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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 हिन्दी - हिन्दी का राष्ट्रीय काव्य

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :200
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2785
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 हिन्दी - हिन्दी का राष्ट्रीय काव्य - सरल प्रश्नोत्तर

माखनलाल चतुर्वेदी के काव्य में राष्ट्र चेतना

प्रश्न- "कवि माखनलाल चतुर्वेदी जी के काव्य में राष्ट्रीय चेतना लक्षित होती है।" इस कथन की सोदाहरण पुष्टि कीजिए।

उत्तर -

प्रस्तावना  - माखनलाल चतुर्वेदी जी समसामयिक युगदृष्टा एवं राष्ट्रीय स्वर को उजागर करनेवाले सच्चे राष्ट्रीय कवि थे। मैथिलीशरण गुप्त, माखनलाल चतुर्वेदी, बालकृष्ण शर्मा नवीन और रामधारी सिंह 'दिनकर' आदि हिन्दी राष्ट्रीय काव्यधारा के प्रमुख स्तम्भ हैं। उनके काव्य में अनन्य देश-प्रेम और निश्चल समर्पण की भावना है। यही देश-प्रेम कालान्तर में उनके जीवन का एक शक्तिशाली स्वर बन गया। 'पुष्प की अभिलाषा' उनकी सर्वाधिक चर्चित कविता रही और इसके लिए उन्हें सागर विश्वविद्यालय द्वारा डी0 लिट0 की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इसके अलावा अपने काव्य संग्रह 'हिम तरंगिणी' के लिए उन्हें सन् 1955 में 'साहित्य अकादमी' पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। देश-प्रेम से ओतप्रोत उनकी कविता 'पुष्प की अभिलाषा' को कोई नहीं भूल सकता-

"चाह नहीं मैं सुरबाला के, गहनों में गूँथा जाऊँ
चाह नहीं, प्रेमी-माला में, बिंध प्यारी को ललचाऊँ
चाह नहीं, सम्राटों के शव, पर हे हरि, डाला जाऊँ
"चाह नहीं, देवों के सिर पर चढ़ भाग्य पर इठलाऊँ
मुझे तोड़ लेना वनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने, जिस पथ जावें वीर अनेक ॥"

स्वाधीनता के प्रति चिन्तित - माखनलाल चतुर्वेदी और अन्य नेता आजादी के लिए वे बहुत चिन्तित थे। लगातार इस दिशा में चिन्तन-मनन करते रहे। इसी कारण 1908 में हिन्द केसरी में आयोजित 'राष्ट्रीय आन्दोलन और बहिष्कार' निबन्ध प्रतियोगिता में उनको पहला स्थान मिला। 'मेरा भारत देश महान' के अनुसार माखनलाल जी ने हमेशा अपने देश को महान ही समझा है। अपने देश और गरिमामयी संस्कृति का वर्णन अपनी कविता 'प्यारे भारत देश में इस प्रकार किया-

"प्यारे भारत देश
गगन-गगन तेरा यश फहरा
पवन पवन तेरा बल गहरा
क्षिति-जल - नभ पर डाल हिंडोले
चरण चरण संचरण सुनहरा ओ ऋषियों के त्वेष
प्यारे भारत देश।।"

'भारतीय आत्मा' की उपाधि - माखनलाल चतुर्वेदी हिन्दी साहित्य में 'एक भारतीय आत्मा' के नाम से प्रख्यात हैं। स्वतन्त्रता संग्राम की ओर आकर्षित होकर गाँधीवाद से प्रभावित हो गए। स्वतन्त्रता- संग्राम के सक्रिय सेनानी होने के कारण कई बार इनको जेल भी जाना पड़ा। इनकी कविता में अनुभूति, भावना, आदर्श, त्याग, राष्ट्र-प्रेम, समाज कल्याण आदि का बड़ा महत्त्व है। महात्मा गांधी जी की सत्य, अहिंसा, तिलक की बलिदान भावना और कविवर रवीन्द्र की मानवपूजा आदि इनके काव्य के आधार- तत्त्व हैं। 'एक भारतीय आत्मा' नाम माखनलाल जी के लिए अत्यन्त योग्य उपनाम है। क्योंकि 'एक भारतीय आत्मा' उस व्यक्ति का नाम है जिसने भारत और भारतीयता की अस्मितता को पूरी तरह आत्मसात कर उसकी रक्षा में अपनी रचनाधर्मिता को समर्पित करने में विश्वास किया। 'एक भारतीय आत्मा' ऐसा नाम है, जिसने भारत की परतन्त्रता को स्वीकार करने के बजाय उसकी स्वतन्त्रता के लिए कारावास का कष्ट झेलने में भी सुख का अनुभव किया। भारतीय आत्मा शब्द का संकेत है कि भारत मेरा देश है और मैं इसकी आत्मा हूँ। यह एक ऐसा उपनाम है जो कवि के मानस में व्याप्त भारत देश पर अपने नैसर्गिक अधिकार को दर्शाता है। सच में माखनलाल जी में देश-प्रेम कूट-कूट कर भरा हुआ था, अपने आप को और देश के सभी जवानों को सिपाही मानते थे। उनकी 'सिपाही' कविता की कुछ पंक्तियाँ देखेंगे तो देश-प्रेम उमड़ आयेगा-

बोल अरे सेनापति मेरे!
मन की घुंडी खोल,
जल, थल, नभ, हिल-डुल जाने दे,
तू किंचित् मत डोल !
दे हथियार या कि मत दे तू
पर तू कर हुंकार,
ज्ञातों को मत, अज्ञातोंको,
तू इस बार पुकार !
धीरज रोग, प्रतीक्षा चिन्ता,
सपने बनें तबाही,
कह 'तैयार'! द्वार खुलने दें,
मैं हूँ एक सिपाही!

पत्रकारिता को माध्यम - उन्होंने अपनी पत्रकारिता के माध्यम से ब्रिटिश शासन के खिलाफ अपनी आवाज़ को बुलन्द किया और युवाओं से देश की स्वतन्त्रता के लिए मर-मिटने का आह्वान किया। उनकी रचनाओं में सशक्त भावनाओं को महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। पत्रकारिता के क्षेत्र में एक नया बदलाव माखनलाल जी से ही प्रारम्भ हुआ है।

माखनलाल चतुर्वेदी जी का जीवन असामान्य था, उनका सम्पूर्ण जीवन ही देश के लिए समर्पित था। जैसे स्वामी विवेकानन्द को एक कोरा सन्यासी, महात्मा गाँधी जी को कोरा राजनेता कहकर टाला नहीं जा सकता, ठीक उसी प्रकार पंडित माखनलाल चतुर्वेदी को कोरा साहित्यकार या पत्रकार कह कर नहीं टाला जा सकता है। पंडित माखनलाल चतुर्वेदी का अद्भुत व्यक्तित्व स्वतन्त्र सेनानी, विशुद्ध साहित्यकार क्रान्तिकारी कवि एवं निर्भीक पत्रकार की मिली-जुली रेखाओं से बनता है। वे कर्म से योद्धा, बुद्धि से चिन्तक, दिल से कवि स्वभाव से सन्त और अद्भुत बेजोड़ प्रवक्ता थे। उनका सम्पूर्ण जीवन और चिन्तन भारतीय समाज की रक्षा करने और संवारने के सन्दर्भ में अभिव्यक्त हुआ है। माखनलाल जी का जीवन जन साधारण सा नहीं था। उनके व्यक्तित्व के विकास के कारण सामान्य परिवार में जन्म और संघर्षपूर्ण जीवन था। वे अपने संघर्षरत जीवन के बारे में कहते हैं कि

"सूली का पथ ही सीखा हूँ, सुविधा सदा बचाता आया।
मैं बलि पथ का अंगारा हूँ, जीवन ज्वाला जलाता आया।"

कुशल वक्ता -  माखनलाल एक कुशल वक्ता भी थे। जब वे बोलते थे तो लोग शान्त हो जाते थे। उनके वक्तृत्व कला पर महात्मा गाँधी भी मुग्ध थे। उन्होंने एक बार टिप्पणी की थी— 'हम सब लोग तो बात करते हैं, बोलना तो माखनलाल जी ही जानते हैं।' सन् 1933 में मध्यप्रदेश में महात्मा गाँधी जी के हरिजन दौरे के समय बाबई पहुँचे थे। तब उन्होंने कहा था- 'मैं बाबई जैसे छोटे स्थान पर इसलिए जा रहा हूँ क्योंकि वह माखनलाल जी का जन्म स्थान है। जिस भूमि ने माखनलाल जी को जन्म दिया है, उसी भूमि को मैं सम्मान देना चाहता हूँ।' माखनलाल जी ने अपने से भी ज्यादा हमेशा देश को ही चाहा है, प्राणों की चिन्ता तो उन्हें कभी थी ही नहीं। इसलिए उनकी 'कैसी है पहिचान तुम्हारी कविता की पंक्तियाँ याद आती हैं-

कैसी है पहिचान तुम्हारी,
राह भूलने पर मिलते हो!
प्राण, कौन से स्वप्न दिख गये,
जो बलि के फूलों खिलते हो।
कैसी है पहिचान तुम्हारी,
राह भूलने पर मिलते हो ॥

स्वाधीनता आन्दोलनों में सहभागिता -  माखनलाल जी के काव्य में बलिदान, समर्पण, विद्रोह, गाँधीवादी दृष्टि, वीर-पूजा तथा प्रेम-आराधना के स्वर प्रमुख है। देश की स्वतन्त्रता के लिए कृतसंकल्प लोकमान्य बालगंगाधर तिलक से दादा माखनलाल प्रभावित थे। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी के सम्पर्क में आने के बाद वे स्वतन्त्रता आन्दोलन में कूद पड़े। वे कई बार जेल गए। बिलासपुर में सन् 1922 में भड़काऊ भाषण देने के लिए उन्हें जेल जाना पड़ा। इसी दौरान उन्होंने बिलासपुर जेल में 'पुष्प की अभिलाषा' कविता की रचना की। उन्होंने अपनी रचना से जनमानस को स्वतन्त्रता की लड़ाई के लिए उत्प्रेरित किया। कर्मवीर में उनके द्वारा लिखे गए लेखों ने अंग्रेज सरकार की नींद उड़ा दी थी। माखनलाल जी का मानना था कि विदेशी शोषण और अत्याचार के खिलाफ जिस व्यक्ति के हृदय में ज्वाला न धधके तो वो कैसा भारतीय है? उसका जीवन ही निरर्थक है, वह मृत सदृश है-

'द्वार बलि का खोल
चल भूडोल कर दे
एक हिम-गिरि एक सिर
का मोल कर दें,
मसलकर, अपने इरादों-सी, उठाकर,
दो हथैली हैं कि
पृथ्वी गोल कर दें
रक्त है या है नसों में क्षुद्र पानी।
जाँच कर, तू सीस दे-देकर जवानी।"

निष्कर्ष - माखनलाल चतुर्वेदी सरल भाषा और ओजपूर्ण भावनाओं के अनूठे हिन्दी रचनाकार थे। राष्ट्रीयता माखनलाल चतुर्वेदी के काव्य का कलेवर है तथा रहस्यात्मक प्रेम उनकी आत्मा है। 30 जनवरी सन् 1968 को साहित्य जगत का यह सितारा संसार से सदा के लिए ओझल हो गया। अब तो उनकी स्मृति ही शेष है। दादा माखनलाल जीवनभर पतझड़ झेलते रहे, पर दूसरों के लिए हमेशा बसन्त की कामना की। वे एक ऐसे क्रान्तिदृष्टा थे, जिन्होंने जीवन के हर क्षेत्र में संघर्ष किया। ऐसे 'एक भारतीय आत्मा' को शत् शत् नमन करते हुए आइए उनकी कविता 'दीप से दीप जले' के अनुसार देश- प्रेम का, मानवता का दीप जलाएँ-

"सुलग सुलग री जोत दीप से दीप मिलें
कर-कंकण बज उठे, भूमि पर प्राण फलें।
युग के दीप नए मानव, मानवी ढलें
सुलग सुलग री जोत! दीप से दीप जलें

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    अनुक्रम

  1. अध्याय - 1 चंदबरदाई : पृथ्वीराज रासो के रेवा तट समय के अंश
  2. प्रश्न- रासो की प्रमाणिकता पर विचार कीजिए।
  3. प्रश्न- पृथ्वीराज रासो महाकाव्य की भाषा पर अपना मत स्पष्ट कीजिए।
  4. प्रश्न- पृथ्वीराज रासो को जातीय चेतना का महाकाव्य कहना कहाँ तक उचित है। तर्क संगत उत्तर दीजिए।
  5. प्रश्न- पृथ्वीराज रासो के सत्ताइसवें सर्ग 'रेवा तट समय' का सारांश लिखिए।
  6. प्रश्न- रासो शब्द की व्युत्पत्ति के सम्बन्ध में प्राप्त मतों का संक्षिप्त उल्लेख कीजिए।
  7. प्रश्न- पृथ्वीराज रासो' में अभिव्यक्त इतिहास पक्ष की विवेचना कीजिए।
  8. प्रश्न- विद्यापति भोग के कवि हैं? क्यों?
  9. अध्याय - 2 जगनिक : आल्हा खण्ड
  10. प्रश्न- जगनिक के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  11. प्रश्न- जगनिक कृत 'आल्हाखण्ड' का उल्लेख कीजिए।
  12. प्रश्न- आल्हा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  13. प्रश्न- कवि जगनिक द्वारा आल्हा ऊदल की कथा सृजन का उद्देश्य वर्णित कीजिए। उत्तर -
  14. प्रश्न- 'आल्हा' की कथा का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
  15. प्रश्न- कवि जगनिक का हिन्दी साहित्य में स्थान निर्धारित कीजिए।
  16. अध्याय - 3 गुरु गोविन्द सिंह
  17. प्रश्न- गुरु गोविन्द सिंह के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  18. प्रश्न- गुरु गोविन्द सिंह की रचनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
  19. प्रश्न- गुरु गोविन्द सिंह' की भाषा पर प्रकाश डालिए।
  20. प्रश्न- सिख धर्म में दशम ग्रन्थ का क्या महत्व है?
  21. प्रश्न- गुरु गोविन्द सिंह के पश्चात् सिख धर्म में किस परम्परा का प्रचलन हुआ?
  22. अध्याय - 4 भूषण
  23. प्रश्न- महाकवि भूषण का संक्षिप्त जीवन और साहित्यिक परिचय दीजिए।
  24. प्रश्न- भूषण ने किन काव्यों की रचना की?
  25. प्रश्न- भूषण की वीर भावना का स्वरूप क्या है?
  26. प्रश्न- वीर भावना कितने प्रकार की होती है?
  27. प्रश्न- भूषण की युद्ध वीर भावना की उदाहरण सहित विवेचना कीजिए।
  28. अध्याय - 5 भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
  29. प्रश्न- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की शैलीगत विशेषताओं को निरूपित कीजिए।
  30. प्रश्न- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के काव्य की भाव-पक्षीय विशेषताओं का निरूपण कीजिए।
  31. प्रश्न- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की भाषागत विशेषताओं का विवेचन कीजिए।
  32. प्रश्न- भारतेन्दु जी के काव्य की कला पक्षीय विशेषताओं का निरूपण कीजिए।
  33. प्रश्न- भीतर भीतर सब रस चूस पद की व्याख्या कीजिए।
  34. अध्याय - 6 अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
  35. प्रश्न- अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' का जीवन परिचय दीजिए।
  36. प्रश्न- अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' के काव्य की भाव एवं कला की भाव एवं कलापक्षीय विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  37. प्रश्न- सिद्ध कीजिए अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' द्विवेदी युग के प्रतिनिधि कवि हैं।
  38. प्रश्न- हरिऔध जी का रचना संसार एवं रचना शिल्प पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
  39. प्रश्न- प्रिय प्रवास की छन्द योजना पर विचार कीजिए।
  40. प्रश्न- 'जन्मभूमि' कविता में कवि हरिऔध जी का देश की भूमि के प्रति क्या भावना लक्षित होती है?
  41. अध्याय - 7 मैथिलीशरण गुप्त
  42. प्रश्न- मैथिलीशरण गुप्त का जीवन-परिचय देते हुए उनकी रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
  43. प्रश्न- 'गुप्त जी राष्ट्रीय कवि की अपेक्षा जातीय कवि अधिक हैं। उपर्युक्त कथन की युक्तिपूर्ण विवेचना कीजिए।
  44. प्रश्न- गुप्त जी के काव्य के कला-पक्ष की समीक्षा कीजिए।
  45. प्रश्न- मैथिलीशरण गुप्त की कविता मातृभूमि का भाव व्यक्त कीजिए।
  46. प्रश्न- मैथिलीशरण गुप्त किस कवि के रूप में विख्यात हैं? उल्लेख कीजिए।
  47. प्रश्न- 'मातृभूमि' कविता में मैथिलीशरण गुप्त ने क्या पिरोया है?
  48. प्रश्न- मैथिलीशरण गुप्त के प्रथम काव्य संग्रह का क्या नाम है? साकेत की कथावस्तु का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  49. प्रश्न- मैथिलीशरण गुप्त ने आर्य शीर्षक कविता में क्या उल्लेख किया है?
  50. अध्याय - 8 जयशंकर प्रसाद
  51. प्रश्न- सिद्ध कीजिए "प्रसाद का प्रकृति-चित्रण बड़ा सजीव एवं अनूठा है।'
  52. प्रश्न- महाकवि जयशंकर प्रसाद के काव्य में राष्ट्रीय चेतना का निरूपण कीजिए।
  53. प्रश्न- 'प्रसाद' के कलापक्ष का विश्लेषण कीजिए।
  54. प्रश्न- 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' कविता का सारांश / सार/ कथ्य अपने शब्दों में लिखिए।
  55. प्रश्न- प्रसाद जी द्वारा रचित राष्ट्रीय काव्यधारा से ओत-प्रोत 'प्रयाण गीत' का सारांश लिखिए।
  56. प्रश्न- जयशंकर प्रसाद जी का हिन्दी साहित्य में स्थान निर्धारित कीजिए।
  57. प्रश्न- प्रसाद जी के काव्य में नवजागरण की मुख्य भूमिका रही है। तथ्यपूर्ण उत्तर दीजिए।
  58. अध्याय - 9 सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
  59. प्रश्न- 'सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' एक क्रान्तिकारी कवि थे।' इस दृष्टि से उनकी काव्यगत प्रवृत्तियों की समीक्षा कीजिए।
  60. प्रश्न- 'निराला ओज और सौन्दर्य के कवि हैं। इस कथन की विवेचना कीजिए।
  61. प्रश्न- निराला के काव्य-भाषा पर एक निबन्ध लिखिए। यथोचित उदाहरण भी दीजिए।
  62. प्रश्न- निराला के जीवन का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  63. प्रश्न- निराला के काव्य में अभिव्यक्त वैयक्तिकता पर प्रकाश डालिए।
  64. प्रश्न- निराला के काव्य में प्रकृति का किन-किन रूपों में चित्रण हुआ है? स्पष्ट कीजिए।
  65. प्रश्न- निराला के साहित्यिक जीवन का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  66. प्रश्न- निराला की सांस्कृतिक चेतना पर प्रकाश डालिए।
  67. प्रश्न- निराला की विद्रोहधर्मिता पर प्रकाश डालिए।
  68. प्रश्न- महाकवि निराला जी की 'भारती जय-विजय करे' कविता का सारांश लिखिए।
  69. अध्याय - 10 माखनलाल चतुर्वेदी
  70. प्रश्न- माखनलाल चतुर्वेदी के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  71. प्रश्न- "कवि माखनलाल चतुर्वेदी जी के काव्य में राष्ट्रीय चेतना लक्षित होती है।" इस कथन की सोदाहरण पुष्टि कीजिए।
  72. प्रश्न- 'माखनलाल जी' की साहित्यिक साधना पर प्रकाश डालिए?
  73. प्रश्न- माखनलाल चतुर्वेदी ने साहित्य रचना का महत्व किस प्रकार प्रकट किया?
  74. प्रश्न- साहित्य पत्रकारिता में माखन लाल चतुर्वेदी का क्या स्थान है
  75. प्रश्न- 'पुष्प की अभिलाषा' कविता का सारांश लिखिए।
  76. प्रश्न- माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा रचित 'जवानी' कविता का सारांश लिखिए।
  77. अध्याय - 11 सुभद्रा कुमारी चौहान
  78. प्रश्न- कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान के जीवन और साहित्य पर प्रकाश डालिए।
  79. प्रश्न- सुभद्रा कुमारी चौहान किस कविता के माध्यम से क्रान्ति का स्मरण दिलाती हैं?
  80. प्रश्न- 'वीरों का कैसा हो वसंत' कविता का सारांश लिखिए।
  81. प्रश्न- 'झाँसी की रानी' गीत का सारांश लिखिए।
  82. अध्याय - 12 बालकृष्ण शर्मा नवीन
  83. प्रश्न- पं. बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' जी का जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  84. प्रश्न- कवि बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' जी की राष्ट्रीय चेतना / भावना पर प्रकाश डालिए।
  85. प्रश्न- 'विप्लव गायन' गीत का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  86. प्रश्न- नवीन जी के 'हिन्दुस्तान हमारा है' गीत का सारांश लिखिए।
  87. प्रश्न- कवि बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' स्वाधीनता के पुजारी हैं। इस कथन को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
  88. अध्याय - 13 रामधारी सिंह 'दिनकर'
  89. प्रश्न- दिनकर जी राष्ट्रीय चेतना और जनजागरण के कवि हैं। विवेचना कीजिए।
  90. प्रश्न- "दिनकर" के काव्य के भाव पक्ष को निरूपित कीजिए।
  91. प्रश्न- 'दिनकर' के काव्य के कला पक्ष का विवेचन कीजिए।
  92. प्रश्न- रामधारी सिंह दिनकर का संक्षिप्त जीवन-परिचय दीजिए।
  93. प्रश्न- दिनकर जी द्वारा विदेशों में किए गए भ्रमण पर प्रकाश डालिए।
  94. प्रश्न- दिनकर जी की काव्यधारा का क्रमिक विकास बताइए।
  95. प्रश्न- शहीद स्तवन (कलम आज उनकी जयबोल) का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  96. प्रश्न- दिनकर जी की 'हिमालय' कविता का सारांश लिखिए।
  97. अध्याय - 14 श्यामलाल गुप्त 'पार्षद'
  98. प्रश्न- कवि श्यामलाल गुप्त का जीवन परिचय एवं राष्ट्र चेतना पर प्रकाश डालिए।
  99. प्रश्न- झण्डा गीत का सारांश लिखिए।
  100. प्रश्न- पार्षद जी ने स्वाधीनता आन्दोलन में शामिल होने के कारण क्या-क्या कष्ट सहन किये।
  101. प्रश्न- श्यामलाल गुप्त पार्षद के हिन्दी साहित्य में योगदान के लिए क्या सम्मान मिला?
  102. अध्याय - 15 श्यामनारायण पाण्डेय
  103. प्रश्न- श्यामनारायण पाण्डे के जीवन और साहित्य पर प्रकाश डालिए।
  104. प्रश्न- श्यामनारायण पाण्डेय ने राष्ट्रीय चेतना का संचार किस प्रकार किया?
  105. प्रश्न- श्यामनारायण पाण्डेय द्वारा रचित 'चेतक की वीरता' कविता का सार लिखिए।
  106. प्रश्न- 'राणा की तलवार' कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  107. अध्याय - 16 द्वारिकाप्रसाद माहेश्वरी
  108. प्रश्न- प्रसिद्ध बाल कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी का जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  109. प्रश्न- 'उठो धरा के अमर सपूतों' का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  110. प्रश्न- वीर तुम बढ़े चलो गीत का सारांश लिखिए।
  111. अध्याय - 17 गोपालप्रसाद व्यास
  112. प्रश्न- कवि गोपालप्रसाद 'व्यास' का एक राष्ट्रीय कवि के रूप में परिचय दीजिए।
  113. प्रश्न- कवि गोपाल प्रसाद व्यास किस भाषा के मर्मज्ञ माने जाते थे?
  114. प्रश्न- गोपाल प्रसाद व्यास द्वारा रचित खूनी हस्ताक्षर कविता का सारांश लिखिए।
  115. प्रश्न- "शहीदों में तू अपना नाम लिखा ले रे" कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  116. अध्याय - 18 सोहनलाल द्विवेदी
  117. प्रश्न- कवि सोहनलाल द्विवेदी जी का जीवन और साहित्य क्या था? स्पष्ट कीजिए।
  118. प्रश्न- कवि सोहनलाल द्विवेदी के काव्य में समाहित राष्ट्रीय चेतना का उल्लेख कीजिए।
  119. प्रश्न- 'मातृभूमि' कविता का केन्द्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
  120. प्रश्न- 'तुम्हें नमन' कविता का सारांश लिखिए।
  121. प्रश्न- कवि सोहनलाल द्विवेदी जी ने महात्मा गाँधी को अपने काव्य में क्या स्थान दिया है?
  122. प्रश्न- सोहनलाल द्विवेदी जी की रचनाएँ राष्ट्रीय जागरण का पर्याय हैं। स्पष्ट कीजिए।
  123. अध्याय - 19 अटल बिहारी वाजपेयी
  124. प्रश्न- कवि अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  125. प्रश्न- अटल बिहारी वाजपेयी के कवि रूप पर प्रकाश डालिए।
  126. प्रश्न- अटल जी का काव्य जन सापेक्ष है। सिद्ध कीजिए।
  127. प्रश्न- अटल जी की रचनाओं में भारतीयता का स्वर मुखरित हुआ है। स्पष्ट कीजिए।
  128. प्रश्न- कदम मिलाकर चलना होगा कविता का सारांश लिखिए।
  129. प्रश्न- उनकी याद करें कविता का सारांश लिखिए।
  130. अध्याय - 20 डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक'
  131. प्रश्न- डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' के जीवन और साहित्य पर प्रकाश डालिए।
  132. प्रश्न- निशंक जी के साहित्य के विषय में अन्य विद्वानों के मतों पर प्रकाश डालिए।
  133. प्रश्न- डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक'के साहित्यिक जीवन पर प्रकाश डालिए।
  134. प्रश्न- हम भारतवासी कविता का सारांश लिखिए।
  135. प्रश्न- मातृवन्दना कविता का सारांश लिखिए।
  136. अध्याय - 21 कवि प्रदीप
  137. प्रश्न- कवि प्रदीप के जीवन और साहित्य का चित्रण कीजिए।
  138. प्रश्न- कवि प्रदीप की साहित्यिक अभिरुचि का परिचय दीजिए।
  139. प्रश्न- कवि प्रदीप किस विचारधारा के पक्षधर थे?
  140. प्रश्न- 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गीत का आधार क्या था?
  141. प्रश्न- गीतकार और गायक के रूप में कवि प्रदीप की लोकप्रियता कब हुई?
  142. प्रश्न- स्वतन्त्रता आन्दोलन में कवि प्रदीप की क्या भूमिका रही?
  143. अध्याय - 22 साहिर लुधियानवी
  144. प्रश्न- साहिर लुधियानवी का साहित्यिक परिचय दीजिए।
  145. प्रश्न- 'यह देश है वीर जवानों का' गीत का सारांश लिखिए।
  146. प्रश्न- साहिर लुधियानवी के गीतों में किन सामाजिक समस्याओं को उठाया गया है?
  147. अध्याय - 23 प्रेम धवन
  148. प्रश्न- गीतकार प्रेम धवन के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  149. प्रश्न- गीतकार प्रेम धवन के गीत देशभक्ति से ओतप्रोत हैं। स्पष्ट कीजिए।
  150. प्रश्न- 'छोड़ों कल की बातें' गीत किस फिल्म से लिया गया है? कवि ने इसमें क्या कहना चाहा है?
  151. प्रश्न- 'ऐ मेरे प्यारे वतन' गीत किस पृष्ठभूमि पर आधारित है?
  152. अध्याय - 24 कैफ़ी आज़मी
  153. प्रश्न- गीतकार कैफी आज़मी के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  154. प्रश्न- "सर हिमालय का हमने न झुकने दिया।" इस पंक्ति का क्या भाव है?
  155. प्रश्न- "कर चले हम फिदा जानोतन साथियों" गीत का प्रतिपाद्य / सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  156. प्रश्न- सैनिक अपनी मातृभूमि के प्रति क्या भाव रखता है?
  157. अध्याय - 25 राजेन्द्र कृष्ण
  158. प्रश्न- गीतकार राजेन्द्र कृष्ण के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  159. प्रश्न- 'जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती हैं बसेरा' गीत का मूल भाव क्या है?
  160. अध्याय - 26 गुलशन बावरा
  161. प्रश्न- गीतकार गुलशन बावरा के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  162. प्रश्न- 'मेरे देश की धरती सोना उगले गीत का प्रतिपाद्य लिखिए। '
  163. अध्याय - 27 इन्दीवर
  164. प्रश्न- गीतकार इन्दीवर के जीवन और फिल्मी कैरियर का वर्णन कीजिए।
  165. प्रश्न- 'है प्रीत जहाँ की रीत सदा' गीत का मुख्य भाव क्या है?
  166. प्रश्न- गीतकार इन्दीवर ने किन प्रमुख फिल्मों में गीत लिखे?
  167. अध्याय - 28 प्रसून जोशी
  168. प्रश्न- गीतकार प्रसून जोशी के जीवन और साहित्य का चित्रण कीजिए।
  169. प्रश्न- 'देश रंगीला रंगीला' गीत में गीतकार प्रसून जोशी ने क्या चित्रण किया है?
  170. प्रश्न- 'देश रंगीला रंगीला' गीत में कवि ने इश्क का रंग कैसा बताया है?

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