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बी ए - एम ए >> फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्रयूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स
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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर
प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना की आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डालिए।
अथवा
अन्तर्राष्ट्रीयता सद्भावना से आप क्या समझते हैं? अन्तर्राष्ट्रीयता सद्भावना के विकास के लिए शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्व की विवेचना कीजिए।
अथवा
अन्तर्राष्ट्रीयता सद्भावना क्या है? शिक्षा किस प्रकार अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना का विकास करने में सहायक हो सकती है?
उत्तर-
अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना का अर्थ
(Meaning of International Understanding)
'अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना का अर्थ संसार के सभी देशों के नागरिकों के मन में एक-दूसरे के प्रति कल्याणकारी भावनाओं का विकास करना होता है। वैज्ञानिक तथा तकनीकी प्रगति के कारण विश्व देश एक-दूसरे के पर्याप्त निकट आ गये। आज विश्व के किसी भी कोने में घटित होने वाली घटना सम्पूर्ण विश्व को प्रभावित करती है। आर्थिक दृष्टि से भी विश्व के देश एक-दूसरे के ऊपर आधारित हैं। विश्व का कोई देश कितना भी शक्तिशाली क्यों न उसे भी किसी न किसी देश से कोई न कोई अन्तर्राष्ट्रीय वस्तु अवश्य माँगनी पड़ती है। आज के विश्व की निर्भरता ने अन्तर्राष्ट्रीय सदभावना को आवश्यक बना दिया है। आज विश्व में भी अस्तित्व, विश्वबन्धुत्व आदि समय की माँग है। अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना को स्पष्ट रूप से समझने के लिए निम्न परिभाषाओं का अध्ययन आवश्यक है।
'अन्तर्राष्ट्रीयता एक भावना है जिसके अनुसार व्यक्ति केवल अपने राष्ट्र का ही सदस्य नहीं होता वरन विश्व का नागरिक भी होता है। - गोल्ड स्मिथ
"अन्तर्राष्ट्रीय भावना एक ऐसी योग्यता है जो आलोचनात्मक रूप से भी देशों के लोगों के आचार- विचार का निरीक्षण करती है तथा उनकी अच्छाइयों की एक-दूसरे से प्रशंसा करें जिसमें उनकी राष्ट्रीयता एवं संस्कृति का ध्यान रखा जाये।' - बी. एस. लीविस
शिक्षा के अन्तर्राष्ट्रीय सदभावना का अर्थ शिक्षा के द्वारा संसार के सभी देशों के नागरिकों के मन में अन्य देशों के नागरिकों के प्रति कल्याणकारी भावनाओं का विकास करना है। शिक्षा का काम इतना ही मात्र नहीं है कि अपन देश के बालकों में अपने ही देश के कल्याण की भावना विकसित करें बल्कि उसे नागरिकों के मन में विश्व कल्याण तथा विश्वबन्धुत्व का भाव विकसित करना चाहिए।
अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना के लिए शिक्षा की आवश्यकता का महत्व
1. सामूहिक विकास का भाव जाग्रत करने के लिए - आज के युग में किसी एक देश का विकास कोई अर्थ नहीं रखता यदि विश्व के अन्य देश पिछडे हो। शिक्षा द्वारा विकसित देशों में यह भाव जागृत करने की आवश्यकता है कि एकाकी विकास उपयोगी नहीं है बल्कि विश्व के देशों के सामूहिक विकास की आवश्यकता है।
2. संकीर्ण राष्ट्रीयता के भाव की समाप्ति के लिए - विश्व में संघर्ष सदैव संकीर्ण राष्ट्रीयता के कारण हुए हैं। दोनों विश्वयुद्ध संकीर्ण तथा उग्र राष्ट्रीयता के परिणाम थे। शिक्षा द्वारा इस संकीर्ण भावना को समाप्त किया जा सकता है और आपसी सदभाव का विकास किया जा सकता है।
3. अन्तर्राष्ट्रीय न्याय की प्राप्ति के लिए - शिक्षा के द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय न्याय की प्राप्ति के लिए वातावरण बनाया जा सकता है। अनेक देश दूसरे निर्धन तथा कमजोर देशों का शोषण करते हैं। इनके विरुद्ध न्याय की भावना का जागरण शिक्षा द्वारा ही किया जा सकता है।
4. मनुष्य में मनुष्यत्व जागृत करने के लिए - शिक्षा द्वारा विश्व के मनुष्यों में यह भाव जाग्रत किया जा सकता है कि मानव मात्र समान है। व्यक्ति-व्यक्ति में कोई अन्तर नहीं होता है, अतः सभी प्रकार भेद-भाव, जातिगत, धर्मगत तथा देशगत को भुलाकर केवल मानवीय भाव जाग्रत करना चाहिए, इसके लिए उचित दृष्टिकोण की शिक्षा परम आवश्यक है।
5. विश्व नागरिकता की भावना विकसित करने के लिए - आज प्रत्येक देश की शिक्षा राष्ट्रीय भावना के जागरण का कार्य कर रही है परन्तु आवश्यकता है कि देश की नागरिकता के भाव की जागृति के साथ-साथ शिक्षा विश्व नागरिकता की भावना का जागरण भी करे।
6. युद्ध के परिणामों से बचाने के लिए - आज नैतिक देश में आपसी वैमनस्य की स्थिति पैदा होती है। एक-दूसरे देश से संघर्ष पर उतारू दिखाई देता है। ऐसे समय इस प्रकार की शिक्षा की आवश्यकता है जो मैत्री भाव विकसित कर सके तथा युद्ध के भयावह परिणामों से सचेत कर सकें।
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- प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
- प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
- प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
- प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
- प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
- प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
- प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
- प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
- प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
- प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
- प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
- प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
- प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।










