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बी काम - एम काम >> बीकाम सेमेस्टर-1 व्यावसायिक सम्प्रेषण बीकाम सेमेस्टर-1 व्यावसायिक सम्प्रेषणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीकाम सेमेस्टर-1 व्यावसायिक सम्प्रेषण
प्रश्न- आप किस प्रकार प्रतिवेदनों में उद्धरण नियमों ( ए. पी. ए. शैली प्रपत्रीकरण) को लागू करेंगे?
उत्तर -
[Applying Citation Rules (APA Style
Documentation) in Reports]
उद्धरण की पाद टिप्पणी विधि संदर्भों के उद्धरण की परम्परागत रीति है। इस विधि में संदर्भों की पृष्ठ के नीचे लिखा जाता है तथा पाठ्य सामग्री के ऊपरी ओर संख्याओं में इंगित किया जाता है।
पाद टिप्पणी का प्रारूप अलग-अलग लेखकों द्वारा भिन्न-भिन्न तरह से अपनाया जा सकता है। परन्तु, सामान्य स्वीकृत प्रक्रिया के अनुसार पाद टिप्पणी के निम्नलिखित प्रारूप उपयोग किए जाते हैं -
1. संक्षिप्त प्रारूप (Abbreviated Form ) - इसे एक ग्रन्थसूची के साथ उपयोग किया जाता है। संक्षिप्त प्रारूप में लेखक का उपनाम, प्रकाशन का नाम तथा इसका पृष्ठ संख्या दिया जाता है।
संक्षिप्त प्रारूप की सार्वभौमिक स्वीकृति नहीं है।
2. पूर्ण प्रारूप (Complete Form ) - पूर्ण संदर्भ प्रारूप जिसे सामान्यतया वरीयता दी जाती हैं, मैं विवरण बिन्दुओं को नीचे दिये गये क्रम में सूचीयत किया जाता है। बिन्दुओं को कॉमा लगाकर अलग किया जाता है तथा प्रत्येक प्रविष्टि प्रकाशन वर्ष के साथ समाप्त होती है। व्यक्तिवाचक संज्ञाएँ बड़े अक्षरों में जाती है। सभी महत्वपूर्ण एवं उपलब्ध मदें उचित क्रम में रखी जाती हैं।
Op. cit - इसका आशय यह है कि यह प्रारूप विगत उद्धरित पाद टिप्पणी जो अलग पृष्ठ पर दी होती है, के संदर्भ के लिए प्रयुक्त होता है। प्रविष्टि में नीचे की लिखावट, लेखक का नाम, op. cit तथा पृष्ठ संख्या दी रहती है।
ibid - इसका अर्थ होता है 'एक ही स्थान में। इसका उपयोग पिछली पाद टिप्पणी का संदर्भ देने के लिए होता है। प्रविष्टि में ऊपर लिखा हुआ ibid तथा पृष्ठ संख्या शामिल होती है।
Loc. cit - इसका अर्थ 'उद्धरित स्थान में। यह पाद टिप्पणी श्रृंखला में विगत प्रविष्टि को संदर्भित करता है। इसका उपयोग केवल तब होता है जब एक ही स्रोत के दो संदर्भों की पृष्ठ संख्याएँ उपयोग की जाती हैं।
ग्रन्थसूची प्रकाशित एवं अप्रकाशित उन कृतियों की क्रम से संख्यांकित सूची होती है जिन्हें प्रतिवेदन तैयार करने से पहले या दौरान देखना होता है। यह संदर्भसूची से कई तरह से भिन्न होती है।
[American Psychological Association (APA)
Style of Documentation Report]
प्रतिवेदन के सम्बन्ध में ए.पी.ए. की नियमावली निम्नलिखित है -
1. प्रतिवेदन लेखक को उन सभी सूचनाओं के प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए जिन्हें उसने किसी भी स्रोत से उपयोग किया हो।
2. सूचनाओं के स्रोतों के प्रमाण प्रस्तुत करने से वह अन्य लोगों के अभिलिखित विचारों या बौद्धिक सम्पदा को संदर्भित करता है।
3. प्रतिवेदन लेखक या इंगित करने के लिए कि उन्हें कहाँ से सूचनाएँ प्राप्त हुई, विशिष्ट प्रारूप का उपयोग करते हैं। ये प्रारूप प्रमाण प्रस्तुतीकरण की शैलियाँ कहलाते हैं।
4. प्रमाण प्रस्तुतीकरण के निम्नलिखित दो प्रकार हैं-
• एम.एल.ए. अर्थात् आधुनिक भाषा संघ।
• ए.पी.ए. अर्थात् अमेरिकी मनोवैज्ञानिक संघ।
5. लेखक प्रमाण प्रस्तुतीकरण की ए.पी.ए. शैली का उपयोग करते हैं।
6. प्रमाण देने की ए.पी.ए. शैली यह आवश्यक करती है कि पूरा कागज डबल स्पेस में हो। 7. प्रमाण देने की ए.पी.ए. शैली यह आवश्यक करती है कि संदर्भ सहित पृष्ठ को 'संदर्भ' नाम दिया जाय।
(Referencing in-tex Citations)
1. ए. पी. ए. हेतु कोष्ठकबद्ध प्रमाण देने के लिए यह आवश्यक होता है कि लेखक उद्धरित सूचना की तिथि भी दे। शोध खण्ड में प्रत्येक वाक्य अपने स्रोत के सम्बन्ध में संदर्भ को आवश्यक करता है तथा प्रकाशन की तिथि भी जरूरी होती है।
2. यदि प्रत्यक्ष रूप में अवतरण दिया जाता है, तो पाठ्य उद्धरण में ए.पी.ए./कोष्ठकबद्ध प्रमाण लेखक के लिए यह आवश्यक करते हैं कि तिथि, पृष्ठ संख्या या अनुच्छेद सं. को अवश्य ही उद्धरित किया जाय। अनुच्छेद संख्याएँ इण्टरनेट स्रोतों के सम्बन्ध में उद्धरित की जाती हैं। इस नियम का अववाद पी.डी.एफ. प्रमाण का उद्धरण किया जाना है। पी.डी.एफ. फाइलों के रूप में प्रकाशित स्रोतों के सम्बन्ध में पृष्ठ संख्याएँ संदर्भित की जाती हैं।
3. किसी पृष्ठ संख्या का संदर्भ देते समय संख्या को एक पृष्ठ की तरह एक पृष्ठ हेतु (p. 24) अथवा कई पृष्ठों हेतु pp. (जैसे pp. 24-30) के रूप में इंगित किया जाना चाहिए।
4. अनुच्छेद संख्या का संदर्भ देते समय संख्या को अनुच्छेद के रूप में पहचानना आवश्यक होता है, उदाहरण के लिए एक अनुच्छेद हेतु ( 4 ) अथवा कई अनुच्छेदों को ( 47 ) के रूप में इंगित किया जाता है।
(Citing Sources on the Reference Page)
1. ए. पी. ए. शीर्षकों के इर्द-गिर्द उद्धरण चिन्हों का उपयोग नहीं करता है।
2. ए. पी. ए. केवल शीर्षक के पहले शब्द के शुरूआती अक्षर को बड़ा लिखता है तथा शीर्षक में एक कोलन के बाद प्रथम शब्द के शुरूआती अक्षर को बड़े रूप में लिखता है। सभी व्यक्तिवाचक संज्ञाओं का पहला अक्षर भी बड़ा लिखा जाता है।
3. ए. पी. ए. लेखक के नाम के बाद तिथि (वर्ष) को उद्धरित करता है।
4. ए. पी. ए. संदर्भ में प्रविष्टियों को वर्णमाला के अनुसार अथवा स्थान के अनुसार इंगित किया जा सकता है।
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