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बीए सेमेस्टर-4 मनोविज्ञान

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2743
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-4 मनोविज्ञान - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- व्यक्तित्वलोप से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-

व्यक्तित्वलोप विकृति (Deperssionalization Disorder) - एक ऐसी विकृति है जिसमें व्यक्ति का आत्मन का प्रत्यक्षण इस सीमा तक बदला रहता है कि उसे पृथक्ककरण का भाव उत्पन्न होता है। व्यक्ति अपने आप को यंत्रवत चलने वाला प्राणी समझने लगता है। उसे यह अनुभव होता है कि वह अपनी ही शारीरिक एवं मानसिक प्रक्रियाओं को एक बाहरी प्रेक्षक के रूप में देख रहा है। इसमें व्यक्ति को संवेदी भ्रामक, भावात्मक अनुक्रियाओं में कमी, अपनी क्रियाओं पर नियंत्रण खोने का भाव आदि होता है।

व्यक्तित्वलोप विकृति के रोगी में वास्तविक परख का गुण बिल्कुल ठीक होता है अर्थात् उसे यह ज्ञात होता है कि उसे यंत्रवत चलने वाला प्राणी का मात्र अनुभव हो रहा है न कि वह सचमुच में वैसा प्राणी है। ऐसे रोगियों में सम्मोहनशीलता का गुण अधिक होता है। DSM IV में व्यक्तित्वलोप विकृत को एक स्वतना मनोविच्छेदी विकृति के रूप में शामिल किया जाना विवादास्पद है क्योंकि इसमें स्मृति में किसी प्रकार की क्षुब्धता नहीं पायी जाती है जबकि मनोविच्छेदी विकृति में स्मृति में क्षुब्धता होना मुख्य लक्षण है।

व्यक्तित्वलोप विकृति के प्रमुख लक्षण - इसका प्रमुख लक्षण है कि व्यक्ति को अपने शरीर का विकृत प्रत्यक्षण होता है, व्यक्ति को यह लगता है कि वह एक रोबोट के समान है। कुछ लोगों में अवसाद, चिन्ता आदि होने का डर रहता है। कुछ लोगों में यह लक्षण बहुत ही कम मात्रा और थोड़े समय के लिये होते हैं तथा इसके विपरीत कुछ लोगों में यह लक्षण चिरकालिक और कई सालों तक बार-बार दिखाई देते हैं, जो उनके दैनिक जीवन के कार्यों को 'पूरा करने में बाधा पहुँचाते हैं।

व्यक्तित्व लोप विकृति के कारण - व्यक्तित्व लोप विकृति के कारणों के बारे में अभी तक बहुत ज्यादा ज्ञात नहीं हुआ है, लेकिन जैविक और वातावरणीय कारक इस विकृति में भूमिका निभाते हैं। अन्य मनोविच्छेदी विकृति के समान तीव्र तनाव या आघातीय घटनाएँ जैसे युद्ध, दर्घटनाएँ, आपदाएँ या अत्यधिक हिंसा, इस विकृति अन्य विकृतियों के साथ जैसे चिन्ता, अवसाद या मनोविदलता के साथ भी हो जाती है। कुछ लोगों में यह अचानक बिना किसी आभासी कारण के भी होते देखी गयी है। अभी तक व्यक्तित्वलोप विकृति का कोई निश्चित कारण नहीं समझ में आया है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इस विकृति के पीछे मस्तिष्क के रासायनिक तत्वों का असंतुलन है।

व्यक्तित्वलोप विकृति का उपचार - व्यक्तित्वलोप विकृति के उपचार के लिये आये गये लोगों में अवसाद तथा चिंता के लक्षण पाये गये। व्यक्तित्वलोप विकृति के उपचार की जरूरत तब होती है जब इसके लक्षण लम्बे समय तक तथा बार-बार नजर आते हैं और जब यह लक्षण व्यक्ति को परेशान कर रहे हों। व्यक्तित्व लोप विकृति का उपचार इस रोग की गंभीरता तथा लक्षणों की तीव्रता के आधार पर किया जाता है। इसके उपचार की कुछ प्रमुख विधियाँ इस प्रकार हैं-

(A) औषध चिकित्सा - मनोविच्छेदी विकृति के उपचार के लिये कोई विशेष दवा नहीं है और व्यक्तित्वलोप विकृति मनोविच्छेदी विकृति का एक प्रमुख प्रकार है। जिन लोगों में व्यक्तित्वलोप का एक प्रमुख प्रकार है। जिन लोगों में व्यक्तित्वलोप के साथ अवसाद तथा चिन्ता के लक्षण तीव्र होते हैं उस स्थिति में अवसाद विरोधी तथा चिन्ता विरोधी दवाईयाँ लाभकारी हैं।

(B) मनोचिकित्सा - इस विधि में कुछ मनोवैज्ञानिक तकनीकों का प्रयोग किया जाता है, जिसमें रोगी यह समझने का प्रयास किया जाता है कि इस विकृति के क्या कारण है और साथ ही साथ इस बात का भी प्रशिक्षण दिया जाता है कि इस विकृति के लक्षणों के बारे में चिन्ता करना छोड़ दे।

(C) संज्ञानात्मक चिकित्सा - इस चिकित्सा पद्धति में व्यक्ति के असंगत चिन्त शैली को परिवर्तित करने का प्रयास किया जाता है जो व्यक्तित्वलोप विकृति के लक्षणों को उत्पन्न करने में सहायक है।

(D) पारिवारिक चिकित्सा - इसमें परिवार को व्यक्तित्वलोप विकृति के बारे में उसके कारणों तथा उपचार के बारे में शिक्षित किया जाता है।

इन उपरोक्त तकनीकों का संयुक्त रूप से प्रयोग कर व्यक्तित्वलोप विकृति को कम किया जा सकता है।

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