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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 भूगोल - सुदूर संवेदन एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली के मूल तत्व

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :200
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2777
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 भूगोल - सरल प्रश्नोत्तर

 

अध्याय - 1

सुदूर संवेदन का परिचय

(Introduction to Remote Sensing)

प्रश्न- सुदूर संवेदन से आप क्या समझते हैं? विभिन्न विद्वानों के सुदूर संवेदन के बारे में क्या विचार हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर -

सुदूर संवेदन

सुदूर संवेदन शब्द का प्रयोग 1960 के दशक में किया गया था। सुदूर संवेदन एक ऐसी प्रक्रिया है, जो भू-पृष्ठीय वस्तुओं एवं घटनाओं की सूचनाओं का संवेदक युक्तियों के द्वारा बिना वस्तु के सम्पर्क में आए मापन और अभिलेखन करता है। सुदूर संवेदन की उपर्युक्त परिभाषा में मुख्यतः धरातलीय पदार्थ, अभिलेखन युक्तियों तथा ऊर्जा तरंगों के माध्यम से सूचनाओं की प्राप्ति को सम्मिलित किया गया है। दरअसल, प्राचीन काल से ही मनुष्य के मन में यह जिज्ञासा रही है कि ब्रह्माण्ड अथवा अन्तरिक्ष के सम्बन्ध में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त की जाए। उस समय ग्रहों, उपग्रहों, 'नक्षत्रों, निहारिकाओं, उल्काओं, धूमकेतुओं आदि को देखने के लिये दूरबीन का प्रयोग किया जाता था परन्तु आज सुदूर संवेदन विज्ञान के क्षेत्र में ऐसे तकनीकी उपकरण विकसित हो गये हैं जिनके द्वारा दृश्य प्रकार के तरंग दैर्ध्य के माध्यम से ब्रह्माण्ड को देखा जा सकता है। वायुयानों तथा मनुष्य द्वारा निर्मित उपग्रहों के विकास ने सुदूर संवेदन के क्षेत्र में क्रान्ति जगा दी है। आधुनिक विकसित उपकरणों को वायुयानों तथा उपग्रहों में रखकर सुदूर से पृथ्वी के प्रतिबिम्बों को लिया जाता है तथा सूचनायें प्राप्त की जाती हैं।

उपग्रहों के विकास से पूर्व, अन्तरिक्ष से सूचनायें प्राप्त करने का कार्य स्वतः प्रक्षेपण तथा प्रकाश फोटोग्राफी तक सीमित था। 1960 के पश्चात् सुदूर संवेदन तकनीक में इतना अधिक सुधार एवं विकास हुआ है कि आज यह ग्लोबीय वातावरण के प्रत्येक पहलू को समझने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। आज सुदूर संवेदन एक शक्तिशाली विज्ञान के रूप में उभरकर सामने आया है कि जिसका व्यावहारिक उपयोग प्रत्येक क्षेत्र में किया जाने लगा है। भू-विज्ञान, भौगोलिक घटनाओं, पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के उपयोग एवं संरक्षण, भूमि उपयोग, प्राकृतिक आपदाओं तथा मौसम विज्ञान के क्षेत्र में सुदूर संवेदन का उल्लेखनीय योगदान है। धीरे-धीरे यह विषय शोध कार्यों के अतिरिक्त विश्वविद्यालय तथा स्कूल स्तर तक के पाठ्यक्रमों में सम्मिलित किया जाने लगा है जिससे शिक्षण संस्थाओं में भी इसके व्यावहारिक अध्ययन का महत्त्व बढ़ा है।

इस प्रकार हम कह सकते हैं कि सुदूर संवेदन का अर्थ किसी दूर स्थित घटना, वस्तु अथवा घरातल के बारे में सूचनाओं अथवा आँकड़ों को प्राप्त करना है। यह कार्य बिना किसी भौतिक सम्पर्क के होता है।

वास्तव में सुदूर संवेदन एक ऐसा विज्ञान है जो पृथ्वी के किसी स्थान, वस्तु अथवा घटना के सम्बन्ध में दूर अन्तरिक्ष में स्थित उपग्रह या अन्तरिक्ष यानों पर लगे संवेदकों के द्वारा ग्रहण किये गये धरातलीय परावर्तित प्रकाश के आवेगों को अंकित करता है। हम संवेदक पर अंकित परावर्तित प्रकाश के आवेगों का विश्लेषण करते हैं। तत्पश्चात् प्राप्त आँकड़ों तथा प्रतिबिम्बों के माध्यम से किसी स्थान, घटना या वस्तु के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी प्राप्त कर निष्कर्ष पर पहुँचते हैं।

जिस प्रकार हमारी आँखें प्रत्येक वस्तु को देखकर उनमें भेद स्थापित करती हैं उसी प्रकार संवेदक भी कार्य करता है। आँखों से देखने पर कुछ वस्तुयें चमकीली तथा कुछ काली लगती हैं या आँखों को अलग-अलग वस्तुओं में रंगों की गहनता अलग-अलग प्रतीत होती है। यह सब प्रकाश आवेगों के कारण होता है। प्रत्येक वस्तु का विद्युत चुम्बकीय विकिरण अलग-अलग होने से आँखों को वस्तुयें अलग-अलग रंगों में प्रतीत होती हैं। संवेदक भी आँखों की तरह विद्युत चुम्बकीय विकिरण को प्राप्त करते हैं। जिस वस्तु से या स्थान से परावर्तित प्रकाश अधिक प्राप्त होता है। वह चमकीली एवं अन्य इसके विपरीत काली प्रतीत होती हैं। वायु कैमरा, बहुस्पेक्ट्रल स्कैनर, तापीय अवरक्त रैखिक क्रमवीक्षक इत्यादि प्रमुख संवेदक हैं जिनकी कार्यशैली का आगे विस्तार से वर्णन किया गया है।

उपग्रहों में प्रयोग किये जाने वाले संवेदक विद्युत चुम्बकीय विकिरण को अंकीय आँकड़ों ॐ रूप में अभिलेखन करते हैं। इन आँकड़ों में प्रतिबिम्ब बनाने की क्षमता होती है। इस प्रकार साष्ट है कि "पृथ्वी से दूर अन्तरिक्ष में किसी प्लेटफॉर्म पर लगे हुए संवेदक द्वारा विद्युत चुम्बकीय विकिरण के माध्यम से धरातलीय सूचनाओं को प्राप्त करने की कला को सुदूर संवेदन विज्ञान कहते हैं"।

प्रमुख विद्वानों ने सुदूर संवेदन को लेकर अपने अलग-अलग विचार प्रस्तुत किए हैं। इसका वर्णन निम्न प्रकार किया जा सकता है-

प्लॉयड एफ० साबिन्स के अनुसार - सुदूर संवेदन शब्द का तात्पर्य उन विधियों में है जिनमें किसी लक्ष्य को पहचानने तथा उनके लक्षणों को मापने के लिए विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा जैसे-प्रकाश, ऊष्मा और रेडियो तरंगों को प्रयोग में लाया जाता है।

फिसचर तथा अन्य के अनुसार - सुदूर संवेदन एक ऐसी कला या विज्ञान है जो बिना किसी सम्पर्क के किसी वस्तु के बारे में जानकारी प्राप्त करता है।

लिंग्टज एवं सिमनेट के अनुसार-बिना छुये या सम्पर्क के किसी वस्तु के बारे में भौतिक आँकड़ों की प्राप्ति करना सुदूर संवेदन कहलाता है।

बैरेट एवं कर्टीज के अनुसार - किसी निश्चित दूरी से किन्हीं युक्तियों द्वारा किसी लक्ष्य के अवलोकन को सुदूर संवेदन कहते हैं।

कोलवेल के अनुसार - विस्तृत अर्थों में 'सुदूर संवेदन' शब्द का अर्थ किसी निश्चित दूरी से टोह लेना या सर्वेक्षण करना है।

व्हाइट के अनुसार - सुदूर संवेदन परिशुद्ध रूप से परिभाषित नहीं होने के बाद भी इसके तहत सभी प्रकार की विधियों को सम्मिलित किया जाता है जो कुछ दूर से पृथ्वी के धरातल की तस्वीरों या विद्युत चुम्बकीय अभिलेखों के कई रूपों को प्राप्त एवं आँकड़ों को परिष्कृत एवं संसाधित करते हैं। विस्तृत अर्थों में सुदूर संवेदन का सम्बन्ध विद्युत चुम्बकीय विकिरण का संसूचन तथा अभिलेखन में होता है जिसे किसी धरातलीय परिदृश्य के लक्ष्य क्षेत्रों से संवेदक यंत्रों द्वारा प्राप्त किया जाता है। यह विकिरण लक्ष्य क्षेत्र के अलग-अलग घटकों से सीधे उत्पन्न या घटकों से प्राप्त सौर ऊर्जा का या स्वयं संवेदक से लक्ष्य क्षेत्र को संचारित ऊर्जा का परावर्तन से हो सकता है।

अमेरिकन राष्ट्रीय शैक्षणिक विज्ञान के अनुसार-वैज्ञानिकों द्वारा सुदूर संवेदन, शब्द का उपयोग वृहत दूरी से लक्ष्यों (पृथ्वी, चन्द्रमा, वायुमण्डल, स्टेलर, घटनायें इत्यादि) के अध्ययन के लिये किया गया है। विस्तृत रूप से सुदूर संवेदन नियोजित आधुनिक संवेदकों, आँकड़ा संसाधित विधितन्त्र संचार सिद्धान्त व युक्तियां, अन्तरिक्ष व वायु निर्मित संयन्त्र तथा वृहत सैद्धान्तिक तथा प्रयोगात्मक प्रणाली जिसका उद्देश्य पृथ्वी के धरातल के वायु एवं अन्तरिक्ष सर्वेक्षण के संचालन से है के सामूहिक प्रभावों को निर्दिष्ट करता है।

कैम्पवेल के अनुसार - सुदूर संवेदन एक ऐसा अभ्यास है जो शीर्ष परिदृश्य से प्राप्त प्रतिबिम्बों के उपयोग द्वारा पृथ्वी के भूमि तथा जल तलों के बारे में सूचनायें प्राप्त करता है तथा जिनमें विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के एक या एक से अधिक प्रदेशों से विद्युत चुम्बकीय विकिरण का परावर्तन या उत्सर्जन का प्रयोग किया जाता है।

उपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर हम कह सकते हैं कि "तरंगदैर्ध्य के पराबैंगनी से लेकर रेडियो प्रभाग में आँकड़ों को एकत्र करने की व्यावहारिकता अथवा अभ्यास ही सुदूर संवेदन हैं"। दूसरे शब्दों में "किसी घटना या वस्तु के सम्बन्ध में शीघ्र एवं तीव्र टोह लेना सुदूर संवेदन कहलाता है"।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- सुदूर संवेदन से आप क्या समझते हैं? विभिन्न विद्वानों के सुदूर संवेदन के बारे में क्या विचार हैं? स्पष्ट कीजिए।
  2. प्रश्न- भूगोल में सुदूर संवेदन की सार्थकता एवं उपयोगिता पर विस्तृत लेख लिखिए।
  3. प्रश्न- सुदूर संवेदन के अंतर्राष्ट्रीय विकास पर टिप्पणी कीजिए।
  4. प्रश्न- सुदूर संवेदन के भारतीय इतिहास एवं विकास पर प्रकाश डालिए।
  5. प्रश्न- सुदूर संवेदन का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
  6. प्रश्न- सुदूर संवेदन को परिभाषित कीजिए।
  7. प्रश्न- सुदूर संवेदन के लाभ लिखिए।
  8. प्रश्न- सुदूर संवेदन के विषय क्षेत्र पर टिप्पणी लिखिए।
  9. प्रश्न- भारत में सुदूर संवेदन के उपयोग पर संक्षिप्त लेख लिखिए।
  10. प्रश्न- सुदूर संवेदी के प्रकार लिखिए।
  11. प्रश्न- सुदूर संवेदन की प्रक्रियाएँ एवं तत्व क्या हैं? वर्णन कीजिए।
  12. प्रश्न- उपग्रहों की कक्षा (Orbit) एवं उपयोगों के आधार पर वर्गीकरण प्रस्तुत कीजिए।
  13. प्रश्न- भारत के कृत्रिम उपग्रहों के कुछ उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।
  14. प्रश्न- कार्य के आधार पर उपग्रहों का विभाजन कीजिए।
  15. प्रश्न- कार्यप्रणाली के आधार पर सुदूर संवेदी उपग्रह कितने प्रकार के होते हैं?
  16. प्रश्न- अंतर वैश्विक स्थान निर्धारण प्रणाली से आप क्या समझते हैं?
  17. प्रश्न- भारत में उपग्रहों के इतिहास पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  18. प्रश्न- भू-स्थाई उपग्रह किसे कहते हैं?
  19. प्रश्न- ध्रुवीय उपग्रह किसे कहते हैं?
  20. प्रश्न- उपग्रह कितने प्रकार के होते हैं?
  21. प्रश्न- सुदूर संवेदन की आधारभूत संकल्पना का वर्णन कीजिए।
  22. प्रश्न- विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के सम्बन्ध में विस्तार से अपने विचार रखिए।
  23. प्रश्न- वायुमण्डलीय प्रकीर्णन को विस्तार से समझाइए।
  24. प्रश्न- विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रमी प्रदेश के लक्षण लिखिए।
  25. प्रश्न- ऊर्जा विकिरण सम्बन्धी संकल्पनाओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। ऊर्जा
  26. प्रश्न- स्पेक्ट्रल बैण्ड से आप क्या समझते हैं?
  27. प्रश्न- स्पेक्ट्रल विभेदन के बारे में अपने विचार लिखिए।
  28. प्रश्न- सुदूर संवेदन की विभिन्न अवस्थाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए।
  29. प्रश्न- सुदूर संवेदन की कार्य प्रणाली को चित्र सहित समझाइये |
  30. प्रश्न- सुदूर संवेदन के प्रकार और अनुप्रयोगों का वर्णन कीजिए।
  31. प्रश्न- विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  32. प्रश्न- सुदूर संवेदन के प्लेटफॉर्म से आपका क्या आशय है? प्लेटफॉर्म कितने प्रकार के होते हैं?
  33. प्रश्न- सुदूर संवेदन के वायुमण्डल आधारित प्लेटफॉर्म की विस्तृत विवेचना कीजिए।
  34. प्रश्न- भू-संसाधन उपग्रहों को विस्तार से समझाइए।
  35. प्रश्न- 'सुदूर संवेदन में प्लेटफार्म' से आप क्या समझते हैं?
  36. प्रश्न- वायुयान आधारित प्लेटफॉर्म उपग्रह के लाभ और कमियों का वर्णन कीजिये।
  37. प्रश्न- विभेदन से आपका क्या आशय है? इसके प्रकारों का भी विस्तृत वर्णन कीजिए।
  38. प्रश्न- फोटोग्राफी संवेदक (स्कैनर ) क्या है? इसके विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
  39. प्रश्न- सुदूर संवेदन में उपयोग होने वाले प्रमुख संवेदकों (कैमरों ) का वर्णन कीजिए।
  40. प्रश्न- हवाई फोटोग्राफी की विधियों की व्याख्या कीजिए एवं वायु फोटोचित्रों के प्रकार बताइये।
  41. प्रश्न- प्रकाशीय संवेदक से आप क्या समझते हैं?
  42. प्रश्न- सुदूर संवेदन के संवेदक से आपका क्या आशय है?
  43. प्रश्न- लघुतरंग संवेदक (Microwave sensors) को समझाइये |
  44. प्रश्न- प्रतिबिंब निर्वचन के तत्वों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
  45. प्रश्न- सुदूर संवेदन में आँकड़ों से क्या तात्पर्य है?
  46. प्रश्न- उपग्रह से प्राप्त प्रतिबिंबों का निर्वचन किस प्रकार किया जाता है?
  47. प्रश्न- अंकिय बिम्ब प्रणाली का वर्णन कीजिए।
  48. प्रश्न- डिजिटल इमेज प्रक्रमण से आप क्या समझते हैं? डिजिटल प्रक्रमण प्रणाली को भी समझाइए।
  49. प्रश्न- डिजिटल इमेज प्रक्रमण के तहत इमेज उच्चीकरण तकनीक की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
  50. प्रश्न- बिम्ब वर्गीकरण प्रक्रिया को विस्तार से समझाइए।
  51. प्रश्न- इमेज कितने प्रकार की होती है? समझाइए।
  52. प्रश्न- निरीक्षणात्मक बिम्ब वर्गीकरण और अनिरीक्षणात्मक बिम्ब वर्गीकरण के मध्य अंतर स्पष्ट कीजिए।
  53. प्रश्न- भू-विज्ञान के क्षेत्र में सुदूर संवेदन ने किस प्रकार क्रांतिकारी सहयोग प्रदान किया है? विस्तार से समझाइए।
  54. प्रश्न- समुद्री अध्ययन में सुदूर संवेदन किस प्रकार सहायक है? विस्तृत विवेचना कीजिए।
  55. प्रश्न- वानिकी में सुदूर संवेदन के अनुप्रयोगों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  56. प्रश्न- कृषि क्षेत्र में सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी की भूमिका का सविस्तार वर्णन कीजिए। साथ ही, भारत में कृषि की निगरानी करने के लिए सुदूर संवेदन प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने हेतु सरकार द्वारा आरम्भ किए गए विभिन्न कार्यक्रमों को भी सूचीबद्ध कीजिए।
  57. प्रश्न- भूगोल में सूदूर संवेदन के अनुप्रयोगों पर टिप्पणी लिखिए।
  58. प्रश्न- मृदा मानचित्रण के क्षेत्र में सुदूर संवेदन के अनुप्रयोगों की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
  59. प्रश्न- लघु मापक मानचित्रण और सुदूर संवेदन के मध्य सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
  60. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र का अर्थ, परिभाषा एवं कार्यक्षेत्र की व्याख्या कीजिए।
  61. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली के भौगोलिक उपागम से आपका क्या आशय है? इसके प्रमुख चरणों का भी वर्णन कीजिए।
  62. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली के विकास की विवेचना कीजिए।
  63. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली का व्याख्यात्मक वर्णन प्रस्तुत कीजिए।
  64. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली के उपयोग क्या हैं? विस्तृत विवरण दीजिए।
  65. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र (GI.S.)से क्या तात्पर्य है?
  66. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र के विकास पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  67. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र के उद्देश्य बताइये।
  68. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र का कार्य क्या है?
  69. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र के प्रकार समझाइये |
  70. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र की अभिकल्पना का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  71. प्रश्न- भौगोलिक सूचना तंत्र के क्या लाभ हैं?
  72. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली में उपयोग होने वाले विभिन्न उपकरणों का वर्णन कीजिए।
  73. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली में कम्प्यूटर के उपयोग का विस्तृत विवरण प्रस्तुत कीजिए।
  74. प्रश्न- GIS में आँकड़ों के प्रकार एवं संरचना पर प्रकाश डालिये।
  75. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली के सन्दर्भ में कम्प्यूटर की संग्रहण युक्तियों का वर्णन कीजिए।
  76. प्रश्न- आर्क जी०आई०एस० से आप क्या समझते हैं? इसके प्रशिक्षण और लाभ के संबंध में विस्तृत व्याख्या कीजिए।
  77. प्रश्न- भौगोलिक सूचना प्रणाली में प्रयोग होने वाले हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  78. प्रश्न- ERDAS इमेजिन सॉफ्टवेयर की अपने शब्दों में समीक्षा कीजिए।
  79. प्रश्न- QGIS (क्यू०जी०आई०एस०) के संबंध में एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  80. प्रश्न- विश्वस्तरीय सन्दर्भ प्रणाली से आपका क्या आशय है? निर्देशांक प्रणाली के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
  81. प्रश्न- डाटा मॉडल अर्थात् आँकड़ा मॉडल से आप क्या समझते हैं? इसके कार्य, संकल्पना और उपागम का वर्णन कीजिए।
  82. प्रश्न- रॉस्टर मॉडल की विवेचना कीजिए। इस मॉडल की क्षमताओं का भी वर्णन कीजिए।
  83. प्रश्न- विक्टर मॉडल की विस्तृत विवेचना कीजिए।
  84. प्रश्न- कार्टोग्राफिक संकेतीकरण त्रिविम आकृति एवं मानचित्र के प्रकार मुद्रण विधि का वर्णन कीजिए।
  85. प्रश्न- रॉस्टर मॉडल की कमियों और लाभ का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  86. प्रश्न- विक्टर मॉडल की कमियों और लाभ के सम्बन्ध में अपने विचार लिखिए।
  87. प्रश्न- रॉस्टर और विक्टर मॉडल के मध्य अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  88. प्रश्न- डेटाम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

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