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चित्रलेखा

भगवती चरण वर्मा

प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2017
पृष्ठ :128
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 19
आईएसबीएन :978812671766

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बी.ए.-II, हिन्दी साहित्य प्रश्नपत्र-II के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार पाठ्य-पुस्तक

प्रश्न- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के गठन का क्या उद्देश्य था?
अथवा
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए।
अथवा
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के गठन का उद्देश्य
उत्तर-
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के उद्देश्य बताइये।
(The aim of the establishment of University Grants Commission)
1948 में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग की सिफारिशों के फलस्वरूप विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना सन 1953 में की गई थी। इसके उपरान्त सन् 1956 में संसद के अधिनियम द्वारा इसे वैधानिक संस्था स्वीकार कर लिया गया। इस कानून के अनुसार चेयरमैन तथा सचिव के अतिरिक्त इस आयोग में 9 सदस्य होंगे। इसके 9 सदस्यों में से 3 सदस्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, चार प्रसिद्ध भारतीय शिक्षाशास्त्री तथा दो केन्द्रीय सरकार के प्रतिनिधि होते हैं।
इस आयोग के सम्बन्ध में कोठारी आयोग ने लिखा है कि - "सम्पूर्ण उच्चतर शिक्षा को एक ही अभिन्न इकाई माना जाना चाहिए तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को अन्ततः उच्च शिक्षा का सर्वागीण प्रतिनिधित्व करना चाहिए।'
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संगठन के सम्बन्ध में कोठारी आयोग ने लिखा है कि
(i) समितियों द्वारा तत्परता के साथ कार्य किया जाये।
(ii) सेवानिवृत्त अध्यापकों की सेवाओं का उपयोग करना।
(iii) विश्वविद्यालयों की आर्थिक स्थिति की जाँच करना।
(iv) अनुदान के वितरण की व्यवस्था करना।
(v) उच्च शिक्षा के सम्बन्ध में केन्द्र को परामर्श प्रदान करना।
(vi) विश्वविद्यालयों में उन्नतिशील अध्ययन केन्द्रों की स्थापना करना।
(vii) विश्वविद्यालयों की डिग्री को मान्यता प्रदान करना।
कोठारी कमीशन ने एन. सी. ई. आर. टी. के गठन के बारे में यह सुझाव दिया है कि - "परिषद का शासी निकास अखिल भारतीय स्तर का होना तथा उसमें गैर सरकारी सदस्यों का बहुमत होना चाहिए। विशेष रूप से यह वांछित है कि उसमें कम से कम माध्यमिक विद्यालय का एक उत्तम अध्यापक हो तथा एक प्राथमिक शिक्षा का विशेषज्ञ जो प्राथमिक विद्यालय का अध्यापक हो तो उत्तम है।

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