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बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :215
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 2702
आईएसबीएन :0

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बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज

प्रश्न- क्या महिला एवं पुरुष जेंडर की आवश्यकताएँ समान होती हैं? समझाते हुए उत्तर दीजिए।

उत्तर-

जेंडर और विकास के दृष्टिकोण के सन्दर्भ में जेंडर आवश्यकताओं को, एक संकल्पना के रूप में समझा जाता है। दो नीतिगत परिप्रेक्ष्य/दृष्टिकोण हैं। पहला है, विकास में महिलाएँ (WID) और दूसरा है, जेंडर और विकास (GAD) जो महिलाओं की विकास से सम्बन्धित करता है। WID दृष्टिकोण के बजाय अब GAD दृष्टिकोण आया और इसके कारण जेंडर आवश्यकताओं और जेंडर सम्बन्धी जैसी नवीन संकल्पनाओं का उदय हुआ।

जेंडर आवश्यकताओं व्यवहारिक जेंडर आवश्यकताओं (PGNs: Practical Gender Needs) और रणनीतिक जेंडर आवश्यकताओं (SGNs: Strategic Gender Needs) में विभाजित हैं। PGNs और SGNs शब्द सन 1985 ई. में मैक्सिन मोलिन्यूक्स द्वारा दिए गए थे। महिलाओं की स्थिति को इन दोनों संकल्पनाओं के विकास कैरोलिन मोजर ने किया ताकि महिलाओं की स्थितियों में सुधार किया जा सके। व्यवहारिक जेंडर आवश्यकताओं का लक्ष्य महिलाओं को उनके मूलभूत उन्तानशीलता को रोक, महिलाओं की पूर्ति को सामाजिक आवश्यकताओं को सम्बोधित करता है। इन आवश्यकताओं में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पेयजल और स्वच्छता तक महिलाओं की पहुँच सम्भव करना शामिल है।

नीतिगत स्तर पर राष्ट्र यदि महिलाओं की इन व्यवहारिक जेंडर आवश्यकताओं को सम्बोधित करता है तो महिलाओं की जीवन-स्थितियों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा। रणनीतिक जेंडर आवश्यकताएँ ऐसी आवश्यकताएँ हैं जो महिलाओं और पुरुषों के बीच विद्यमान असमान शक्ति सम्बन्धों को पुनःसंतुलित करने में सहायता करती हैं। ये आवश्यकताएँ श्रम के जेंडरीकृत विभाजन, शक्ति की असमान भागीदारी तथा समाज में असमान पहुँच और उस पर असमान नियंत्रण जैसी संकल्पनाओं से जुड़ी हैं। महिलाओं की स्थिति को सशक्त करने के उदाहरणों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, शैक्षिक अधिकार, संपत्ति एवं आय अपने शरीर पर महिलाओं का नियंत्रण इन आवश्यकताओं/हितों को चुनौती देना आसान नहीं है। लेकिन समाज में सामाजिक स्थिति सुधारने के लिये रणनीतिक आवश्यकताएँ स्पष्ट और स्पर्श कर सकती हैं। अपनी सामूहिक चेतना के उन्नयन के लिये किसी पृष्ठ, जाति, वर्ग, धर्म या जनजाति की महिलाएँ इन रणनीतिक आवश्यकताओं को साझा कर सकती हैं और इन्हें सुन-समझ सकती हैं। पुरुषों की भी रणनीतिक जेंडर आवश्यकताएँ होंगी, जैसे— बच्चों की देखभाल करने में सहभागिता करके परिवार में अपनी भूमिकाओं का स्वरूप बदलना या कुछ घरेलू कामों की जिम्मेदारी लेना (मानव एवं पायट, 1999)। आवश्यकताओं के इन दोनों प्रकारों को एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता और जेंडर-समावेशी नीतियों के निर्माण के लिये ये दोनों प्रकार की आवश्यकताएँ महत्वपूर्ण हैं।

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