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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्यसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- ज्यूरिस प्रोडेन्सियल प्रतिमान की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
ज्यूरिस प्रोडेन्सियल प्रतिमान
(The Juris Prudential Model)
ज्यूरिस प्रोडेन्सियल प्रतिमान के प्रवर्तक आलीवर तथा शेवर हैं। उन्होंने इसका प्रयोग समायोजन की क्षमताओं के विकास के लिए किया। इसके निम्नलिखित तत्व हैं-
उद्देश्य (Focus) - सूचनाओं एवं तथ्यों के आधार पर सामाजिक समस्या को तर्कपूर्ण ढंग से सोचने तथा समझने की क्षमताओं का विकास करना इसका प्रमुख उद्देश्य है।
संरचना (Syntax) - इसमें सीखने की परिस्थितियाँ सामाजिक जीवन की समस्या को पहचानने से आरम्भ होती हैं। इन समस्याओं को शिक्षक तथा छात्रों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। कक्षा तथा सामाजिक तनावों से भी समस्या उत्पन्न हो जाती है। शिक्षक को विभिन्न प्रकार की क्रियायें करनी होती हैं जिनकी सहायता से छात्र तथा शिक्षक के मध्य अन्तर्प्रक्रिया होती है।
सामाजिक प्रणाली (Social System) - इस प्रतिमान में छात्रों में शिक्षकों की सुनिश्चित क्रियाओं द्वारा सामाजिक समस्या को समझने की क्षमता का विकास किया जाता है। छात्रों के अपने विचारों की अभिव्यक्ति करने की पूर्ण स्वतंत्रता होती है।
सहायक प्रणाली (Support System) - इस प्रतिमान के द्वारा ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न करने का प्रयास किया जाता है जिनसे बौद्धिक तथा सामाजिक विकास होता है। इस प्रतिमान के मूल्यांकन की दो बातों को ध्यान में रखा जाता है - (1) छात्र समस्या के समाधान के लिए आवश्यक सूचनायें एकत्रित कर सकते हैं या नहीं। (2) वाद-विवाद में छात्र न्यायसंगत स्थिति का अनुकरण कर सकते हैं या नहीं। इससे यह विवादित होता है कि छात्र कहाँ तक जीवन की समस्याओं को सामाजिक मूल्यों से सम्बन्धित कर सकते हैं।
इस प्रतिमान के द्वारा छात्रों में सामाजिक समस्या के विश्लेषण की क्षमता का विकास होता है और वे मूल्यों के महत्व को समझने लगते हैं।
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