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बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :215
मुखपृष्ठ : ई-पुस्तक
पुस्तक क्रमांक : 2702
आईएसबीएन :0

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बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज

प्रश्न- स्त्रियाँ प्रतिदिन घर या बाहर किस प्रकार की समस्याओं का सामना करती हैं? तथा इनसे मुक्ति हेतु सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता की चर्चा भी करें।

उत्तर-

स्त्रियाँ अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन में घर और घर के बाहर अनेक समस्याओं का सामना करती हैं—

  • स्त्रियों के प्रति में अनेक नकारात्मक तत्वों का सामना करना पड़ता है। ये नकारात्मक प्रभाव हैं: बालिका भ्रूण हत्या, बालिका शिशु हत्या, दहेज, यौन उत्पीड़न और वैश्यावृत्ति।
  • गरीबी, कुपोषण, बालिका शिशु हत्या आदि के कारण 0-6 की उम्र समूह में लड़कियों की संख्या घट रही है।
  • यद्यपि घर स्त्रियों के लिये सुरक्षित स्थान समझा जाता है फिर भी कई प्रकार के यौन दुर्व्यवहार जैसे कि पिटाना, बुनियादी अधिकारों का निपेक्ष, विवाह उत्पीड़न, दहेज, मृत्यु और घर में जबरदस्ती बिठाए रखना, सब घर में ही होते हैं।
  • स्त्रियों पर होने वाले अपराधों में लगभग 30 प्रतिशत घरेलू हिंसा या मारपीट से जुड़ी हुई हैं।
  • चूँकि घरेलू हिंसा घर में होती है अतः इसे सामान्यतः परिवार का झगड़ा या एक गलतफहमी समझा जाता है।
  • सुरक्षित आवास अथवा वृद्धाश्रम कई विधवाओं को मजबूर करते हैं कि वे दमनात्मक परिवार से निकल आयें।
  • यद्यपि दहेज निषेध अधिनियम 1961 में पारित हुआ और 1984 तथा 1986 में इसमें संशोधन किये गये, फिर भी दहेज से जुड़ी हिंसा में बढ़ोतरी हो रही है।
  • बलात्कार, किसी भी महिला से सहमति यौन सम्बन्ध स्थापित करने की क्रिया है जिसके लिये कम-से-कम 7 वर्ष की जेल के दंड दिये जाने का प्रावधान है। अगर यह हिरासत में किया गया बलात्कार हो, सामूहिक बलात्कार या गर्भवती महिला से बलात्कार अथवा 12 वर्ष से कम उम्र के लड़कों के साथ किया गया बलात्कार हो तो इसके लिये कम-से-कम 10 वर्ष की जेल के दंड का प्रावधान है।
  • वह दुर्व्यवहार जो मारपीट जिसे स्त्रियाँ अपने कार्य स्थल पर सहन करती हैं उसे 'यौन उत्पीड़न' कहते हैं। इसके लिये जो दंड दिया जाता है वह सर्वोच्च न्यायालय के 1997 के निर्देश के अनुसार लागू होता है।
  • हाल की स्थिति में विधवाओं की दशा में निश्चित परिवर्तन हुए हैं। लेकिन वे विधवाएँ जिनके पास पर्याप्त आर्थिक और सामाजिक सहायता नहीं है वे इन समस्याओं का मुक़ाबला करती रहेंगी।
  • कानूनों को कठोरता से लागू करना, हृदय परिवर्तन, और सामाजिक तथा आर्थिक सुरक्षा यदि स्त्रियों को दी जाये तो इससे उनकी समस्याओं का बहुत बड़ी सीमा तक निवारण हो सकता है।

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