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बीकाम सेमेस्टर-4 पर्यटन एवं यात्रा प्रबन्ध

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2755
आईएसबीएन :0

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बीकाम सेमेस्टर-4 पर्यटन एवं यात्रा प्रबन्ध - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- पर्यटन के पर्यावरणीय प्रभावों की चर्चा कीजिए।

उत्तर-

पर्यटन के पर्यावरणीय प्रभाव

पर्यावरण एक पूर्ण परिवेश या परिस्थिति है, जिसमें एक व्यक्ति, पशु-पक्षी या पौधा रहता है या व्यवहार करता है। एक व्यक्ति का वातावरण उन सभी चीजों से बना होता है, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से, जीवन स्थितियों से संबंद्ध होती हैं। इसमें घर, इमारतें, साथी व्यक्ति, जानवर, पौधा, भूमि, जल, तापमान, प्रकाश, वायु, वनस्पति और जीव, अन्य मानव, विकसित आधारभूत संरचना आदि शामिल होते हैं। जीवित पौधे और पशु-पक्षी न केवल परिवेश में मौजूद होते हैं, बल्कि एक-दूसरे के साथ व्यवहार भी करते हैं। व्यवहार, व्यवहार की गतिशीलता पर निर्भर करते हुए भी काफी हद तक प्रभावी होता है। पर्यटन विशाल संख्या में विविध दृष्टिकोण वाले व्यक्तियों को लगाकर एक क्षेत्र में लाता है। उन स्थानों तक पहुँचने वाले लोगों की विशाल संख्या के कारण विभिन्न संसाधनों पर बहुत तीव्र दबाव बन गया है। अधिकाधिक आधारभूत संरचनाएँ बनाई जा रही हैं, जो पुनः क्षेत्र के परिदृश्य में बहुत परिवर्तन कर रही हैं। अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कुछ पर्यावरणीय सुधार भी किए जाते हैं। अतः पर्यटन, पर्यावरण के संरक्षण में मदद करता है। पर्यटन के नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव विशेष रूप से गंतव्य स्थानों पर पर्यटन के कई नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव हैं। उनमें से महत्वपूर्ण प्रभाव निम्नलिखित हैं-

(1) भूमि उपयोग को घरों / होटलों / रेस्तरां के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण रूप से परिवर्तित किया जाता है, क्योंकि इसकी माँग पर्यटकों और इससे संबंधित लोगों के लिए होती है।

(2) जंगल काट दिया जाता है। कृषि योग्य भूमि को इमारतों/सड़कों / कचरा निपटान में बदल दिया जाता है।

(3) पहाड़ी क्षेत्र में ढलान पर सड़कों का निर्माण मृदा-कटाव जैसी कई समस्याओं को जन्म देता है, जो पारिस्थितिक असंतुलन उत्पन्न करता है। पौधों और वनस्पति का नष्ट होना, पर्यावरण पर भयानक दुष्प्रभाव उत्पन्न करता है।

(4) ऐसे क्षेत्रों में प्राकृतिक पारिस्थितिकी की गिरावट और गड़बड़ी के मामले सामान्य होते जा रहे हैं। पर्यटन के कारण जैव-विविधता का भारी नुकसान भी होता है।

(5) ऐसे क्षेत्रों में मानव हस्तक्षेप के कारण भू-स्खलन विस्तृत रूप से देखा जाता है।

(6) जल-रिसाव की कमी के कारण जल-प्रवाह ज्यादा होता है। अत्यधिक जल-प्रवाह के कारण अधिक मृदा-क्षरण देखा गया है। ऊपरी परत में उच्च कटाव, निम्नवर्ती भाग में गाद की भारी मात्रा उत्पन्न करता है। गंदे कीचड़ का जमाव और उच्च जल-प्रवाह उच्च बाढ़ को जन्म देता है और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र को लगभग बंजर बना देता है।

(7) किसी भी स्थल पर आने वाली पर्यटकों की भारी संख्या गंतव्य क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव उत्पन्न करते हैं। वे संसाधनों का क्षय करते हैं।

(8) संसाधनों की भारी माँग, गुणवत्ता और मात्रा के संदर्भ में अपक्षय और गिरावट लाता है। यह जल, वायु और भूमि जैसे संसाधनों के प्रदूषण का कारक बनता है।

(9) बढ़ती पर्यटन गतिविधियों के कारण, समुद्र तटों, झीलों, नदियों, भूमिगत जल का प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।

(10) पर्यटकों की बड़ी संख्या, विभिन्न चीजों की बढ़ती उच्च माँग और उनके लिए बढ़ती हुई अन्य सहयोगी सुविधाएँ पर्यटन स्थलों में बेहद भीड़ बढ़ाती हैं।

(11) ऐसे क्षेत्र में मल निपटान और जल निकास का प्रबंधन एक मुश्किल कार्य है।

(12) पर्यटन दुनिया भर के पर्यटकों की आवश्कयताओं की पूर्ति करता है। वे लघु अवधि में बड़ी दूरी को कवर करने के लिए हवाई यात्रा करते हैं। हवाई यात्रा के फलस्वरूप वातावरण में भारी मात्रा में विषैली गैसें, जैसे- कार्बन-डाई-ऑक्साइड, मोनो-ऑक्साइड आदि उत्सर्जित होती हैं। कुल मिलाकर, दुनिया भर में पर्यावरणीय समस्याएँ बढ़ रही हैं।

(13) स्थानीय परिवहन जैव ईंधन की खपत द्वारा पर्यावरण को भी प्रदूषित करता है। पर्यटकों की अधिक भीड़ के कारण पुरातात्विक, ऐतिहासिक, वास्तुशिल्प और प्राकृतिक स्थलों की स्थिति बिगड़ती जा रही है।

(14) कई पर्यटन झरनों, पुलों, बदलते वन प्रकारों, बादलों, बर्फ, स्कीइंग आदि की प्राकृतिक सुन्दरता से पूर्ण पर्वतीय स्थानों में घूमने में रुचि रखते हैं। ये सभी पर्वतीय ढलानों के लिए नाजुक क्षेत्र में पाए जाते हैं। इन क्षेत्रों की यात्रा करने वाले पर्यटकों की अधिक संख्या के फलस्वरूप वहन क्षमता पर दबाव की स्थिति उत्पन्न होती है।

(15) सड़कों/रास्तों/कैंपों की जमीन पर कूड़ा पाया जाता है।

(16) पार्कों/ वन्य जीवन अभ्यारण्यों / आरक्षित जैव मंडलों में पर्यटकों की अधिक यात्रा, जंगली जानवरों के व्यवहार और यहाँ तक कि प्रजनन चक्र को भी परिवर्तित कर देता है। वे पर्यटकों से डर जाते हैं और प्रायः अपने प्राकृतिक निवास स्थान से दूर चले जाते हैं और वे परिधि से बाहर चले जाते हैं। अधिक जल गतिविधि और नौकायन के कारण जलीय जानवरों और पादप जीवों में भी समान परिणाम देखे जाते हैं।

(17) पर्यटन मनोरंजन गतिविधियों द्वारा आवास का अपक्षय हो सकता है। उदाहरण के लिए, वन्य जीवन को देखना, जानवरों के लिए तनाव उत्पन्न कर सकता हैं और उनके प्राकृतिक व्यवहार को परिवर्तित कर सकता है, जब पर्यटक अधिक करीब आते हैं।

(18) जब कई पर्यटक पैदल घूम रहे होते हैं तो पैदल मार्गों के नजदीक वनस्पति को उनके पैरों तले कुचलने से नुकसान होता है। घास, पौधे और झाड़ियाँ विनष्ट हो जाती हैं और उनका विकास धीमा हो जाता है।

(19) एक ही पगडंडी का बार-बार उपयोग करते हुए पर्यटक मिट्टी और वनस्पति को रौंदते हैं, जो अंततः क्षय का कारण बनता है, जो जैव-विविधता को नुकसान पहुँचा सकता है।

(20) ऊँची इमारतों/ होटलों का निर्माण क्षितिज को बाधित करता है और प्राकृतिक सौंदर्य को धूमिल करता है।

(21) जो भी सुविधाएँ पर्यटकों के गंतव्य पर प्रदान की जाती हैं, वे कुछ समय के बाद अपर्याप्त हो जाती हैं और क्षमतानुसार जरूरतों को पूरा करने के लिए पुनः बढ़ाई जाती हैं। इस प्रकार, ऐसे क्षेत्रों में आवश्यकताओं की संतुष्टि एक अस्थायी घटना है।

पर्यटन के सकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव

विशेषकर गंतव्य स्थानों पर पर्यटन के कई सकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव होते हैं। उनमें से महत्वपूर्ण प्रभाव निम्नलिखित हैं-

(1) चूँकि बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं और पर्यटकों से आय उत्पन्न होती है, इसलिए अधिक से अधिक पर्यावरणीय चेतना की उम्मदी की जाती है।

(2) कभी-कभी विदेशी पर्यटक, पर्यावरण पर दबाव को कम करने के बारे में एक अच्छा विचार देते हैं और स्थायी पर्यटन पर बल देते हैं।

(3) एकत्रित धन का उपयोग अधिक संसाधनों के निर्माण और क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के लिए किया जाता है।

(4) सफाई अभियान अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए संचालित किया जाता है।

(5) अधिक से अधिक पर्यावरणीय सुरक्षात्मक उपायों को अपनाया जाता है।

(6) पारिस्थितिक संतुलन अनुरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करने के लिए उद्देश्य बन जाता है।

(7) वहाँ विभिन्न गतिविधियों का व्यवसायीकरण होता है, किन्तु दुष्प्रभावों से बचने के लिए रक्षात्मक कदम भी उठाए जाते हैं।

(8) पर्यावरण पर पर्यटन के दुष्प्रभावों का अध्ययन करने के लिए विभिन्न अनुसंधान गतिविधियाँ/परियोजनाएँ चलाई जा रही हैं। ये अध्ययन सामाजिक समस्याओं को समझाने में फायदेमंद होते हैं। इन अध्ययनों के निष्कर्षों और अनुसंशाओं का पालन किया जाता है। यह सही पर्यावरण/पारिस्थितिकी संतुलन बनाने में मदद करता है।

(9) स्थानीय लोगों को भी पर्यावरण / परिवेश के महत्व के बारे में अवगत कराया जाता है। वे संतुलन को बनाए रखने में भी सहयोग करते हैं।

(10) गलियों, सड़कों, झीलों, समुद्र-तटों, पर्वतीय ढालों आदि को साफ करने के लिए अधिक से अधिक प्रयास किए जाते हैं। यह क्षेत्र को साफ-सुथरा बनाता है।

(11) स्मारकों, ऐतिहासिक स्थलों, खुदाई स्थानों, संग्रहालयों आदि को उचित उपायों द्वारा संरक्षित किया जाता है। उन्हें नियामक रूप से अनुरक्षित किया जाता है और साफ रखा जाता है।

(12) सार्वजनिक पार्क, उद्यान, सड़कों के किनारे की हरियाली, मूर्ति सदृश परिदृश्य, औषधीय जड़ी-बूटियों में प्रयोग किए जाने वाले उद्यानों, पौधों की नर्सरी को विकसित और अनुरक्षित किया जाता है।

(13) उपेक्षित, विकृत बेकार भूमि को पार्कों के रूप में बदल दिया जाता है और आकर्षक बनाया जाता है।

(14) निजी और सार्वजनिक इमारतों को पुनर्निर्मित किया जाता है। इससे क्षेत्र बहुत सुंदर प्रतीत होता है। यह हमारी आँखों को आनंद प्रदान करता है। यह स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी अच्छा है।

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