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बी ए - एम ए >> फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्रयूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स
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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर
प्रश्न- भारत में पूर्व प्राथमिक शिक्षा का विकास बताइए।
उत्तर-
भारत में पूर्व प्राथमिक शिक्षा का विकास
भारत में पूर्व प्राथमिक शिक्षा के विकास के सम्बन्ध में मिशनरियों के द्वारा प्रमुख कदम उठाये गये। मिशनरियों ने प्रारम्भ में अपने द्वारा खोले गए कुछ विद्यालयों के साथ पूर्व प्राथमिक कक्षायें सम्बद्ध कर दीं। कुछ ने तो अलग से नर्सरी स्कूल भी खोले। नूतन बाल शिक्षण संघ ने भी इस सम्बन्ध में अपना महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया और 1920 से स्वदेशी पद्धति पर आधारित स्कूल खोले। 1939 में डॉ. मारिया मान्टेसरी भी भारत आयीं और यहाँ पर उन्होंने पूर्व प्राथमिक शिक्षा को प्रेरणा दी।
वही पर शिक्षा आयोग ने पूर्व प्राथमिक शिक्षा के विकास का उल्लेख किया और लिखा कि - "1947 से पहले पूर्व प्राथमिक शिक्षा की ओर बहुत कम ध्यान दिया जाता था और उसे राज्य की जिम्मेदारी भी नहीं समझा जाता था।' शिक्षा के इतिहास की बात की जाए तो पहली बार केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की भारत में शैक्षिक विकास सम्बन्धी रिपोर्ट में इसके महत्व पर जोर दिया गया और सिफारिश की कि पूर्व प्राथमिक शिक्षा की पर्याप्त व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली का एक आवश्यक अंग मानी जाती है।
1950-51 में पूर्व प्राथमिक स्कूलों की संख्या कुल 303 थी जहाँ 866 अध्यापक थे और लगभग 28000 नामांकनों की व्यवस्था थी। कुल प्रत्यक्ष खर्च भी बढ़कर 110 लाख रु. या कुल शिक्षा व्यय का 0.2% हो गया। ये मुख्यतः संस्थायें शहरी थी और देहाती इलाकों में केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड और सामुदायिक विकास प्रकाशन ने महत्वपूर्ण काम किया जो कुल मिलाकर 20,000 बालवाड़ियाँ चलाते हैं जिनमें कुल लगभग 6,00,000 नामांकनों की व्यवस्था है।
छठी पंचवर्षीय योजना एवं पूर्व प्राथमिक शिक्षा - इस योजना के तहत ग्रामीण गन्दी बस्तियों में रहने वाले बच्चों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्राथमिक विद्यालय खोलने के लक्ष्य को निर्धारित किया गया तथा इसी के साथ यह भी निश्चित किया गया कि देश के प्रत्येक विकास खण्ड में कम से कम एक शिशु शिक्षा केन्द्र की स्थापना हो, जिसको स्वास्थ्य, पोषाहार, समाज कल्याण, ग्रामीणी विकास तथा शिक्षा कार्यक्रमों के अंग के रूप में विकसित किया गया। इसके लिए एक निर्धारित धनराशि में से ही व्यय करने की व्यवस्था की गई।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 एवं प्राथमिक शिक्षा - राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में पूर्व प्राथमिक शिक्षा पर विशेष बल दिया तथा बच्चों की शिक्षा पर पर्याप्त धन को व्यय करने की व्यवस्था थी। प्राथमिक शिक्षा के सार्वजनीकरण के अन्तर्गत शिक्षा केन्द्र खोले जायेंगे। जहाँ बच्चों की देखभाल और शिक्षा के केन्द्र पूर्णतः बाल केन्द्रित होंगे जहाँ पर बच्चों के बहुमुखी विकास हेतु खेलकूद एवं अन्य उपयोगी कार्यक्रम आयोजित होंगे
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- प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
- प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
- प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
- प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
- प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
- प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
- प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।










