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प्राचीन भारतीय और पुरातत्व इतिहास >> बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 प्राचीन भारतीय इतिहास

बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 प्राचीन भारतीय इतिहास

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2794
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 प्राचीन भारतीय इतिहास - सरल प्रश्नोत्तर

अध्याय - 1

पुरातत्व एवं इसका अन्य विज्ञानों से सम्बन्ध

(Archaeology and its Relation
with Other Sciences)

प्रश्न- पुरातत्व क्या है? इसकी विषय-वस्तु का निरूपण कीजिए।

अथवा
विभिन्न पुराविदों की परिभाषाओं सहित पुरातत्व की परिभाषा दीजिए।

सम्बन्धित लघु उत्तरीय प्रश्न
1. पुरातत्व की परिभाषा दीजिए।
2. पुरातत्व से आप क्या समझते हैं? इसके स्वरूप को स्पष्ट कीजिए।
3. 'पुरातत्व की परिभाषा दीजिए एवं उसकी प्रकृति समझाइये।

उत्तर -

पुरातत्व की परिभाषा एवं अर्थ

पुरातत्व अंग्रेजी भाषा के आर्किओलॉजी (Archaeology) शब्द के पर्यायवाची के रूप में व्यवहृत होता है इसलिये हिन्दी के इस पुरातत्व शब्द का वास्तविक अर्थ ज्ञात करने के लिये अंग्रेजी में इस शब्द की व्युत्पत्ति के विषय में विचार कर लेना अनिवार्य होगा। आर्किओलॉजी शब्द यूनानी भाषा के आर्किअस (Archaois) तथा लोगस (Logos) शब्दों से मिलकर बना है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है - 'पुरातत्व ज्ञान' लेकिन आजकल पुरातत्व शब्द का उसके शाब्दिक अर्थ से किंचित भिन्न अर्थों में प्रयोग किया जाता है। पुरातत्व की परिभाषाएँ विभिन्न पुरातत्ववेत्ताओं ने भिन्न प्रकार से दी हैं, जिनका उल्लेख करना समीचीन होगा।

गार्डेन चाइल्ड के अनुसार, "पुरातत्व सुस्पष्ट भौतिक अवशेषों के माध्यम से मानव के क्रिया कलापों के अध्ययन को कहा जा सकता है।

ग्राह्म क्लार्क के अनुसार, "पुरातत्व को मानव को अतीत के इतिहास की रचना करने लिए पुरावशेषों के क्रमबद्ध एवं सुव्यवस्थित अध्ययन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।"

"Archaeology may be simply as the systematic study of antiquities as a means of reconstructing the past.

ग्लिन डेनिअल के अनुसार "पुरातत्व शब्द का प्रयोग दो प्रमुख अर्थों में किया जा सकता है-

1. मानव अतीत के भौतिक अवशेषों के अध्ययन में
2.. मानव के प्रागैतिहासिक काल से सम्बन्धित पुरावशेषों के अध्ययन के अर्थ में।"

इनमें से प्रथम परिप्रेक्ष्य में पुरातत्व शब्द का अत्यन्त व्यापक अर्थ ग्रहण किया गया है। इस दृष्टि से पुरातत्व के अन्तर्गत पाषाण काल के औजारों से लेकर आजकल के काल पात्रों तक का समावेश किया जा सकता है। प्रत्येक देश में इतिहासकार अपनी उन सूचनाओं के लिए पुरातत्व पर आश्रित रहता है, जहाँ वे पुनः अतीत में नहीं जा सकते और उस काल का इतिहास लिखना चाहते हैं। विशेष रूप से भारत में तो लगभग डेढ़ शताब्दियों से पूर्व मुस्लिम युग का समूचा इतिहास अन्वेषकों द्वारा प्राप्त किये गये तथ्यों एवं उत्खननकर्ताओं की सामग्री के अध्ययन पर निर्मित है। पुरातत्व के उद्देश्य की चर्चा करते हुए एस. आर. दास ने कहा है कि-

"The fundamental aim of archaeology is to work out and solve diverse problems of history by supplying a concrete material base and there by placing history on a solid ground."

भारतीय पुरातत्व के अन्वेषण का इतिहास

भारतीय पुरातत्व के अन्वेषण का इतिहास अंग्रेजों के काल में गर्वनर जनरल लार्ड वारेन हेस्टिंग्स के समय से प्रारम्भ होता है। सर्वप्रथम ईस्ट इण्डिया कम्पनी के पदाधिकारी विलियम जोन्स महोदय ने एशिया में सभी प्रकार के पुरातात्विक अन्वेषण का सूत्रपात किया। सन् 1794 में विलियम जोन्स के अवसान के बाद हेनरी कालबुक ने बागडोर संभाली। उन्होंने भारतीय पुरातन संस्कृति के अन्वेषण पर यूरोपीय विद्वानों का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने लन्दन में जाकर 'रायल एशियाटिक सोसायटी' की स्थापना की। सन् 1807 में मार्त्विस वेलेजली ने दिनाजपुर, गोरखपुर, शाहाबाद, भागलपुर, रंगपुर आदि पर पुरातात्विक गवेषणा कर नवीन तथ्य प्रकाशित किये। उसी समय साल्ट और रसकिन ने पश्चिमी भारत के पुरातत्व पर प्रकाश डाला। दक्षिण भारत पर टामस डेनियल ने कार्य प्रारम्भ किया और उसी समय वहाँ कर्नल मेकेन्जी ने पुरातत्व का अध्ययन प्रारम्भ किया।

भारतीय पुरातत्वान्वेषण के महत्वपूर्ण अध्याय का आरम्भ 1887 ई. में हुआ। इस समय तक कुछ स्तूपों की खुदाई भी हो चुकी थी। इसके बाद तीस वर्ष तक पुरातत्व का पूर्ण सूत्र विख्यात पुराविद जेम्स फर्ग्युसन, मेजर किट्टो, एडवर्ड टॉमस, अलेक्जेण्डर कनिंघम आदि के हाथ में रहा। कनिंघम महोदय के अथक प्रयासों से सन् 1862 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (Archaeological Survey of India) की स्थापना हुई। श्री कनिंघम महोदय इसके निदेशक बने। सन् 1885 तक कनिंघम महोदय ने कार्य किया और इस विभाग द्वारा किये गये पुरातात्विक कार्यों को चौबीस जिल्दों के अन्तर्गत प्रकाशित कराया गया। कनिंघम महोदय के बाद डॉ. बर्गेस ने इसे संभाला। बर्गेस के बाद पुरातत्व विभाग के निर्देशक पद पर जॉन मार्शल आये। इस प्रकार 1902 ई. से भारतीय पुरातत्व के अन्वेषण में एक नया युग आरम्भ हुआ।

सर जॉन मार्शल महोदय ने प्राचीन स्थानों का निरीक्षण किया और वहाँ से नवीन तथ्यों को उद्घाटित करने के लिये उत्खनन कार्य भी कराया। इस समय राजगृह, मथुरा, सारनाथ, मिरखासपुर, भीटा, खाशिया आदि नगरों का अन्वेशण हुआ। 1924 ई. में नालन्दा, अमरावती, तक्षशिला आदि नगरों का पुरातात्विक आधार पर ऐतिहासिक महत्व समझा गया। इसी वर्ष मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के उत्खनन ने यह प्रमाणित कर दिया कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता का इतिहास प्राप्त साधनों के आधार पर पाँच हजार वर्ष जाता है। मार्शल के बाद माधवस्वरूप वत्स, सर मार्टीमर हीलर आदि ने भारतीय पुरातत्व के अन्वेषण की बागडोर संभाली। आज वर्तमान भारत में भारतीय पुरातत्व विभाग अपने कई उपविभागों और क्षेत्रीय विभागों के माध्यम से तथा विश्वविद्यालयों में शोध करने वाले पुराविदों के माध्यम से भारत के विभिन्न अंचलों में फैले हुए पुरातत्व अवशेषों के उद्घाटन का कार्य कर रहा है।

पुरातत्व विज्ञान का स्वरूप

पुरातत्व विज्ञान का स्वरूप पुरातत्व के प्रसिद्ध पुरोधा जे. जी. डी. क्लार्क ने लिखा है "पुरातत्व के अध्ययन के औचित्य को सिद्ध करने की कतई आवश्यकता नहीं है। विश्व ब्रह्माण्ड के स्वरूप की खोज तथा कला एवं दर्शन के अध्ययन की ही भाँति यह विषय (पुरातत्व) भी मानव के ज्ञान के आयाम को व्यापार बनाता है। आज विश्व में सवर्त्र बिखराव एवं अलगाव की प्रवृत्ति विशेष रूप से दृष्टिगोचर हो रही है। मानवता को समझने हेतु पुरातत्व एक नयी दृष्टि प्रदान करता है। वर्तमान ही नहीं अपितु विगत मानव समुदायों के रीति-रिवाजों (Usages), इतिहास एवं परम्पराओं (Tradition) के प्रति आदर भाव को विकसित करने में सहायक है।"

प्रचलित भाषा में जिसे हम इतिहास कहते हैं, वह उन घटनाओं का वर्णन करता है जो लिखित रूप में आ गयी हैं। परन्तु संसार के प्राचीन इतिहास का एक बहुत बड़ा भाग भूगर्भ में छिपा हुआ है। ऐसे तथ्यों का उद्घाटन भूगर्भ के उत्खनन के माध्यम से ही प्रकाश में लाया जा सकता है। उदाहरणार्थ मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के विषय में हमें कुछ भी ज्ञात न था। 1921 ई. में श्री राखलदास बनर्जी और रायबहादुर दयाराम साहनी की अध्यक्षता में जो उत्खनन कार्य हुआ, उसमें जमीन के नीचे दबे हुये पूरे के पूरे शहर निकल आये। इन शहरों में सिन्धु घाटी की एक नवीन सभ्यता प्रकाश में आयी। भूगर्भ के इस प्रकार के उत्खनन से और पुरातन अवशेषों के मिलने से प्राचीनकाल की सभ्यता पर प्रकाश पड़ता है। इस प्रकार इतिहास की दृष्टि बहुत सीमित क्षेत्र तक परिमित है जबकि पुरातत्व विज्ञान की दृष्टि इतिहास से आगे निकल जाती है। पुरातत्व विज्ञान द्वारा एकत्र सामग्री के आधार पर इतिहास अतीतकाल का लिखित निर्माण करता है।

इस प्रकार मानव के अतीत का सारा अध्ययन और अनुसंधान लिखित और अलिखित साक्ष्यों की व्याख्या पर आधारित है। इसी व्याख्या के आधार पर कुछ अनुमानपरक निष्कर्ष (Inference) और सीमाएँ (Limitation) होती हैं। पुराविदों द्वारा प्रयुक्त साक्ष्यों की भी अपनी सीमाएँ एवं कमियाँ हैं।

प्रो. जे. एन. पाण्डेय का अभिमत है कि- "पुरातत्व अज्ञातनामा (Nameless) मृत व्यक्तियों के बारे में अध्ययन करता है इसलिए पुराविदों द्वारा संस्कृतियों के अध्ययन की रूपरेखा में व्यष्टि पर नहीं, बल्कि सारा ध्यान समष्टि पर केन्द्रित होता है।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- पुरातत्व क्या है? इसकी विषय-वस्तु का निरूपण कीजिए।
  2. प्रश्न- पुरातत्व का मानविकी तथा अन्य विज्ञानों से सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
  3. प्रश्न- पुरातत्व विज्ञान के स्वरूप या प्रकृति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  4. प्रश्न- 'पुरातत्व के अभाव में इतिहास अपंग है। इस कथन को समझाइए।
  5. प्रश्न- इतिहास का पुरातत्व शस्त्र के साथ सम्बन्धों की विवेचना कीजिए।
  6. प्रश्न- भारत में पुरातत्व पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
  7. प्रश्न- पुरातत्व सामग्री के क्षेत्रों का विश्लेषण अध्ययन कीजिये।
  8. प्रश्न- भारत के पुरातत्व के ह्रास होने के क्या कारण हैं?
  9. प्रश्न- प्राचीन इतिहास की संरचना में पुरातात्विक स्रोतों के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
  10. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास की संरचना में पुरातत्व का महत्व बताइए।
  11. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में अभिलेखों का क्या महत्व है?
  12. प्रश्न- स्तम्भ लेख के विषय में आप क्या जानते हैं?
  13. प्रश्न- स्मारकों से प्राचीन भारतीय इतिहास की क्या जानकारी प्रात होती है?
  14. प्रश्न- पुरातत्व के उद्देश्यों से अवगत कराइये।
  15. प्रश्न- पुरातत्व के विकास के विषय में बताइये।
  16. प्रश्न- पुरातात्विक विज्ञान के विषय में बताइये।
  17. प्रश्न- ऑगस्टस पिट, विलियम फ्लिंडर्स पेट्री व सर मोर्टिमर व्हीलर के विषय में बताइये।
  18. प्रश्न- उत्खनन के विभिन्न सिद्धान्तों तथा प्रकारों का उल्लेख कीजिए।
  19. प्रश्न- पुरातत्व में ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज उत्खननों के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
  20. प्रश्न- डेटिंग मुख्य रूप से उत्खनन के बाद की जाती है, क्यों। कारणों का उल्लेख कीजिए।
  21. प्रश्न- डेटिंग (Dating) क्या है? विस्तृत रूप से बताइये।
  22. प्रश्न- कार्बन-14 की सीमाओं को बताइये।
  23. प्रश्न- उत्खनन व विश्लेषण (पुरातत्व के अंग) के विषय में बताइये।
  24. प्रश्न- रिमोट सेंसिंग, Lidar लेजर अल्टीमीटर के विषय में बताइये।
  25. प्रश्न- लम्बवत् और क्षैतिज उत्खनन में पारस्परिक सम्बन्धों को निरूपित कीजिए।
  26. प्रश्न- क्षैतिज उत्खनन के लाभों एवं हानियों पर प्रकाश डालिए।
  27. प्रश्न- पुरापाषाण कालीन संस्कृति का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  28. प्रश्न- निम्न पुरापाषाण कालीन संस्कृति का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  29. प्रश्न- उत्तर पुरापाषाण कालीन संस्कृति के विकास का वर्णन कीजिए।
  30. प्रश्न- भारत की मध्यपाषाणिक संस्कृति पर एक वृहद लेख लिखिए।
  31. प्रश्न- मध्यपाषाण काल की संस्कृति का महत्व पूर्ववर्ती संस्कृतियों से अधिक है? विस्तृत विवेचन कीजिए।
  32. प्रश्न- भारत में नवपाषाण कालीन संस्कृति के विस्तार का वर्णन कीजिये।
  33. प्रश्न- भारतीय पाषाणिक संस्कृति को कितने कालों में विभाजित किया गया है?
  34. प्रश्न- पुरापाषाण काल पर एक लघु लेख लिखिए।
  35. प्रश्न- पुरापाषाण कालीन मृद्भाण्डों पर टिप्पणी लिखिए।
  36. प्रश्न- पूर्व पाषाण काल के विषय में एक लघु लेख लिखिये।
  37. प्रश्न- पुरापाषाण कालीन शवाशेष पद्धति पर टिप्पणी लिखिए।
  38. प्रश्न- मध्यपाषाण काल से आप क्या समझते हैं?
  39. प्रश्न- मध्यपाषाण कालीन संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।।
  40. प्रश्न- मध्यपाषाणकालीन संस्कृति का विस्तार या प्रसार क्षेत्र स्पष्ट कीजिए।
  41. प्रश्न- विन्ध्य क्षेत्र के मध्यपाषाणिक उपकरणों पर प्रकाश डालिए।
  42. प्रश्न- गंगा घाटी की मध्यपाषाण कालीन संस्कृति पर प्रकाश डालिए।
  43. प्रश्न- नवपाषाणिक संस्कृति पर टिप्पणी लिखिये।
  44. प्रश्न- विन्ध्य क्षेत्र की नवपाषाण कालीन संस्कृति पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
  45. प्रश्न- दक्षिण भारत की नवपाषाण कालीन संस्कृति के विषय में बताइए।
  46. प्रश्न- मध्य गंगा घाटी की नवपाषाण कालीन संस्कृति पर टिप्पणी लिखिए।
  47. प्रश्न- ताम्रपाषाणिक संस्कृति से आप क्या समझते हैं? भारत में इसके विस्तार का उल्लेख कीजिए।
  48. प्रश्न- जोर्वे-ताम्रपाषाणिक संस्कृति की विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
  49. प्रश्न- मालवा की ताम्रपाषाणिक संस्कृति का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  50. प्रश्न- ताम्रपाषाणिक संस्कृति पर टिप्पणी लिखिए।
  51. प्रश्न- आहार संस्कृति का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  52. प्रश्न- मालवा की ताम्रपाषाणिक संस्कृति पर प्रकाश डालिए।
  53. प्रश्न- जोर्वे संस्कृति की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
  54. प्रश्न- ताम्रपाषाणिक संस्कृति के औजार क्या थे?
  55. प्रश्न- ताम्रपाषाणिक संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालिए।
  56. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता / हड़प्पा सभ्यता के नामकरण और उसके भौगोलिक विस्तार की विवेचना कीजिए।
  57. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता की नगर योजना का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  58. प्रश्न- हड़प्पा सभ्यता के नगरों के नगर- विन्यास पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
  59. प्रश्न- सिन्धु घाटी के लोगों की शारीरिक विशेषताओं का संक्षिप्त मूल्यांकन कीजिए।
  60. प्रश्न- पाषाण प्रौद्योगिकी पर टिप्पणी लिखिए।
  61. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता के सामाजिक संगठन पर टिप्पणी कीजिए।
  62. प्रश्न- सिंधु सभ्यता के कला और धर्म पर टिप्पणी कीजिए।
  63. प्रश्न- सिंधु सभ्यता के व्यापार का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
  64. प्रश्न- सिंधु सभ्यता की लिपि पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
  65. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता के पतन के कारणों पर प्रकाश डालिए।
  66. प्रश्न- लौह उत्पत्ति के सम्बन्ध में पुरैतिहासिक व ऐतिहासिक काल के विचारों से अवगत कराइये?
  67. प्रश्न- लोहे की उत्पत्ति (भारत में) के विषय में विभिन्न चर्चाओं से अवगत कराइये।
  68. प्रश्न- "ताम्र की अपेक्षा, लोहे की महत्ता उसकी कठोरता न होकर उसकी प्रचुरता में है" कथन को समझाइये।
  69. प्रश्न- महापाषाण संस्कृति के विषय में आप क्या जानते हैं? स्पष्ट कीजिए।
  70. प्रश्न- लौह युग की भारत में प्राचीनता से अवगत कराइये।
  71. प्रश्न- बलूचिस्तान में लौह की उत्पत्ति से सम्बन्धित मतों से अवगत कराइये?
  72. प्रश्न- भारत में लौह-प्रयोक्ता संस्कृति पर टिप्पणी लिखिए।
  73. प्रश्न- प्राचीन मृद्भाण्ड परम्परा से आप क्या समझते हैं? गैरिक मृद्भाण्ड (OCP) संस्कृति का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  74. प्रश्न- चित्रित धूसर मृद्भाण्ड (PGW) के विषय में विस्तार से समझाइए।
  75. प्रश्न- उत्तरी काले चमकदार मृद्भाण्ड (NBPW) के विषय में संक्षेप में बताइए।
  76. प्रश्न- एन. बी. पी. मृद्भाण्ड संस्कृति का कालानुक्रम बताइए।
  77. प्रश्न- मालवा की मृद्भाण्ड परम्परा के विषय में बताइए।
  78. प्रश्न- पी. जी. डब्ल्यू. मृद्भाण्ड के विषय में एक लघु लेख लिखिये।
  79. प्रश्न- प्राचीन भारत में प्रयुक्त लिपियों के प्रकार तथा नाम बताइए।
  80. प्रश्न- मौर्यकालीन ब्राह्मी लिपि पर प्रकाश डालिए।
  81. प्रश्न- प्राचीन भारत की प्रमुख खरोष्ठी तथा ब्राह्मी लिपियों पर प्रकाश डालिए।
  82. प्रश्न- अक्षरों की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालिए।
  83. प्रश्न- अशोक के अभिलेख की लिपि बताइए।
  84. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास की संरचना में अभिलेखों के महत्व का उल्लेख कीजिए।
  85. प्रश्न- अभिलेख किसे कहते हैं? और प्रालेख से किस प्रकार भिन्न हैं?
  86. प्रश्न- प्राचीन भारतीय अभिलेखों से सामाजिक जीवन पर क्या प्रकाश पड़ता है?
  87. प्रश्न- अशोक के स्तम्भ लेखों के विषय में बताइये।
  88. प्रश्न- अशोक के रूमेन्देई स्तम्भ लेख का सार बताइए।
  89. प्रश्न- अभिलेख के प्रकार बताइए।
  90. प्रश्न- समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति के विषय में बताइए।
  91. प्रश्न- जूनागढ़ अभिलेख से किस राजा के विषय में जानकारी मिलती है उसके विषय में आप सूक्ष्म में बताइए।
  92. प्रश्न- मुद्रा बनाने की रीतियों का उल्लेख करते हुए उनकी वैज्ञानिकता को सिद्ध कीजिए।
  93. प्रश्न- भारत में मुद्रा की प्राचीनता पर प्रकाश डालिए।
  94. प्रश्न- प्राचीन भारत में मुद्रा निर्माण की साँचा विधि का वर्णन कीजिए।
  95. प्रश्न- मुद्रा निर्माण की ठप्पा विधि का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  96. प्रश्न- आहत मुद्राओं (पंचमार्क सिक्कों) की मुख्य विशेषताओं एवं तिथिक्रम का वर्णन कीजिए।
  97. प्रश्न- मौर्यकालीन सिक्कों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत कीजिए।
  98. प्रश्न- आहत मुद्राओं (पंचमार्क सिक्के) से आप क्या समझते हैं?
  99. प्रश्न- आहत सिक्कों के प्रकार बताइये।
  100. प्रश्न- पंचमार्क सिक्कों का महत्व बताइए।
  101. प्रश्न- कुषाणकालीन सिक्कों के इतिहास का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  102. प्रश्न- भारतीय यूनानी सिक्कों की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
  103. प्रश्न- कुषाण कालीन सिक्कों के उद्भव एवं प्राचीनता को संक्षेप में बताइए।
  104. प्रश्न- गुप्तकालीन सिक्कों का परिचय दीजिए।
  105. प्रश्न- गुप्तकालीन ताम्र सिक्कों पर टिप्पणी लिखिए।
  106. प्रश्न- उत्तर गुप्तकालीन मुद्रा का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  107. प्रश्न- समुद्रगुप्त के स्वर्ण सिक्कों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  108. प्रश्न- गुप्त सिक्कों की बनावट पर टिप्पणी लिखिए।
  109. प्रश्न- गुप्तकालीन सिक्कों का ऐतिहासिक महत्व बताइए।
  110. प्रश्न- इतिहास के अध्ययन हेतु अभिलेख अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। विवेचना कीजिए।
  111. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में सिक्कों के महत्व की विवेचना कीजिए।
  112. प्रश्न- प्राचीन सिक्कों से शासकों की धार्मिक अभिरुचियों का ज्ञान किस प्रकार प्राप्त होता है?
  113. प्रश्न- हड़प्पा की मुद्राओं के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
  114. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में अभिलेखों का क्या महत्व है?
  115. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत के रूप में सिक्कों का महत्व बताइए।

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