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बी ए - एम ए >> फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्रयूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स
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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर
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शिक्षा के अभिकरण : औपचारिक, अनौपचारिक एवं निरौपचारिक
Agencies of Education : Formal, Informal and Non-Formal
प्रश्न- शिक्षा के साधनों से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न साधनों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
अथवा
शिक्षा के अभिकरणों के प्रकार बताइए।
अथवा
शिक्षा में औपचारिक एवं अनौपचारिक साधनों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर-
शिक्षा विद्यालयों में ही दी जाती है परन्तु स्कूल तथा कालेजों के अतिरिक्त भी शिक्षा प्रदान करने के अनेक साधन हैं। समाज ने प्राचीनकाल से ही शिक्षा को क्रियान्वित रूप देने के लिए विभिन्न संस्थाओं को अपनाया है तथा उनका विकास किया है। ये संस्थाएँ ही शिक्षा के साधन कहलाती हैं।
रेमान्ट के कथनानुसार "अध्यापक ही केवल शिक्षा नहीं देता केवल स्कूल तथा कालेज ही शिक्षण संस्थाएँ नहीं हैं वरन् ऐसी कई संस्थाएँ हैं जिनका प्रभाव शैक्षिक होता है।
वैसे शाब्दिक अर्थ के अनुसार साधन शब्द अंग्रेजी शब्द Agencey का हिन्दी रूपान्तर है। Agency का तात्पर्य है 'एजेन्ट' (Agent) का कार्य। एजेन्ट से तात्पर्य उस तत्व माध्यम, वस्तु या व्यक्ति से है जो कोई कार्य सम्पादित करता है अथवा प्रभाव डालता है। शिक्षा के साधन का तात्पर्य उस वस्तु, स्थान, तत्व या संस्था से है जो बालक को शिक्षा प्रदान करती है अर्थात उस पर शैक्षिक प्रभाव डालती है। सार गार्डफ्रे थामसन (Sir Godfrey Thomson) के शब्दों में सम्पूर्ण वातावरण व्यक्ति की शिक्षा का साधन है किन्तु इस वातावरण में कुछ तत्वों जैसे - घर, स्कूल, चर्च, प्रेस, व्यवसाय सार्वजनिक जीवन आनन्द के साधन का विशेष महत्व है।'
1. शिक्षा के विभिन्न साधन (Various Kind of Agencies of Education)
(i) औपचारिक और अनौपचारिक साधन (Formal and informal agencies)
(ii) शिक्षा के अन्य अनौपचारिक साधन (Other informal agencies of education)
(iii) सक्रिय और निष्क्रिय साधन (Active and passive agencies)
औपचारिक साधन
(Formal Agenceis)
वे संस्थाएँ जो किसी पूर्ण निश्चित उद्देश्य के अनुसार चलती हैं, उनके कार्य की कुछ सीमा होती है और जो शिक्षा के संकुचित उद्देश्य की प्राप्ति के साधन मात्र होती हैं, औपचारिक साधन कहलाती हैं। औपचारिक संस्थाओं में जानबूझकर विचारपूर्वक शिक्षा प्रदान की जाती है। इन साधनों के अन्तर्गत शिक्षालय, चर्च, संग्रहालय, पुस्तकालय, आर्ट गैलरीज, आदि होती हैं। यह सभी साधन बालकों को औपचारिक शिक्षा प्रदान करते हैं।
औपचारिक संस्थाओं का निर्माण समाज अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कराता है। इनकी देखभाल प्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा की जाती है। इन संस्थाओं का कार्य, समय व स्थान निश्चित योजना के द्वारा ढालने का प्रयास किया जाता है, इसमें शिक्षा की प्रक्रिया सुव्यवस्थित रूप से चलती है।
औपचारिक शिक्षा के दोष भी हैं। डॉ. वी. के अनुसार, "औपचारिक शिक्षा बड़ी ही सरलता से तुच्छ, निर्जीव, अस्पष्ट एवं किताबी बन सकती है। कम विकसित समाजों में जो संचित ज्ञान होता है, उसे कार्य में बदला जा सकता है। किन्तु उन्नत संस्कृति में जो बात सीखी जाती है वे प्रतीकों के रूप में होती है और उन्हें कार्यों में परिणित नहीं किया जा सकता है। इस बात का हमेशा डर बना रहता है कि औपचारिक शिक्षा जीवन के अनुभव से कोई सम्बन्ध न रखकर केवल विद्यालयों की विषय सामग्री न बन जाये।'
अनौपचारिक साधन
(Informal Agencies)
अनौपचारिक साधन वह साधन है जिनका कार्य शिक्षा देना नही होता परन्तु यह आकस्मिक रूप से अथवा परोक्ष रूप से सभी पर शैक्षिक प्रभाव डालते हैं। दूसरे शब्दों में अनौपचारिक साधन वे साधन हैं जो अप्रत्यक्ष रूप से शिक्षा प्रदान करते हैं। अतः यह साधन औपचारिक साधन से भिन्न होते हैं। इन साधनों की न तो कोई पूर्व निश्चित योजना होती है और न कोई निश्चित नियम होते हैं। यह अज्ञात, अप्रत्यक्ष तथा अनौपचारिक रूप से बालक के संस्कारों में रूपान्तर करते हैं। इन साधनों के अन्तर्गत परिवार, समाज, राज्य, युवक, समूह, खेल का मैदान, चलचित्र, प्रेस, रेडियो, दल-गुट आदि आते हैं।
अनौपचारिक शिक्षा की संस्थाओं पर किसी और संस्था का नियन्त्रण नहीं होता। ये बन्धन मुक्त होते हैं। इनका विकास स्वाभाविक रूप से होता है। इनकी शिक्षा सरल स्वाभाविक तथा आडम्बर विहीन होती है। इनके द्वारा बालक वास्तविक जीवन की शिक्षा प्राप्त करते हैं और उनका स्वाभाविक रूप से विकास होता है। डीवी अनौपचारिक साधनों को औपचारिक साधनों से अधिक महत्व प्रदान करता है। उनका कथन है ”ये आकस्मिक एवं स्वाभाविक रूप से प्रभाव डालकर अनजाने ही व्यक्तियों में अच्छी आदत, व्यवहार, चरित्र एवं रुचियों का निर्माण करते हैं। बालक को वास्तविक अनौपचारिक रीति से शिक्षा देते हैं। उनकी बुद्धि एवं कल्पना शक्ति का विकास करते हैं और उनके अनुभवों को विकसित एवं प्रबुद्ध बनाते हैं। सामाजिक अनुकूलन में उनकी सहायता करते हैं। स्पष्ट है कि इन साधनों का अभाव व्यापक होता है।
अनौपचारिक शिक्षा के अनेक गुणों के होते हुए भी कुछ दोष हैं। अनौपचारिक शिक्षा किसी पूर्व निश्चित योजना के अनुसार नहीं चलती, इसलिए इसमें समय एवं प्रयासों का अपव्यय होता है। इसके द्वारा उच्चकोटि का ज्ञान नहीं मिल पाता है। इनके द्वारा कला-कौशल की शिक्षा नहीं दी जा सकती। उक्त दोषों के होते हुए भी अनौपचारिक शिक्षा का अपना ही एक महत्व है।
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- प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
- प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
- प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
- प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
- प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
- प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
- प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।










