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बी ए - एम ए >> फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्रयूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स
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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर
प्रश्न- भारतीय संविधान के अधिकार पत्र की प्रमुख विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
भारतीय संविधान के निर्माण में कई देशों के संविधान की कुछ महत्वपूर्ण धाराओं को जो भारतीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुकूल थी सम्मिलित किया गया है। इसी क्रम में भारतीय संविधान में सम्मिलित मौलिक अधिकार, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा अन्य आधुनिक संविधानों से अनुप्रेरित हैं, किन्तु भारतीय संविधान का अधिकार पत्र अधिकारों तथा उससे सम्बद्ध व्यवस्था के सम्बन्ध में अन्य देशों के संविधानों के अधिकार पत्रों से अलग एवं कुछ प्रमुख विशेषताओं से युक्त है -
1. व्यापक अधिकार पत्र - भारतीय संविधान के भाग तीन में वर्णित मूल अधिकार, विश्व के अन्य किसी भी संविधान में दिये गये अधिकार पत्र से अधिक विस्तृत एवं व्यापक है। मूल अधिकारों के सम्बन्ध में भारतीय संविधान के कुल 23 अनुच्छेद है जोकि अनुच्छेद 12 से 30 तथा अनुच्छेद 32 से 35 तक वर्णित है। इनमें से तो कुछ अनुच्छेद अत्यधिक व्यापक हैं। जैसेकि अनुच्छेद 17 के मूल रूप में 450 खण्ड थे। तथा अब तक हुए संशोधनों से इसके आकार में और भी अधिक वृद्धि हो चुकी है। इसकी व्यापकता का एक प्रमुख कारण यह है कि प्रत्येक अधिकार के साथ प्रतिबन्धों की भी व्यवस्था की गई है।
2. व्यवहारिकता एवं वास्तविकता पर आधारित भारतीय संविधान में उल्लिखित मौलिक अधिकार काल्पनिक नहीं है वरन् वास्तविक एवं व्यवहारिक भी है। साथ ही सम्पूर्ण समाज के लिए उपयोगी भी है। भारतीय संविधान में सभी व्यक्तियों के लिए समानता के अधिकार को स्वीकार करते हुए पिछड़े एवं दलित वर्गों के विकास के लिए संविधान में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। शिक्षा एवं संस्कृति की स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत अल्पसंख्यकों की शिक्षा और भाषा सम्बन्धी हितों की रक्षा का प्रबन्ध किया गया है और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की व्यवस्था इस उद्देश्य से की गई है कि समाज में धार्मिक सहिष्णुता का वातावरण बना रहे।
3. मौलिक अधिकार असीमित एवं निरंकुश नहीं है - भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक अधिकार असीमित तथा निरंकुश नहीं है। संविधान के अंतर्गत जहाँ एक ओर मौलिक अधिकारों की व्यवस्था की गई है वहीं दूसरी ओर इन पर प्रतिबन्ध भी लगाये गये हैं।
4. संविधान वर्णित अधिकार ही प्रभावी हैं अगणित या प्राकृतिक नहीं - भारतीय संविधान के भाग तीन में उल्लिखित अधिकारों को ही मान्यता प्राप्त है। संविधान के अंतर्गत अगणित या प्राकृतिक अधिकारों के लिए कोई स्थान नहीं है। तथा सर्वोच्च न्यायालय संविधान में उल्लिखित अधिकारों के अतिरिक्त अन्य अधिकारों को लागू करने की कार्यवाही नहीं कर पाता है।
5. मौलिक अधिकारों के हनन से सुरक्षा की व्यवस्था - भारतीय संविधान में उल्लिखित मौलिक अधिकार भारत में कोई कल्पना या कागजी लेखा जोखा ही नहीं है। इन्हें पूर्ण वैधानिक दर्जा प्राप्त है तथा संविधान ने न्यायालयों को यह निर्देशित किया है कि वे इस बात को सुनिश्चित करे कि नागरिकों को प्रदत्त इन मौलिक अधिकारों का हनन किसी के द्वारा न होने पाये
संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय पर उच्च न्यायालय की शरण ले सकता है और न्यायपालिका, व्यवस्थापिका या कार्यपालिका के ऐसे सभी कानूनों और कार्यों को अवैध घोषित कर सकती है जो मूल अधिकारों को अनुचित रूप से प्रतिबन्धित करते हैं। संविधान के द्वारा अधिकारों की रक्षा के लिए जिस प्रकार के वैधानिक उपचारों की व्यवस्था की गई है वे अत्यन्त महत्वपूर्ण तथा पर्याप्त प्रभावशाली है।
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- प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
- प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
- प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
- प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
- प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
- प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
- प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।










