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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-1 मनोविज्ञान

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2789
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-1 मनोविज्ञान - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- गर्भकालीन विकास को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारक कौन-से है। विस्तार में समझाइए। 

अथवा
भ्रूण के विकास पर पड़ने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।

उत्तर -

गर्भकालीन विकास को प्रभावित करने वाले कारक
(Factors Influencing pre-natal Development )

1. माँ का आहार (Maternal Nutrition ) - गर्भकालीन अवस्था में बालक अपना आहार माँ से Placenta के द्वारा प्राप्त करता है। अतः आवश्यक है कि माँ का आहार सन्तुलित हो और माँ के आहार में सभी आवश्यक पोषक तत्व विद्यमान हों। माँ के आहार में प्रोटीन, फैट्स और कार्बोहाइड्रेट्स - तीनों ही उपयुक्त मात्रा में आवश्यक हैं। प्रोटीन्स से टिशूज का निर्माण होता है। फैट्स शरीर में ईंधन का कार्य करते हैं तथां कार्बोहाइड्रेट्स शरीर को शक्ति प्रदान करते हैं। कुछ गर्भवती स्त्रियों की यह धारण होती है कि गर्भकालीन अवस्था में उन्हें दो जीवों के लिए भोजन करना होता है— एक, स्वयं के लिए तथा दूसरा बच्चे के लिए। इस प्रवृत्ति से गर्भस्थ शिशु मोटा हो सकता है और जन्म के समय गर्भवती स्त्री को काफी परेशानी हो सकती है। आवश्यक है कि गर्भवती स्त्री सन्तुलित आहार ले जिससे गर्भस्थ शिशु का विकास सामान्य ढंग से चल सके।

2. माँ का स्वास्थ्य (Maternal Health) या माँ की बीमारी - गर्भवती स्त्रियों की बीमारियाँ भी गर्भस्थ शिशु के शारीरिक विकास को महत्त्वपूर्ण ढंग से प्रभावित करती हैं। कुछ गम्भीर संक्रामक रोग; जैसे— सिफलिस या गॉनोरिया (Syphilis or Gonorrhea) यदि गर्भवती स्त्री को है, तो इसके गर्भस्थ शिशु पर अनेक परिणाम पड़ते हैं; उदाहरण के लिए, इन बीमारियों के कारण गर्भस्थ शिशु गर्भ से गिर सकता है; यदि गर्भ से नहीं गिरता है, तो जन्म के उपरान्त इस प्रकार का बालक जन्म से अन्धा, जन्म से बहरा, मानसिक दुर्बल या कोई और गत्यात्मक विकार (Motor Disorders) हो सकते हैं। इसी प्रकार यदि गर्भवती स्त्री को पहले या दूसरे महीने में मीजिल्स निकल आये, तो गर्भस्थ शिशु के हृदय और कानों पर प्रभाव पड़ सकता है।

गर्भवती स्त्री यदि गर्भ के दिनों में कुनेन (Quinine) औषधि का जिसका प्रयोग मलेरिया आदि रोगों में किया जाता है) प्रयोग अधिक करती है, तो निश्चय ही बालक के श्रवण पर इसका प्रभाव पड़ता है, बालक बहरा हो सकता है। इसी प्रकार से सिर दर्द और शरीर-दर्द की गोलियाँ यदि गर्भवती स्त्री अक्सर लेती रहती हैं; तो इस प्रकार की औषधियाँ गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क की ऑक्सीजन सप्लाई को प्रभावित करती हैं, जिससे गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क को क्षति पहुँच सकती है।

3. शराब और तम्बाकू ( Alcohol & Tobacco) - गर्भवती स्त्री यदि लगातार शराब और तम्बाकू का प्रयोग गर्भकालीन अवस्था में करती रहती है, तो इसका भी गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है; उदाहरण के लिए, अधिक मदिरापान के प्रभाव में देखा गया है कि गर्भस्थ शिशु में बेचैनी और हृदय की धड़कनें अक्रमिक हो जाती हैं। तम्बाकू का अधिक सेवन भी हानिकारक है। तम्बाकू में निकोटीन होती है, जो एक शक्तिशाली Narcotic Poison है।

4. माता-पिता की आयु (Maternal Age) - लोगों में यह आम धारणा है कि अधिक आयु के माता-पिता की सन्तानें अधिक बुद्धिमान होती हैं, परन्तु यह धारणा बहुत ठीक नहीं है। हरलॉक (1974) का विचार है कि, स्त्री की आयु 21 वर्ष उपयुक्त है। इस आयु से पूर्व स्त्रियों का जनन अंग पूर्णतः परिपक्व नहीं होता है। यद्यपि बालक का जन्म तो 15 साल की लड़कियों में भी होता देखा जाता है। इसी प्रकार से स्त्री की आयु 28 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस आयु के बाद गर्भस्थ शिशु के शारीरिक विकास में अनेक अनियमितताएँ आ सकती हैं। बुद्धि परीक्षण सम्बन्धी अध्ययनों में देखा गया कि प्रतिभाशाली बालकों के पिता की औसत आयु का विस्तार 30 से 34 वर्ष था।

5. माँ की संवेगात्मक अनुभूतियाँ (Maternal Emotions ) - गर्भवती स्त्री की संवेगात्मक अनुभूतियों का गर्भस्थ शिशु के विकास पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। वह गर्भवती स्त्रियाँ, जो अपने गर्भधारण से प्रसन्न नहीं हैं, उन्हें अक्सर इस अप्रसन्नता के कारण उल्टियाँ होने लगती हैं या जी मिचला रहता है। कई बार यह भी देखा गया है कि गर्भवती स्त्रियाँ जब गर्भधारण पर प्रसन्न नहीं होती तो वे गर्भ गिराने के लिए दवाइयों का प्रयोग करती हैं। इस अवस्था में जब गर्भ सफलता से नहीं गिरता है तो कई बार देखा गया है कि असफल गर्भपात से गर्भस्थ शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास में विकार आ जाते हैं।

6. माता-पिता की अभिवृत्तियाँ (Attitudes of Mother & Father) - माता-पिता तथा परिवारीजनों की अभिवृत्तियों का प्रभाव भी गर्भस्थ शिशु के विकास पर पड़ता है; परन्तु यह प्रभाव प्रत्यक्ष न होकर अप्रत्यक्ष होता है। कई बार नवविवाहित दम्पत्ति तुरन्त बच्चा नहीं चाहते हैं क्योंकि तुरन्त बच्चे से उनका वैवाहिक समायोजन (Marital Adjustment) बिगड़ता है। इस अवस्था में यदि बच्चा हो जाता है तो माता-पिता उसे न चाहने के कारण अधिक परवाह नहीं करते जिससे शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है। कुछ माता-पिता अपने होने वाले बच्चे के सम्बन्ध में कल्पना बना लेते हैं यदि इनका स्वप्न बालक (Dream Child ) स्वस्थ, सुन्दर और कुशाग्र बुद्धि वाला है। और वास्तव में उत्पन्न होने वाला बालक इस स्वप्न बालक (Dream Child) के विपरीत विशेषताएँ रखने वाला है, तो ऐसी अवस्था में माता-पिता के बच्चे के प्रति सपने जाते हैं। वह बेमन से अपने बच्चों की सेवा करते हैं। फलस्वरूप उनका विकास प्रभावित होता है । कुछ माता-पिता बच्चा नहीं चाहते हैं; क्योंकि बच्चों से काम बढ़ जाता है। साथ ही खर्च भी बढ़ जाता है। इस प्रकार की अभिवृत्ति वाले दम्पत्ति के जब बच्चा होता है तो भी वह अपने बच्चों का सामान्य और स्वस्थ ढंग से लालन-पालन नहीं कर पाते हैं। फलस्वरूप बच्चों का सामान्य और स्वस्थ ढंग से लालन-पालन नहीं कर पाते हैं। फलस्वरूप बच्चों में विकास सम्बन्धी विकृतियाँ उत्पन्न हो जाती हैं। उपरोक्त विवरण से स्पष्ट है कि माता-पिता की अभिवृत्तियाँ गर्भस्थ शिशु के विकास को उस समय अधिक प्रभावित करती हैं, जब बच्चों का जन्म होता है।

 

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- मानव विकास को परिभाषित करते हुए इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालिए।
  2. प्रश्न- विकास सम्प्रत्यय की व्याख्या कीजिए तथा इसके मुख्य नियमों को समझाइए।
  3. प्रश्न- मानव विकास के सम्बन्ध में अनुदैर्ध्य उपागम का वर्णन कीजिए तथा इसकी उपयोगिता व सीमायें बताइये।
  4. प्रश्न- मानव विकास के सम्बन्ध में प्रतिनिध्यात्मक उपागम का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  5. प्रश्न- मानव विकास के सम्बन्ध में निरीक्षण विधि का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  6. प्रश्न- व्यक्तित्व इतिहास विधि के गुण व सीमाओं को लिखिए।
  7. प्रश्न- मानव विकास में मनोविज्ञान की भूमिका की विवेचना कीजिए।
  8. प्रश्न- मानव विकास क्या है?
  9. प्रश्न- मानव विकास की विभिन्न अवस्थाएँ बताइये।
  10. प्रश्न- मानव विकास को प्रभावित करने वाले तत्वों का वर्णन कीजिए।
  11. प्रश्न- मानव विकास के अध्ययन की व्यक्ति इतिहास विधि का वर्णन कीजिए
  12. प्रश्न- विकासात्मक अध्ययनों में वैयक्तिक अध्ययन विधि के महत्व पर प्रकाश डालिए?
  13. प्रश्न- चरित्र-लेखन विधि (Biographic method) पर प्रकाश डालिए ।
  14. प्रश्न- मानव विकास के सम्बन्ध में सीक्वेंशियल उपागम की व्याख्या कीजिए ।
  15. प्रश्न- प्रारम्भिक बाल्यावस्था के विकासात्मक संकृत्य पर टिप्पणी लिखिये।
  16. प्रश्न- गर्भकालीन विकास की विभिन्न अवस्थाएँ कौन-सी है ? समझाइए ।
  17. प्रश्न- गर्भकालीन विकास को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारक कौन-से है। विस्तार में समझाइए।
  18. प्रश्न- नवजात शिशु अथवा 'नियोनेट' की संवेदनशीलता का उल्लेख कीजिए।
  19. प्रश्न- क्रियात्मक विकास से आप क्या समझते है ? क्रियात्मक विकास का महत्व बताइये ।
  20. प्रश्न- क्रियात्मक विकास की विशेषताओं पर टिप्पणी कीजिए।
  21. प्रश्न- क्रियात्मक विकास का अर्थ एवं बालक के जीवन में इसका महत्व बताइये ।
  22. प्रश्न- संक्षेप में बताइये क्रियात्मक विकास का जीवन में क्या महत्व है ?
  23. प्रश्न- क्रियात्मक विकास को प्रभावित करने वाले तत्व कौन-कौन से है ?
  24. प्रश्न- क्रियात्मक विकास को परिभाषित कीजिए।
  25. प्रश्न- प्रसवपूर्व देखभाल के क्या उद्देश्य हैं ?
  26. प्रश्न- प्रसवपूर्व विकास क्यों महत्वपूर्ण है ?
  27. प्रश्न- प्रसवपूर्व विकास को प्रभावित करने वाले कारक कौन से हैं ?
  28. प्रश्न- प्रसवपूर्व देखभाल की कमी का क्या कारण हो सकता है ?
  29. प्रश्न- प्रसवपूर्ण देखभाल बच्चे के पूर्ण अवधि तक पहुँचने के परिणाम को कैसे प्रभावित करती है ?
  30. प्रश्न- प्रसवपूर्ण जाँच के क्या लाभ हैं ?
  31. प्रश्न- विकास को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन हैं ?
  32. प्रश्न- नवजात शिशु की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करो।
  33. प्रश्न- शैशवावस्था में (0 से 2 वर्ष तक) शारीरिक विकास एवं क्रियात्मक विकास के मध्य अन्तर्सम्बन्धों की चर्चा कीजिए।
  34. प्रश्न- नवजात शिशु की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  35. प्रश्न- शैशवावस्था में बालक में सामाजिक विकास किस प्रकार होता है?
  36. प्रश्न- शिशु के भाषा विकास की विभिन्न अवस्थाओं की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
  37. प्रश्न- शैशवावस्था क्या है?
  38. प्रश्न- शैशवावस्था में संवेगात्मक विकास क्या है?
  39. प्रश्न- शैशवावस्था की विशेषताएँ क्या हैं?
  40. प्रश्न- शिशुकाल में शारीरिक विकास किस प्रकार होता है?
  41. प्रश्न- शैशवावस्था में सामाजिक विकास पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।
  42. प्रश्न- सामाजिक विकास से आप क्या समझते है ?
  43. प्रश्न- सामाजिक विकास की अवस्थाएँ कौन-कौन सी हैं ?
  44. प्रश्न- संवेग क्या है? बालकों के संवेगों का महत्व बताइये ।
  45. प्रश्न- बालकों के संवेगों की विशेषताएँ बताइये।
  46. प्रश्न- बालकों के संवेगात्मक व्यवहार को प्रभावित करने वाले कारक कौन-से हैं? समझाइये |
  47. प्रश्न- संवेगात्मक विकास को समझाइए ।
  48. प्रश्न- बाल्यावस्था के कुछ प्रमुख संवेगों का वर्णन कीजिए।
  49. प्रश्न- बालकों के जीवन में नैतिक विकास का महत्व क्या है? समझाइये |
  50. प्रश्न- नैतिक विकास को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारक कौन-से हैं? विस्तार पूर्वक समझाइये?
  51. प्रश्न- संज्ञानात्मक विकास की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  52. प्रश्न- संज्ञानात्मक विकास क्या है? बाल्यावस्था में संज्ञानात्मक विकास किस प्रकार होता है?
  53. प्रश्न- बाल्यावस्था क्या है?
  54. प्रश्न- बाल्यावस्था की विशेषताएं बताइयें ।
  55. प्रश्न- बाल्यकाल में शारीरिक विकास किस प्रकार होता है?
  56. प्रश्न- सामाजिक विकास की विशेषताएँ बताइये।
  57. प्रश्न- संवेगात्मक विकास क्या है?
  58. प्रश्न- संवेग की क्या विशेषताएँ होती है?
  59. प्रश्न- बाल्यावस्था में संवेगात्मक विकास की विशेषताएँ क्या है?
  60. प्रश्न- कोहलबर्ग के नैतिक सिद्धान्त की आलोचना कीजिये।
  61. प्रश्न- पूर्व बाल्यावस्था में बच्चे अपने क्रोध का प्रदर्शन किस प्रकार करते हैं?
  62. प्रश्न- बालक के संज्ञानात्मक विकास से आप क्या समझते हैं?
  63. प्रश्न- संज्ञानात्मक विकास की विशेषताएँ क्या हैं?
  64. प्रश्न- किशोरावस्था की परिभाषा देते हुये उसकी अवस्थाएँ लिखिए।
  65. प्रश्न- किशोरावस्था में यौन शिक्षा पर एक निबन्ध लिखिये।
  66. प्रश्न- किशोरावस्था की प्रमुख समस्याओं पर प्रकाश डालिये।
  67. प्रश्न- संज्ञानात्मक विकास से आप क्या समझते हैं? किशोरावस्था में संज्ञानात्मक विकास किस प्रकार होता है एवं किशोरावस्था में संज्ञानात्मक विकास को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों का उल्लेख कीजिए?
  68. प्रश्न- किशोरावस्था में संवेगात्मक विकास का वर्णन कीजिए।
  69. प्रश्न- नैतिक विकास से आप क्या समझते हैं? किशोरावस्था के दौरान नैतिक विकास की विवेचना कीजिए।
  70. प्रश्न- किशोरवस्था में पहचान विकास से आप क्या समझते हैं?
  71. प्रश्न- किशोरावस्था को तनाव या तूफान की अवस्था क्यों कहा गया है?
  72. प्रश्न- अनुशासन युवाओं के लिए क्यों आवश्यक होता है?
  73. प्रश्न- किशोरावस्था से क्या आशय है?
  74. प्रश्न- किशोरावस्था में परिवर्तन से सम्बन्धित सिद्धान्त कौन-से हैं?
  75. प्रश्न- किशोरावस्था की प्रमुख सामाजिक समस्याएँ लिखिए।
  76. प्रश्न- आत्म विकास में भूमिका अर्जन की क्या भूमिका है?
  77. प्रश्न- स्व-विकास की कोई दो विधियाँ लिखिए।
  78. प्रश्न- किशोरावस्था में पहचान विकास क्या हैं?
  79. प्रश्न- किशोरावस्था पहचान विकास के लिए एक महत्वपूर्ण समय क्यों है ?
  80. प्रश्न- पहचान विकास इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
  81. प्रश्न- एक किशोर के लिए संज्ञानात्मक विकास का क्या महत्व है?
  82. प्रश्न- प्रौढ़ावस्था से आप क्या समझते हैं? प्रौढ़ावस्था में विकासात्मक कार्यों का वर्णन कीजिए।
  83. प्रश्न- वैवाहिक समायोजन से क्या तात्पर्य है ? विवाह के पश्चात् स्त्री एवं पुरुष को कौन-कौन से मुख्य समायोजन करने पड़ते हैं ?
  84. प्रश्न- एक वयस्क के कैरियर उपलब्धि की प्रक्रिया और इसमें शामिल विभिन्न समायोजन को किस प्रकार व्याख्यायित किया जा सकता है?
  85. प्रश्न- जीवन शैली क्या है? एक वयस्क की जीवन शैली की विविधताओं का वर्णन कीजिए।
  86. प्रश्न- 'अभिभावकत्व' से क्या आशय है?
  87. प्रश्न- अन्तरपीढ़ी सम्बन्ध क्या है?
  88. प्रश्न- विविधता क्या है ?
  89. प्रश्न- स्वास्थ्य मनोविज्ञान में जीवन शैली क्या है?
  90. प्रश्न- लाइफस्टाइल साइकोलॉजी क्या है ?
  91. प्रश्न- कैरियर नियोजन से आप क्या समझते हैं?
  92. प्रश्न- युवावस्था का मतलब क्या है?
  93. प्रश्न- कैरियर विकास से क्या ताप्पर्य है ?
  94. प्रश्न- मध्यावस्था से आपका क्या अभिप्राय है ? इसकी विभिन्न विशेषताएँ बताइए।
  95. प्रश्न- रजोनिवृत्ति क्या है ? इसका स्वास्थ्य पर प्रभाव एवं बीमारियों के संबंध में व्याख्या कीजिए।
  96. प्रश्न- मध्य वयस्कता के दौरान होने बाले संज्ञानात्मक विकास को किस प्रकार परिभाषित करेंगे?
  97. प्रश्न- मध्यावस्था से क्या तात्पर्य है ? मध्यावस्था में व्यवसायिक समायोजन को प्रभावित करने वाले कारकों पर प्रकाश डालिए।
  98. प्रश्न- मिडलाइफ क्राइसिस क्या है ? इसके विभिन्न लक्षणों की व्याख्या कीजिए।
  99. प्रश्न- उत्तर वयस्कावस्था में स्वास्थ्य पर टिप्पणी लिखिए।
  100. प्रश्न- स्वास्थ्य के सामान्य नियम बताइये ।
  101. प्रश्न- मध्य वयस्कता के कारक क्या हैं ?
  102. प्रश्न- मध्य वयस्कता के दौरान कौन-सा संज्ञानात्मक विकास होता है ?
  103. प्रश्न- मध्य वयस्कता में किस भाव का सबसे अधिक ह्रास होता है ?
  104. प्रश्न- मध्यवयस्कता में व्यक्ति की बुद्धि का क्या होता है?
  105. प्रश्न- मध्य प्रौढ़ावस्था को आप किस प्रकार से परिभाषित करेंगे?
  106. प्रश्न- प्रौढ़ावस्था के मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष के आधार पर दी गई अवस्थाओं का वर्णन कीजिए।
  107. प्रश्न- मध्यावस्था की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  108. प्रश्न- क्या मध्य वयस्कता के दौरान मानसिक क्षमता कम हो जाती है ?
  109. प्रश्न- उत्तर वयस्कावस्था (50-60) वर्ष में मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक समायोजन पर संक्षेप में प्रकाश डालिये।
  110. प्रश्न- उत्तर व्यस्कावस्था में कौन-कौन से परिवर्तन होते हैं तथा इन परिवर्तनों के परिणामस्वरूप कौन-कौन सी रुकावटें आती हैं?
  111. प्रश्न- पूर्व प्रौढ़ावस्था की प्रमुख विशेषताओं के बारे में लिखिये ।
  112. प्रश्न- वृद्धावस्था में नाड़ी सम्बन्धी योग्यता, मानसिक योग्यता एवं रुचियों के विभिन्न परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
  113. प्रश्न- सेवा निवृत्ति के लिए योजना बनाना क्यों आवश्यक है ? इसके परिणामों की चर्चा कीजिए।
  114. प्रश्न- वृद्धावस्था की विशेषताएँ लिखिए।
  115. प्रश्न- वृद्धावस्था से क्या आशय है ? संक्षेप में लिखिए।
  116. प्रश्न- उत्तर वयस्कावस्था (50-60 वर्ष) में हृदय रोग की समस्याओं का विवेचन कीजिए।
  117. प्रश्न- वृद्धावस्था में समायोजन को प्रभावित करने वाले कारकों को विस्तार से समझाइए ।
  118. प्रश्न- उत्तर वयस्कावस्था में स्वास्थ्य पर टिप्पणी लिखिए।
  119. प्रश्न- स्वास्थ्य के सामान्य नियम बताइये ।
  120. प्रश्न- रक्तचाप' पर टिप्पणी लिखिए।
  121. प्रश्न- आत्म अवधारणा की विशेषताएँ क्या हैं ?
  122. प्रश्न- उत्तर प्रौढ़ावस्था के कुशल-क्षेम पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
  123. प्रश्न- संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  124. प्रश्न- जीवन प्रत्याशा से आप क्या समझते हैं ?
  125. प्रश्न- अन्तरपीढ़ी सम्बन्ध क्या है?
  126. प्रश्न- वृद्धावस्था में रचनात्मक समायोजन पर टिप्पणी लिखिए।
  127. प्रश्न- अन्तर पीढी सम्बन्धों में तनाव के कारण बताओ।

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