लोगों की राय

बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य

बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2758
आईएसबीएन :0

Like this Hindi book 0

5 पाठक हैं

बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य - सरल प्रश्नोत्तर

अध्याय-1 शैक्षिक तकनीकी : अर्थ, प्रकृति, क्षेत्र एवं महत्व

(Educational Technology : Meaning, Nature, Scope and Significance)

प्रश्न- शैक्षिक तकनीकी का क्या अर्थ है? शैक्षिक तकनीकी की विशेषताएँ स्पष्ट कीजिए।

अथवा
शैक्षिक तकनीकी के सम्प्रत्यय को परिभाषित करते हुए उसके महत्व की विवेचना कीजिए।

उत्तर-

शैक्षिक तकनीकी का अर्थ समझने से पूर्व हमें शिक्षा एवं तकनीकी का अर्थ समझने से पूर्व हमें शिक्षा एवं तकनीकी का अर्थ समझ लेना चाहिए। तकनीकी से सम्बन्धित एक अन्य शब्द विज्ञान भी है जिसका अर्थ समझना आवश्यक है।

शिक्षा का अर्थ - शिक्षा ज्ञान प्राप्त करने की प्रक्रिया को कहते हैं। शाब्दिक अर्थों में शिक्षा का अर्थ - "बालक की आन्तरिक शक्तियों, प्रतिभाओं और क्षमताओं को बाहर की ओर अग्रसर कर विकसित करना है।" व्यापक अर्थ में शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया है जो जीवन-पर्यन्त चलती रहती है।

विज्ञान का अर्थ - "विज्ञान किसी वस्तु का वह क्रमबद्ध ज्ञान है जो मानवीय परीक्षण तथा अनुभव से प्राप्त होता है।" विज्ञान के द्वारा व्यक्ति के अन्दर वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होता है जिसके फलस्वरूप उसके विचारों में क्रमबद्धता आती है, उसके निर्णयों तथा निष्कर्षों में वस्तुनिष्ठता आती है और उसे पूर्वाग्रहों तथा पक्षपात की धारणा से मुक्ति मिलती है।

तकनीकी का अर्थ

"तकनीकी वैज्ञानिक सिद्धान्त का प्रयोगात्मक लक्ष्यों में प्रयोग मात्र है।" - जैकेटा ब्लूमर

"तकनीकी, विज्ञान का कला में प्रयोग है।" - ओफीश

विज्ञान का विकास तकनीकी के माध्यम से होता है। वैज्ञानिक ज्ञान को जब व्यवहार में प्रयुक्त किया जाता है तब उसे तकनीकी कहा जाता है। विज्ञान तथा तकनीकी परस्पर सम्बन्धित होते हैं तथा एक दूसरे को आधार प्रदान करते हैं। विज्ञान हमें यह बताता है कि किसी वस्तु अथवा सिद्धान्त को जानना चाहिए, जबकि तकनीकी इस बात पर बल देती है कि उस वस्तु अथवा सिद्धान्त को कैसे जाना जाये?

शिक्षा एवं तकनीकी भी आपस में घनिष्ठ रूप से संबंधित हैं। शैक्षिक तकनीकी के द्वारा बालकों को शिक्षा प्रदान करने में सहायता मिलती है। हमारे देश में छात्रों को विज्ञान के नियम तथा सिद्धान्त तो पढ़ाये जाते हैं लेकिन उन्हें उन नियमों तथा सिद्धान्तों के विषय में व्यावहारिक ज्ञान प्रदान नहीं किया जाता। समाज व राष्ट्र की उन्नति के लिए यह परम आवश्यक है कि विद्यार्थियों को विज्ञान के साथ तकनीकी का भी ज्ञान प्रदान किया जाये।

शैक्षिक तकनीकी का अर्थ - शैक्षिक तकनीकी एक ऐसी प्रविधि का विज्ञान है जिसके द्वारा शिक्षा के उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सकता है। इसका क्षेत्र केवल उद्देश्यों को निर्धारित करने तक ही सीमित नहीं है, वरन् यह उद्देश्यों को व्यावहारिक रूप में परिभाषित करने में सहायता करता है। इसके द्वारा शिक्षा की वर्तमान प्रक्रिया को उन्नत करने के लिए क्रमबद्ध रूप से प्रयत्न किया जाता है। शैक्षिक तकनीकी के द्वारा शिक्षा के उद्देश्य, विधि, पाठ्यक्रम, सहायक सामग्री तथा मूल्यांकन आदि को विकसित एवं उन्नत किया जाता है। जे. के. गालवैथ के अनुसार प्रत्येक तकनीकी में दो मुख्य विशेषताएँ होती हैं - प्रथम वैज्ञानिक ज्ञान का व्यावहारिक कार्यों में क्रमबद्ध प्रयोग तथा द्वितीय - व्यवहार के कार्यों का खण्ड-उपखण्ड में विभाजन करना। शिक्षा के क्षेत्र में जो भी विषय इन मापदण्डों की विशेषताओं को पूरा करता है उसे शैक्षिक तकनीकी कहते हैं। इसके द्वारा शिक्षण के उद्देश्यों को व्यावहारिक रूप में परिभाषित किया जाता है। शैक्षणिक तकनीकी शिक्षा के उद्देश्य निर्धारित नहीं करती है। शिक्षा के उद्देश्य तो सामाजिक, राजनीतिक एवं अन्य विचारक निर्धारित करते हैं। शैक्षिक तकनीकी के द्वारा तो शिक्षा के निर्धारित उद्देश्य की प्राप्ति के लिए विभिन्न विधियों एवं प्रविधियों का निर्माण तथा विकास किया जाता है।

शैक्षिक तकनीकी की परिभाषाएँ - विभिन्न मनोवैज्ञानिक एवं शिक्षाशास्त्रियों ने शैक्षिक तकनीकी की अनेक परिभाषाएँ दी हैं।

प्रमुख परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं -

(1) "तकनीकी तथा विज्ञान के आविष्कारों तथा नियमों का शिक्षा की प्रक्रिया में प्रयोग को शैक्षिक तकनीकी कहा जाता है।" - एम. एस. कुलकर्णी

(2) "शिक्षा तकनीकी उन क्रमबद्ध विधियों के विकास को तथा उस व्यावहारिक ज्ञान को कहते हैं, जिनका उपयोग विद्यालय में शैक्षिक योजना, प्रक्रिया तथा प्रशिक्षण किया जाता है।" - मैथिस

(3) शैक्षिक तकनीकी से तात्पर्य वैज्ञानिक या अन्य संगठित ज्ञान के व्यवहार में प्रयोग से हैं। इसमें व्यावहारिक कार्य का खण्ड-उपखण्ड में विभाजन किया जाता है। - जे. के. गालवैथ

(4) शैक्षिक तकनीकी को उन विधियों तथा प्रविधियों का ज्ञान माना जा सकता है जिसके द्वारा शैक्षिक उद्देश्यों को प्राप्त किया जा सके। - एस. के. मित्रा

(5) "शैक्षिक तकनीकी सीखने और सिखाने की दिशाओं में वैज्ञानिक ज्ञान का प्रयोग है जिसके द्वारा शिक्षण एवं प्रशिक्षण को प्रभावपूर्णता तथा दक्षता में सुधार लाया जाता है।" - जी. ओ. लेथ

(6) "मानव के सीखने की परिस्थितियों में वैज्ञानिक प्रक्रिया के प्रयोग को शैक्षिक तकनीकी कहते हैं।" - आर. ए. कोक्स

(7) "शैक्षिक तकनीकी का प्रमुख उद्देश्य कुछ आवश्यक तत्वों, जैसे - शैक्षिक उद्देश्य, व्यवहार तथा उनके पाठ्यवस्तु, शिक्षण सामग्री, विधि, वातावरण, छात्रों व निर्देशकों के मध्य होने वाली अन्तःक्रिया को नियंत्रित करके अधिकतम शैक्षिक प्रभाव उत्पन्न करना है।" - तकाशी सकामाटो

(8) ज्ञान के व्यवहार में विनियोग की प्रक्रिया ही शैक्षिक तकनीकी है। - ई. एम. बूटर

(9) अधिगम के मनोविज्ञान का व्यावहारिक शैक्षिक समस्याओं पर गहन प्रयोग ही शैक्षिक तकनीकी है। - डीसीको

शैक्षिक तकनीकी की विशेषताएँ - शैक्षिक तकनीकी की विभिन्न परिभाषाओं से शैक्षिक तकनीकी के सन्दर्भ में निम्नलिखित विशेषताएँ स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती हैं-

(i) शैक्षिक तकनीकी विज्ञान पर आधारित है।

(ii) यह विज्ञान का व्यावहारिक रूप है, क्योंकि इसमें विज्ञान तथा तकनीकी का प्रयोग किया जाता है।

(iii) इसके प्रयोग से शिक्षण विधि, उद्देश्य, नीतियों, पाठ्यवस्तु तथा वातावरण द्वारा विद्यार्थियों व अध्यापकों के व्यवहार में वांछित परिवर्तन लाया जाता है।

(iv) इसके द्वारा कक्षा शिक्षण को सरल, वैज्ञानिक, वस्तुनिष्ठ तथा प्रभावपूर्ण बनाया जा सकता है।

(v) इस तकनीकी के द्वारा वैज्ञानिक ज्ञान का शिक्षण एवं प्रशिक्षण में प्रयोग किया जाता है।

(vi) यह विधि निरन्तर प्रगतिशील, विकासशील एवं प्रभावपूर्ण है।

(vii) यह तकनीकी शिक्षा सम्बन्धी, मूल्यांकन तथा निर्देशन में वैज्ञानिक रूप से सुधार करती है।

(viii) शैक्षिक तकनीकी मनोविज्ञान, दृश्य-श्रव्य सामग्री, मशीन, विज्ञान, कला आदि में बहुत सहायता लेती है।

(ix) इस तकनीकी के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में कई नवीन अवधारणाओं का जन्म हुआ, जैसे - अभिक्रमित अध्ययन, अन्तःप्रक्रिया विश्लेषण, प्रोजेक्टर, कम्प्यूटर, वीडियोटेप, टेपरिकॉर्डर, श्रव्य-दृश्य सामग्री, सूक्ष्म शिक्षण, सीमुलेटेड शिक्षण आदि।

(xi) शैक्षिक तकनीकी का सम्बन्ध शिक्षा की समस्याओं, उनके विश्लेषण, उनके निराकरण के लिए शोध तथा शिक्षा के सुधार से है।

(x) शैक्षिक तकनीकी प्रभावकारी अधिगम के लिए विधाओं, विधियों, प्रविधियों के विकास पर बल देती है।

(xii) शैक्षिक तकनीकी वातावरण, संसाधनों और विधियों द्वारा अधिगम प्रक्रिया को सरल बनाती है।

शैक्षिक तकनीकी का महत्व - शैक्षिक तकनीकी का शिक्षा के क्षेत्र में अत्यधिक महत्व तथा उपयोगिता है। इसने शिक्षा के क्षेत्र में क्रान्ति उत्पन्न कर दी है। शिक्षण तकनीकी ने शिक्षण प्रक्रिया को विशेष रूप से प्रभावित किया है। शिक्षा तकनीकी का महत्वपूर्ण योगदान यह है कि इसके द्वारा शिक्षण के सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया गया है। इससे पूर्व सीखने के सिद्धान्त बहुत महत्वपूर्ण माने जाते थे परन्तु ये सिद्धान्त शिक्षा की समस्याओं को हल नहीं कर सके। इसके अतिरिक्त शैक्षिक तकनीकी की निम्नलिखित उपयोगिताएँ हैं-

(i) इसके माध्यम से जनसाधारण के लिए शिक्षा, अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा तथा सतत् शिक्षा आदि कार्यक्रमों का प्रसार तथा विकास सफलतापूर्वक किया जा सकता है।

(ii) शिक्षण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावशाली तथा सार्थक बनाया जा सकता है।

(iii) शिक्षा के संगठन, प्रशासन व प्रबन्ध की समस्याओं का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन तथा विकास किया जा सकता है।

(iv) आजकल जनसाधारण के पास रेडियो, ट्रांजिस्टर तथा टेलीविजन की सुविधाएँ सुलभ हैं। शिक्षा के लिए इन सब साधनों का उपयोग किया जा सकता है।

(v) विद्यार्थियों की सीखने की उपलब्धि में वृद्धि की जा सकती है।

(vi) शैक्षिक तकनीकी के द्वारा अध्यापक की कार्यक्षमता में वृद्धि की जा सकती है।

(vii) इसके प्रयोग से अध्यापक का कार्य सरल, स्पष्ट, रुचिपूर्ण एवं प्रभावपूर्ण बन सकता है।

(viii) अध्यापक का दृष्टिकोण, वैज्ञानिक, वस्तुनिष्ठ एवं मनोवैज्ञानिक हो सकता है।

(ix) शैक्षिक तकनीकी का प्रमुख आधार व्यवहार होता है। अतः इसके द्वारा अध्यापकों तथा विद्यार्थियों के व्यवहार में वांछित परिवर्तन लाया जा सकता है।

(x) अभिक्रमित अध्ययन द्वारा व्यक्तिगत विभिन्नता की समस्या का हल तथा विद्यार्थियों में स्वतः अध्ययन करने की आदत का निर्माण किया जा सकता है।

(xi) नवीन शिक्षण प्रतिमान, शिक्षण उपकरण एवं विधियों से शिक्षण को प्रभावपूर्ण बनाया जा सकता है।

(xii) इस तकनीकी की मदद से अध्यापक एक प्रबन्धक के रूप में विद्यार्थियों के बड़े समूह को कम समय तथा व्यय पर अच्छी शिक्षा प्रदान कर सकता है।

(xiii) सूक्ष्म शिक्षण, सीमुलेटेड शिक्षण, अनुकरणीय शिक्षण आदि के द्वारा प्रशिक्षण को प्रभावपूर्ण बनाया जा सकता है।

(xiv) नवीन शिक्षा उपकरणों, विधियों तथा मशीनों के प्रयोग से शिक्षण को व्यावहारिक, सार्थक तथा प्रभावपूर्ण बनाया जा सकता है।

(xv) राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के स्तर को ऊँचा किया जा सकता है।

(xvi) शैक्षिक तकनीकी के प्रयोग से शिक्षा में अनुसंधान एवं शोधकार्य का सुधार हो सकेगा।

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book