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बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :215
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 2702
आईएसबीएन :0

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बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज

प्रश्न- बालक के समाजीकरण की प्रक्रिया के महत्वपूर्ण कारक कौन-कौन से हैं?

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. उचित समाजीकरण के लिए बच्चे का उचित पालन-पोषण क्यों आवश्यक है?
  2. सामाजिक शिक्षण का बालकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर—

समाजीकरण की प्रक्रिया

समाजीकरण की प्रक्रिया के महत्वपूर्ण कारक निम्नलिखित हैं—

  1. पालन-पोषण— उचित समाजीकरण के लिए आवश्यक है कि बालक का पालन-पोषण अच्छे वातावरण में उचित ढंग से किया जाए। ऐसा करने पर ही वह समाज के आदर्शों व मूल्यों के अनुसार आचरण करना सीखता है।

  2. सहकारिता— जैसे-जैसे बालक अपने साथ इन व्यक्तियों का सहयोग पाता है वैसे-वैसे वह दूसरों का सहयोग भी प्रारम्भ कर देता है। इससे उसकी सामाजिक प्रवृत्तियां संगठित हो जाती हैं।

  3. सहानुभूति— बालक, प्रारम्भ में अपनी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर रहता है। यहाँ पर ध्यान रखना आवश्यक है कि परिवार में बालक की सभी आवश्यकताएँ पूरी करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके साथ सहानुभूति पूर्ण व्यवहार करना भी अनिवार्य है। इससे बालक अपर्याप्त की भावना अनुभव करने लगता है व उन्हें अधिक प्यार भी करने लगता है।

  4. आत्मीकरण— जब परिवार तथा अन्य समूहों द्वारा बालक को सहानुभूति प्राप्त होती है तब आत्मीकरण की भावना का विकास होता है।

  5. पुरस्कार एवं दंड— जब बालक समाज के आदर्शों एवं प्रतिमानों के अनुरूप आचरण करता है तो उसकी प्रशंसा होती है अथवा उसे उचित रूप से पुरस्कार किया जाता है। इसके विपरीत जब वह समाज के आदर्शों के विपरीत आचरण करता है तो उसे दंड दिया जाता है। इससे बालक के समाजीकरण होने में सहायता मिलती है।

  6. अनुकरण— अनुकरण समाजीकरण का एक मूलभूत तत्व है। बालक परिवार, पड़ोस तथा अन्य समूहों के लोगों को जिस प्रकार का व्यवहार करते हुए देखता है, उसी का अनुकरण करने लगता है।

  7. सामाजिक शिक्षण— सामाजिक शिक्षण का भी बालक के समाजीकरण पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यह सामाजिक शिक्षण परिवार से प्रारंभ होता है। परिवार में बालक माता-पिता, भाई-बहन तथा अन्य सदस्यों से रहन-सहन, उठना-बैठना, खान-पान, बोलचाल आदि के विषय में शिक्षा प्राप्त करता है।

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