बी काम - एम काम >> बीकाम सेमेस्टर-2 व्यावसायिक अर्थशास्त्र बीकाम सेमेस्टर-2 व्यावसायिक अर्थशास्त्रसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीकाम सेमेस्टर-2 व्यावसायिक अर्थशास्त्र - सरल प्रश्नोत्तर
महत्वपूर्ण तथ्य
- “श्रम तथा पूँजी में वृद्धि सामान्यतः संगठन को सुधारती है, जिसके परिणामस्वरूप श्रम तथा पूँजी की कार्य कुशलता बढ़ जाती है और इसलिये उत्पादन में अनुपात से अधिक वृद्धि होती है।” — मार्शल
- उत्पादन अवशिष्ट छोटी होने के कारण फर्म अपनी स्थिर साधनों को नहीं बदल पाती।
- उत्पादन तकनीक स्थिर रहती है।
- उत्पादन क्रिया में एक साधन की कमी की दूसरे साधन की वृद्धि के द्वारा पूरा नहीं किया जा सकता।
- पूँजी की स्थिर मात्रा के साथ श्रम की उत्तरत्तर इकाइयों से कुल उत्पादन में वृद्धि यदि हम सीमांत उत्पादन कहते हैं, क्रमशः घटती जाती है।
- प्रारम्भ में वृद्धि के बाद औसत उत्पादन में भी घटने की प्रवृत्ति है पर सीमांत उत्पाद की अपेक्षा इसमें घटने की दर कम है।
- प्रो. रिकार्डो के शब्दों में - “जब कुछ उत्पादन साधनों को स्थिर रखकर एक उत्पादन साधन की इकाइयों में समान वृद्धि की जाती तब एक निश्चित बिन्दु के बाद उत्पादन की उत्पन्न होने वाली वृद्धियाँ कम हो जायेंगी अर्थात् सीमांत उत्पादन घटेगा।”
- “कृषि में लगायी गई पूँजी और श्रम की वृद्धि से सामान्यतः उत्पादन की मात्रा में अनुपात में कम वृद्धि होती है, फिर चाहे ही कृषि कला में कोई उन्नति हो।” — मार्शल
उत्पादन ह्रास नियम का सम्बन्ध उत्पादन की भौतिक मात्रा से होता है न कि उसके मूल्य से।
यह नियम परिवर्तनशील साधन की उपयुक्त मात्रा प्रयोग हो चुकने के बाद लागू होती है।
जब साधनों के अनुपात में परिवर्तन किया जाए उस समय कम से कम एक साधन का स्थिर रहना आवश्यक है।
उन इकाइयों का समष्टि होना चाहिए जो परिवर्तनशील हों।
उत्पादन की तकनीक में सुधार की कोई व्यवस्था न हो।
परिवर्तनशील अनुपात नियम में तीन प्रकार के प्रतिफल उत्पन्न होते हैं।
बढ़ते प्रतिफल की अवस्था—इस अवस्था में औसत उत्पादकता निरन्तर बढ़ती रहती है और सीमांत उत्पादकता धनात्मक एवं औसत उत्पादकता से अधिक होती है।
इस अवस्था में जैसे-जैसे स्थिर साधन पर परिवर्तनशील साधन की मात्रा बढ़ाई जाती है वैसे-वैसे निरन्तर एवं पूर्ण विधेयता होने के कारण बढ़ते प्रतिफल प्राप्त होते हैं।
घटते प्रतिफल की अवस्था—इस अवस्था में सीमांत उत्पादकता और औसत उत्पादकता दोनों घटती हैं, किन्तु धनात्मक होती हैं।
ऋणात्मक प्रतिफल की अवस्था—इस अवस्था में कुल उत्पादन घटना आरम्भ कर देता है क्योंकि उस बिन्दु के बाद सीमांत उत्पादकता ऋणात्मक हो जाती है।
एक विवेकशील उत्पादक सदैव घटते प्रतिफल की अवस्था में उत्पादन करेगा। क्योंकि इस अवस्था में भी अपेक्षाकृत स्थिर साधनों की पूर्ण विधेयता करके उत्पादन अधिकतम उत्पादकता प्राप्त करने में सक्षम होता है।
प्रो. बोगल ने अनुसार, “यदि विभागन द्वारा से प्रवेश करती है तो परिवर्तनशील अनुपात का नियम विघटित से बाहर कूद जाएगा।”
पहले अवस्था को घटती लागत का नियम, दूसरी स्टेज को स्थिर लागत का नियम और तीसरी स्टेज को बढ़ती लागत का नियम कहते हैं।
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