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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2758
आईएसबीएन :0

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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य - सरल प्रश्नोत्तर

 

अध्याय-12 कम्प्यूटर नेटवर्क एवं वेब संसाधन

(Computer Network and Web Resources)

प्रश्न- इन्टरनेट से आपका क्या अभिप्राय है? शिक्षा के क्षेत्र में इन्टरनेट की उपयोगिता का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

अथवा
इन्टरनेट क्या है? शिक्षा में इसके उपयोग को बताइये।

उत्तर-

भारत में इन्टरनेट सुविधा
(Internet Facility in India)

भारत में इंटरनेट सुविधा का प्रारम्भ 15 अगस्त, सन् 1995 में हुआ। वर्ष 1991 में आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया की शुरूआत के साथ-साथ भारत को सूचना के एक राष्ट्रीय स्त्रोत की आवश्यकता महसूस होने लगी थी। सन् 1994 में सूचना स्त्रोत के रूप में इंटरनेट की सुविधा प्राप्त हुई।

उदारीकरण के लाभ को विस्तार के लिए वर्ष 1995 से इसे जनसाधारण के लिए मुक्त कर दिया - गया। पूर्व में यह सुविधा केवल शिक्षण संस्थाओं, अनुसन्धानशालाओं तथा सरकारी उपक्रमों को अर्जेंट एवं निकनेट के द्वारा ही उपलब्ध थी। वर्तमान में भारत में इंटरनेट की सुविधा विदेश संचार निगम लिमिटेड के द्वारा उपलब्ध करायी जाती है। उपभोक्ता इंटरनेट पर उपलब्ध हर प्रकार की सूचना को प्राप्त कर सकता है।

हमारे देश में विदेश संचार निगम लिमिटेड द्वारा इंटरनेट सेवा के लिए मुम्बई स्थित इंटरनेट एक्सेस नोड को अमेरिका और यूरोप के इंटरनेट नोड के साथ क्रमशः उपग्रह तथा समुद्र के नीचे बिछी केबिलों द्वारा जोड़ा गया है। भारत के अन्य स्थानों पर रिमोट कन्ट्रोल एक्सेस नोड स्थापित किये गए हैं। नोड के जुड़ाव के लिए दूर संचार विभाग द्वारा इंटरसिटी लिंक का प्रयोग किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त विदेश संचार निगम द्वारा गेटवे पैकेज स्विच सर्विस रिमोट एरिया डोमेस्टिक पैकेज स्विच नेटवर्क तथा हाई स्पीड री-सेट नेटवर्क इत्यादि से भी सम्बन्ध स्थापित किया जा रहा है।

इंटरनेट प्रणाली विभिन्न प्रकार की तकनीकी के संयुक्त रूप से कार्य करने की प्रणाली है। इंटरनेट का आधार, राष्ट्रीय सूचना इन्फ्रास्ट्रक्चर होता है, यहाँ से विभिन्न सम्पर्क लाइनें, कम्प्यूटरों को जोड़ती हैं, जिन्हें होस्ट कम्प्यूटर कहते हैं। ये विश्वविद्यालयों या अन्य संस्थानों से जुड़े रहते हैं और इन्हें इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कहा जाता है।

ये कम्प्यूटर्स विशेष संचार लाइनों तथा इण्टरनेट कनेक्शन द्वारा साधारण टेलीफोन लाइन या मोडेम के जरिये, उपभोक्ता व्यक्ति के पर्सनल कम्प्यूटर (P.C.) से जुड़े रहते हैं। यह सम्पर्क डायल - अप कनेक्शन कहलाता है। एक सामान्य उपभोक्ता निश्चित राशि का भुगतान करके I.S.P. से इंटरनेट से जुड़ा रहता है।

इस प्रणाली के द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ कक्षाओं के लिए श्रेष्ठ तथा अत्याधुनिक शैक्षिक सामग्री की उपलब्धता भी सुनिश्चित हो रही है। यदि कोई छात्र शिक्षा का सर्वश्रेष्ठ लाभ उठाना चाहता है तो इंटरनेट खोलकर ज्ञान की विविधता प्राप्त करता है।

नेट में हर विषय पर ज्ञान का विशाल भंडार है एवं कम्प्यूटर पर बैठकर कोई भी व्यक्ति, किसी भी विषय से सम्बन्धित नवीनतम घटना के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकता है।

अधिगम के मार्ग में आने वाले समय एवं स्थान और सामाजिक आर्थिक बाधाओं को नेट समाप्त कर देता है। उस दुनिया के किसी भी हिस्से से वांछित विषय पर नवीनतम सूचना उपलब्ध रहती है। भारत में इग्नू पिलानी एवं आई० आई० टी० जैसे संस्थानों ने इंटरनेट आधारित कार्यक्रम शुरू कर दिये हैं।

इंटरनेट द्वारा प्रदत्त सुविधाएँ
(Facilities Provided by Internet)

वर्तमान समय में इंटरनेट के माध्यम से निम्नलिखित सुविधाएँ प्राप्त की जा रही हैं-

(1) ई-कॉमर्स - यह इंटरनेट आधारित उपभोक्ता बाजार की एक कार्य-प्रणाली है। इसके अन्तर्गत इंटरनेट पर ठीक उसी प्रकार वस्तुओं का क्रय-विक्रय किया जाता है। भारत में ई-कॉमर्स अभी प्रारम्भिक अवस्था में है। ई-कॉमर्स के माध्यम से सेवाएँ देने वाली भारतीय कम्पनियों में मुख्य हैं- अमृल, आई० सी० आई० तथा राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज।

भारत में ई-कॉमर्स से सम्बन्धित विनियमों तथा कानूनों का अत्यधिक अभाव है जिसके कारण इस माध्यम का विस्तार नहीं हो पा रहा है।

इस प्रणाली का प्रमुख आधार इलेक्ट्रॉनिक डाटा-एक्सचेंज है, जिसके अन्तर्गत आँकड़ों को परिवर्तित करने तथा स्थानान्तरित करने की सुविधा होती है। इसके अन्तर्गत ग्राहक जब वेबसाइट पर उपलब्ध सामान को पसन्द करके क्रय करता है, तो उसे भुगतान के लिए कम्प्यूटर पर उपलब्ध एक फार्म भरना होता है। इस फार्म में अपना क्रेडिट कार्ड नम्बर, देय राशि, पाने वाली फर्म का नाम इत्यादि सूचनाएँ अकिंत करनी होती हैं। फार्म के भरते ही ग्राहक के खाते से धनराशि निकलकर विक्रेता के खाते में स्थानांतरित हो जाती है।

इलेक्ट्रॉनिक डाटा इंटरनेट के अन्तर्गत अभी हाल में एक नई प्रणाली का सूत्रपात हुआ है। इस प्रणाली के अन्तर्गत क्रेता कम्प्यूटर पर अपने डिजिटल हस्ताक्षर द्वारा चेक काट सकता है। यह प्रणाली उन्हीं देशों में लागू है, जहाँ डिजिटल हस्ताक्षर को कानूनी मान्यता मिली हुई है।

(2) ई-मेल (Electronic Mail) - यह सूचना सम्प्रेक्षण का एक रूप है। इस प्रणाली में नेटवर्क के द्वारा एक कम्प्यूटर को दूसरे कम्प्यूटर से जोड़कर तत्काल सूचना को सम्प्रेषित करने की सुविधा प्राप्त की जाती है। एक कम्प्यूटर से भेजी गयी सूचना को दूसरे कम्प्यूटर पर पढ़ा जा सकता है।

ई-मेल प्रणाली में मोडेम का महत्त्वपूर्ण स्थान होता है। जब एक कम्प्यूटर सुदूरवर्ती दूसरे कम्प्यूटर तक सूचना भेजता है, तो पहले कम्प्यूटर के साथ संलग्न मोडेम कम्प्यूटर में भण्डारित डिजिटल सूचना कोड को टेलीफोन लाइन द्वारा एनलॉग रूप में परिवर्तित कर दूसरे कम्प्यूटर तक भेजता है। दूसरी ओर दूसरे कम्प्यूटर से संलग्न मोडेम इस सूचना को अपने से संलग्न टेलीफोन से प्राप्त कर दूसरे रूप में डिजिटल रूप में बदलकर संचित करता है।

इस प्रणाली में एक कम्प्यूटर से दूसरे कम्प्यूटर में संदेश भेजने के लिए दूसरे कम्प्यूटर एक प्रेषित करना है, तो उनके पते की जानकारी होनी जरूरी है। ई-मेल का महत्त्व व्यवसाय एवं औद्योगिक क्षेत्रों में सर्वाधिक है। इसके प्रयोग से कम व्यय में ही संदेशों का आदान-प्रदान हो जाता है। एक पृष्ठ ई-मेल का व्यय लगभग 5 रुपया आता है, जो फैक्स, टेलेक्स, एस० टी० डी० अथवा कोरियर से सस्ता है।

हमारे देश में ई-मेल का सर्वाधिक प्रयोग ऑटोमोबाइल एवं अभियन्त्रण के क्षेत्र में होता है। भारत मैं ई-मेल से अधिक तीव्रगति से संदेश पहुँचाने वाली वर्तमान में कोई सेवा नहीं है। ई-मेल के माध्यम से ध्वनि रूप में संदेश भेजने की सुविधा देने वाले टाओटाक नामक सॉफ्टवेयर का विकास ब्रिटेन की एशपूल टेलीकॉम द्वारा किया गया है। इसे सॉफ्टवेयर के साथ एक साउण्ड कार्ड माइक्रोफोन तथा स्पीकर्स की आवश्यकता होती है। भारत में वर्तमान में आठ कम्पनियाँ ई-मेल सुविधा उपलब्ध करा रही हैं इनमें विप्रो, वीटीमेल, ग्लोबमेल, एक्स ई-मेल तथा स्प्रिंट मेल प्रमुख हैं।

(3) फैक्स - फैक्स का उपयोग मुख्यतया दस्तावेजों को भेजने में किया जाता है। संचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में फैक्स एक लोकप्रिय प्रणाली है। फैक्स की प्रणाली त्वरित एवं सस्ती है। इस उपकरण की सहायता से टेलीफोन नेटवर्क के द्वारा किसी दस्तावेज को दूरवर्ती स्थान पर बिल्कुल ऐसे भेजा जाता है जैसे हम किसी दस्तावेज की फोटोस्टेट मशीन से प्रतिलिपि प्राप्त हैं।

(4) पेजिंग एवं सेल्युलर - इन दोनों प्रणालियों में संदेश भेजने के लिए रेडियो तरंगों का प्रयोग होता है। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यापारिक रूप से परिवर्तन लाने में पेजिंग एवं सेल्युलर प्रणालियों का विशेष योगदान है। वर्तमान में इस प्रणाली में वैप नामक तकनीकी का समायोजन कर, इसे और भी अधिक सक्षम बना दिया गया है।

वैप तकनीकी की शुरूआत वर्ष 1999 की प्रथम तिमाही में की गयी। इस तकनीकी के माध्यम से सेल्युलर फोन के द्वारा इंटरनेट से जुड़ाव कायम किया जा सकता है। इसमें फैक्स तथा ई-मेल की सुविधा प्राप्त की जा सकती है। इधर बीच वैप का प्रसार काफी तेजी से हुआ है। अब तक विश्व की लगभग नौ हजार वेबसाइटों ने वैप तकनीक को अपना लिया है। भारत में भी कई कम्पनियाँ इन वेबसाइटों से जुड़ने जा रही हैं। ऐअर रेल ने इंडिया टुडे ऑन वाहन, इंडिया इंफोलाइन तथा इंडिया गाइड के साथ समझौता किया है।

भारत में इंटरनेट सेवा प्रदान करने वाली सत्यम ऑन लाइन द्वारा शीघ्र ही वैप गेटवेकं की स्थापना देश में की जा रही है। वैप पर आधारित फोन गति तथा वैड विड्थ के मामले में कुछ कमजोर हैं। भारत में वर्तमान में जी० एस० एम० तकनीक का प्रयोग हो रहा है, जिसके माध्यम से मात्र 9.6 किलोवाइट्स प्रति सेकण्ड की गति से सूचनाओं का प्रेषण किया जा सकता है।

मई, 2000 में जी० पी० आर० एस० नामक नई तकनीकी का प्रयोग शुरू हुआ है, जिसकी गति 176.2 किलोवाइट्स प्रति मिनट है। इस तकनीकी के लिए अन्तर्राष्ट्रीय संस्था मोटोरोला तथा बी० पी० एल. में एक समझौता अभी हाल में ही सम्पन्न हुआ है। जहाँ तक डाटा ट्रांसमिशन के लिए तीसरी पीढ़ी की तकनीक जिसे ब्राडबैंड मोबाइल कहा जाता है, बाजार में आ चुका है।

(5) सेटेलाइट फोन - उपग्रह आधारित मोबाइल फोन का क्षेत्र सेल्यूलर फोन से अधिक विस्तृत तथा व्यापक आधार वाला होता है। सेटेलाइट फोन के माध्यम से उपभोक्ता विश्व के किसी भी स्थान से, किसी भी अन्य स्थान पर तुरन्त सम्पर्क कायम कर सकता है। इस प्रणाली की विशेषता यह है कि इसके अन्तर्गत एक ही हैंडसेट से फोन, फैक्स तथा पेजिंग सेवा का उपयोग किया जा सकता है।

(6) मोबाइल फोन - देश में आज लगभग दो करोड़ लोग मोबाइल फोन का प्रयोग कर रहे हैं। इनकी संख्या में लगातार तेजी से वृद्धि हो रही है। वर्ष 1999 की प्रथम छमाही में ही लगभग अस्सी हजार लोग मोबाइल फोन से जुड़े। एक सर्वेक्षण के अनुसार देश के सेल्युलर फोन के बाजार में लगभग अस्सी प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।

(7) वर्ल्ड वाइड वेव - ई-मेल के बाद इंटरनेट पर प्राप्त सर्वाधिक लोकप्रिय सुविधा वर्ल्ड वेव है। कम्प्यूटर की दुनिया में इसे www कहा जाता है। वेव पर चित्र, कार्टून, ध्वनि इत्यादि के माध्यम से जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

(8) टेलीटेक्स्ट - यह एक ऐसी इलैक्ट्रॉनिक पत्रिका है जिसे घर बैठे कम्प्यूटर स्क्रीन पर पढ़ा जा सकता है। टेलीटेक्स्ट प्रणाली में स्क्रीन पर सबसे पहले सूचनाओं की क्रम सूची आती है, जिसे देखकर यह जाना जा सकता है कि किस विषय में सम्बन्धित सूचना किस पृष्ठ पर है? इसके द्वारा रेलवे की समय-सारणी, बाजार भाव, शेयर बाजार, समारोहों, कार्यक्रमों, बैठकों, टेलीफोन डायरेक्टरी, विमानों की समय-सारणी इत्यादि में बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। भारत में टेलीटेक्स्ट सेवा दूरदर्शन, इलेक्ट्रॉनिक विभाग तथा भारत सरकार के उपग्रह नेटवर्क के लिए स्थापित भारतीय राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र के संयुक्त प्रयास से की गई है। सभी सूचनाओं को हर समय अद्यतन बनाये रखने तथा उपलब्ध कराने के लिए भारत में एक सूचना बैंक की स्थापना की जा रही है। यह केन्द्र सभी संस्थानों तथा एजेन्सियों की सूचनाओं को अद्यतन रूप से प्राप्त कर मेमोरी में संग्रहित करेगा तथा इनका प्रेषण करेगा।

हमारे देश में यह सुविधा अंग्रेजी भाषा में और कुछ चुने हुए स्थानों पर ही प्राप्त है। कुछ समय उपरान्त इस सुविधा को हिन्दी भाषा में भी उपलब्ध कराए जाने की योजना है।

(9) ई-फैक्स - ई-फैक्स का उपकरण फैक्स मशीन के साथ नेटवर्क डिवाइस का एक छोटा यन्त्र लगाने मात्र से काम करने लगता है। यह सुविधा इलेक्ट्रॉनिक डाटा इंटरचेंज के माध्यम से उपलब्ध होती है। जब कोई दस्तावेज ई-फैक्स मशीन पर रखा जाता है, तो वह स्वयं उस पते को खोज लेता है, जहाँ उस दस्तावेज को भेजना होता है। यदि दस्तावेज को कई स्थानों पर प्रेषित किया जाना है, तो सर्विस प्रोवाइडर इसे एक साथ कई स्थानों पर प्रेषित कर देता है।

(10) यूजनेट - यूजनेट में निहित सूचनाओं के भण्डार को किसी विषय पर आधारित समूह में बाँटा जा सकता है तथा एक विषय पर रुचि रखने वाले व्यक्ति सूचनाओं का आदान-प्रदान एवं विचार-विमर्श कर सकते हैं। यह सुविधा ई-मेल सुविधा की भाँति है, किन्तु इसका विस्तार अधिक है, ई-मेल सुविधा जहाँ एक से एक तक सीमित है, वहीं यूजनेट सुविधा एक से अधिक तक विस्तृत है।

(11) टेलनेट - टेलनेट एक ऐसी सुविधा है, जिसके माध्यम से इंटरनेट से जुड़े विश्व के किसी भी कम्प्यूटर पर 'लॉग इन कर उस पर इस प्रकार का कार्य कर सकते हैं जैसे उक्त कम्प्यूटर का ' की बोर्ड' हमारे पास है। इसीलिए इस सुविधा को 'रिमोट लॉग इन' भी कहते हैं। टेलनेट के माध्यम से विश्व के किसी भी पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तक को पढ़ा जा सकता है और उसके किसी पेज का प्रिंट आउट भी निकाला जा सकता है।

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