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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 हिन्दी - हिन्दी का राष्ट्रीय काव्य

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :200
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2785
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 हिन्दी - हिन्दी का राष्ट्रीय काव्य - सरल प्रश्नोत्तर

अध्याय - 18 
सोहनलाल द्विवेदी

मातृभूमि, तुम्हें नमन
चल पड़े जिधर दो डग मग में)

व्याख्या भाग

1. मातृभूमि


ऊँचा खड़ा हिमालय, आकाश चूमता है,
नीचे चरण तले पड़, नित सिन्धु झूमता है।
गंगा, यमुना, त्रिवेणी, नदियाँ लहर रही हैं,
जगमग छटा निराली, पग-पग पर छहर रही है।
वह पुण्य भूमि मेरी, वह स्वर्णभूमि मेरी।
वह जन्म भूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी ॥

शब्दार्थ - तले = नीचे। नित = प्रतिदिन। सिन्धु = सागर। निराली = अनोखी छहर= रही छायी हुई।

सन्दर्भ - प्रस्तुत पंक्तियाँ मातृभूमि कविता से अवतरित है। जिसके रचयिता सुप्रसिद्ध कवि श्री सोहन लाल द्विवेदी जी हैं।

प्रसंग - इन पंक्तियों में कवि ने भारत के प्राकृतिक सौन्दर्य और समृद्धि का वर्णन किया है।

व्याख्या - उत्तर दिशा में हिमालय पर्वत स्थित है। जिसकी ऊँची चोटियाँ आकाश का स्पर्श करती दिखाई देती है। विश्व का सबसे ऊँचा पर्वत भारत के गौरव का प्रतीक है। इस देश के दक्षिण दिशा में स्थित हिन्दी महासागर भारत माँ के चरणों का स्पर्श करके मानो अपने सौभाग्य पर इतराता है। इस देश में गंगा यमुना और सरस्वती जैसी पवित्र नदी का अनोखा संगम है। जिसका अद्भुत सौन्दर्य चारों ओर छाया दिखाई देता है। नदियों के पवित्र जल से सिंचित भारत की धरती हरी भरी और सुन्दर दिखाई देती है। यह धरती पवित्र भाँति भाँति के खनिज पदार्थों औषधि वनस्पतियों से सम्पन्न है। ऐसा महान देश मेरी जन्म भूमि है मेरी मातृभूमि मुझे इस सौभाग्य पर गर्व है।

काव्यगत सौन्दर्य -

1. कवि की राष्ट्रचेतना दर्शनीय है।
2. भाषा - सहज, सरल, ओजमयी खड़ी बोली।
3. रस - वीर रस।
4. अलंकार - उल्लेख, अनुप्रास।

झरने अनेक झरते जिसकी पहाड़ियों में,
चिड़ियाँ चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में।
अमराइयाँ घनी हैं, कोयल पुकारती है,
बहती मलय पवन है, तन मन सँवारती है।
वह धर्मभूमि मेरी, वह कर्मभूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।

शब्दार्थ - मस्त = प्रसन्ना अमराइयाँ = आम के बगीचे। मलय पवन = सुगन्धित वायु।

सन्दर्भ एवं प्रसंग - पूर्ववत्।

व्याख्या - कवि कहते हैं कि भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में कल कल बहते हुए झरने यहाँ की शोभा बढ़ाते हैं। इन हरे-भरे वन्य प्रदेशों में चिड़ियों की मधुर चहचहाहट से वातावरण मदमस्त हो जाता है। आम के घने बगीचों में वसंत ऋतु के आगमन पर कोयल की मीठी कूक सुनाई देती है। भारत के दक्षिण में स्थित हिमालय पर्वत से बहने वाली शीतल और सुगन्धित हवा प्राणियों को तन मन को स्फूर्ति व ताजगी से भर देती है। यहाँ अनेक धर्मों की स्थापना हुई जिससे मनुष्य को एक नई जीवन दृष्टि मिली यह देश कर्म प्रधान देश है। इसकी सेवा सम्मान है। मेरी भारत भूमि मेरी मातृभूमि है। जो मुझे सदैव कर्म और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

काव्यगत सौन्दर्य -

1. प्रकृति का मनोहारी चित्रण है।
2. भाषा - सहज-सरल प्रवाहमयी खड़ी बोली।
3. रस - वीर रस।
4. अलंकार - उपमा, अनुप्रास।

जन्मे जहाँ थे रघुपति, जन्मी जहाँ थी सीता,
श्रीकृष्ण ने सुनाई, वंशी पुनीत गीता।
गौतम ने जन्म लेकर, जिसका सुयश बढ़ाया,
जग को दया दिखाई, जग को दीया दिखाया।
वह युद्धभूमि मेरी, वह बुद्धभूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी।

शब्दार्थ - रघुपति रामचन्द्र। पुनीत पवित्र। सुयश प्रतिष्ठा। दीया दीपक।

सन्दर्भ एवं प्रसंग - पूर्ववत्।

व्याख्या - जन्म देने वाले वीर महापुरुषों का वर्णन करते हुए कवि कहते हैं, कि इस देश में रघुकुल में श्री राम का जन्म हुआ। जो मर्यादा पुरुषोत्तम है उनका जीवन चरित्र मानव जीवन का सर्वोच्च आदर्श प्रस्तुत करता है। यहाँ सीता जैसी पतिव्रता धर्म परायण स्त्री का जन्म हुआ। जिन्होंने नारी धर्म का आदर्श स्थापित किया। यह द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। जिन्होंने महाभारत के युद्ध में गीता का उपदेश देकर मनुष्य को निष्काम कर्म की शिक्षा दी। बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध ने मानव को प्रेम और अहिंसा का पाठ पढ़ाया उनके मन के दीपक से आज विश्व के अनेक देश से अलौकिक हैं। बुद्ध ने लोगों को माया मोह आदि विकारों से मुक्त होकर ज्ञान मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

कवि कहते हैं कि यह भारत भूमि मेरी जन्म भूमि है। जो शांति और अहिंसा की वाहक है तथा धर्म और न्याय के रक्षक है।

काव्यगत सौन्दर्य -

1. यहाँ कवि ने देश के अतीत के गौरव का गुणगान किया है।
2. कवि की राष्ट्र भक्ति भावना दर्शनीय है।
3. भाषा - सहज-सरल प्रवाहमयी खड़ी बोली।
4. रस - वीर रस।
5. अलंकार - उल्लेख, उपमा, अनुप्रास।

2. तुम्हें नमन (चल पड़े जिधर दो डग मग में)

चल पड़े जिधर दो डग मग में
चल पड़े कोटि पग उसी ओर,
पड़ गई जिधर भी एक दृष्टि
गड़ गये कोटि दृग उसी ओर,
जिसके शिर पर निज धरा हाथ,
उसके शिर-रक्षक कोटि हाय,
जिस पर निज मस्तक झुका दिया
झुक गये उसी पर कोटि माथ;
हे कोटिचरण, हे कोटिबाहु !
हे कोटिरूप, हे कोटिनाम!
तुम एकमूर्ति, प्रतिमूर्ति कोटि
हे कोटिमूर्ति, तुमको प्रणाम !

शब्दार्थ - डग कदम, चरण। मग मार्ग। कोटि करोड़ों। दृष्टि नजर। धरा रखा। शिर रक्षक सिर की रक्षा करने वाले। निज अपना। कोटिबाहु करोड़ों भुजाओं वाले।

सन्दर्भ एवं प्रसंग - प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ राष्ट्रीय काव्य धारा के प्रतिनिधि कवि सोहन लाल द्विवेदी जी द्वारा रचित 'तुम्हें नमन' कविता से ली गई है।

इन पंक्तियों में कवि ने युगपुरुष महात्मा गांधी के प्रति अपनी श्रद्धा एवं निष्ठा का परिचय दिया है। कवि द्विवेदी जी पर गाँधी जी की विचारधारा और उनके आन्दोलनों का काफी प्रभाव पड़ा। गाँधी जी की नेतृत्व शक्ति देखकर वह आश्चर्य चकित रह गए। कवि ने गांधी जी को युगावतार माना है।

व्याख्या - कवि कहता है कि जिधर भी गाँधी जी के दो कदम आगे बढ़े उस मार्ग पर करोड़ों पाँव भी चल पड़े अर्थात् करोड़ों लोग गाँधी जी का अनुसरण करने लगे। जिस ओर भी उनकी दृष्टि पड़ गई, करोड़ों लोगों के नेत्र भी उसी ओर देखने लगे। जिसके सिर पर गाँधी जी ने हाथ रख दिया, उस सिर की रक्षा के लिए करोड़ों हाथ एक साथ उठ गए। जिसके सामने भी उन्होंने जरा भी सिर झुकाया करोड़ों लोगों के सिर भी उधर ही झुक गए। कवि कहता है कि हे कोटि चरणों वाले!, हे कोटि भुजाओं वाले! हे करोड़ों रूपों में उपस्थित होने वाले, हे करोड़ों नामों वाले ! तुम तो एकमूर्ति हो लेकिन तुम्हारी करोड़ों प्रतिमूर्ति है। कवि इस कोटि मूर्तियाँ धारण करने वाले व्यक्तित्व के स्वामी को प्रणाम करता है।

काव्यगत सौन्दर्य -

1. यहाँ कवि की गाँधी जी के प्रति श्रद्धा की भावना का चित्रण हुआ है।
2. भाषा - संस्कृत निष्ठ, खड़ी बोली।
3. रस - वीर रस।
4. अलंकार - उपमा, अनुप्रास, उल्लेख।

युग बढ़ा तुम्हारी हँसी देख य
ुग हटा तुम्हारी भृकुटि देख,
तुम अचल मेखला बन भू की
खींचते काल पर अमिट रेख;
तुम बोल उठे, युग बोल उठा,
तुम मौन बने, युग मौन बना,
कुछ कर्म तुम्हारे संचित कर
युगकर्म जगा, युगधर्म तना;
युग परिवर्तक, युग-संस्थापक,
युग-संचालक, हे युगाधार!
युग-निर्माता, युग-मूर्ति ! तुम्हें
युग-युग तक युग का नमस्कार!

शब्दार्थ - भृकुटि = क्रोधपूर्ण मुद्रा। मेखला = करधनी, श्रृंखला। अमिट रेख = कभी न मिटने वाली रेखा। मौन = चुप। संचित कर = इकट्ठे करके। युग परिवर्तक = युग का बदलने वाले। युग संस्थापक = युग की स्थापना करने वाले। युगाधार युग के आधार।

सन्दर्भ एवं प्रसंग - पूर्ववत्।

व्याख्या - कवि कहता है कि संसार तुम्हारी हँसी देखकर आगे बढ़ा और जैसे ही तुम्हारी भृकुटि चढ़ी देखी, वह पीछे हट गया। तुमने भूमि की स्थिर मेखला बन कर समय पर कभी न मिटने वाली रेखा खींच दी है। कवि कहता है कि गाँधी जी बोले तो उनके साथ संसार बोल उठा, यदि वे चुप रहे, तो संसार भी चुप रहा। तुम्हारे कर्मों को एकत्रित करके संसार में कर्म हुआ और वह कर्म युग के लिए धर्म बन गए। कवि गाँधी जी को विभिन्न विशेषणों से सम्बोधित करता हुआ कहता है कि हे युग को बदलने वाले, हे युग की स्थापना करने वाले! हे युग को चलाने वाले!, युग का निर्माण करने वाले, संसार में प्रतिष्ठित मूर्ति के समान हे युग के आधार! तुम्हें मेरा और संसार का युगों-युगों तक नमन है।

काव्यगत सौन्दर्य -

1. कवि ने गाँधी जी को युगाधार माना है।
2. गाँधी जी के प्रति अपने हृदयोदगारों का चित्रण है।
3. भाषा-सहज, सरल तत्सम परक खड़ी बोली।
4. रस- वीर रस।
5. अलंकार- अनुप्रास, उपमा, उल्लेख।

तुम युग-युग की रूढ़ियाँ तोड़
रचते रहते नित नई सृष्टि,
उठती नवजीवन की नींवें
ले नवचेतन की दिव्य-दृष्टि;
धर्माडंबर के खंडहर पर
कर पद-प्रहार, कर धराध्वस्त
मानवता का पावन मंदिर
निर्माण कर रहे सृजनव्यस्त !
बढ़ते ही जाते दिग्विजयी !
गढ़ते तुम अपना रामराज,
आत्माहुति के मणिमाणिक से
मढ़ते जननी की स्वर्णताज!

शब्दार्थ - रूढ़ियाँ = सड़ी-गली परम्पराएँ। नीवें = आधारशिला। नव चेतन = नवीन चेतना मक्त। पद-प्रहार = पैरों से चोट मारना। धराध्वस्त = मिट्टी में मिलाकर। दिग्विजयी = दिशाओं को जीतने वाले। आत्माहुति = सर्वस्व अर्पित करना। मढ़ते = सजाते। स्वर्णताज = सोने का मुकुट।

सन्दर्भ एवं प्रसंग - पूर्ववत्।

व्याख्या - कवि गाँधी जी के कार्यों का विवरण देता हुआ कहता है कि तुमने युग-युग से चली आ रही सड़ी-गली परम्पराओं को तोड़कर एक नई सृष्टि का निर्माण किया है। उसकी आधारशिला से नये जीवन का बोध होता है। उसी नव चेतना से दिव्य-दृष्टि लेकर तुमने धर्माडम्बरों के खंडहरों पर चोट की अर्थात् तुमने समाज में फैले कुरीतियों, आडम्बरों को तोड़-फोड़ दिया और नयी चेतना का संचार किया। तुमने उन विचारधाराओं पर चोट की ओर उसे मिट्टी में मिला दिया। उस स्थान पर तुम मानवता का मन्दिर के निर्माण में व्यस्त हो गए है तुम एक दिग्वजय के समान आगे बढ़ते जा रहे थे और अपना एक नया रामराज्य का निर्माण करते जाते थे। तुम अपनी आत्माहुति रूपी मणिमणिकाओं से भारतमाता के स्वर्ण मुकुट को पढ़ा है।

काव्यगत सौन्दर्य -

1. गाँधी जी ने समाज से आडम्बरों और रूढ़ियों को तोड़कर रामराज्य की स्थापना का स्वप्न देखा था।
2. भाषा - तत्सम परक खड़ी बोली।
3. रस - वीर रस।
4. अलंकार -  रूपक, अनुप्रास, उपमा, उल्लेख।

तुम कालचक्र के रक्त सने
दशनों को कर से पकड़ सुदृढ़,
मानव को दानव के मुँह से
ला रहे खींच बाहर बढ़ बढ़;
पिसती कराहती जगती के
प्राणों में भरते अभय दान,
अघमरे देखते हैं तुमको,
किसने आकार यह किया त्राण?
दृढ़ चरण, सुदृढ़ करसंपुट से
तुम कालचक्र की चाल रोक,
नित महाकाल की छाती पर
लिखते करुणा के पुण्य श्लोक !

शब्दार्थ - कालचक्र समय का पहिया। दशनों दाँतों। सुदृढ़ मजबूती से दानव राक्षस। अभयदान निडरता का वरदान। कर संपुट हाथों की अंजुली। चाल गति। त्राण रक्षा 

सन्दर्भ एवं प्रसंग - पूर्ववत्।

व्याख्या - कवि कहता है कि तुमने समय रूपी चक्र के रक्त से सने दाँतों को हाथों में मजबूती पकड़कर मानवता को दानवी मुख से बाहर खींच लिया और कालचक्र में पिसती - कराहती दुनिया को प्राण देकर अभयदान दिया। जो लगभग अधमरे से हो चुके थे, वे आश्चर्य से भरकर देख रहे थे कि किसने आकार उनकी रक्षा की। कवि गाँधी के दृढ़ संकल्प के विषय में कहता है कि तुमने अपने दृढ़ पाँवों और दृढ़ हाथों से कालचक्र की गति को रोक दिया और जो महाकाल रक्त रंजित था अब तुम उसकी छाती पर बैठकर करुणा भरे गीत लिख रहे थे।

काव्यगत सौन्दर्य -

1. गाँधी जी ने युगों-युगों से दमन चक्र में पिसती मानवता का उद्धार किया।
2. भाषा - तत्सम परक खड़ी बोली।
3. रस - वीर रस।
4. अलंकार - रूपक, अनुप्रास, उपमा, उल्लेख, अतिशयोक्ति।

कँपता असत्य, कँपती मिथ्या,
'बर्बरता कँपती है थरथर !
कँपते सिंहासन, राजमुकुट
कँपते, खिसके आते भू पर,
हैं अस्त्र-शस्त्र कुंठित लुंठित,
सेनाएँ करती गृह प्रयाण!
रणभेरी तेरी बजती है,
उड़ता है तेरा ध्वज निशान !
हे दृष्टा, हे युग स्स्रष्टा,
पढ़ते कैसा यह मोक्ष - मंत्र?
इस राजतन्त्र के खँडहर में
उगता अभिनव भारत स्वतन्त्र !

शब्दार्थ - कँपता काँपता हुआ, डरा हुआ। मिथ्या झूठी। बर्बरता क्रूरता, नृशंसता। कुंठित निराश, अवसाद ग्रस्त। लुंठित लूटा-खसोटा गया, असहाय अवस्था में पड़ा हुआ। गृह प्रयाण घर को प्रस्थान करना। अभिनव नए।

सन्दर्भ एवं प्रसंग - पूर्ववत्।

व्याख्या - कवि गाँधी जी के व्यक्तित्व को वर्णित करता हुआ कहता है कि उनके समक्ष झूठी, झूठी क्रूरता थरथर काँपने लगती है। शोषकों के सिंहासन डोलने लगते हैं, राजमुकुट अपने स्थान से खिसकने - हिलने लगते हैं, अस्त्र-शस्त्र धारहीन और असहाय होकर पृथ्वी पर गिर पड़ते हैं; सेनाएँ युद्ध भूमि की ओर प्रस्थान करने के स्थान पर घर की ओर लौटने लगती है। चारों ओर तुम्हारा ही स्वर रणभेरी के समान गुंजित होता है, तुम्हारा ही झण्डा फहराता है अर्थात् तुम शत्रु पर विजय पा चुके हो।

कवि कहता है कि युग दृष्टा और युग स्रष्टा ! तुमने यह कैसा मुक्ति प्रदान कराने वाला मन्त्र पढ़ा, जिसने अंग्रेजों के राजतन्त्र को खण्डहर में बदल दिया और उस नए और स्वतन्त्र भारत का निर्माण किया।

काव्यगत सौन्दर्य -

1. यहाँ कवि ने गाँधी जी के स्वतन्त्रता संग्राम में दिए गए योगदान का अतिशयोक्ति पूर्ण वर्णन किया है।
2. भाषा - तत्सम परक खड़ी बोली।
3. रस - वीर रस।
4. अलंकार - रूपक, अनुप्रास, उपमा, उल्लेख, अतिशयोक्ति।

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    अनुक्रम

  1. अध्याय - 1 चंदबरदाई : पृथ्वीराज रासो के रेवा तट समय के अंश
  2. प्रश्न- रासो की प्रमाणिकता पर विचार कीजिए।
  3. प्रश्न- पृथ्वीराज रासो महाकाव्य की भाषा पर अपना मत स्पष्ट कीजिए।
  4. प्रश्न- पृथ्वीराज रासो को जातीय चेतना का महाकाव्य कहना कहाँ तक उचित है। तर्क संगत उत्तर दीजिए।
  5. प्रश्न- पृथ्वीराज रासो के सत्ताइसवें सर्ग 'रेवा तट समय' का सारांश लिखिए।
  6. प्रश्न- रासो शब्द की व्युत्पत्ति के सम्बन्ध में प्राप्त मतों का संक्षिप्त उल्लेख कीजिए।
  7. प्रश्न- पृथ्वीराज रासो' में अभिव्यक्त इतिहास पक्ष की विवेचना कीजिए।
  8. प्रश्न- विद्यापति भोग के कवि हैं? क्यों?
  9. अध्याय - 2 जगनिक : आल्हा खण्ड
  10. प्रश्न- जगनिक के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  11. प्रश्न- जगनिक कृत 'आल्हाखण्ड' का उल्लेख कीजिए।
  12. प्रश्न- आल्हा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  13. प्रश्न- कवि जगनिक द्वारा आल्हा ऊदल की कथा सृजन का उद्देश्य वर्णित कीजिए। उत्तर -
  14. प्रश्न- 'आल्हा' की कथा का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
  15. प्रश्न- कवि जगनिक का हिन्दी साहित्य में स्थान निर्धारित कीजिए।
  16. अध्याय - 3 गुरु गोविन्द सिंह
  17. प्रश्न- गुरु गोविन्द सिंह के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  18. प्रश्न- गुरु गोविन्द सिंह की रचनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत कीजिए।
  19. प्रश्न- गुरु गोविन्द सिंह' की भाषा पर प्रकाश डालिए।
  20. प्रश्न- सिख धर्म में दशम ग्रन्थ का क्या महत्व है?
  21. प्रश्न- गुरु गोविन्द सिंह के पश्चात् सिख धर्म में किस परम्परा का प्रचलन हुआ?
  22. अध्याय - 4 भूषण
  23. प्रश्न- महाकवि भूषण का संक्षिप्त जीवन और साहित्यिक परिचय दीजिए।
  24. प्रश्न- भूषण ने किन काव्यों की रचना की?
  25. प्रश्न- भूषण की वीर भावना का स्वरूप क्या है?
  26. प्रश्न- वीर भावना कितने प्रकार की होती है?
  27. प्रश्न- भूषण की युद्ध वीर भावना की उदाहरण सहित विवेचना कीजिए।
  28. अध्याय - 5 भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
  29. प्रश्न- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की शैलीगत विशेषताओं को निरूपित कीजिए।
  30. प्रश्न- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के काव्य की भाव-पक्षीय विशेषताओं का निरूपण कीजिए।
  31. प्रश्न- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की भाषागत विशेषताओं का विवेचन कीजिए।
  32. प्रश्न- भारतेन्दु जी के काव्य की कला पक्षीय विशेषताओं का निरूपण कीजिए।
  33. प्रश्न- भीतर भीतर सब रस चूस पद की व्याख्या कीजिए।
  34. अध्याय - 6 अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
  35. प्रश्न- अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' का जीवन परिचय दीजिए।
  36. प्रश्न- अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' के काव्य की भाव एवं कला की भाव एवं कलापक्षीय विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  37. प्रश्न- सिद्ध कीजिए अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' द्विवेदी युग के प्रतिनिधि कवि हैं।
  38. प्रश्न- हरिऔध जी का रचना संसार एवं रचना शिल्प पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
  39. प्रश्न- प्रिय प्रवास की छन्द योजना पर विचार कीजिए।
  40. प्रश्न- 'जन्मभूमि' कविता में कवि हरिऔध जी का देश की भूमि के प्रति क्या भावना लक्षित होती है?
  41. अध्याय - 7 मैथिलीशरण गुप्त
  42. प्रश्न- मैथिलीशरण गुप्त का जीवन-परिचय देते हुए उनकी रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
  43. प्रश्न- 'गुप्त जी राष्ट्रीय कवि की अपेक्षा जातीय कवि अधिक हैं। उपर्युक्त कथन की युक्तिपूर्ण विवेचना कीजिए।
  44. प्रश्न- गुप्त जी के काव्य के कला-पक्ष की समीक्षा कीजिए।
  45. प्रश्न- मैथिलीशरण गुप्त की कविता मातृभूमि का भाव व्यक्त कीजिए।
  46. प्रश्न- मैथिलीशरण गुप्त किस कवि के रूप में विख्यात हैं? उल्लेख कीजिए।
  47. प्रश्न- 'मातृभूमि' कविता में मैथिलीशरण गुप्त ने क्या पिरोया है?
  48. प्रश्न- मैथिलीशरण गुप्त के प्रथम काव्य संग्रह का क्या नाम है? साकेत की कथावस्तु का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  49. प्रश्न- मैथिलीशरण गुप्त ने आर्य शीर्षक कविता में क्या उल्लेख किया है?
  50. अध्याय - 8 जयशंकर प्रसाद
  51. प्रश्न- सिद्ध कीजिए "प्रसाद का प्रकृति-चित्रण बड़ा सजीव एवं अनूठा है।'
  52. प्रश्न- महाकवि जयशंकर प्रसाद के काव्य में राष्ट्रीय चेतना का निरूपण कीजिए।
  53. प्रश्न- 'प्रसाद' के कलापक्ष का विश्लेषण कीजिए।
  54. प्रश्न- 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' कविता का सारांश / सार/ कथ्य अपने शब्दों में लिखिए।
  55. प्रश्न- प्रसाद जी द्वारा रचित राष्ट्रीय काव्यधारा से ओत-प्रोत 'प्रयाण गीत' का सारांश लिखिए।
  56. प्रश्न- जयशंकर प्रसाद जी का हिन्दी साहित्य में स्थान निर्धारित कीजिए।
  57. प्रश्न- प्रसाद जी के काव्य में नवजागरण की मुख्य भूमिका रही है। तथ्यपूर्ण उत्तर दीजिए।
  58. अध्याय - 9 सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
  59. प्रश्न- 'सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' एक क्रान्तिकारी कवि थे।' इस दृष्टि से उनकी काव्यगत प्रवृत्तियों की समीक्षा कीजिए।
  60. प्रश्न- 'निराला ओज और सौन्दर्य के कवि हैं। इस कथन की विवेचना कीजिए।
  61. प्रश्न- निराला के काव्य-भाषा पर एक निबन्ध लिखिए। यथोचित उदाहरण भी दीजिए।
  62. प्रश्न- निराला के जीवन का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  63. प्रश्न- निराला के काव्य में अभिव्यक्त वैयक्तिकता पर प्रकाश डालिए।
  64. प्रश्न- निराला के काव्य में प्रकृति का किन-किन रूपों में चित्रण हुआ है? स्पष्ट कीजिए।
  65. प्रश्न- निराला के साहित्यिक जीवन का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  66. प्रश्न- निराला की सांस्कृतिक चेतना पर प्रकाश डालिए।
  67. प्रश्न- निराला की विद्रोहधर्मिता पर प्रकाश डालिए।
  68. प्रश्न- महाकवि निराला जी की 'भारती जय-विजय करे' कविता का सारांश लिखिए।
  69. अध्याय - 10 माखनलाल चतुर्वेदी
  70. प्रश्न- माखनलाल चतुर्वेदी के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  71. प्रश्न- "कवि माखनलाल चतुर्वेदी जी के काव्य में राष्ट्रीय चेतना लक्षित होती है।" इस कथन की सोदाहरण पुष्टि कीजिए।
  72. प्रश्न- 'माखनलाल जी' की साहित्यिक साधना पर प्रकाश डालिए?
  73. प्रश्न- माखनलाल चतुर्वेदी ने साहित्य रचना का महत्व किस प्रकार प्रकट किया?
  74. प्रश्न- साहित्य पत्रकारिता में माखन लाल चतुर्वेदी का क्या स्थान है
  75. प्रश्न- 'पुष्प की अभिलाषा' कविता का सारांश लिखिए।
  76. प्रश्न- माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा रचित 'जवानी' कविता का सारांश लिखिए।
  77. अध्याय - 11 सुभद्रा कुमारी चौहान
  78. प्रश्न- कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान के जीवन और साहित्य पर प्रकाश डालिए।
  79. प्रश्न- सुभद्रा कुमारी चौहान किस कविता के माध्यम से क्रान्ति का स्मरण दिलाती हैं?
  80. प्रश्न- 'वीरों का कैसा हो वसंत' कविता का सारांश लिखिए।
  81. प्रश्न- 'झाँसी की रानी' गीत का सारांश लिखिए।
  82. अध्याय - 12 बालकृष्ण शर्मा नवीन
  83. प्रश्न- पं. बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' जी का जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  84. प्रश्न- कवि बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' जी की राष्ट्रीय चेतना / भावना पर प्रकाश डालिए।
  85. प्रश्न- 'विप्लव गायन' गीत का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  86. प्रश्न- नवीन जी के 'हिन्दुस्तान हमारा है' गीत का सारांश लिखिए।
  87. प्रश्न- कवि बालकृष्ण शर्मा 'नवीन' स्वाधीनता के पुजारी हैं। इस कथन को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
  88. अध्याय - 13 रामधारी सिंह 'दिनकर'
  89. प्रश्न- दिनकर जी राष्ट्रीय चेतना और जनजागरण के कवि हैं। विवेचना कीजिए।
  90. प्रश्न- "दिनकर" के काव्य के भाव पक्ष को निरूपित कीजिए।
  91. प्रश्न- 'दिनकर' के काव्य के कला पक्ष का विवेचन कीजिए।
  92. प्रश्न- रामधारी सिंह दिनकर का संक्षिप्त जीवन-परिचय दीजिए।
  93. प्रश्न- दिनकर जी द्वारा विदेशों में किए गए भ्रमण पर प्रकाश डालिए।
  94. प्रश्न- दिनकर जी की काव्यधारा का क्रमिक विकास बताइए।
  95. प्रश्न- शहीद स्तवन (कलम आज उनकी जयबोल) का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  96. प्रश्न- दिनकर जी की 'हिमालय' कविता का सारांश लिखिए।
  97. अध्याय - 14 श्यामलाल गुप्त 'पार्षद'
  98. प्रश्न- कवि श्यामलाल गुप्त का जीवन परिचय एवं राष्ट्र चेतना पर प्रकाश डालिए।
  99. प्रश्न- झण्डा गीत का सारांश लिखिए।
  100. प्रश्न- पार्षद जी ने स्वाधीनता आन्दोलन में शामिल होने के कारण क्या-क्या कष्ट सहन किये।
  101. प्रश्न- श्यामलाल गुप्त पार्षद के हिन्दी साहित्य में योगदान के लिए क्या सम्मान मिला?
  102. अध्याय - 15 श्यामनारायण पाण्डेय
  103. प्रश्न- श्यामनारायण पाण्डे के जीवन और साहित्य पर प्रकाश डालिए।
  104. प्रश्न- श्यामनारायण पाण्डेय ने राष्ट्रीय चेतना का संचार किस प्रकार किया?
  105. प्रश्न- श्यामनारायण पाण्डेय द्वारा रचित 'चेतक की वीरता' कविता का सार लिखिए।
  106. प्रश्न- 'राणा की तलवार' कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  107. अध्याय - 16 द्वारिकाप्रसाद माहेश्वरी
  108. प्रश्न- प्रसिद्ध बाल कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी का जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  109. प्रश्न- 'उठो धरा के अमर सपूतों' का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  110. प्रश्न- वीर तुम बढ़े चलो गीत का सारांश लिखिए।
  111. अध्याय - 17 गोपालप्रसाद व्यास
  112. प्रश्न- कवि गोपालप्रसाद 'व्यास' का एक राष्ट्रीय कवि के रूप में परिचय दीजिए।
  113. प्रश्न- कवि गोपाल प्रसाद व्यास किस भाषा के मर्मज्ञ माने जाते थे?
  114. प्रश्न- गोपाल प्रसाद व्यास द्वारा रचित खूनी हस्ताक्षर कविता का सारांश लिखिए।
  115. प्रश्न- "शहीदों में तू अपना नाम लिखा ले रे" कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  116. अध्याय - 18 सोहनलाल द्विवेदी
  117. प्रश्न- कवि सोहनलाल द्विवेदी जी का जीवन और साहित्य क्या था? स्पष्ट कीजिए।
  118. प्रश्न- कवि सोहनलाल द्विवेदी के काव्य में समाहित राष्ट्रीय चेतना का उल्लेख कीजिए।
  119. प्रश्न- 'मातृभूमि' कविता का केन्द्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
  120. प्रश्न- 'तुम्हें नमन' कविता का सारांश लिखिए।
  121. प्रश्न- कवि सोहनलाल द्विवेदी जी ने महात्मा गाँधी को अपने काव्य में क्या स्थान दिया है?
  122. प्रश्न- सोहनलाल द्विवेदी जी की रचनाएँ राष्ट्रीय जागरण का पर्याय हैं। स्पष्ट कीजिए।
  123. अध्याय - 19 अटल बिहारी वाजपेयी
  124. प्रश्न- कवि अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  125. प्रश्न- अटल बिहारी वाजपेयी के कवि रूप पर प्रकाश डालिए।
  126. प्रश्न- अटल जी का काव्य जन सापेक्ष है। सिद्ध कीजिए।
  127. प्रश्न- अटल जी की रचनाओं में भारतीयता का स्वर मुखरित हुआ है। स्पष्ट कीजिए।
  128. प्रश्न- कदम मिलाकर चलना होगा कविता का सारांश लिखिए।
  129. प्रश्न- उनकी याद करें कविता का सारांश लिखिए।
  130. अध्याय - 20 डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक'
  131. प्रश्न- डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' के जीवन और साहित्य पर प्रकाश डालिए।
  132. प्रश्न- निशंक जी के साहित्य के विषय में अन्य विद्वानों के मतों पर प्रकाश डालिए।
  133. प्रश्न- डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक'के साहित्यिक जीवन पर प्रकाश डालिए।
  134. प्रश्न- हम भारतवासी कविता का सारांश लिखिए।
  135. प्रश्न- मातृवन्दना कविता का सारांश लिखिए।
  136. अध्याय - 21 कवि प्रदीप
  137. प्रश्न- कवि प्रदीप के जीवन और साहित्य का चित्रण कीजिए।
  138. प्रश्न- कवि प्रदीप की साहित्यिक अभिरुचि का परिचय दीजिए।
  139. प्रश्न- कवि प्रदीप किस विचारधारा के पक्षधर थे?
  140. प्रश्न- 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गीत का आधार क्या था?
  141. प्रश्न- गीतकार और गायक के रूप में कवि प्रदीप की लोकप्रियता कब हुई?
  142. प्रश्न- स्वतन्त्रता आन्दोलन में कवि प्रदीप की क्या भूमिका रही?
  143. अध्याय - 22 साहिर लुधियानवी
  144. प्रश्न- साहिर लुधियानवी का साहित्यिक परिचय दीजिए।
  145. प्रश्न- 'यह देश है वीर जवानों का' गीत का सारांश लिखिए।
  146. प्रश्न- साहिर लुधियानवी के गीतों में किन सामाजिक समस्याओं को उठाया गया है?
  147. अध्याय - 23 प्रेम धवन
  148. प्रश्न- गीतकार प्रेम धवन के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  149. प्रश्न- गीतकार प्रेम धवन के गीत देशभक्ति से ओतप्रोत हैं। स्पष्ट कीजिए।
  150. प्रश्न- 'छोड़ों कल की बातें' गीत किस फिल्म से लिया गया है? कवि ने इसमें क्या कहना चाहा है?
  151. प्रश्न- 'ऐ मेरे प्यारे वतन' गीत किस पृष्ठभूमि पर आधारित है?
  152. अध्याय - 24 कैफ़ी आज़मी
  153. प्रश्न- गीतकार कैफी आज़मी के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  154. प्रश्न- "सर हिमालय का हमने न झुकने दिया।" इस पंक्ति का क्या भाव है?
  155. प्रश्न- "कर चले हम फिदा जानोतन साथियों" गीत का प्रतिपाद्य / सारांश अपने शब्दों में लिखिए।
  156. प्रश्न- सैनिक अपनी मातृभूमि के प्रति क्या भाव रखता है?
  157. अध्याय - 25 राजेन्द्र कृष्ण
  158. प्रश्न- गीतकार राजेन्द्र कृष्ण के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  159. प्रश्न- 'जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती हैं बसेरा' गीत का मूल भाव क्या है?
  160. अध्याय - 26 गुलशन बावरा
  161. प्रश्न- गीतकार गुलशन बावरा के जीवन और साहित्य का परिचय दीजिए।
  162. प्रश्न- 'मेरे देश की धरती सोना उगले गीत का प्रतिपाद्य लिखिए। '
  163. अध्याय - 27 इन्दीवर
  164. प्रश्न- गीतकार इन्दीवर के जीवन और फिल्मी कैरियर का वर्णन कीजिए।
  165. प्रश्न- 'है प्रीत जहाँ की रीत सदा' गीत का मुख्य भाव क्या है?
  166. प्रश्न- गीतकार इन्दीवर ने किन प्रमुख फिल्मों में गीत लिखे?
  167. अध्याय - 28 प्रसून जोशी
  168. प्रश्न- गीतकार प्रसून जोशी के जीवन और साहित्य का चित्रण कीजिए।
  169. प्रश्न- 'देश रंगीला रंगीला' गीत में गीतकार प्रसून जोशी ने क्या चित्रण किया है?
  170. प्रश्न- 'देश रंगीला रंगीला' गीत में कवि ने इश्क का रंग कैसा बताया है?

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