शब्द का अर्थ
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ईठ :
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पुं० [सं० इष्ट, प्रा० इट्ठ] प्रिय व्यक्ति, मित्र और सखा वि० प्रिय। उदाहरण—ज्यों क्यों हूँ न मिलै केशव दोऊ ईठ। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
ईठ :
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पुं० [सं० इष्ट, प्रा० इट्ठ] प्रिय व्यक्ति, मित्र और सखा वि० प्रिय। उदाहरण—ज्यों क्यों हूँ न मिलै केशव दोऊ ईठ। |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
ईठना :
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स० [सं० इष्ट] चाहना। अ० इष्ट या वांछित होना।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है) |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
ईठना :
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स० [सं० इष्ट] चाहना। अ० इष्ट या वांछित होना।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है) |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
ईठि :
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स्त्री० [सं० इष्टि, प्रा० इट्ठि] १. ईठ (अर्थात् इष्ट) होने की अवस्था या भाव। २. मित्रता। दोस्ती। उदाहरण—बोलिये न झूठ, ईठि मूढ़ पै न कीजिए।—केशव। क्रि० वि० [हिं० ईठि] इष्ट रूप में। अच्छी तरह। उदाहरण—ललन चलनु सुनि चुप रही बोली आपु न ईठि।—बिहारी। स्त्री० [?] छोटा भाला। बरछी।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |
ईठि :
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स्त्री० [सं० इष्टि, प्रा० इट्ठि] १. ईठ (अर्थात् इष्ट) होने की अवस्था या भाव। २. मित्रता। दोस्ती। उदाहरण—बोलिये न झूठ, ईठि मूढ़ पै न कीजिए।—केशव। क्रि० वि० [हिं० ईठि] इष्ट रूप में। अच्छी तरह। उदाहरण—ललन चलनु सुनि चुप रही बोली आपु न ईठि।—बिहारी। स्त्री० [?] छोटा भाला। बरछी।(यह शब्द केवल पद्य में प्रयुक्त हुआ है)(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) |
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समानार्थी शब्द-
उपलब्ध नहीं |