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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2758
आईएसबीएन :0

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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य - सरल प्रश्नोत्तर

 

अध्याय-15 फ्लैण्डर्स का अन्तः क्रिया विश्लेषण

(Flander's Interaction Analysis)

प्रश्न- अन्तः क्रिया विश्लेषण का क्या अर्थ है? फ्लैण्डर्स की अन्तः क्रिया विश्लेषण प्रणाली की बुनियादी सैद्धान्तिक मान्यताओं की विवेचना कीजिए।

उत्तर-

अन्तःक्रिया विश्लेषण का अर्थ

'अन्तः क्रिया विश्लेषण' की सही परिभाषा फ्लैण्डर्स के द्वारा सन् 1961 में दी गयी थी। उन्होंने इसका निर्माण अध्यापक-विद्यार्थी के आपसी व्यवहार, प्रभाव एवं उपलब्धियों के आधार पर किया था। शिक्षण में शिक्षक व्यवहार एक क्रिया है जो कक्षा में की जाती है। कक्षा शिक्षण के दौरान शिक्षक की विभिन्न प्रकार की अन्तः क्रियाएँ होती हैं। विद्यार्थियों के साथ होने वाली क्रिया तथा व्यवहार के माध्यम से अन्तःक्रिया की जा सकती है। अध्यापक-विद्यार्थी के बीच शाब्दिक और अशाब्दिक विचारों व संकेतों का आदान-प्रदान होता है। कक्षा व्यवहार और कक्षा क्रिया के : विश्लेषण को अन्तः क्रिया विश्लेषण कहा जाता है। यह अन्तः क्रिया विश्लेषण एक विशिष्ट शोध प्रक्रिया है। कक्षा में होने वाली क्रमबद्ध घटनाओं के अध्ययन की एक वस्तुनिष्ठ व वैज्ञानिक विधि है। यह विधि अध्यापक को अपने शिक्षण कार्य में अधिक प्रभावशाली बनाने और विद्यार्थियों से अपनी अन्तःक्रिया को सुधारने में सहायता प्रदान करता है। अन्तः क्रिया विधि की सहायता से कक्षा के सभी व्यवहारिक ज्ञान का निरीक्षण करके उन्हें अंकित किया जाता है। इसके द्वारा शिक्षक को अपने शिक्षण को उद्देश्यपूर्ण बनाने में मदद मिलती है। इस प्रकार अन्तः क्रिया विश्लेषण एक ऐसी विधि है जिसके द्वारा अध्यापक व्यवहार और कक्षा अन्तःक्रिया के प्रारूप का निरीक्षण और विश्लेषण किया जाता है।

अन्तःक्रिया विश्लेषण की परिभाषा सर्वप्रथम प्रयास एण्डरसन ने सन् 1935 में दी थी। एण्डरसन के कार्यों से प्रभावित होकर फ्लैण्डर्स ने सन् 1959 में दसवर्षीय अन्तः क्रिया विश्लेषण प्रणाली का विकास किया । अन्तः क्रिया विश्लेषण की कुछ परिभाषाएँ शिक्षाविदों ने निम्नलिखित रूप में दी हैं-

(1) रूहेला के अनुसार - "डॉ. रूहेला ने अपनी पुस्तक 'Education Technology' में लिखा है कि कक्षीय अन्तःक्रिया विश्लेषण को दो भागों में बाँटा जा सकता है- (i) शाब्दिक अन्तःक्रिया, (ii) अशाब्दिक अन्तः क्रिया।"

(i) शाब्दिक अन्तः क्रिया - इस अन्तः क्रिया में अध्यापक एवं विद्यार्थियों का आपसी प्रभाव सम्मिलित है।

(ii) अशाब्दिक अन्तःक्रिया - अध्यापक कक्षा में शिक्षण कार्य करते समय वह कई चीजों को संकेतों द्वारा समझाता है, ये सभी अशाब्दिक अन्तःक्रिया के अंतर्गत आते हैं।

(2) डॉ. एस. के. ठाकुर के विचारों के अनुसार - "कक्षीय अन्तः क्रिया विश्लेषण के एक ऐसे साधन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो शिक्षण अधिगम सत्र के दौरान शाब्दिक अन्तःक्रिया के वर्गों को रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता है। इस तकनीक के द्वारा कक्षा में अध्यापक के शाब्दिक व्यवहार के परिणामस्वरूप एवं गुणात्मक आयामों को प्रकट किया जाता है।"

(3) डॉ. आर. ए. शर्मा के विचारानुसार - "अन्तर्क्रिया विश्लेषण एक विशेष शोध प्रक्रिया है जो शिक्षण के कई पक्षों में से केवल कुछ ही सूचना प्रदान करती है। यह अध्यापक और विद्यार्थियों के बीच सहज सम्प्रेषण का विश्लेषण करती है....... अन्तःक्रिया विश्लेषण केवल उस शाब्दिक सम्प्रेषण से संबंधित है जिसमें विषय-वस्तु पहले से तैयार नहीं होती। अन्तःक्रिया विश्लेषण की समूची प्रक्रिया अध्यापक प्रभाव का मापक बन जाती है, क्योंकि यह धारणा है कि कक्षा में अध्यापक का ज्यादातर प्रभाव उसके शाब्दिक कथनों से संबंधित होता है और अधिकांश अशाब्दिक प्रभाव शाब्दिक प्रभाव से स्वीकारात्मक रूप से सम्बन्धित होता है।"

फ्लैण्डर्स अन्तः क्रिया विश्लेषण प्रणाली की बुनियादी सैद्धान्तिक मान्यताएँ -  'अन्तः क्रिया विश्लेषण' के विचार में, फ्लैण्डर्स अन्तः क्रिया विश्लेषण प्रणाली की बुनियादी सैद्धान्तिक मान्यताएँ निम्नलिखित हैं-

 

(1) शाब्दिक कथनों द्वारा विचारों की अभिव्यक्ति - सामान्यतः अध्यापक का प्रभाव शाब्दिक कथनों से व्यक्त होता है। कक्षा-कक्ष में अध्यापक या विद्यार्थी बोलते हैं। अशाब्दिक क्रियाओं का भी प्रभाव पड़ता है परन्तु उन्हें अन्तःक्रिया विश्लेषण द्वारा रिकॉर्ड नहीं किया जाता। अशाब्दिक क्रियाएँ शाब्दिक क्रियाओं के अनुरूप ही होती हैं।

(2) विद्यार्थियों और अध्यापक में सम्बन्ध - शिक्षण-अधिगमन की प्रक्रिया में अध्यापक एवं विद्यार्थियों में अन्तःक्रिया की भूमिका निभाई जाती है। विद्यार्थी अपने अध्यापक से भावनापूर्वक व्यवहार की कामना करते हैं और उससे लोकतांत्रिक व्यवहार की अपेक्षा करते हैं।

(3) सामाजिक वातावरण एवं उत्पादकता में संबंध - सामाजिक वातावरण उत्पादकता एवं व्यक्तिगत सम्बन्धों की गुणात्मकता पर आधारित होता है। यह बिल्कुल सही है कि अध्यापक के कक्षा में न होने पर भी कक्षा का भी वातावरण उच्च स्तर का हो सकता है।

(4) अध्यापक का विद्यार्थियों पर प्रभाव - अध्यापक के प्रति विद्यार्थियों का स्नेह अध्यापक पर उसके व्यवहार पर निर्भर करता है। अध्यापक का विद्यार्थियों पर बहुत अधिक प्रभाव रहता है। विद्यार्थी अपने अध्यापक की बातों पर इतना अधिक विश्वास करते हैं, जितना कि वे अपने घर के बड़े सदस्यों पर भी नहीं करते।

(5) निरीक्षण तकनीक का प्रयोग - कक्षा में अध्यापक के व्यवहार का निरीक्षण तकनीक के द्वारा वस्तुनिष्ठ निरीक्षण किया जा सकता है। इसके द्वारा व्यवहार के प्राकृतिक रूपों का ज्ञान हो सकता है। इससे सामान्य क्रिया में कम से कम हस्तक्षेप करते हुए मूल्यांकन भी किया जा सकता है।

(6) कक्षा-कक्ष के स्वतंत्र वातावरण - कक्षा-कक्ष के स्वतंत्र वातावरण में विद्यार्थियों का निष्पादन अधिक होता है

(7) पृष्ठ पोषण की भूमिका - अध्यापक के कक्षीय व्यवहार के पृष्ठ पोषण की भूमिका को अपना कर संशोधन किया जा सकता है। संशोधन की मात्रा तय करने के लिए शोध जारी है।

(8) फ्लैन्डर्स के अनुवाद पृष्ठ पोषण द्वारा - फ्लैन्डर्स के अनुवाद पृष्ठ पोषण द्वारा कक्षा-कक्ष व्यवहार में परिवर्तन लाया जा सकता है।

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