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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 चित्रकला - भारतीय वास्तुकला का इतिहास-II

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2804
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 चित्रकला - भारतीय वास्तुकला का इतिहास-II - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- किशनगढ़ शैली की विशेषताएँ संक्षेप में लिखिए।


सम्बन्धित लघु उत्तरीय प्रश्न
1. किशनगढ़ शैली में प्रकृति चित्रण किस प्रकार का है?
2. किशनगढ़ शैली की भवन सज्जा कैसी थी ?

उत्तर-

किशनगढ़ शैली की विशेषताएँ

1. नारी चित्रण - किशनगढ़ शैली की मुख्य विशेषता नारी चित्रण है। जिस सुन्दर ढंग से नारी का चित्रण हुआ है। उसकी काँगड़ा शैली की नारी से तुलना की जा सकती है। नारी का सौन्दर्य चित्रण करने में इस शैली के चित्रकारों ने कमाल कर दिखाया है। इसी से इस शैली का मूल्यांकन हुआ है। चेहरे कोमलता लिए हुए हैं तथा कहीं भी भारीपन या रूक्षता नहीं है। स्त्रियों को लताओं के समान पतला, लचकदार व छरहरे शरीर का चित्रित किया है। चेहरे भी लम्बे हैं जिनमें माथा ऊंचा और पीछे की ओर है, नाक लम्बी व नुकीली है होठ जरा कटावदार मोटे व आगे की ओर निकले हुये हैं। ठोड़ी भी थोड़ी लम्बी है। चेहरे त्रिकोणाकार हैं।

नेत्रों की बनावट तो किशनगढ़ शैली में विशिष्ट स्थान रखती है। खंजन पक्षी के आकार के पीछे तक लम्बे खिंचे हुए नेत्र तथा धनुषाकार भृकुटी अति सुन्दर बनी हैं। गर्दन भी लम्बी बनी है, हाथ और उंगलियाँ भी लम्बी तथा सुन्दर बनी हैं। बालों को एक लट कान के पास छूती हुई, विशेषतया किशनगढ़ में ही मिलती है। पुरुष और नारी दोनों आकृतियों में कन्धों तक लटकी हुई केश राशी बनी है। क्षीण कटि तथा उन्नत वक्ष हैं।

2. रात्रि के दृश्य - मेवाड़ शैली की भाँति इस शैली में रात्रि के दृश्य को बहुत निपुणता के साथ चित्रित किया गया है। पीले रंग प्रकाश जो दीपकों से किया गया है सुन्दर है। चाँदनी रात के दृश्य बहुत ही आकर्षक हैं।

3. वेश-भूषा - स्त्रियों की वेश-भूषा के अधिकतर लहंगा चोली व पारदर्शी चुन्नी हैं। परन्तु कहीं-कहीं साड़ी भी बनाई गयी हैं। पुरुषों के वस्त्र में सिर पर पगड़ी है जो औरंगजेब के समय की है ऊँची बनाई गयी है जिसमें झब्बा भी लगाया गया है। पजामा तथा वही राजपूती पटका बनाया गया है। धार्मिक चित्रों में कृष्ण को पीतवसन पहले दिखाया गया है।

अलंकार एवं आभूषण भी रत्नजटित हैं। माथे पर झूमर, गले में मोतियों की माला तथा पूर्णतया, गला विभिन्न प्रकार मालाओं से लदा हुआ है। कानों में कुण्डल मोतियों से बने हैं। हाथों व उंगलियों तक में पूर्णतया आभूषण तथा अंगूठियाँ बनाई हैं। बाजूबन्द व चूड़ियाँ बहुत सुन्दर ढंग से चित्रित की गयी है।

4. प्रतीकात्मक चित्र - इस शैली में राधा और कृष्ण को आत्मा और परमात्मा के रूप में दर्शाया गया है।

5. नौका विहार - इस शैली में नौका विहार के बहुत सुन्दर चित्र हैं जिनमें सजीवता तथा गति हैं। लाल रंग की छोटी-छोटी नौकायें अधिकतर बनी हैं।

6. रंग योजना - इस शैली में रंगों को अधिकतर बिना मिश्रित किये लगाया गया है, जिनमें लाल, पीले व नीले रंग का प्रयोग मुख्य है। वैसे हरा, कला और सफ़ेद रंग भी प्रयोग हुआ है और सोने, चाँदी के रंगों का प्रयोग हुआ है।

7. रेखा सौन्दर्य - किशनगढ़ शैली के चित्रों में गतिमान तथा लयपूर्ण रेखायें देखने को मिलती हैं। ये रेखायें बारीक हैं तथा कोमलता लिये हुए हैं।

8. प्रकृति चित्रण - किशनगढ़ शैली में प्रकृति चित्रण बहुत भावुकता से दिखाया गया है। राधाकृष्ण के प्रेमी-प्रेमिका के चित्रण की पृष्ठभूमि में जो लता, वृक्ष आदि का सजीव चित्रण है, उसने उस वातावरण में चार चाँद लगा दिये हैं। ऊंचा क्षितिज बनाकर वनस्पति की महत्ता को प्रकट किया है। कहीं-कहीं क्षितिज बनाया ही नहीं है, केवल वृक्ष व लताओं को इतना घना बनाया गया है कि बहुत रोमांचक वातावरण प्रतीत होता है। झील के दृश्यों में भी चित्रकारों ने प्राकृतिक सौन्दर्य को बड़ी सफलता से चित्रित किया है।

9. भीड़-भाड़ के चित्र - कुछ चित्रों में बहुत भीड़-भाड़ बनाई गयी है जैसे कि 'गोवर्द्धन धारण' चित्र है इसमें अगणित आकृतियाँ हैं। स्त्री व पुरुष दोनों ओर हैं, कृष्ण बीच में गोवर्द्धन पर्यंत को एक उंगली पर उठाये खड़े हैं, परन्तु विशेषता यह है कि हर आकृति तथा चेहरे बिल्कुल एक से सुन्दर हैं तथा चित्र पूर्णतया सन्तुलित हैं।

10. बड़े चित्र - प्राय: इस शैली के चित्र थोड़े बड़े बने हैं। अन्य शैलियों में लघु चित्र ही

11. भवन सज्जा - भवन सज्जा बहुत सुन्दर है जिसमें गुम्बद, जालियाँ तथा खिड़कियाँ बहुत आकर्षक हैं।

यह शैली, रूप नगर व किशनगढ़ दो स्थानों पर विकसित हुई। कुछ दिन तो नागरी दास भी रूप नगर रहे थे, परन्तु उसके बाद उनके पुत्र सरदार सिंह ने राजधानी ही रूप नगर में बना ली थी, जहाँ कि किशनगढ़ के चित्रकार रहने लगे थे।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- पाल शैली पर एक निबन्धात्मक लेख लिखिए।
  2. प्रश्न- पाल शैली के मूर्तिकला, चित्रकला तथा स्थापत्य कला के बारे में आप क्या जानते है?
  3. प्रश्न- पाल शैली की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालिए।
  4. प्रश्न- पाल शैली के चित्रों की विशेषताएँ लिखिए।
  5. प्रश्न- अपभ्रंश चित्रकला के नामकरण तथा शैली की पूर्ण विवेचना कीजिए।
  6. प्रश्न- पाल चित्र-शैली को संक्षेप में लिखिए।
  7. प्रश्न- बीकानेर स्कूल के बारे में आप क्या जानते हैं?
  8. प्रश्न- बीकानेर चित्रकला शैली किससे संबंधित है?
  9. प्रश्न- बूँदी शैली के चित्रों की विशेषताओं की सचित्र व्याख्या कीजिए।
  10. प्रश्न- राजपूत चित्र - शैली पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
  11. प्रश्न- बूँदी कोटा स्कूल ऑफ मिनिएचर पेंटिंग क्या है?
  12. प्रश्न- बूँदी शैली के चित्रों की विशेषताएँ लिखिये।
  13. प्रश्न- बूँदी कला पर टिप्पणी लिखिए।
  14. प्रश्न- बूँदी कला का परिचय दीजिए।
  15. प्रश्न- राजस्थानी शैली के विकास क्रम की चर्चा कीजिए।
  16. प्रश्न- राजस्थानी शैली की विषयवस्तु क्या थी?
  17. प्रश्न- राजस्थानी शैली के चित्रों की विशेषताएँ क्या थीं?
  18. प्रश्न- राजस्थानी शैली के प्रमुख बिंदु एवं केन्द्र कौन-से हैं ?
  19. प्रश्न- राजस्थानी उपशैलियाँ कौन-सी हैं ?
  20. प्रश्न- किशनगढ़ शैली पर निबन्धात्मक लेख लिखिए।
  21. प्रश्न- किशनगढ़ शैली के विकास एवं पृष्ठ भूमि के विषय में आप क्या जानते हैं?
  22. प्रश्न- 16वीं से 17वीं सदी के चित्रों में किस शैली का प्रभाव था ?
  23. प्रश्न- जयपुर शैली की विषय-वस्तु बतलाइए।
  24. प्रश्न- मेवाड़ चित्र शैली के उद्भव एवं विकास पर प्रकाश डालिए।
  25. प्रश्न- किशनगढ़ चित्रकला का परिचय दीजिए।
  26. प्रश्न- किशनगढ़ शैली की विशेषताएँ संक्षेप में लिखिए।
  27. प्रश्न- मेवाड़ स्कूल ऑफ पेंटिंग पर एक लेख लिखिए।
  28. प्रश्न- मेवाड़ शैली के प्रसिद्ध चित्र कौन से हैं?
  29. प्रश्न- मेवाड़ी चित्रों का मुख्य विषय क्या था?
  30. प्रश्न- मेवाड़ चित्र शैली की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए ।
  31. प्रश्न- मेवाड़ एवं मारवाड़ शैली के मुख्य चित्र कौन-से है?
  32. प्रश्न- अकबर के शासनकाल में चित्रकारी तथा कला की क्या दशा थी?
  33. प्रश्न- जहाँगीर प्रकृति प्रेमी था' इस कथन को सिद्ध करते हुए उत्तर दीजिए।
  34. प्रश्न- शाहजहाँकालीन कला के चित्र मुख्यतः किस प्रकार के थे?
  35. प्रश्न- शाहजहाँ के चित्रों को पाश्चात्य प्रभाव ने किस प्रकार प्रभावित किया?
  36. प्रश्न- जहाँगीर की चित्रकला शैली की विशेषताएँ लिखिए।
  37. प्रश्न- शाहजहाँ कालीन चित्रकला मुगल शैली पर प्रकाश डालिए।
  38. प्रश्न- अकबरकालीन वास्तुकला के विषय में आप क्या जानते है?
  39. प्रश्न- जहाँगीर के चित्रों पर पड़ने वाले पाश्चात्य प्रभाव की चर्चा कीजिए ।
  40. प्रश्न- मुगल शैली के विकास पर एक टिप्पणी लिखिए।
  41. प्रश्न- अकबर और उसकी चित्रकला के बारे में आप क्या जानते हैं?
  42. प्रश्न- मुगल चित्रकला शैली के सम्बन्ध में संक्षेप में लिखिए।
  43. प्रश्न- जहाँगीर कालीन चित्रों को विशेषताएं बतलाइए।
  44. प्रश्न- अकबरकालीन मुगल शैली की विशेषताएँ क्या थीं?
  45. प्रश्न- बहसोली चित्रों की मुख्य विषय-वस्तु क्या थी?
  46. प्रश्न- बसोहली शैली का विस्तार पूर्वक वर्णन कीजिए।
  47. प्रश्न- काँगड़ा की चित्र शैली के बारे में क्या जानते हो? इसकी विषय-वस्तु पर प्रकाश डालिए।
  48. प्रश्न- काँगड़ा शैली के विषय में आप क्या जानते हैं?
  49. प्रश्न- बहसोली शैली के इतिहास पर प्रकाश डालिए।
  50. प्रश्न- बहसोली शैली के लघु चित्रों के विषय में आप क्या जानते हैं?
  51. प्रश्न- बसोहली चित्रकला पर अपने विचार प्रकट कीजिए।
  52. प्रश्न- बहसोली शैली की चित्रगत विशेषताएँ लिखिए।
  53. प्रश्न- कांगड़ा शैली की विषय-वस्तु किस प्रकार कीं थीं?
  54. प्रश्न- गढ़वाल चित्रकला पर निबंधात्मक लेख लिखते हुए, इसकी विशेषताएँ बताइए।
  55. प्रश्न- गढ़वाल शैली की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की व्याख्या कीजिए ।
  56. प्रश्न- गढ़वाली चित्रकला शैली का विषय विन्यास क्या था ? तथा इसके प्रमुख चित्रकार कौन थे?
  57. प्रश्न- गढ़वाल शैली का उदय किस प्रकार हुआ ?
  58. प्रश्न- गढ़वाल शैली की विशेषताएँ लिखिये।
  59. प्रश्न- तंजावुर के मन्दिरों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालिए।
  60. प्रश्न- तंजापुर पेंटिंग का परिचय दीजिए।
  61. प्रश्न- तंजावुर पेंटिंग की शैली किस प्रकार की थी?
  62. प्रश्न- तंजावुर कलाकारों का परिचय दीजिए तथा इस शैली पर किसका प्रभाव पड़ा?
  63. प्रश्न- तंजावुर पेंटिंग कहाँ से संबंधित है?
  64. प्रश्न- आधुनिक समय में तंजावुर पेंटिंग का क्या स्वरूप है?
  65. प्रश्न- लघु चित्रकला की तंजावुर शैली पर एक लेख लिखिए।

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