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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-1 अर्थशास्त्र - आर्थिक संवृद्धि एवं विकास

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :224
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2773
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-1 अर्थशास्त्र - आर्थिक संवृद्धि एवं विकास - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- प्रो. हिणिन्स द्वारा प्रतिपादित औद्योगिक द्वैतवाद सिद्धान्त की आलोचनात्मक विवेचना कीजिए।

अथवा
हिगिंस का प्रौद्योगिकीय द्वैतवाद का सिद्धान्त मूलतः साधन अनुपातों को शामिल करता है और उसका सम्बन्ध सीमित उत्पादकीय रोजगार अवसरों से है। व्याख्या कीजिए।

उत्तर-

औद्योगिक द्वैतवाद
(Technological Dualism)

प्रो. हिणिन्स ने, औद्योगिक द्वैतवाद सिद्धान्त का प्रतिपादन प्रो. बोइके द्वारा प्रतिपादित सामाजिक द्वैतवाद सिद्धान्त के समान्तर ही किया। औद्योगिक द्वैतवाद से हमारा तात्पर्य है : अर्द्ध विकसित अर्थव्यवस्था में विकसित एवं परम्परागत क्षेत्रों में विभिन्न उत्पादन परिणामों का उपयोग।

हिणिन्स ने अल्प विकसित तथा अर्द्ध-विकसित देशों की समस्याओं के विषय में बताया कि साधन स्तर पर संरचनात्मक सन्तुलन स्थापित करना इन देशों की प्रमुख विशेषता है। अर्द्ध विकसित देशों में अनेक समस्यायें उत्पन्न होने का एक कारण आर्थिक सन्तुलन है। इसके कारण बेरोजगारी तथा अर्द्ध-बेरोजगारी जैसी प्रमुख समस्यायें उत्पन्न होती हैं। हिग्गीन्स ने द्वैतवाद सिद्धान्त का प्रतिपादन दो वस्तुओं, दो उत्पत्ति साधनों, दो क्षेत्रों के निकट उनकी साधन सम्पन्नता तथा परिणामों के आधार पर किया है। दो क्षेत्र का तात्पर्य देहाती तथा औद्योगिक क्षेत्र से है। देहाती क्षेत्रों में खाद्य वस्तुओं का उत्पादन होता है तथा कच्चे माल की आपूर्ति की जाती है। औद्योगिक क्षेत्र दूसरा क्षेत्र है। इस क्षेत्र में खनिज तेल आदि के बड़े उद्योग स्थापित किये जाते हैं।

हिणिन्स द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्त में उस प्रक्रिया का वर्णन भी किया गया है जिसके अंतर्गत औद्योगिकीय द्वैतवाद ने द्वैतीय अर्थव्यवस्थाओं में बेरोजगारी तथा छिपी बेरोजगारी को जन्म दिया है। औद्योगिक क्षेत्र का औद्योगीकरण होने पर पूंजी निर्माण की दर की तुलना में जनसंख्या में वृद्धि अधिक हो जाती है। इस क्षेत्र में पूंजी प्रधान प्रविधियों का प्रयोग अधिक होता है फलतः रोजगार नहीं उपलब्ध हो पाता है। जनसंख्या में वृद्धि होने से श्रमिक शहरों को छोड़कर गांवों की ओर पलायन करते हैं और आजीविका का विकल्प तलाशते हैं।

देहात में विकास के साधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध नहीं होते, प्रारम्भ में कृषि योग्य अर्थात् उपजाऊ भूमि पर काश्त करके रोजगार उपलब्ध किया जा सकता है। श्रम तथा पूंजी का प्रयोग करके विकास की प्रक्रिया को सन्तुलित किया जा सकता है। इस क्षेत्र में अधिक पूंजी लगाने से न तो यह अधिक उत्पादक क्षेत्र बन सकता है और न ही यह अधिकतम हितकारी हो सकता है। यहाँ पर प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करने के साधन बहुत कम होते हैं। इसी प्रकार औद्योगिक क्षेत्रों में भी औद्योगिक प्रवृत्ति छिपी बेरोजगारी को दूर करने में सहायक नहीं होती। हिग्गीन्स बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक क्षेत्रों में पर्याप्त वृद्धि हुई है जब देहाती क्षेत्रों में यह वृद्धि बहुत ही कम मात्रा में हुई है। इसके अतिरिक्त छिपी बेरोजगारी की समस्या एक भयंकर रूप में सामने आई हैं।

प्रो. हिगिंस का प्रौद्योगिकीय द्वैतवाद का सिद्धान्त कुछ सीमित तत्वों पर आधारित है, अर्थात् पूँजी, श्रम। यदि हम प्रो. हिगिंस के अनुसार बात करें तो यह सिद्धान्त छिपी बेरोजगारी पर ध्यान केन्द्रित करता है, लेकिन आज के प्रतियोगी बाजार में सीमित उत्पादकता एवं रोजगार के अवसर हमारी आर्थिक व्यवस्था एवं विकास को सतत् रूप से अग्रसर नहीं कर सकते, क्योंकि रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिये तीव्र औद्योगीकरण एवं वैज्ञानिकीकरण की आवश्यकता है। इन्होंने शिक्षित बेरोजगारी, खुली बेरोजगारी, आदि अवसरों पर कोई विशेष विचार नहीं दिया। अतएव हम कह सकते हैं कि जनसंख्या की वृद्धि दर जिस अनुपात में बढ़ रही है, उस अनुपात में रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं हैं। इस सीमित रोजगार का सबसे प्रमुख कारण विकसित देशों की प्रतियोगिता एवं उनकी योजनाओं के आकलन की कमी है। यदि हम गौर करें तो प्रो. हिगिंस के अनुसार रोजगार पाने के लिये ग्रामीणवासी शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों एवं पूँजी की कमी है, लेकिन वास्तव में यदि हम आंकलन करें तो जिस गति से रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, उसकी दुगुनी गति से बेरोजगारी (जनसंख्या) बढ़ रही है। इस तरह इस सिद्धान्त के अनुसार मात्र पलायन करने से रोजगार तो न बढ़ेंगे क्योंकि उद्योगों का विकास अर्द्धविकसित एवं विकासशील देशों में उस गति से नहीं हो रहा जिस गति से बेरोजगारी बढ़ रही है। इनके विचारों के द्वारा सीमित साधनों से रोजगार के अवसरों में वृद्धि नहीं की जा सकती क्योंकि रोजगार बढ़ाने के लिये जनसंख्या नीति, आर्थिक औद्योगीकरण नीति, अच्छी राजकोषीय नीति, राजनैतिक नीति एवं रोजगार नीति का सही दिशा में मार्ग प्रशस्त करना पडेगा। यदि हम शिक्षित बेरोजगारी की बात करें तो इसका ग्राफ निरन्तर बढ़ता जा रहा है और किसी भी धर्म एवं दर्शन में इसको बहिष्कृत करने की शक्ति नहीं दिखाई पड़ रही है। इस तरह प्रो. हिगिंस का विचार पुराने समाजवाद के सिद्धान्त से श्रेष्ठ है। परन्तु यह सिद्धान्त भी अब मात्र सीमित साधनों के परिवर्तन के आधार पर रोजगार सृजित करने का मात्र माध्यम ही बन चुका है।

इसलिए हम कह सकते हैं कि हिंगिस का प्रौद्योगिकी सिद्धान्त मात्र सीमित उत्पादन क्षमता एवं सीमित रोजगार अवसरों तक ही सम्भव है।

आलोचनाएँ (Criticisms) - प्रो. हिग्गीन्स के द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्त सामाजिक . द्वैतवाद की अपेक्षा अधिक आधुनिक है। इस सिद्धान्त के अंतर्गत छिपी बेरोजगारी की समस्या को समझाने का प्रयास किया गया है किन्तु फिर भी इस सिद्धान्त में कुछ कमियाँ हैं जिसकी वजह से इसकी आलोचना की गई है। इसकी कमियाँ निम्नलिखित हैं-

(i) हिग्गीन्स ने औद्योगिक क्षेत्र में श्रम की खपत करने वाली प्रविधि की उपेक्षा की है और इस बात को स्पष्ट रूप से बताया है कि पूँजी औद्योगिक क्षेत्र में प्रगति की आधारशिला है। विदेशों से आयात की जाने वली तकनीकें श्रम की बचत करने में सहायक नहीं होती।

(ii) इस सिद्धान्त में इस बात का स्पष्टीकरण नहीं किया गया कि साधन कीमतों तथा साधन सम्पन्नताओं का सम्बन्ध किस प्रकार बनता है और देहाती क्षेत्रों में साधन संपन्नताएँ तथा उत्पादन फलनों से छिपी बेरोजगारी किस प्रकार बढती है।

(iii) औद्योगिक द्वैतवाद में छिपी बेरोजगारी के स्वभाव तथा आकार को नहीं बताया गया है।

(iv) हिग्गीन्स ने संरचनात्मक संगठनों पर बल देकर संस्थात्मक साधनों की उपेक्षा की है जिनके बिना विकास की प्रक्रिया सम्भव नहीं है।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- आर्थिक विकास का आशय तथा परिभाषा कीजिए। आर्थिक विकास की प्रकृति व महत्व का वर्णन कीजिए।
  2. प्रश्न- आर्थिक विकास की परिभाषाएँ दीजिए।
  3. प्रश्न- आर्थिक विकास की विशेषताएँ बताइए।
  4. प्रश्न- आर्थिक विकास की प्रकृति बताइए।
  5. प्रश्न- आर्थिक विकास एवं आर्थिक वृद्धि में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  6. प्रश्न- आर्थिक विकास को प्रभावित करने वाले कारको की विवेचना कीजिये।
  7. प्रश्न- आर्थिक विकास को निर्धारित करने वाले आर्थिक तत्वों का वर्णन कीजिए।
  8. प्रश्न- आर्थिक विकास के अनार्थिक तत्वों को समझाइए।
  9. प्रश्न- आर्थिक विकास पर मानवीय संसाधन के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
  10. प्रश्न- जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास में बाधक हैं?
  11. प्रश्न- बढ़ती हुई जनसंख्या का आर्थिक विकास पर प्रभाव बताइए।
  12. प्रश्न- आर्थिक विकास के मापक बताइये।
  13. प्रश्न- आर्थिक विकास में संस्थाओं की भूमिका समझाइए।
  14. प्रश्न- किसी देश के आर्थिक विकास में विदेशी पूँजी की भूमिका की व्याख्या कीजिए।
  15. प्रश्न- आर्थिक संवृद्धि की गैर-आर्थिक बाधाएँ कौन-कौन सी हैं?
  16. प्रश्न- आर्थिक पिछड़ापन आर्थिक तथा अनार्थिक कारकों का परिणाम है। इस कथन का विश्लेषण कीजिए।
  17. प्रश्न- आर्थिक विकास एवं विकास अन्तराल की माप किस प्रकार की जाती है?
  18. प्रश्न- गरीबी अथवा निर्धनता के अर्थ को स्पष्ट कीजिए, भारत में गरीबी के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डालिए।
  19. प्रश्न- विकसित एवं विकासशील देशों की आय एवं सम्पत्ति असमानता में अन्तराल के कारणों का स्पष्ट विवेचन कीजिए।
  20. प्रश्न- मानव विकास सूचकांक की धारणा किन मान्यताओं पर आधारित है, तथा मानव विकास सूचकांक निर्माण करने के चरणों की व्याख्या कीजिए।
  21. प्रश्न- गरीबी रेखा के निर्धारण का क्या महत्त्व है? तथा भारत में गरीबी रेखा के निर्धारण हेतु सरकार द्वारा उठाये गये कदमों पर प्रकाश डालिए?
  22. प्रश्न- प्रसरण प्रभाव को स्पष्ट कीजिए।
  23. प्रश्न- सापेक्ष गरीबी बनाम निरपेक्ष गरीबी पर टिप्पणी लिखिए।
  24. प्रश्न- मानव विकास सूचकांक (HDI) क्या है? यह मानव विकास में कितने आयामों को मानता है?
  25. प्रश्न- भौतिक जीवन कोटि निर्देशांक किसने निर्मित किया? भौतिक जीवन कोटि निर्देशांक किन सूचकों द्वारा की जाती है?
  26. प्रश्न- "कोई देश इसलिए गरीब रहता है क्योंकि वह गरीब है। " स्पष्ट कीजिए।
  27. प्रश्न- निर्धनता के दुष्चक्र को तोड़ने के उपाय बताइये।
  28. प्रश्न- गिनी गुणांक क्या है? गिनी गुणांक कैसे मापा जाता है?
  29. प्रश्न- गिनी गुणांक का महत्व क्या है? स्पष्ट कीजिए।
  30. प्रश्न- लॉरेंज वक्र क्या है?
  31. प्रश्न- वैश्विक भूख सूचकांक क्या है?
  32. प्रश्न- लिंग सम्बन्धित विकास सूचक क्या है?
  33. प्रश्न- मानव निर्धनता सूचक क्या है? स्पष्ट कीजिए।
  34. प्रश्न- खुशहाली सूचकांक क्या है?
  35. प्रश्न- सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य क्या है? स्पष्ट कीजिए।
  36. प्रश्न- सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य (MDG) की महत्वपूर्ण विशेषताएँ बताइये।
  37. प्रश्न- सतत् विकास की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
  38. प्रश्न- आर्थर लुइस द्वारा प्रस्तुत असीमित श्रम आपूर्ति द्वारा आर्थिक विकास के सिद्धान्त का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
  39. प्रश्न- प्रबल प्रयास सिद्धान्त की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
  40. प्रश्न- नैल्सन का निम्नस्तरीय संतुलन अवरोध का सिद्धान्त की चित्रात्मक व्याख्या कीजिए।
  41. प्रश्न- संतुलित विकास के सिद्धान्त की विवेचना कीजिए तथा विकासशील देशों के सन्दर्भ में इसकी सीमाएं बताइए।
  42. प्रश्न- संतुलित विकास के पक्ष में तर्क दीजिए।
  43. प्रश्न- संतुलित विकास के विपक्ष में विभिन्न अर्थशास्त्रियों द्वारा दिये गये तर्कों का वर्णन कीजिए।
  44. प्रश्न- असंतुलित विकास को परिभाषित कीजिए।
  45. प्रश्न- असंतुलित विकास के सम्बन्ध में विभिन्न अर्थशास्त्रियों द्वारा परिलक्षित किये गये विचारों को प्रकट कीजिए।
  46. प्रश्न- संतुलित तथा असंतुलित विकास पद्धति में कौन बेहतर है?
  47. प्रश्न- हर्षमैन के असन्तुलित विकास सिद्धान्त की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए तथा विकासशील देशों के लिए इसकी उपयुक्तता का विवेचन कीजिए।
  48. प्रश्न- संतुलित एवं असंतुलित विकास की व्याख्या कीजिए। भारत जैसे विकासशील देश के लिए किस प्रकार का विकास अपेक्षित है?
  49. प्रश्न- असंतुलित विकास सिद्धान्त को समझाइये |
  50. प्रश्न- सन्तुलित विकास के सम्बन्ध में रोजेन्स्टीन रोडान के विचार को स्पष्ट कीजिए।
  51. प्रश्न- हर्षमैन द्वारा संतुलित विकास के विचार की किस प्रकार आलोचना की गयी है?
  52. प्रश्न- रोस्टोव की आर्थिक विकास की अवस्थाओं का वर्णन एवं आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
  53. प्रश्न- हैरोड तथा डोमर के विकास मॉडल की आलोचनात्मक व्याख्या करते हुए बताइए कि भारत जैसे अल्पविकसित देश में यह कहाँ तक लागू किया जा सकता है?
  54. प्रश्न- हैरोड द्वारा प्रस्तुत विकास दरों व समीकरण बताइए।
  55. प्रश्न- हैरोड के विकास मॉडल की आलोचनायें बताइए।
  56. प्रश्न- हैरोड का विकास मॉडल डोमर के विकास मॉडल से किस प्रकार भिन्न है?
  57. प्रश्न- हैरोड के विकास प्रारूप का संक्षेप में परीक्षण कीजिए। भारत जैसे विकासशील देशों में यह कहाँ तक लागू होता है?
  58. प्रश्न- हैरोड - डोमर मॉडल में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  59. प्रश्न- व्यष्टि स्तर पर नियोजन समझाइए।
  60. प्रश्न- हैरोड - डोमर मॉडल में छुरी-धार सन्तुलन की परिकल्पना को स्पष्ट कीजिए।
  61. प्रश्न- भारत के जनसंख्या वृद्धि की बदलती हुई विशेषताओं पर एक नोट लिखिए।
  62. प्रश्न- जनांकिकी से क्या अभिप्राय है? जनांकिकी संक्रमण सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए।
  63. प्रश्न- जनसंख्या एवं पर्यावरण किस प्रकार एक-दूसरे से सम्बन्धित हैं तथा आर्थिक विकास को कैसे प्रभावित करते हैं? मूल्यांकन कीजिए।
  64. प्रश्न- "जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास में सहायक है अथवा बाधक।" इस कथन की व्याख्या कीजिए।
  65. प्रश्न- जनसंख्या का आर्थिक विकास पर तथा आर्थिक विकास का जनसंख्या पर पड़ने वाले प्रभाव का मूल्यांकन कीजिए।
  66. प्रश्न- पर्यावरण क्या है? इसके कार्यों को स्पष्ट कीजिए?
  67. प्रश्न- जनसंख्या नीति 2000 की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
  68. प्रश्न- समावेशी विकास की आवधारणा या महत्व क्या है?
  69. प्रश्न- समावेशी विकास के समक्ष चुनौतियाँ क्या हैं?
  70. प्रश्न- समावेशी विकास की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।
  71. प्रश्न- बाजार विफलता का अर्थ स्पष्ट कीजिए एवं बाजार विफलता के कारण बताइये।
  72. प्रश्न- सरकार की विफलता के कारण बताइए।
  73. प्रश्न- बाजार विफलता को ठीक करने के उपाय बताइये।
  74. प्रश्न- सरकार की विफलता का अर्थ क्या है तथा इसके क्या कारण हैं?
  75. प्रश्न- सरकार की विफलता का अर्थ बताइए।
  76. प्रश्न- मानव पूँजी क्या है? आर्थिक विकास में मानवीय पूँजी निर्माण की भूमिका एवं महत्व की विवेचना कीजिए।
  77. प्रश्न- "जनसंख्या राष्ट्र के लिये सम्पत्ति है और दायित्व भी।" इस कथन पर टिप्पणी कीजिए।
  78. प्रश्न- मानवीय पूँजी निर्माण का क्या अर्थ है तथा मानवीय संसाधनों के विकास में क्या महत्व है? स्पष्ट कीजिए।
  79. प्रश्न- मानवीय पूँजी निर्माण की समस्याओं पर प्रकाश डालिए।
  80. प्रश्न- मानवीय साधनों में विनियोग कितने मदों में किया जाता है? स्पष्ट कीजिए।
  81. प्रश्न- मानव पूँजी निर्माण के उपायों पर चर्चा कीजिए।
  82. प्रश्न- मानव पूँजी निर्माण के घटकों तथा अर्धविकसित देशों में मानव पूँजी के निम्न स्तर होने के कारणों का स्पष्ट विवेचन कीजिए।
  83. प्रश्न- मानवीय पूँजी निर्माण के क्या-क्या मापदण्ड हैं? तथा इसके मापदण्डों का मूल्यांकन कीजिए।
  84. प्रश्न- आर्थिक विकास से आपका क्या तात्पर्य है? किसी विकासशील (अल्पविकसित ) देश की क्या विशेषताएँ हैं?
  85. प्रश्न- भारत जैसे एक अल्पविकसित देश के प्रमुख लक्षणों पर प्रकाश डालिए। भारत के अल्पविकसित होने के प्रमुख कारणों को बताइए।
  86. प्रश्न- विकसित एवं विकासशील अर्थव्यवस्था के मध्य अन्तर स्पष्ट करते हुए आर्थिक विकास के सूचकांकों पर प्रकाश डालिए।
  87. प्रश्न- अल्पविकास के प्रमुख मापदण्ड़ों को स्पष्ट कीजिये।
  88. प्रश्न- अल्पविकास के कारणों को स्पष्ट कीजिये।
  89. प्रश्न- विकसित एवं विकासशील अर्थव्यवस्था में अन्तर स्पष्ट करें।
  90. प्रश्न- क्या भारत एक अल्पविकसित देश है? स्पष्ट कीजिये।
  91. प्रश्न- अल्पविकसित अर्थव्यवस्था की प्रमुख विशेषतायें लिखिये।
  92. प्रश्न- आर्थिक संवृद्धि एवं आर्थिक विकास में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  93. प्रश्न- मिर्डल के चक्रीय कार्यकरण का सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए।
  94. प्रश्न- विकास के फाई एवं रेनिस सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए।
  95. प्रश्न- फाई- रेनिस सिद्धान्त की मान्यताएँ बताइए।
  96. प्रश्न- फाई- रेनिस के सिद्धान्त को रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए।
  97. प्रश्न- फाई-रेनिस सिद्धान्त की आलोचनाएँ बताइए।
  98. प्रश्न- प्रो. हिणिन्स द्वारा प्रतिपादित औद्योगिक द्वैतवाद सिद्धान्त की आलोचनात्मक विवेचना कीजिए।
  99. प्रश्न- तकनीकी द्वैतवाद पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  100. प्रश्न- 'द्वैतवाद' एक विकासशील अर्थव्यवस्था के विकास की किस प्रकार बाधित कर सकती है?
  101. प्रश्न- बोइके का सामाजिक दुहरापन सिद्धान्त समझाइये।
  102. प्रश्न- मिन्ट का वित्तीय दुहरेपन को दूर करने का विकास सिद्धान्त क्या है?
  103. प्रश्न- अल्पविकास का निर्भरतापरक सिद्धान्त स्पष्ट कीजिए।
  104. प्रश्न- काल्डोर का आर्थिक वृद्धि मॉडल की व्याख्या कीजिए।
  105. प्रश्न- हैरड की तटस्थ तकनीकी प्रगति को स्पष्ट कीजिए।
  106. प्रश्न- तटस्थ एवं गैर तटस्थ तकनीकी प्रगति क्या है? तटस्थता के सम्बन्ध में हिक्स की धारणा स्पष्ट कीजिए।
  107. प्रश्न- आर्थिक विकास में तकनीकी प्रगति का महत्व स्पष्ट कीजिए।
  108. प्रश्न- सोलो के दीर्घकालीन वृद्धि मॉडल की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए [
  109. प्रश्न- सोलो मॉडल की सीमाएँ लिखिए।
  110. प्रश्न- सोलो के वृद्धि मॉडल के अनुसार एक अर्थव्यवस्था में उत्पादन किन तत्वों पर निर्भर करता है? संक्षेप में व्याख्या कीजिए।
  111. प्रश्न- करने से जानकारी (कौशल अर्जन) (Learning By Doing) को स्पष्ट कीजिए।
  112. प्रश्न- तकनीकी प्रगति का अभिप्राय क्या है?
  113. प्रश्न- स्टिग्लिट्ज का असममित सूचना सिद्धान्त स्पष्ट कीजिए।
  114. प्रश्न- शोध एवं विकास (Research and Development ) पर टिप्पणी कीजिए।
  115. प्रश्न- किसी देश के आर्थिक विकास में शिक्षा, शोध एवं ज्ञान की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
  116. प्रश्न- अन्तर्जात संवृद्धि सिद्धान्त को स्पष्ट कीजिए।
  117. प्रश्न- एक विकासशील अर्थव्यवस्था में विदेशी पूँजी की आवश्यकता महत्व तथा खतरों की विवेचना कीजिए।
  118. प्रश्न- बहुराष्ट्रीय निगम से आप क्या समझते हैं? भारत जैसे विकासशील देश में निजी क्षेत्र एवं बहुराष्ट्रीय निगमों की क्या भूमिका है?
  119. प्रश्न- विश्व बैंक के क्या कार्य हैं? विकासशील देशों के सम्बन्ध में विश्व बैंक की क्या नीति है?
  120. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष की स्थापना कब हुई थी तथा विकासशील देशों के सम्बन्ध में अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष की नीतियों की स्पष्ट विवेचना कीजिए।
  121. प्रश्न- मौद्रिक नीति के प्रमुख उद्देश्यों की व्याख्या कीजिए।
  122. प्रश्न- बहुराष्ट्रीय निगम क्या है? उनके पक्ष एवं विपक्ष में तर्क दीजिए।
  123. प्रश्न- भारत के बाह्य ऋण' समझाइये |
  124. प्रश्न- 'प्रत्यक्ष विदेशी निवेश' पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  125. प्रश्न- निजी विदेशी निवेश के विचार से आप क्या समझते हैं?
  126. प्रश्न- आर्थिक विकास में घाटे का वित्त प्रबंधन की भूमिका की व्याख्या कीजिए [
  127. प्रश्न- किसी देश के आर्थिक वृद्धि में विदेशी व्यापार की भूमिका की व्याख्या कीजिए।
  128. प्रश्न- एक विकासशील अर्थव्यवस्था में मौद्रिक नीति किस प्रकार कार्य करती है? स्पष्ट कीजिए।
  129. प्रश्न- विश्व बैंक के कार्यों की प्रगति को स्पष्ट कीजिए।
  130. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की सफलताओं एवं असफलताओं को स्पष्ट कीजिए।
  131. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से भारत को होने वाले लाभों का विश्लेषण कीजिए।
  132. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के कार्यों को स्पष्ट कीजिए।
  133. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष के उद्देश्यों का विवेचन कीजिए।
  134. प्रश्न- विश्व बैंक से भारत को क्या लाभ हुए हैं? समझाइये |
  135. प्रश्न- विश्व बैंक की प्रमुख आलोचनायें लिखिये।
  136. प्रश्न- विश्व बैंक के उद्देश्यों को स्पष्ट कीजिए।
  137. प्रश्न- विश्व बैंक के कार्यों का विश्लेषण कीजिए।

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