बी ए - एम ए >> चित्रलेखा चित्रलेखाभगवती चरण वर्मा
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बी.ए.-II, हिन्दी साहित्य प्रश्नपत्र-II के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार पाठ्य-पुस्तक
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इण्टरनेशनल बोर्ड और नेशनल बोर्ड
(International Boards and National Boards)
प्रश्न- शिक्षा बोर्ड के बारे में विस्तृत विवेचना कीजिए।
उत्तर- भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है - एन. बी. ई.। 1975 में इसे नई दिल्ली में एक सोसाइटी के रूप में दिल्ली सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम के तहत स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा और परीक्षा के मानकीकरण के लिए स्थापित किया गया। इतना ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड द्वारा प्रदान की जाने वाली स्नातकोत्तर डिग्री को डिप्लोमेंट ऑफ नेशनल बोर्ड कहते हैं।
भारत में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन चिकित्सा के क्षेत्र में और वैश्विक स्तर पर परीक्षाओं का सबसे बड़ा पोर्टफोलियो को आयोजित करता है।
भारत में अन्तर्राष्ट्रीय विद्यालय पूर्ण शिक्षा के विकास की भूमिका को सामने लाती है। भारत सरकार 6 - 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को मुफ्त में शिक्षा प्रदान करती है। प्रत्येक माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा प्रदान करना चाहते हैं। कुछ तो अपने बच्चों को निजी स्कूलों में रखने में सक्षम हैं जहाँ पर शिक्षाविद् सहपाठ्यचर्या से सम्बन्धी गतिविधिये में हाथ बँटाते हैं जिससे कि सर्वांगीण विकास सम्भव है। इस तरह की शिक्षा हर बच्चे के लिए सस्ती नहीं होती है। देखा जाए तो प्रत्येक माता- पिता के पास अपने बच्चों को अन्तर्राष्ट्रीय स्कूलों में दाखिला दिलाने का साधन नहीं है।
शिक्षा बोर्ड की भूमिका - शिक्षा बोर्ड की बात की जाए तो ऐसे कई पब्लिक स्कूल हैं जो सी. बी. एस. ई. और आई. सी. एस. ई. जैसे राष्ट्रीय बोर्ड प्रदान करते हैं। इसके अलावा भारत में राष्ट्रीय बोर्ड की उपलब्धता अन्तर्राष्ट्रीय बोर्ड की तुलना में अधिक है।
बोर्ड की तीन व्यापक श्रेणियाँ हैं जो कि मुख्य रूप से निम्नलिखित हैं-
(1) राज्य बोर्ड,
(2) नेशनल बोर्ड,
(3) अन्तर्राष्ट्रीय बोर्ड।
(1) राज्य बोर्ड -
लाभ - (A) राज्य से सम्बन्धित कॉलेजों में सीट का आरक्षण।
(B) आसान पाठ्यक्रम के अलावा छात्रों पर कोई भी अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।
(C) बच्चों को अपनी रुचियों के लिए अधिक अवकाश मिलता है।
(D) पाठ्यपुस्तकें आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।
हानि - (A) सभी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बराबरी पर नहीं है।
(B) स्कूलों में बुनियादी शिक्षाओं का उपलब्ध न होना।
(C) राष्ट्रीय शिक्षा के बराबर पाठ्यपुस्तकों का न होना।
(2) राष्ट्रीय बोर्ड -
लाभ - (1) शिक्षा की गुणवत्ता और पाठ्यपुस्तक की सामग्री का उच्च स्तर पर होना।
(2) भारत के सभी कॉलेजों में मान्यता।
(3) स्कूल में अच्छी गुणवत्ता वाले शिक्षक और कर्मचारी।
(4) पाठ्यपुस्तक के अन्तर्गत छात्रों के व्यक्तित्व विकास करने वाली विषयों की श्रृंखला शामिल है।
हानि - (1) राज्य बोर्ड की अपेक्षा पाठ्यक्रम भारी है।
(2) फीस अधिक होना।
(3) राज्य बोर्ड में देशभर के कॉलेजों में सीट का आरक्षण होना।
(3) अन्तर्राष्ट्रीय बोर्ड -
लाभ - (1) व्यक्तित्व का विकास करना।
(2) विभिन्न प्रकार के विषयों का होना।
(3) एनआरआई परिवार के लिए भारत का स्थानान्तरण करने या फिर देश से बाहर जाने का विकल्प होना।
(4) कई सारी सुविधाओं के साथ बुनियादी सुविधाओं को भी शामिल करना।
(5) शिक्षा की शीर्ष गुणवत्ता।
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