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फास्टर नोट्स-2018 बी. ए. प्रथम वर्ष शिक्षाशास्त्र प्रथम प्रश्नपत्र

यूनिवर्सिटी फास्टर नोट्स

प्रकाशक : कानपुर पब्लिशिंग होम प्रकाशित वर्ष : 2017
पृष्ठ :136
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 307
आईएसबीएन :0

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बी. ए. प्रथम वर्ष (सेमेस्टर-1) शिक्षाशास्त्र के नवीनतम पाठ्यक्रमानुसार हिन्दी माध्यम में सहायक-प्रश्नोत्तर

13

अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना के लिए शिक्षा
(Education for International Understanding)

 

प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय बोध का विकास करने के उपाय की व्याख्या कीजिए।

अथवा

अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना के सिद्धान्त, अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा के उद्देश्य तथा अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना की विकसित करने के उपायों का वर्णन कीजिए।

उत्तर-

अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना के विकास के सिद्धान्त
Principles of Development of International Understanding

शिक्षा-शास्त्रियों ने कई सिद्धान्तों गिनाये हैं जिनके पालन से परस्पर प्रेम तथा सद्भावना का विकास हो सकता है तथा मैत्री विश्वबन्धुत्व एवं अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना को बढ़ाया जा सकता है। उनमें से प्रमुख सिद्धान्त निम्न है -
1. स्वतन्त्र विचार का सिद्धान्त,
2. परस्पर सम्बन्ध का सिद्धान्त,
3. विश्व संस्कृति के प्रसार का सिद्धान्त,
4. सहनशीलता का सिद्धान्त,
5. आत्मनिर्भरता का सिद्धान्त,
6. सामूहिक उत्तरदायित्व का सिद्धान्त।
सन् 1949 में यूनेस्को (Unesco) ने अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा के लिए निम्न सिद्धान्त बनाये हैं -
1. सामाजिक विज्ञान के अध्ययन में मानव के व्यक्तित्व के विकास के सम्बन्ध का अध्ययन करना चाहिए।
2. वर्तमान विश्व की किसी भी समस्या के किसी भी अंग में रुचि लेन के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना चाहिए।
3. सामाजिक विज्ञान के अध्ययन में संसार के समस्त प्रमुख अंगो के अध्ययन पर ध्यान देना चाहिए।
4. सामाजिक विज्ञान के पढ़ने में भिन्न-भिन्न मानव समुदायों के परस्पर सौहार्द्रपूर्ण सम्बन्धों पर विशेष बल देना चाहिए।
5. सामाजिक विज्ञान के अध्ययन में नागरिकता की शिक्षा प्रदान करने के हेतु, कक्षा, विद्यालय एवं समाज को प्रयोगशाला के रूप में प्रयोग करना चाहिए।
6. सामाजिक विज्ञानों के अध्ययन में बालकों में आलोचनात्मक तर्क शक्ति के विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
7. सामाजिक विकास के अध्ययन में आवश्यक मनोवृत्तियाँ एवं कौशल के विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
8. सामाजिक विज्ञानों के अध्ययन में सामाजिक घटनाओं, तनावों एवं सहकारिता सम्बन्धी समस्याओं पर विचार करना चाहिए।
9. विश्व के भूगोल के अध्ययन पर जोर देना चाहिए।

अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा के उद्देश्य
(Aims of International Education)

1. संकुचित भावनाओं को दूर करना - आज विश्व के देशों में संकुचित भावनाएँ व्याप्त हैं। आपसी विद्वेष के परिणाम हम अनेक छोटे युद्ध तथा विश्व युद्दों के रूप में देख चुके हैं। आज भी ईरान- ईराक युद्ध इसके ज्वलन्त परिणाम है। यदि संकुचित भावनाएँ नष्ट न हुई तो विश्व का विनाश सम्भव है, जैसा के. पी. सैयदन ने लिखा है -
"यदि आज विश्वयुद्ध महायुद्ध में फँस जायेगा, तो न यहाँ पर स्वास्थ्य रह जायेगा, न आर्थिक समृद्धि, न कला, न संस्कृति और न साहित्य पनप सकेगा।'
2. मानव के दृष्टिकोण को अधिक व्यापक करना - चूँकि वैज्ञानिक तथा तकनीकी विकास ने देशों की दूरी कम कर दी है अतः मानव के दृष्टिकोण में भी परिवर्तन आवश्यक है। अतः शिक्षा का उद्देश्य मानव के दृष्टिकोण को व्यापक बनाना होना चाहिए जिससे विश्वबन्धुत्व की भावना का विकास हो सके।
3. विश्व संस्कृति का विकास करना - जैसे-जैसे प्रत्येक देश की अपनी संस्कृति होती है, वैसे ही विश्व संस्कृति भी है आवश्यकता है कि ऐसी संस्कृति का विकास किया जाये। अतः शिक्षा का उद्देश्य विश्व संस्कृति का निर्माण करना होना चाहिए।
4. विश्व नागरिकता का विकास करना - प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी देश का नागरिक होता है और उस आधार पर उसे अपने कुछ नागरिक कर्त्तव्यों का पालन करना पड़ता है परन्तु अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना के विकास के लिए शिक्षा का उद्देश्य विश्व नागरिकता का विकास होना चाहिए, इस सम्बन्ध में माध्यमिक शिक्षा का आयोग का कथन उचित ही है। "वास्तविकता में इसलिए केवल देश प्रेम ही पर्याप्त नहीं है और तथ्य जीवन के अनुभव का पूरक होना चाहिए कि हम विश्व के एक सदस्य हैं और मानसिक तथा भावात्मक रूप से तैयार होना चाहिए जिससे ऐसी सदस्यता के दायित्वों का निर्वाह कर सकें।'
अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा का उद्देश्य विश्व की समस्याओं से परिचित करना होना चाहिए। विश्व की बहुत सी समस्याएं सामूहिक होती हैं और उनकी अनुभूति से सद्भावना का जागरण हो सकता है।
5. विश्व की समस्याओं से परिचित कराना

अन्तर्राष्ट्रीय सद्भावना के विकास करने के उपाय
(Measures to Develop International Relationship)

1. विश्व संस्कृति के केन्द्र के रूप में विद्यालय।
2. व्यापक शिक्षण विधियों का प्रयोग |
3. जनसाधारण में स्वतन्त्र दृष्टिकोण का विकास।
4. अन्तर्राष्ट्रीय भावना विकसित करने वाले विश्व विषयों का पाठ्यक्रम में समावेश।
5. संचार साधन का सदुपयोग।
6. अन्तर्राष्ट्रीय दिवसों का विद्यालय में आयोजन।
7. मानव धर्म सिद्धान्तों का प्रसार।
8. उच्च साहित्य के आदान-प्रदान की व्यवस्था।
9. शान्ति निकेतन सरीखी संस्थाओं का निर्माण।
10. दृष्टिकोण को व्यापक बनाने वाली पाठ्य सहगामी क्रियाओं का आयोजन।
11. अनौपचारिक शिक्षा साधनों का उपयोग स्काउटिंग WHO के समान।
12. शिक्षा की समस्याओं के निराकरण हेतु अन्तर्राष्ट्रीय संगठन।
13. अन्तर्राष्ट्रीय यात्राओं, सांस्कृतिक मण्डलों के आदान-प्रदान तथा छात्र व शिक्षकों के आदान- प्रदान की व्यवस्था।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- वैदिक काल में गुरुओं के शिष्यों के प्रति उत्तरदायित्वों का वर्णन कीजिए।
  2. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा में गुरु-शिष्य के परस्पर सम्बन्धों का विवेचनात्मक वर्णन कीजिए।
  3. प्रश्न- वैदिक शिक्षा व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं की विवेचना कीजिए। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु यह किस सीमा तक प्रासंगिक है?
  4. प्रश्न- वैदिक शिक्षा की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  5. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा के कम से कम पाँच महत्त्वपूर्ण आदर्शों का उल्लेख कीजिए और आधुनिक भारतीय शिक्षा के लिए उनकी उपयोगिता बताइए।
  6. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे? वैदिक काल में प्रचलित शिक्षा के मुख्य गुण एवं दोष बताइए।
  7. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के मुख्य उद्देश्य क्या थे?
  8. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा के प्रमुख गुण बताइए।
  9. प्रश्न- प्राचीन काल में शिक्षा से क्या अभिप्राय था? शिक्षा के मुख्य उद्देश्य एवं आदर्श क्या थे?
  10. प्रश्न- वैदिककालीन उच्च शिक्षा का वर्णन कीजिए।
  11. प्रश्न- प्राचीन भारतीय शिक्षा में प्रचलित समावर्तन और उपनयन संस्कारों का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  12. प्रश्न- वैदिककालीन शिक्षा का मुख्य उद्देश्य ज्ञान का विकास तथा आध्यात्मिक उन्नति करना था। स्पष्ट कीजिए।
  13. प्रश्न- आधुनिक काल में प्राचीन वैदिककालीन शिक्षा के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
  14. प्रश्न- वैदिक शिक्षा में कक्षा नायकीय प्रणाली के महत्व की विवेचना कीजिए।
  15. प्रश्न- वैदिक कालीन शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  16. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं? शिक्षा के विभिन्न सम्प्रत्ययों का उल्लेख करते हुए उसके वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  17. प्रश्न- शिक्षा का अर्थ लिखिए।
  18. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  19. प्रश्न- शिक्षा के दार्शनिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  20. प्रश्न- शिक्षा के समाजशास्त्रीय सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  21. प्रश्न- शिक्षा के राजनीतिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  22. प्रश्न- शिक्षा के आर्थिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  23. प्रश्न- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक सम्प्रत्यय की विवेचना कीजिए।
  24. प्रश्न- शिक्षा के वास्तविक सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
  25. प्रश्न- क्या मापन एवं मूल्यांकन शिक्षा का अंग है?
  26. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए। आपको जो अब तक ज्ञात परिभाषाएँ हैं उनमें से कौन-सी आपकी राय में सर्वाधिक स्वीकार्य है और क्यों?
  27. प्रश्न- शिक्षा से तुम क्या समझते हो? शिक्षा की परिभाषाएँ लिखिए तथा उसकी विशेषताएँ बताइए।
  28. प्रश्न- शिक्षा का संकीर्ण तथा विस्तृत अर्थ बताइए तथा स्पष्ट कीजिए कि शिक्षा क्या है?
  29. प्रश्न- शिक्षा का 'शाब्दिक अर्थ बताइए।
  30. प्रश्न- शिक्षा का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी अपने शब्दों में परिभाषा दीजिए।
  31. प्रश्न- शिक्षा से आप क्या समझते हैं?
  32. प्रश्न- शिक्षा को परिभाषित कीजिए।
  33. प्रश्न- शिक्षा की दो परिभाषाएँ लिखिए।
  34. प्रश्न- शिक्षा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  35. प्रश्न- आपके अनुसार शिक्षा की सर्वाधिक स्वीकार्य परिभाषा कौन-सी है और क्यों?
  36. प्रश्न- 'शिक्षा एक त्रिमुखी प्रक्रिया है।' जॉन डीवी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं?
  37. प्रश्न- 'शिक्षा भावी जीवन की तैयारी मात्र नहीं है, वरन् जीवन-यापन की प्रक्रिया है। जॉन डीवी के इस कथन को उदाहरणों से स्पष्ट कीजिए।
  38. प्रश्न- शिक्षा के क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
  39. प्रश्न- शिक्षा विज्ञान है या कला या दोनों? स्पष्ट कीजिए।
  40. प्रश्न- शिक्षा की प्रकृति की विवेचना कीजिए।
  41. प्रश्न- शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ को स्पष्ट कीजिए तथा शिक्षा के व्यापक व संकुचित अर्थ में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  42. प्रश्न- शिक्षा और साक्षरता पर संक्षिप्त टिप्पणी दीजिए। इन दोनों में अन्तर व सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
  43. प्रश्न- शिक्षण और प्रशिक्षण के बारे में प्रकाश डालिए।
  44. प्रश्न- विद्या, ज्ञान, शिक्षण प्रशिक्षण बनाम शिक्षा पर प्रकाश डालिए।
  45. प्रश्न- विद्या और ज्ञान में अन्तर समझाइए।
  46. प्रश्न- शिक्षा और प्रशिक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।

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