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बी ए - एम ए >> फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्रयूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स
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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर
प्रश्न- शिक्षा के अन्य अनौपचारिक साधनों की विवेचना कीजिए।
उत्तर-
शिक्षा के अन्य अनौपचारिक साधन
(Other Informal Agencies of Education)
शिक्षा के कुछ अनौपचारिक साधन हैं। इसकी जानकारी करना आवश्यक है तथा हम यहाँ पर शिक्षा के अनौपचारिक साधनों पर विचार करेंगे। ये साधन निम्न हैं-
1. समाचार पत्र एवं पत्रिकाएँ (News Paper and Magazines) - अनौपचारिक साधनों में समाचार पात्रों की शिक्षा देने की क्षमता स्वयं सिद्ध है। दैनिक समाचार पत्र व्यक्ति तथा समाज का नित्य का शिक्षक है। देश-विदेश में विभिन्न आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक क्षेत्रों में क्या हो रहा है, इसका ज्ञान हमें समाचार पत्रों से प्राप्त होता है। समाचार पत्रों के उत्तम कहानियाँ, निबन्ध, साहित्यिक समीक्षा एवं लेख भी होते हैं। इन्हें पढ़कर व्यक्ति बहुत से विषयों बातों की शिक्षा प्राप्त करते हैं और विचार विश्लेषण द्वारा अपने निष्कर्ष निकालते हैं। व्यापारियों को वस्तुओं के भाव मालूम होते हैं। खिलाड़ियों को अपनी रुचि के खेलों के सम्बन्ध में ज्ञान मिलता है।
2. रेडियो एवं टीवी - जिन अनौपचारिक साधनों से शिक्षा प्रदान होती है उनमें रेडियो तथा टी. वी का शिक्षात्मक एवं सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है। रेडियो नागरिकों को बड़ी सजगता के साथ शिक्षा दे रहा है। इनके द्वारा हम शीघ्र ही समाचार सुन लेते हैं। इनके द्वारा प्रसारित होने वाले कार्यक्रमो से हम कुछ न कुछ सीखते हैं। समय-समय पर विशेषज्ञों द्वारा दिये गये समाज विषयक भाषण इसकी उपयोगिता के प्रतीक है। इन भाषणों में हमें पर्याप्त शिक्षा मिलती है। किसानों को खेती-बारी तथा स्वास्थ्य सम्बन्धी बहुत-सी बातें बतलाई जाती हैं। बालकों तथा स्त्रियों के मानसिक एवं सांस्कृतिक विकास के लिए विशेष कार्यक्रम प्रसारित होते हैं। वादन, नृत्य के प्रति सामान्य जन की रुचि में विकास करने का श्रेय रेडियो एवं टी. वी. को है।
3. सिनेमा (Cinema) - सिनेमा शिक्षा का मुख्य साधन है। बालक बहुत सी बाते सिनेमा से सीख जाते हैं। इस प्रकार इनसे मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञानवर्द्धन भी होता है। शिक्षा की दृष्टि से सिनेमा की न्यूज रील विशेष लाभकारी सिद्ध हुई है। सिनेमा का बालक के चरित्र पर प्रभाव पड़ता है परन्तु खेद का विषय है कि शिक्षा के इस प्रबल साधन का हमारे चलचित्र निर्माता निम्न कोटि के चित्र प्रदर्शित करते हैं जिनका बालक तथा बालिकाओं के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। यह फिल्म निर्माता व्यक्ति, समाज, देश की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर चलचित्रों का कथानक चुने तो सभी का कल्याण हो सकता है। इस सम्बन्ध में सरकार के लिए यह आपेक्षित है कि वह गन्दे एवं अश्लील चित्रों पर रोक लगाये और उनके स्थान पर ऐसे चित्रों को प्रोत्साहन दे जो शिक्षा और चरित्र-निर्माण की दृष्टि से उत्तम हों।
4. नाटक (Drama) - शिक्षा के अनौपचारिक साधनों में नाटक हमारे जीवन एवं चरित्र पर प्रभाव डालते हैं। इनसे हमें अनेकानेक शिक्षायें मिलती हैं। यह हमारी केवल कल्पना शक्ति का ही विकास नहीं करते वरन् वे बोल-चाल में प्रशिक्षित करते हैं। ये पाठ्यक्रम की बहुत-सी कड़वी बातें बड़ी सरलता से बालकों तक पहुँचा देते हैं। समाज में फैली हुई बुराइयों तथा सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक विकास के नाटकों का प्रदर्शन लाभदायक होता है। बालकों के सर्वागीण विकास के लिए नाटक बहुत जरूरी है। इससे शिक्षा के साथ-साथ मनोरंजन भी होता है। इनके शैक्षिक महत्व को देखते हुए कुछ शिक्षाशास्त्रियों ने इनके अध्ययन क्लब खोलकर अच्छे शिक्षाप्रद नाटकों के प्रदर्शन किए। नाटकों का प्रभाव बुरा भी होता है, इसलिए अश्लील तथा कामवासना को उत्तेजित करने वाले नाटकों को प्रदर्शित नहीं करना चाहिए।
5. धर्म (Religion) - बालक की शिक्षा में जहाँ समाज के अन्य संगठनों का शिक्षा के अनौपचारिक साधन के रूप में महत्व है वहाँ इनके मध्य धर्म तथा धार्मिक संस्थाओं का भी अपना एक स्थान है। इस सम्बन्ध में हमारे लिए यह जानना आवश्यक नहीं है कि धार्मिक शिक्षा होनी चाहिए अथवा नहीं और धर्म से हम कुछ सीखते रहते हैं। धार्मिक स्थानों जैसे - मन्दिर-मस्जिद, धार्मिक कार्यों, धार्मिक यात्राओं, धार्मिक उत्सवों आदि से हमें शिक्षा मिलती है। प्राचीनकाल में तो धर्म एवं धार्मिक संगठन औपचारिक रूप से शिक्षा प्रदान करते थे परन्तु आज स्थिति बदल गई है। अब विद्यालय अनौपचारिक शिक्षा के मुख्य साधन बन गये परन्तु धर्म का इस सम्बन्ध में अब भी महत्व है और धर्म से हम अनौपचारिक रूप से शिक्षा प्राप्त करते हैं।
6. समाज कल्याण केन्द्र आदि (Social Welfare Centre etc.) - शिक्षा की कुछ ऐसी भी अनौपचारिक एजेन्सियाँ हैं जिन्हें ब्राउन महोदय ने शिक्षा के अव्यावसायिक, साधनों (Non Commercial Agencies) के अन्तर्गत रखा है। इनमें समाज कल्याण केन्द्र, युवक दल स्काउटिंग की गणना की जाती है। सामुदायिक विकास योजना के अन्तर्गत समाज कल्याण केन्द्रों तथा समाज शिक्षा केन्द्रों की गाँवों एवं शहरों में स्थापना की गयी है। इनके कार्य एवं क्रियाओं में भाग लेने से व्यक्ति इनके द्वारा अनौपचारिक रूप से शिक्षा ग्रहण करते हैं। इस प्रकार युवक युवक दलों से बालक स्काउटिंग से और बालिकाएँ गर्ल मार्डिग शिक्षा ग्रहण करती हैं। कारखानों में काम करने वाले कारीगर व्यावसायिक उद्योग- धन्धों में कार्य करके अपने-अपने व्यवसाय सम्बन्धी अपना ज्ञान तथा अपनी कार्य कुशलता बढ़ाते हैं।
7. पुस्तकालय एवं वाचनालय (Library and Reading Room) - पुस्तकालय एवं वाचनालय अपने सद्परिणामों के कारण अनौपचारिक शिक्षा के लोकप्रिय साधन हैं। इनकी लोकप्रियता इस बात से परिलक्षित होती है कि आज कोई भी शिक्षा संस्था ऐसी नहीं है जहाँ पुस्तकालय एवं वाचनालय हो। विद्यालयों के अतिरिक्त मोहल्लों, कस्बों आदि के ज्ञानावर्धन के हेतु नगर निगम, जिला परिषद, नगर पालिका, धनी एवं सामाजिक व्यक्तियों ने सार्वजनिक पुस्तकालयों एवं वाचनालयों की स्थापना की। पुस्तकालय एवं वाचनालय अनेक विषयों की पुस्तकों एवं पत्रिकाओं, कोषों, विशाल सन्दर्भ ग्रन्थों की व्याख्या करके जनमात्र का ज्ञान वर्धन करते हैं। आज हमारे लिए ये इतने महत्व के साधन हैं कि इनके बिना छात्र एवं शिक्षक वर्ग का कार्य चल नहीं सकता। अब लगभग प्रत्येक शिक्षक अपना स्वयं का एक छोटा-मोटा पुस्तकालय रखने का प्रयत्न करता है।
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- प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
- प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
- प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
- प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
- प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
- प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
- प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।










