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बी एड - एम एड >> बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाजसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज
प्रश्न- पाठ्यपुस्तकों से लिंगीय पक्षपात को कम करने हेतु सुझाव दीजिए।
उत्तर-
पाठ्यपुस्तकों से लिंगीय पक्षपात को कम करने के लिए सुझाव पाठ्यक्रमों व पाठ्यपुस्तकों से जेंडर पक्षपात को कम करने के लिए निम्नलिखित सुझाव हैं—
- शैक्षिक सामग्री का उत्पादन संविधान में निहित भावना तथा मौलिक अधिकार एवं समानता के अनुरूप होना चाहिए।
- पाठ्यक्रम व पाठ्यपुस्तकों में वहां संशोधन करने की आवश्यकता है जहां महिलाओं का चित्रण केवल अच्छी गृहणियों की तरह किया गया है। पुरुषों के समान महिलाओं की उपलब्धि को शामिल करने की आवश्यकता है यह दिखाया जा सकता है कि पिता खाना बना रहा है, माता बल्ब लगा रही है, लड़की स्कूल से साइकिल पर लौट रही है तथा लड़का झाड़ू लगा रहा है।
- पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तकों में एक लिंगीय समिति जिसमें अकादमिक, नारीवाद, इतिहासकार, सरकार आदि शामिल हों, जिससे पाठ्यक्रम की गुणवत्ता एवं यह सुनिश्चित हो जाए कि पाठ्यपुस्तकें लिंग भेद से मुक्त हैं।
- बालिकाओं के स्थान पर सबसे सहज सोच विकसित हो बजाय लड़कों के परिवार में बालिकाओं की वास्तविक स्थिति को महत्व देने चाहिए।
- अब बहुत कम महिलाओं को आकस्मिक पढ़ाई जाती है, क्योंकि महिलाओं की आत्मकथाएं कम संख्या में निर्मित हैं इनकी संख्या बढ़ाकर बालिकाओं को प्रेरित किया जा सकता है।
- पाठ्यपुस्तकों के उत्पादन को एक साधारण क्रिया की तरह नहीं लिया जाना चाहिए बल्कि पर राज्य सरकार को पर्यवेक्षण तथा नियंत्रण होना चाहिए।
- लिंग भेद को दर्शाने वाली शिक्षण सामग्री को परिवर्तित कर देना चाहिए।
- कला, संगीत, गृह विज्ञान आदि महिलाओं के विषय जबकि भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित आदि विषयों को पुरुषों से सम्बद्ध माना जाता था, उसमें परिवर्तन करना।
- शिक्षकों/शिक्षिकाओं लड़के एवं लड़कियों के मध्य स्वच्छंद-अक्रिया को प्रोत्साहित करें।
- विद्यार्थियों को समूह अध्ययन दिया जाए तथा लड़के एवं लड़कियों को समूह में कार्य करने के लिए प्रेरित करें।
- कक्षा में कार्यों का बंटवारा लड़के एवं लड़कियों के मध्य समान रूप से होना चाहिए।
- यदि एक लड़का व एक लड़की समान कार्य करते हैं अथवा अक्रिया करते हैं तो उस पर कोई नकारात्मक भाषिक टिप्पणी न किया जाए तथा उसे तथाकथित बुरे काम की श्रेणी से बाहर निकालकर देखा जाए।
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