण प्रणाली द्वारा अनुदेशन।
अनुदेशन तकनीकी की विशेषताएँ - अनुदेशन तकनीकी की प्रमुख विशेषताएँ निम्न प्रकार से हैं-
(1) अनुदेशन विभिन्न प्रकार की दृश्य-श्रव्य सामग्री, विधियों, प्रविधियों द्वारा प्रदान किया जाता है।
(2) चूँकि अनुदेशन का अर्थ केवल ज्ञान व सूचनायें प्रदान करना है, अतः इस तकनीकी के द्वारा ज्ञानात्मक उद्देश्यों की प्राप्ति की जाती है।
(3) अनुदेशन तकनीकी शिक्षण को प्रभावपूर्ण बनाती है।
(4) अनुदेशन तकनीकी दृश्य-श्रव्य सामग्री पर आधारित है, इसलिए शिक्षण धीरे-धीरे यंत्रवत होता जाता है।
(5) इसमें निर्देशन केवल शिक्षण के स्मृति स्तर पर आधारित होता हैं।
(6) इस तकनीकी के क्षेत्र में विभिन्न प्रयोगों एवं शोध कार्यों की सहायता से महत्वपूर्ण अनुदेशनात्मक सिद्धान्तों का विकास किया जा सकता है, जिससे अनुदेशन को प्रभावपूर्ण बनाया जा सकता है।
(7) इसमें छात्रों को उनकी व्यक्तिगत विभिन्नताओं के अनुसार सीखने का अवसर प्रदान किया जाता है।
(8) यह तकनीकी मनोविज्ञान तथा अधिगम के सिद्धान्तों पर आधारित है।
(9) इसमें छात्रों को सही अनुक्रिया दिया जाता है।
(10) इस तकनीकी में शिक्षक छात्र सम्बन्धों का अभाव रहता है, अतः शिक्षक का स्थान एक सहायक के रूप में होता है।
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