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बी ए - एम ए >> फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्रयूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स
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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर
प्रश्न- मॉण्टेसरी शिक्षा पद्धति के गुण-दोषों की व्याख्या कीजिए।
अथवा
मॉण्टेसरी शिक्षा पद्धति का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर-
किसी भी शैक्षिक पद्धति का मूल्यांकन उसके गुण-दोषों के आधार पर किया जाता है। अतः हम इस पद्धति के गुण-दोषों पर विचार करेंगे -
गुण (Merits) -
मॉण्टेसरी शिक्षण पद्धति के गुण निम्नलिखित हैं-
1. यह पद्धति प्रयोगात्मक मनोविज्ञान के विभिन्न अंगों का अनुसरण करती है।
2. यह शिक्षण पद्धति वैज्ञानिक है। यह अनुभव व निरीक्षण पर बल देती है।
3. कम उम्र के बच्चों के लिए यह विधि अत्यधिक उपयुक्त है क्योंकि बच्चों को वस्तुओं के प्रयोग में आनन्द मिलता है।
4. यह शिक्षण पद्धति लिखना सिखाने की मनोवैज्ञानिक विधि है।
5. ज्ञानेन्द्रियाँ बालक की शिक्षा का आधार हैं। मॉण्टेसरी पद्धति ज्ञानेन्द्रियों की शिक्षा को सबसे अधिक महत्व देती है।
6. मॉण्टेसरी पद्धति आत्मशिक्षा पर बल देती है। बालक स्वयं की सीखी हुई बातों में रुचि लेता है।
7. इस पद्धति में दण्ड एवं पुरस्कार के लिए कोई स्थान नहीं है।
8. यह पद्धति इस चिरसत्य में विश्वास करती है कि मनुष्य सामाजिक प्राणी है अतः यह सामाजिक प्रशिक्षण पर बल देती है।
9. यह पद्धति स्वयं शिक्षा पर बल देती है।
10. यह पद्धति बाल-केन्द्रित है। बालकों की विभिन्नताओं को जानने के लिए उनके ध्यान का अवलोकन करती है।
11. यह पद्धति वैयक्तिक शिक्षण पर बल देती है।
12. यह पद्धति बालकों की रुचियों और मानसिक विकास के अनुसार शिक्षा देती है।
13. इस पद्धति ने बाल गृह के रूप में संसार को एक नवीन सामाजिक संस्था भेंट की है।
14. इस पद्धति का अनुशासन भी विचार की श्रेष्ठ है। मॉण्टेसरी के अनुसार अनुशासन बाहर से नहीं लादा जाता वरन् अन्दर से विकसित किया जाता है।
15. यह पद्धति बालक के व्यक्तित्व का सम्मान करती है तथा उसका विकास करने के लिए वाँछनीय साधनों को जुटाती है।
16. मॉण्टेसरी पद्धति में खेल द्वारा शिक्षा दी जाती है। क्योंकि बालकों को खेल बहुत प्रिय होता है।
दोष या सीमाएँ (Limitations or Demerits)
मॉण्टेसरी पद्धति में अनेक अच्छाइयाँ है, किन्तु कुछ कमियाँ भी हैं जो निम्नलिखित हैं -
1. विलियम किलपैट्रिक का कथन है कि इस पद्धति में बालक के व्यक्तित्व के विकास पर बल दिया जाता है किन्तु उसके सामाजिक विकास पर यथोचित ध्यान नहीं दिया जाता। अतः विकास एकांगी होगा।
2. यह शिक्षा प्रणाली 3 से 7 वर्ष के बालकों के लिए विकसित की गई थी। इस आयु वर्ग के बालकों से यह आशा करना कि वे अपने कपड़े स्वयं धोएँगे, वे खाना स्वयं बनाएँगे, खाना स्वयं परोसेंगे, विद्यालय की सफाई करेंगे, हास्यास्पद है। कोमल बालकों से कठोर कार्यों के सम्पादन की आशा स्वयं मॉण्टेसरी के शिक्षण सिद्धान्तों के विरुद्ध है।
3. स्टर्न के अनुसार शैक्षिक उपकरणों से बुद्धि का एकांगी विकास होता है। रंग, रूप, ध्वनि पर अलग-अलग बल देने से मस्तिष्क के स्वाभाविक विकास में बाधा पड़ती है।
4. स्प्रंगर का कहना है कि मॉण्टेसरी पद्धति में काल्पनिक खेलों की उपेक्षा की गयी है। बालक की असन्तुष्ट मूल-प्रवृत्तियों का रेचन (catharsis) इन्हीं काल्पनिक खेलों से होता है। इस रेचन के अभाव में भावना-ग्रन्थियों के बनने का भय होता है।
5. हेसन का कहना है कि मॉण्टेसरी पद्धति में खेल के वास्तविक सिद्धान्त का अभाव है। खेल- खेल के लिए हो, तभी वह खेल होगा अन्यथा कार्य हो जायेगा।
6. मॉण्टेसरी पहले लिखना सिखाना चाहती हैं। यह प्रश्न विवादास्पद है।
7. जिस विधि से लिखना सिखाने की कार्य योजना मॉण्टेसरी पद्धति में होती है, वह वैज्ञानिक होते हुए भी मनोवैज्ञानिक नहीं कही जा सकती है। वर्ण तथा अक्षरों से न चलकर वाक्य से चलना गेस्टाल्ट मनोविज्ञान के अनुसार अधिक उपयुक्त है।
8. इस पद्धति में केवल एक ही ज्ञानेन्द्रिय की एक बार शिक्षा दी जाती है। ज्ञानेन्द्रियों की पृथक् शिक्षा, शक्ति-मनोविज्ञान पर आधारित समझ पड़ती है। किन्तु शक्ति-सिद्धान्त का मनोविज्ञान में अब परित्याग हो चुका है।
9. कहने को तो इस पद्धति में पूर्ण स्वतंत्रता है किन्तु एक समय में एक उपकरण को देकर बालक की स्वतंत्रता को हम सीमित कर देते हैं।
10. इस पद्धति द्वारा बालक में सामाजिक गुणों का विकास नहीं हो पाता है।
11. इस पद्धति में समय अधिक नष्ट होता है।
12. यह शिक्षण पद्धति अधिक खर्चीली है अतः गरीब समाज में कठिनता से लागू हो पाती है।
13. इस पद्धति में इतने अधिक उपकरणों का प्रयोग किया जाता है कि ऐसा जान पड़ता है, मानो यह बालक की सम्पूर्ण शिक्षा का भार लेने का दावा करती है जो निराधार है।
14. यह पद्धति साधारण बालकों के लिए उतनी उपयोगी नहीं है जितनी की मन्दबुद्धि बालकों के लिए।
15. इस पद्धति में कुछ बड़ी संख्या में योग्य एवं सुशिक्षित अध्यापकों पाठ्य सहगामी क्रियाओं की आवश्यकता होती है जो उपलब्ध कराना अत्यन्त कठिन है।
इन गुण-दोषों के होते हुए भी मॉण्टेसरी के योगदान को शिक्षा-जगत भुला नहीं सकता है। पूर्व प्राथमिक स्तर पर बच्चों की शिक्षा की एक स्पष्ट एवं वैज्ञानिक पद्धति प्रदान करके डॉ. मेरिया मॉण्टेसरी ने शिक्षा-संसार का बड़ा उपकार किया है। भारत में आकर उन्होंने स्वयं कुछ भारतीय शिक्षकों को अपनी विधि में दीक्षित किया है। इसलिए भारत में पूर्व-प्राथमिक स्तर पर किण्डरगार्टन से अधिक मॉण्टेसरी विद्यालय हैं। यद्यपि मॉण्टेसरी शिक्षण पद्धति को फ्रॉबेल की शिक्षण पद्धति के समान नही माना जाता है फिर भी उसके कार्यों की सभी शिक्षा विद्वानों ने सराहना की है। मॉण्टेसरी ने किण्डरगार्टन शिक्षा पद्धति को अधिक परिष्कृत रूप में पेश करने की कोशिश की है। यही कारण है कि आधुनिक समय में मॉण्टेसरी शिक्षण पद्धति बहुत लोकप्रिय सिद्ध हुई है, क्योंकि इसने अपने द्वारा खोजी गई नवीन शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से बालक के मनोविज्ञान को पढ़ते हुए शिक्षित करने का सफल प्रयास किया है। इनके कार्यों से प्रभावित होकर एच.डब्ल्यू.होम्स ने कहा था -
"डॉ. मॉण्टेसरी का कार्य अद्वितीय, अनोखा और गौरवपूर्ण है। हमारे पास शिक्षा प्रणाली का कोई ऐसा अन्य उदाहरण नहीं हैं, जो कम से कम अपनी क्रमबद्धता पूर्णता और अपने व्यावहारिक प्रयोग में मौलिक हो और जिसका निर्माण तथा उद्घाटन एक स्त्री के मस्तिष्क और हाथ से किया जाता है।'
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- प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
- प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
- प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
- प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
- प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
- प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
- प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।










