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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 भूगोल - सुदूर संवेदन एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली के मूल तत्व

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :200
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2777
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 भूगोल - सरल प्रश्नोत्तर

अध्याय - 12

जी.आई.एस. में निर्देशांक प्रणाली

(Coordinate System in GIS)

प्रश्न- विश्वस्तरीय सन्दर्भ प्रणाली से आपका क्या आशय है? निर्देशांक प्रणाली के प्रकारों का वर्णन कीजिए।

उत्तर -

दीर्घवृत्त निर्देशांक प्रणाली या विश्वस्तरीय सन्दर्भ प्रणाली ग्लोब के धरातल पर किसी भी बिन्दु की सटीक स्थिति के निर्धारण के लिए अक्षांश तथा देशान्तर डिग्रियों का प्रयोग करते हैं। केवल भूमध्य रेखा के आस-पास ही एक डिग्री देशान्तर की दूरी लगभग एक डिग्री अक्षांश के बराबर होती है। यह इसलिये होता है कि केवल भूमध्य रेखा ही एक ऐसी अक्षांश रेखा है जो देशान्तर के वृतों के बराबर बड़ी है। गोलाकार पृथ्वी के समान अर्द्धव्यास के वृत्त को वृहत वृत्त कहते हैं।

जब अक्षांश तथा देशान्तर डिग्रियाँ प्रधान दूरियों के साथ सम्बन्धित नहीं होती हैं, तब दूरस्थ दूरियों का मापन इनसे नहीं किया जा सकता है। यह मापन प्रणाली पृथ्वी के केन्द्र से कोणों को नापते हैं न कि पृथ्वी के धरातल की दूरियाँ को। यह एक समतल निर्देशांक प्रणाली नहीं है। पृथ्वी के घुमावदार धरातल को नापने के लिये ग्लोब की निर्देशांक प्रणाली प्रयोग की जाती है। अक्षांश तथा देशांतर रेखायें सभी उपलब्ध मानचित्र प्रक्षेपों के लिये पृथ्वी के धरातल पर सन्दर्भ स्थिति का निर्धारण करती है। सन्दर्भ बसाव स्थिति की उपयुक्तता के कारण ही दीर्घवृत्तज निर्देशांक प्रणाली को विश्वस्तरीय सन्दर्भ प्रणाली (Global Referance System) कहते हैं।

भारत तथा इसके सीमावर्ती देशों में प्रयोग किया जाने वाला दीर्घवृत्तज एवरेस्ट है। उपग्रहों की सहायता से ग्लोब के सम्पूर्ण भाग का अवलोकन किया जा सकता है इसलिये सारे ग्लोब के लिये सबसे फिट धरातल WGS-84 माना जाता है।

आमतौर पर गोलाकार आकृति की ज्यामिति को समझना कठिन होता है। मानचित्र प्रक्षेप को समझने के लिये गोलाकृति को समझना अति आवश्यक है। गोलाकार प्रणाली में सभी क्षैतिज रेखाओं को अक्षांश रेखा या समान्तर कहा जाता है। ऊर्ध्वाधर रेखाओं को देशान्तर रेखायें या याम्योत्तर (Maridians) कहते हैं। इन रेखाओं को आपस में मिलाने पर ग्रिडजाल आकृति को रेखाजाल (Graticul) कहते हैं। उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव को ग्लोब के क्रमशः उत्तरी और दक्षिणी भाग में क्रमश: बिन्दु के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। जहाँ पर सभी मेरीडियन या याम्योत्तर मिलते हैं उसे ध्रुव कहते हैं। ध्रुव की ओर याम्योत्तर के मध्य की दूरी कम होती जाती है तथा ध्रुवों पर इनका अन्तर शून्य हो जाता है।

भूमध्य रेखा पर दो देशान्तर के बीच की दूरी का अन्तर 111.321 किमी होता है जबकि 60° अक्षांश रेखा पर यही अन्तर 55.802 किमी है।

भूमध्य रेखा तथा प्रधान रेखा के प्रतिच्छेदन बिन्दु पृथ्वी का केन्द्र होता है।

निर्देशांक प्रणाली के प्रकार (Types of Coordinate System) - निर्देशांक प्रणालियों को निम्न प्रकारों में विभाजित किया जाता है-

(1) कार्टेसियन निर्देशांक (Cartesian System) - कार्टेसियन निर्देशांक प्रणाली के अनुसार प्रतिच्छेदन बिन्दु के निर्देशांक 0,0 हैं। इस प्रकार सम्पूर्ण ग्लोब चार गोलाद्धों में बँट जाता है जिसका आधार कम्पास किमान होता है। इसी आधार पर दिशायें भी निर्धारित की जाती हैं।

(2) भौगोलिक निर्देशांक प्रणाली (p, A, Z) - किसी दीर्घवृत्त (Ellipse) को लगभग अक्ष पर घुमाने पर दीर्घवृत्तजों का प्रयोग अक्षांश (p) तथा देशान्तर (A) की गणना करने के लिये किया जाता है।

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ऊँचाई (Z) की गणना के लिये ज्योड का प्रयोग किया जाता है जो कि एक स्थिर सम्भावित गुरुत्व सतह होती है।

प्रत्येक वृत्त को 360 अंश में विभाजित किया जा सकता है जिन्हें डिग्री कहते हैं। प्रत्येक डिग्री 60 मिनट में विभाजित होती है जबकि प्रत्येक मिनट 60 सेकेण्ड में विभाजित होता

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परम्परागत रूप से अक्षांश तथा देशान्तर रेखाओं को डिग्री, मिनट तथा सेकेन्ड में (DMS) मापा जाता है। 0° अक्षांश पर भूमध्य रेखा व 90° अक्षांश पर उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव होते हैं। देशान्तर रेखाओं के लिये 0° प्रधान याम्योत्तर रेखा होती है जो उ० ध्रुव से प्रारम्भ होकर ग्रीनविच नगर से गुजरती हुई दक्षिणी ध्रुव पर समाप्त होती है। जब हम ग्रीनविच से पूर्व की ओर यात्रा करते हैं तो 180° तक के देशान्तर को धनात्मक मापा जाता है जबकि ग्रीनविच से पश्चिम की ओर - 180° देशान्तर मापा जाता है। कहने का अर्थ यह है कि प्रधान केन्द्रीय रेखा से पूर्व की ओर + तथा पश्चिम की ओर - देशान्तर मापा जाता है। उदाहरण के लिये, आस्ट्रेलिया को लिया जा सकता है जो भूमध्य रेखा के दक्षिण तथा ग्रीनविच के पूर्व में है। इसलिये धनात्मक देशान्तर तथा ऋणात्मक अक्षांश है। दीर्घवृत्तज पर अक्षांश रेखायें धरातल के ठीक लम्ब पर मापी जाती हैं।

1. दीर्घवृत्तज पर कोई S बिन्दु लिया गया है तथा इस पर mn लम्बवत् खींचा गया है।
2. Pg रेखा को S की सहायता से लिया गया तथा mn लम्ब तल समान किया गया।
3.इस प्रकार कोण pqr जो भूमध्य रेखीय तल के साथ खींचा गया है, S बिन्दु का अक्षांश 0 है।

समतल मापन

गोलाकार आकृति के निर्देशांक का मापन करना सबसे कठिन होता है। भौगोलिक आंकड़ों को समतल निर्देशांक प्रणाली पर प्रक्षेपित किया जाता है। जब कभी भी किसी गोल आकृति या इसके किसी भाग को समतल सतह पर प्रक्षेपित किया जाता है तो इसके गोलाद्धय मान परिवर्तित हो जाते हैं। प्रायः समतल सतह पर बसाव स्थितियों को ग्रिड X.Y में निर्देशांकों के द्वारा पहचाना जाता है। प्रत्येक बसाव बिन्दु के दो मान होते हैं। एक इसकी क्षैतिज दशा को तथा दूसरा उर्द्धाधर दशा को स्पष्ट करता है। इन मानों को x निर्देशांक एवं Y निर्देशांक कहा जाता है। इस अंक पद्धति को प्रयोग करने पर प्रारंभ के निर्देशांक X = 0 तथा Y = 0 होते हैं।

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चित्र- निर्देशांक प्रणाली

किसी ग्रिडजाल के केन्द्र में क्षैतिज रेखा को X अक्ष तथा केन्द्रीय उर्द्धाधर रेखा को - Y अक्ष कहते हैं। स्रोत केन्द्र से ऊपर क्षैतिज रेखाओं का तथा स्रोत केन्द्र से दायीं ओर उर्द्धाधर रेखाओं का धनात्मक मान होता है। इसके विपरीत नीचे की ओर तथा बायीं ओर यह मान ऋणात्मक होता है। चित्र में चार चतुर्थांश प्रदर्शित किये गये हैं जिन पर धनात्मक तथा ऋणात्मक निर्देशांकों को सम्मिलित कर दिखाया गया है।

समतल मापन प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें दूरी, कोण तथा क्षेत्रफल स्थिर रहता है।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- सुदूर संवेदन से आप क्या समझते हैं? विभिन्न विद्वानों के सुदूर संवेदन के बारे में क्या विचार हैं? स्पष्ट कीजिए।
  2. प्रश्न- भूगोल में सुदूर संवेदन की सार्थकता एवं उपयोगिता पर विस्तृत लेख लिखिए।
  3. प्रश्न- सुदूर संवेदन के अंतर्राष्ट्रीय विकास पर टिप्पणी कीजिए।
  4. प्रश्न- सुदूर संवेदन के भारतीय इतिहास एवं विकास पर प्रकाश डालिए।
  5. प्रश्न- सुदूर संवेदन का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
  6. प्रश्न- सुदूर संवेदन को परिभाषित कीजिए।
  7. प्रश्न- सुदूर संवेदन के लाभ लिखिए।
  8. प्रश्न- सुदूर संवेदन के विषय क्षेत्र पर टिप्पणी लिखिए।
  9. प्रश्न- भारत में सुदूर संवेदन के उपयोग पर संक्षिप्त लेख लिखिए।
  10. प्रश्न- सुदूर संवेदी के प्रकार लिखिए।
  11. प्रश्न- सुदूर संवेदन की प्रक्रियाएँ एवं तत्व क्या हैं? वर्णन कीजिए।
  12. प्रश्न- उपग्रहों की कक्षा (Orbit) एवं उपयोगों के आधार पर वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए।
  13. प्रश्न- भारत के कृत्रिम उपग्रहों के कुछ उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।
  14. प्रश्न- कार्य के आधार पर उपग्रहों का विभाजन कीजिए।
  15. प्रश्न- कार्यप्रणाली के आधार पर सुदूर संवेदी उपग्रह कितने प्रकार के होते हैं?
  16. प्रश्न- अंतर वैश्विक स्थान निर्धारण प्रणाली से आप क्या समझते हैं?
  17. प्रश्न- भारत में उपग्रहों के इतिहास पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  18. प्रश्न- भू-स्थाई उपग्रह किसे कहते हैं?
  19. प्रश्न- ध्रुवीय उपग्रह किसे कहते हैं?
  20. प्रश्न- उपग्रह कितने प्रकार के होते हैं?
  21. प्रश्न- सुदूर संवेदन की आधारभूत संकल्पना का वर्णन कीजिए।
  22. प्रश्न- विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के सम्बन्ध में विस्तार से अपने विचार रखिए।
  23. प्रश्न- वायुमण्डलीय प्रकीर्णन को विस्तार से समझाइए।
  24. प्रश्न- विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रमी प्रदेश के लक्षण लिखिए।
  25. प्रश्न- ऊर्जा विकिरण सम्बन्धी संकल्पनाओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। ऊर्जा
  26. प्रश्न- स्पेक्ट्रल बैण्ड से आप क्या समझते हैं?
  27. प्रश्न- स्पेक्ट्रल विभेदन के बारे में अपने विचार लिखिए।
  28. प्रश्न- सुदूर संवेदन की विभिन्न अवस्थाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
  29. प्रश्न- सुदूर संवेदन की कार्य प्रणाली को चित्र सहित समझाइये |
  30. प्रश्न- सुदूर संवेदन के प्रकार और अनुप्रयोगों का वर्णन कीजिए।
  31. प्रश्न- विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  32. प्रश्न- सुदूर संवेदन के प्लेटफॉर्म से आपका क्या आशय है? प्लेटफॉर्म कितने प्रकार के होते हैं?
  33. प्रश्न- सुदूर संवेदन के वायुमण्डल आधारित प्लेटफॉर्म की विस्तृत विवेचना कीजिए।
  34. प्रश्न- भू-संसाधन उपग्रहों को विस्तार से समझाइए।
  35. प्रश्न- 'सुदूर संवेदन में प्लेटफार्म' से आप क्या समझते हैं?
  36. प्रश्न- वायुयान आधारित प्लेटफॉर्म उपग्रह के लाभ और कमियों का वर्णन कीजिये।
  37. प्रश्न- विभेदन से आपका क्या आशय है? इसके प्रकारों का भी विस्तृत वर्णन कीजिए।
  38. प्रश्न- फोटोग्राफी संवेदक (स्कैनर ) क्या है? इसके विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
  39. प्रश्न- सुदूर संवेदन में उपयोग होने वाले प्रमुख संवेदकों (कैमरों ) का वर्णन कीजिए।
  40. प्रश्न- हवाई फोटोग्राफी की विधियों की व्याख्या कीजिए एवं वायु फोटोचित्रों के प्रकार बताइये।
  41. प्रश्न- प्रकाशीय संवेदक से आप क्या समझते हैं?
  42. प्रश्न- सुदूर संवेदन के संवेदक से आपका क्या आशय है?
  43. प्रश्न- लघुतरंग संवेदक (Microwave sensors) को समझाइये |
  44. प्रश्न- प्रतिबिंब निर्वचन के तत्वों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
  45. प्रश्न- सुदूर संवेदन में आँकड़ों से क्या तात्पर्य है?
  46. प्रश्न- उपग्रह से प्राप्त प्रतिबिंबों का निर्वचन किस प्रकार किया जाता है?
  47. प्रश्न- अंकिय बिम्ब प्रणाली का वर्णन कीजिए।
  48. प्रश्न- डिजिटल इमेज प्रक्रमण से आप क्या समझते हैं? डिजिटल प्रक्रमण प्रणाली को भी समझाइए।
  49. प्रश्न- डिजिटल इमेज प्रक्रमण के तहत इमेज उच्चीकरण तकनीक की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
  50. प्रश्न- बिम्ब वर्गीकरण प्रक्रिया को विस्तार से समझाइए।
  51. प्रश्न- इमेज कितने प्रकार की होती है? समझाइए।
  52. प्रश्न- निरीक्षणात्मक बिम्ब वर्गीकरण और अनिरीक्षणात्मक बिम्ब वर्गीकरण के मध्य अंतर स्पष्ट कीजिए।
  53. प्रश्न- भू-विज्ञान के क्षेत्र में सुदूर संवेदन ने किस प्रकार क्रांतिकारी सहयोग प्रदान किया है? विस्तार से समझाइए।
  54. प्रश्न- समुद्री अध्ययन में सुदूर संवेदन किस प्रकार सहायक है? विस्तृत विवेचना कीजिए।
  55. प्रश्न- वानिकी में सुदूर संवेदन के अनुप्रयोगों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  56. प्रश्न- कृषि क्षेत्र में सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी की भूमिका का सविस्तार वर्णन कीजिए। साथ ही, भारत में कृषि की निगरानी करने के लिए सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने हेतु सरकार द्वारा आरम्भ किए गए विभिन्न कार्यक्रमों को भी सूचीबद्ध कीजिए।
  57. प्रश्न- भूगोल में सूदूर संवेदन के अनुप्रयोगों पर टिप्पणी लिखिए।
  58. प्रश्न- मृदा मानचित्रण के क्षेत्र में सुदूर संवेदन के अनुप्रयोगों की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
  59. प्रश्न- लघु मापक मानचित्रण और सुदूर संवेदन के मध्य सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
  60. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र का अर्थ, परिभाषा एवं कार्यक्षेत्र की व्याख्या कीजिए।
  61. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली के भौगोलिक उपागम से आपका क्या आशय है? इसके प्रमुख चरणों का भी वर्णन कीजिए।
  62. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली के विकास की विवेचना कीजिए।
  63. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली का व्याख्यात्मक वर्णन प्रस्तुत कीजिए।
  64. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली के उपयोग क्या हैं? विस्तृत विवरण दीजिए।
  65. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र (GI.S.)से क्या तात्पर्य है?
  66. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र के विकास पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  67. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र के उद्देश्य बताइये।
  68. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र का कार्य क्या है?
  69. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र के प्रकार समझाइये |
  70. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र की अभिकल्पना का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  71. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र के क्या लाभ हैं?
  72. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली में उपयोग होने वाले विभिन्न उपकरणों का वर्णन कीजिए।
  73. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली में कम्प्यूटर के उपयोग का विस्तृत विवरण प्रस्तुत कीजिए।
  74. प्रश्न- GIS में आँकड़ों के प्रकार एवं संरचना पर प्रकाश डालिये।
  75. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली के सन्दर्भ में कम्प्यूटर की संग्रहण युक्तियों का वर्णन कीजिए।
  76. प्रश्न- आर्क जी०आई०एस० से आप क्या समझते हैं? इसके प्रशिक्षण और लाभ के संबंध में विस्तृत व्याख्या कीजिए।
  77. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली में प्रयोग होने वाले हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  78. प्रश्न- ERDAS इमेजिन सॉफ्टवेयर की अपने शब्दों में समीक्षा कीजिए।
  79. प्रश्न- QGIS (क्यू०जी०आई०एस०) के संबंध में एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  80. प्रश्न- विश्वस्तरीय सन्दर्भ प्रणाली से आपका क्या आशय है? निर्देशांक प्रणाली के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
  81. प्रश्न- डाटा मॉडल अर्थात् आँकड़ा मॉडल से आप क्या समझते हैं? इसके कार्य, संकल्पना और उपागम का वर्णन कीजिए।
  82. प्रश्न- रॉस्टर मॉडल की विवेचना कीजिए। इस मॉडल की क्षमताओं का भी वर्णन कीजिए।
  83. प्रश्न- विक्टर मॉडल की विस्तृत विवेचना कीजिए।
  84. प्रश्न- कार्टोग्राफिक संकेतीकरण त्रिविम आकृति एवं मानचित्र के प्रकार मुद्रण विधि का वर्णन कीजिए।
  85. प्रश्न- रॉस्टर मॉडल की कमियों और लाभ का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  86. प्रश्न- विक्टर मॉडल की कमियों और लाभ के सम्बन्ध में अपने विचार लिखिए।
  87. प्रश्न- रॉस्टर और विक्टर मॉडल के मध्य अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  88. प्रश्न- डेटाम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

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