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बी ए - एम ए >> फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्रयूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स
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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर
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इण्टरनेशनल बोर्ड और नेशनल बोर्ड
(International Boards and National Boards)
प्रश्न- शिक्षा बोर्ड के बारे में विस्तृत विवेचना कीजिए।
उत्तर-
भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है - एन. बी. ई.। 1975 में इसे नई दिल्ली में एक सोसाइटी के रूप में दिल्ली सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम के तहत स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा और परीक्षा के मानकीकरण के लिए स्थापित किया गया। इतना ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड द्वारा प्रदान की जाने वाली स्नातकोत्तर डिग्री को डिप्लोमेंट ऑफ नेशनल बोर्ड कहते हैं।
भारत में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन चिकित्सा के क्षेत्र में और वैश्विक स्तर पर परीक्षाओं का सबसे बड़ा पोर्टफोलियो को आयोजित करता है।
भारत में अन्तर्राष्ट्रीय विद्यालय पूर्ण शिक्षा के विकास की भूमिका को सामने लाती है। भारत सरकार 6 - 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को मुफ्त में शिक्षा प्रदान करती है। प्रत्येक माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा प्रदान करना चाहते हैं। कुछ तो अपने बच्चों को निजी स्कूलों में रखने में सक्षम हैं जहाँ पर शिक्षाविद् सहपाठ्यचर्या से सम्बन्धी गतिविधिये में हाथ बँटाते हैं जिससे कि सर्वांगीण विकास सम्भव है। इस तरह की शिक्षा हर बच्चे के लिए सस्ती नहीं होती है। देखा जाए तो प्रत्येक माता- पिता के पास अपने बच्चों को अन्तर्राष्ट्रीय स्कूलों में दाखिला दिलाने का साधन नहीं है।
शिक्षा बोर्ड की भूमिका - शिक्षा बोर्ड की बात की जाए तो ऐसे कई पब्लिक स्कूल हैं जो सी. बी. एस. ई. और आई. सी. एस. ई. जैसे राष्ट्रीय बोर्ड प्रदान करते हैं। इसके अलावा भारत में राष्ट्रीय बोर्ड की उपलब्धता अन्तर्राष्ट्रीय बोर्ड की तुलना में अधिक है।
बोर्ड की तीन व्यापक श्रेणियाँ हैं जो कि मुख्य रूप से निम्नलिखित हैं-
(1) राज्य बोर्ड,
(2) नेशनल बोर्ड,
(3) अन्तर्राष्ट्रीय बोर्ड।
(1) राज्य बोर्ड -
लाभ - (A) राज्य से सम्बन्धित कॉलेजों में सीट का आरक्षण।
(B) आसान पाठ्यक्रम के अलावा छात्रों पर कोई भी अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।
(C) बच्चों को अपनी रुचियों के लिए अधिक अवकाश मिलता है।
(D) पाठ्यपुस्तकें आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।
हानि - (A) सभी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बराबरी पर नहीं है।
(B) स्कूलों में बुनियादी शिक्षाओं का उपलब्ध न होना।
(C) राष्ट्रीय शिक्षा के बराबर पाठ्यपुस्तकों का न होना।
(2) राष्ट्रीय बोर्ड -
लाभ - (1) शिक्षा की गुणवत्ता और पाठ्यपुस्तक की सामग्री का उच्च स्तर पर होना।
(2) भारत के सभी कॉलेजों में मान्यता।
(3) स्कूल में अच्छी गुणवत्ता वाले शिक्षक और कर्मचारी।
(4) पाठ्यपुस्तक के अन्तर्गत छात्रों के व्यक्तित्व विकास करने वाली विषयों की श्रृंखला शामिल है।
हानि - (1) राज्य बोर्ड की अपेक्षा पाठ्यक्रम भारी है।
(2) फीस अधिक होना।
(3) राज्य बोर्ड में देशभर के कॉलेजों में सीट का आरक्षण होना।
(3) अन्तर्राष्ट्रीय बोर्ड -
लाभ - (1) व्यक्तित्व का विकास करना।
(2) विभिन्न प्रकार के विषयों का होना।
(3) एनआरआई परिवार के लिए भारत का स्थानान्तरण करने या फिर देश से बाहर जाने का विकल्प होना।
(4) कई सारी सुविधाओं के साथ बुनियादी सुविधाओं को भी शामिल करना।
(5) शिक्षा की शीर्ष गुणवत्ता।
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- प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
- प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
- प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
- प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
- प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
- प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
- प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।










