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बी ए - एम ए >> फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्रयूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स
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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर
प्रश्न- डाल्टन पद्धति का मूल्यांकन कीजिए।
अथवा
डाल्टन पद्धति के गुण-दोषों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर-
डाल्टन पद्धति के गुण
(Merits of Dalton Method)
डाल्टन पद्धति के प्रमुख गुण या विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
1. इस पद्धति में कुशाग्र बुद्धि, मन्दबुद्धि तथा सामान्य बुद्धि वाले सभी छात्र लाभ उठाते हैं, क्योंकि वे अपनी गति से प्रगति करने का अवसर प्राप्त करते हैं।
2. प्रत्येक छात्र के ऊपर उसकी प्रगति का उत्तरदायित्व रहता है। अतः वे कठिन परिश्रम करने को अपने-आप बाध्य होते हैं।
3. इस पद्धति में कार्य के लिए एक विद्यार्थी को दूसरे विद्यार्थियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। यदि कोई विद्यार्थी एक दिन विद्यालय नहीं आता तो दूसरे दिन वह स्वयं ही अपने कार्य को करने का पूरा प्रयास करता है।
4. इस पद्धति में विद्यार्थी अपनी अच्छानुसार विधियों का उपयोग करने तथा इच्छा के विषयों को पढने में स्वतन्त्र रहता है।
5. इस पद्धति में विद्यार्थी दिए हुए कार्य की पूर्ति के लिए विभिन्न पाठ्य-पुस्तक, सहायक पुस्तक, सन्दर्भ पुस्तक तथा अन्य साधनों की सहायता लेता है। इससे उन्हें एक तो इन पुस्तकों का उचित प्रयोग आ जाता है तथा दूसरे, स्वयं ज्ञान संचय करने के कारण वह उसे शीघ्र ग्रहण भी होता है। इससे उनके अन्दर पुस्तक पढने की आदत बन जाती है।
6. डाल्टन पद्धति में अधिकांश विद्यार्थी सम्पूर्ण शिक्षण सामग्री की उपलब्धता के कारण प्रयोगशाला में ही अध्ययन करते हैं, जिससे गृहकार्य की अनिवार्यता समाप्त हो जाती है।
7. इस पद्धति के अनुसार परीक्षा का प्रश्न नहीं उठता है। उसमें जो समय या धन व्यय होता है, उसकी बचत हो जाती है। परीक्षा के जो दोष हैं, विद्यार्थी उनसे बच जाते हैं।
8. इस पद्धति में बालक अपनी योग्यतानुसार जिस प्रयोगशाला में चाहता है उसमें अध्ययन करता है। इस प्रकार बालक को स्वतंत्र वातावरण में अध्ययन करने का अवसर प्राप्त होता है।
9. अध्यापक का एक मित्र एवं मार्गदर्शक की भूमिका के कारण शिक्षक और विद्यार्थी के सम्बन्ध बहुत अच्छे होते हैं।
10. इस पद्धति में शिक्षक को छात्रों की व्यक्तिगत प्रगति का स्पष्ट ज्ञान रहता है।
11. विद्यालय के अनुशासन की समस्या हल हो जाती है। विद्यालय का वातावरण यथेष्ट रूप से प्रजातान्त्रिक हो जाता है।
12. आपस में विचार-विमर्श करने वे एक-दूसरे की समस्या हल करने का अवसर प्राप्त होने के कारण पारस्परिक सहयोग एवं सहायता की भावना का विकास होता है।
डाल्टन पद्धति की सीमाएँ या दोष
(Limitations or Demerits of Dalton Method)
डाल्टन पद्धति के दोष निम्नलिखित हैं -
1. डाल्टन पद्धति में बालकों को अधिकतर अपना समस्त कार्य लिखित रूप से करना होता है और इनमें मौखिक कार्य की अपेक्षा की जाती है।
2. इस पद्धति में प्रत्येक विषय की अलग प्रयोगशाला होती है जिससे विषयों की सानुबन्धता का अभाव रहता है तथा विद्यार्थियों को पूर्ण ज्ञान प्रदान करने में समस्या होती है।
3. मन्दबुद्धि बालकों के लिए यह पद्धति उचित नहीं प्रतीत होती क्योंकि वे अन्य बालकों से बहुत पिछड़ जाते हैं और निराश होकर अध्ययन छोड़ देते है।
4. इस पद्धति को सफलतापूर्वक चलाने के लिए अत्यन्त योग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होती है, जिसका नितान्त अभाव है।
5. डाल्टन पद्धति में वैयक्तिक शिक्षण पर अत्यधिक बल दिया जाता है जिसके कारण बालकों में सामूहिक भावना का उचित विकास नहीं होता और वे अत्यधिक स्वार्थी बन जाते हैं।
6. इस पद्धति में शिक्षा सम्बन्धी अनैतिक कार्यों के होने की सम्भावना बहुत अधिक रहती है। कभी-कभी विद्यार्थी अपने कार्य को स्वयं समाप्त न करके दूसरे विद्यार्थियों से करवा लेते हैं अथवा दूसरे विद्यार्थियो की नकल उतार लेते हैं।
7. इस पद्धति में शिक्षण की सफलता सम्पूर्ण विषय के दत्त कार्य के बनाने पर निर्भर करती है। इस दत्त कार्य के बनाने में अनुभव और कुशलता की आवश्यकता होती है।
8. हमारे देश में मातृभाषा या अन्य प्रादेशिक भाषाओं में विभिन्न विषयों की पाठ्य-पुस्तक, सहायक पुस्तक तथा प्रमाणिक पुस्तकों का इतना अधिक अभाव है कि हम कक्षा शिक्षक की पद्धति को अभी पूर्णतः हटा नहीं सकते। यदि हम डाल्टन प्रणाली से पढ़ाते हैं तो प्रत्येक विषय पर देशी भाषा में पुस्तकों का इतना व्यापक संकलन होना चाहिए कि छात्र दत्त कार्य पूरा करने हेतु पुस्तकों के अभाव का अनुभव न करे।
9. प्राथमिक या माध्यमिक कक्षाओं के छात्रों का मानसिक विकास इस सीमा तक नहीं होता है कि वे दत्त कार्य को पाकर आत्मनिर्भरता के साथ सम्पूर्ण कार्य को जिम्मेदारी के साथ कर लें। यदि उन्हें कार्य करने में समय अधिक लगता है या दत्त कार्य करने में पूर्ण सफलता नहीं मिलती, तब वे निरुत्साही एवं निराशापूर्ण हो जाते हैं और विषय के प्रति रुचि और जिज्ञासा खो बैठते हैं। छोटी कक्षाओं के लिए यह विधि पूर्णतः असंतोषजनक है।
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- प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
- प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
- प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
- प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
- प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
- प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
- प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।










