बी ए - एम ए >> बीए सेमेस्टर-4 राजनीति विज्ञान बीए सेमेस्टर-4 राजनीति विज्ञानसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीए सेमेस्टर-4 राजनीति विज्ञान - सरल प्रश्नोत्तर
अध्याय - 7
थॉमस हॉब्स
(Thomas Hobbes)
थॉमस हॉब्स सत्रहवीं शताब्दी का प्रसिद्ध अंग्रेज दार्शनिक था जिसने राजनीतिक चिन्तन को एक नई दिशा में विकसित करने का प्रयत्न किया। उसने अपने युग के राजनीतिक परिदृश्य में जो परिवर्तन देखे उनसे उसे विश्वास हो गया कि मानव सभ्यता की रक्षा के लिए सृदृढ़ शासन व्यवस्था जरूरी है।
थॉमस हॉब्स का जन्म ब्रिटेन के मेलसमबरी नामक स्थान पर सन् 1588 ई. में उस समय हुआ था जब आर्मेडा का युद्ध हुआ था और ब्रिटेन में सर्वत्र भय का साम्राज्य था। डर के इस साम्राज्य ने हॉब्स को डरपोक बना दिया। वह एक पादरी का पुत्र था अतः उसे बाइबिल का गहरा ज्ञान था परन्तु शुरू से ही उसकी धर्म के प्रति रुचि कम थी। माम्सबरी तथा ऑक्सफोर्ड में उसने शिक्षा प्राप्त की। पढ़ाई के बाद वह विलियम कैवेन्डिश के उत्तराधिकारी का शिक्षक बना। इसे परिवार के साथ उसका जीवन भर सम्बन्ध बना रहा।
सन् 1610 ई. में उसने अपने शिष्य कैवेन्डिश के साथ यूरोप की यात्रा की। इसी समय निरंकुश राजतन्त्र के दो मुख्य समर्थकों - लॉर्ड और स्टेफोर्ड को जेल में डाल दिया गया। इससे हॉब्स चिन्तित हो गया क्योंकि उसने भी राजतन्त्र का समर्थन करते हुए एक पम्फलेट लिखा था, अत: वह भाग कर फ्रांस चला गया। इस बीच वह इंग्लैण्ड से आये हुए युवराज तथा भावी राजा चार्ल्स द्वितीय का गणितशास्त्र का शिक्षक रहा। उसने राजशास्त्र के अतिरिक्त समाजशास्त्र, गणित और दर्शनशास्त्र का अध्ययन किया। 1642 ई. में उसका ग्रन्थ 'डी सिवे' और 1651 ई. में 'लेवायथन' प्रकाशित हुआ। लेवायथन के प्रकाशन में फ्रांसीसी अधिकारी नाराज हो गये, अतः हॉब्स फ्रांस से भागकर इंग्लैण्ड पहुँचा। 1660 ई. में इंग्लैण्ड में क्रामवेल द्वारा स्थापित कॉमनवेल्थ टूट गया और राजतन्त्र की पुनः स्थापना हुई। जब चार्ल्स द्वितीय गद्दी पर बैठा। उन्होंने हॉब्स के लिए 200 पॉण्ड वार्षिक पेन्शन बाँध दी। 1679 ई. में 91 वर्ष की अवस्था में देहान्त हो गया।
थॉमस हॉब्स के महत्वपूर्ण कथन
मैं तथा भय दोनों जुड़वाँ भाई हैं।
मनुष्य स्वार्थी अहंकारी प्राणी है।
आत्मसंरक्षण मनुष्य की मूलभूत प्रवृत्ति है।
विधि सम्प्रभु का आदेश है।
आज्ञापालन का उद्देश्य सुरक्षा है।
प्राकृतिक विधियाँ बुद्धिमता की विधियाँ हैं।
मानव का सम्पूर्ण जीवन शक्ति प्राप्ति करने की अविश्रान्त इच्छा है।
प्राकृतिक अवस्था में मनुष्य का जीवन एकांकी, दीन-हीन, घृणित, पाशवित और क्षणभंगुर था।
महत्वपूर्ण पुस्तकें
डी सिवे (De Cive)
लेवायथन (Leviathan)
डी कार पोरे पॉलिटिको (De car Pore Politico)
डी होमाइन (De Homine)
कानून के तत्त्व (Element of Law)
गृहयुद्ध पर एक वार्ता (A Dialogue on the Civil Wars)
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