लोगों की राय

बी ए - एम ए >> बीए सेमेस्टर-5 पेपर-1 अर्थशास्त्र - आर्थिक संवृद्धि एवं विकास

बीए सेमेस्टर-5 पेपर-1 अर्थशास्त्र - आर्थिक संवृद्धि एवं विकास

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :224
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2773
आईएसबीएन :0

Like this Hindi book 0

5 पाठक हैं

बीए सेमेस्टर-5 पेपर-1 अर्थशास्त्र - आर्थिक संवृद्धि एवं विकास - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- "जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास में सहायक है अथवा बाधक।" इस कथन की व्याख्या कीजिए।

उत्तर-

जनसंख्या वृद्धि : आर्थिक विकास में सहायक

जनसंख्या आर्थिक विकास में सहायक है, इस विचार को मानने वाले प्रमुख अर्थशास्त्री प्रो. हैन्सन, आर्थर लुईस, लोकिन, क्लार्क, हर्षमैन, रेबुशकीन, अल्फ्रेड बोन तथा ई. एफ. पेनरोज हैं। बढ़ती हुई जनसंख्या से बाजारों का विस्तार होता है, जिससे निवेश की प्रेरणा को बल प्राप्त होता है। उत्पादन और रोजगार बढ़ने लगता है। अतः जनसंख्या वृद्धि किसी देश के आर्थिक विकास को अत्यधिक प्रभावित करती है, इस सम्बन्ध में निम्न तर्क दिये जाते हैं

(1) उत्पादन में वृद्धि - जनसंख्या वृद्धि से उत्पादन की मात्रा में वृद्धि होती है, बशर्ते कि जनसंख्या का आकार देश में उपलब्ध पूँजी व भूमि की तुलना में छोटा हो, अर्थात् जनसंख्या वृद्धि और उत्पादन वृद्धि में 'वनात्मक सह-सम्बन्ध' हो।

(2) कौशल निर्माण को बढ़ावा - नये ज्ञान की खोज तथा उसका विकास मानव द्वारा ही किया जाता है, जो स्वयं जनसंख्या का परिणाम है। इस प्रकार वृद्धिशील जनसंख्या, सृजनात्मक मस्तिष्कों का सृजन करती है जिसके परिणामस्वरूप कौशल निर्माण को बल मिलता है, नये ज्ञान के भण्डार में वृद्धि होती है और राष्ट्रीय उत्पादन में वृद्धि होने लगती है।

साइमन कुजनेट्स के अनुसार, “आर्थिक उत्पादन की वृद्धि, परीक्षित ज्ञान के स्टॉक का फलन है। "

(3) कार्यकारी श्रम-शक्ति की पूर्ति का स्रोत - आर्थिक विकास प्राकृतिक साधनों, श्रम शक्ति, पूँजी और तकनीकी का फलन है। इसमें श्रम शक्ति सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटक माना जाता है क्योंकि विकास प्रक्रिया में वही एकमात्र प्रावैगिक साधन है। साइमन कुजनेट्स का भी कहना है कि, “अन्य बातें समान रहने पर जनसंख्या की प्रत्येक वृद्धि श्रम शक्ति को बढ़ाती है। हाँ ! इसका श्रम शक्ति के लिए निश्चित योगदान इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या जनसंख्या वृद्धि मृत्यु दर के गिरने के कारण अथवा शुद्ध देशान्तरवास के कारण या जन्म- दर में वृद्धि के कारण हुई है।'

 

(4) पूँजी निर्माण का स्रोत - रेगनर नर्से का कहना है कि, “अतिरिक्त श्रम शक्ति एक प्रकार की अदृश्य बचत है और अर्द्ध-बेरोजगारी के रूप में इन अदृश्य सम्भाव्य बचतों को पूँजी निर्माण के लिए प्रयोग किया जा सकता है। इस प्रकार अतिरिक्त श्रम शक्ति, पूँजी निर्माण का एक सुलभ साधन सिद्ध होता है।"

(5) मानव पूँजी निर्माण में सहायक - मानव पूँजी से अभिप्राय, तकनीकी दृष्टि से एक प्रशिक्षित एवं कुशल श्रम शक्ति से लगाया जाता है। उपलब्ध श्रम-शक्ति के ज्ञान में जब वृद्धि करके और उसकी कुशलताओं तथा योग्यताओं में सुधार का प्रयास किया जाता है तो उससे मानव पूँजी का निर्माण होता है, जिसका अन्तिम प्रभाव प्रति व्यक्ति उत्पादकता को बढ़ाता है और अर्थव्यवस्था की विकास दर को ऊँचा उठाने में सहायक होता है।

( 6 ) बाजारों का विस्तार - जनसंख्या आर्थिक विकास का साधन और साध्य दोनों ही है, अर्थात् लोग केवल धन के उत्पादक ही नहीं होते, बल्कि वे धन का उपयोग भी करते हैं। पूरकता के इस अर्थ में, जनसंख्या वृद्धि उपभोक्ताओं के रूप में वस्तुओं के लिए माँग पैदा करती है जिससे ... > बाजारों का विस्तार होता है ... > बचतों की वृद्धि होती है ... > उत्पादन के ढाँचे में विविधता आती है और फलस्वरूप ... > रोजगार के अवसरों में वृद्धि होती है। इस प्रकार जनसंख्या वृद्धि वस्तुओं की अतिरिक्त माँग का सृजन करके आर्थिक विकास को बल प्रदान करती है।

जनसंख्या वृद्धि : आर्थिक विकास में बाधक

प्रो. विलार्ड, हार्वे लीबिन्स्टीन, प्रो. मायर, एच. डब्ल्यू सिंगर आदि विद्वान उपरोक्त मत के विपरीत कहते हैं कि, “जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास की दर पर ऋणात्मक प्रभाव डालती है, बचत दर को घटाती है और विनियोग की उत्पादकता को कम करती है।" निम्न कारणों से जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास में बाधक बनती हैं-

(1) पूँजी निर्माण का कम होना - जनसंख्या वृद्धि पूँजी निर्माण की दर को मन्द करती है। अल्पविकसित देशों में जनसंख्या की दोषपूर्ण आयु संरचना, पूँजी निर्माण में वृद्धि की सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। प्रो. स्पैंगलर के अनुसार, औद्योगिक देशों में प्रति 3 श्रमिकों के पीछे 2 व्यक्ति आश्रित होते हैं जबकि अल्पविकसित देशों में यह अनुपात 3:4 का है। आश्रितों का यह ऊँचा अनुपात बचत क्षमता को सर्वाधिक प्रभावित करता है और उसे घटाता है जिससे पूँजी निर्माण की गति मन्द पड़ जाती है।

(2) बेरोजगारी का बढ़ना - जनसंख्या की तीव्र वृद्धि से श्रम शक्ति में भी वृद्धि हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप बेरोजगारी की सम्भावना बढ़ जाती है। जनसंख्या वृद्धि का दुष्परिणाम खुली बेरोजगारी, अर्द्ध-बेरोजगारी, दुर्गेजगारी और अदृश्य बेरोजगारी के रूप में सामने आती है। यह बेरोजगारी मानव संसाधनों के अपव्यय का प्रतीक है जो विकास दर को निम्न स्तर पर बनाये रखता है।

(3) जनांकिकीय निवेश का बढ़ना और आर्थिक निवेश का घटना - जनसंख्या वृद्धि से जनांकिकीय निवेश बढ़ता है और बचत करने की क्षमता घटती है, जिसके कारण निवेश की आवश्यकता और निवेश योग्य कोष की पूर्ति में असन्तुलन उत्पन्न हो जाता है। जनांकिकीय निवेश या 'आवश्यक निवेश' से अभिप्राय उस निवेश से होता है जो बढ़ती हुई जनसंख्या को स्थिर जीवन- स्तर पर बनाये रखने के लिए आवश्यक होता है। जनसंख्या वृद्धि के कारण कुल निवेश का काफी बड़ा भाग जनांकिकीय निवेश के रूप में समाप्त हो जाता है और निवेश जोकि आर्थिक विकास का आधार है, के लिए कुछ भी शेष नहीं बच पाता।

( 4 ) प्रति व्यक्ति आय पर अधोगामी प्रभाव - तीव्रगति से बढ़ती हुई जनसंख्या का प्रति व्यक्ति आय पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसका कारण यह है कि एक निश्चित स्तर तक जनसंख्या-वृद्धि प्रति व्यक्ति आय को बढ़ाती है, किन्तु जब जनसंख्या की वृद्धि की दर विकास दर का अतिक्रमण करना प्रारम्भ कर देती है तो प्रति व्यक्ति आय आवश्यक रूप से घटने लगती है।

(5) राष्ट्रीय उत्पाद में कमी - देश में उपलब्ध साधनों का सर्वोत्तम उपयोग करने हेतु जनशक्ति का पर्याप्त मात्रा में होना आवश्यक है, परन्तु उत्पादन वृद्धि की तुलना में यदि जनसंख्या की वृद्धि अधिक तेजी के साथ हो रही है तो उत्पादन वृद्धि का प्रभाव अत्यन्त नगण्य होगा क्योंकि जनसंख्या में होने वाली तीव्र वृद्धि, बढ़ते हुए उत्पादन को ढककर राष्ट्रीय उत्पादन व प्रति व्यक्ति आय में कमी करेगी।

( 6 ) खाद्यान्न पूर्ति की समस्या - अल्पविकसित देशों में तेजी के साथ बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण खाद्यान्नों की पूर्ति में कमी आने लगती है। यह समस्या आर्थिक विकास को तीन प्रकार से प्रभावित करती है

(i) खाद्यान्न का सम्भरण अपर्याप्त होने पर जनसंख्या का अल्प पोषण होता है जिससे उसकी कार्यकुशलता व उत्पादन क्षमता घटती है।

(ii) खाद्य सामग्री की कमी से, अल्पविकसित देशों को खाद्यान्न आदि विदेशों से आयात करने पड़ते हैं जिसके कारण उनके सम्मुख विदेशी विनिमय संकट उत्पन्न हो जाता है और विदेशी भुगतान करना कठिन समस्या बन जाती है।

(iii) विदेशी विनिमय का सही उपयोग न हो पाना, जनसंख्या के अत्यधिक दबाव का ही दुष्परिणाम है।

उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट होता है कि जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास में बाधक भी होती है अथवा सहायक दोनों ही है।

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

    अनुक्रम

  1. प्रश्न- आर्थिक विकास का आशय तथा परिभाषा कीजिए। आर्थिक विकास की प्रकृति व महत्व का वर्णन कीजिए।
  2. प्रश्न- आर्थिक विकास की परिभाषाएँ दीजिए।
  3. प्रश्न- आर्थिक विकास की विशेषताएँ बताइए।
  4. प्रश्न- आर्थिक विकास की प्रकृति बताइए।
  5. प्रश्न- आर्थिक विकास एवं आर्थिक वृद्धि में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  6. प्रश्न- आर्थिक विकास को प्रभावित करने वाले कारको की विवेचना कीजिये।
  7. प्रश्न- आर्थिक विकास को निर्धारित करने वाले आर्थिक तत्वों का वर्णन कीजिए।
  8. प्रश्न- आर्थिक विकास के अनार्थिक तत्वों को समझाइए।
  9. प्रश्न- आर्थिक विकास पर मानवीय संसाधन के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
  10. प्रश्न- जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास में बाधक हैं?
  11. प्रश्न- बढ़ती हुई जनसंख्या का आर्थिक विकास पर प्रभाव बताइए।
  12. प्रश्न- आर्थिक विकास के मापक बताइये।
  13. प्रश्न- आर्थिक विकास में संस्थाओं की भूमिका समझाइए।
  14. प्रश्न- किसी देश के आर्थिक विकास में विदेशी पूँजी की भूमिका की व्याख्या कीजिए।
  15. प्रश्न- आर्थिक संवृद्धि की गैर-आर्थिक बाधाएँ कौन-कौन सी हैं?
  16. प्रश्न- आर्थिक पिछड़ापन आर्थिक तथा अनार्थिक कारकों का परिणाम है। इस कथन का विश्लेषण कीजिए।
  17. प्रश्न- आर्थिक विकास एवं विकास अन्तराल की माप किस प्रकार की जाती है?
  18. प्रश्न- गरीबी अथवा निर्धनता के अर्थ को स्पष्ट कीजिए, भारत में गरीबी के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डालिए।
  19. प्रश्न- विकसित एवं विकासशील देशों की आय एवं सम्पत्ति असमानता में अन्तराल के कारणों का स्पष्ट विवेचन कीजिए।
  20. प्रश्न- मानव विकास सूचकांक की धारणा किन मान्यताओं पर आधारित है, तथा मानव विकास सूचकांक निर्माण करने के चरणों की व्याख्या कीजिए।
  21. प्रश्न- गरीबी रेखा के निर्धारण का क्या महत्त्व है? तथा भारत में गरीबी रेखा के निर्धारण हेतु सरकार द्वारा उठाये गये कदमों पर प्रकाश डालिए?
  22. प्रश्न- प्रसरण प्रभाव को स्पष्ट कीजिए।
  23. प्रश्न- सापेक्ष गरीबी बनाम निरपेक्ष गरीबी पर टिप्पणी लिखिए।
  24. प्रश्न- मानव विकास सूचकांक (HDI) क्या है? यह मानव विकास में कितने आयामों को मानता है?
  25. प्रश्न- भौतिक जीवन कोटि निर्देशांक किसने निर्मित किया? भौतिक जीवन कोटि निर्देशांक किन सूचकों द्वारा की जाती है?
  26. प्रश्न- "कोई देश इसलिए गरीब रहता है क्योंकि वह गरीब है। " स्पष्ट कीजिए।
  27. प्रश्न- निर्धनता के दुष्चक्र को तोड़ने के उपाय बताइये।
  28. प्रश्न- गिनी गुणांक क्या है? गिनी गुणांक कैसे मापा जाता है?
  29. प्रश्न- गिनी गुणांक का महत्व क्या है? स्पष्ट कीजिए।
  30. प्रश्न- लॉरेंज वक्र क्या है?
  31. प्रश्न- वैश्विक भूख सूचकांक क्या है?
  32. प्रश्न- लिंग सम्बन्धित विकास सूचक क्या है?
  33. प्रश्न- मानव निर्धनता सूचक क्या है? स्पष्ट कीजिए।
  34. प्रश्न- खुशहाली सूचकांक क्या है?
  35. प्रश्न- सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य क्या है? स्पष्ट कीजिए।
  36. प्रश्न- सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य (MDG) की महत्वपूर्ण विशेषताएँ बताइये।
  37. प्रश्न- सतत् विकास की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
  38. प्रश्न- आर्थर लुइस द्वारा प्रस्तुत असीमित श्रम आपूर्ति द्वारा आर्थिक विकास के सिद्धान्त का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
  39. प्रश्न- प्रबल प्रयास सिद्धान्त की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
  40. प्रश्न- नैल्सन का निम्नस्तरीय संतुलन अवरोध का सिद्धान्त की चित्रात्मक व्याख्या कीजिए।
  41. प्रश्न- संतुलित विकास के सिद्धान्त की विवेचना कीजिए तथा विकासशील देशों के सन्दर्भ में इसकी सीमाएं बताइए।
  42. प्रश्न- संतुलित विकास के पक्ष में तर्क दीजिए।
  43. प्रश्न- संतुलित विकास के विपक्ष में विभिन्न अर्थशास्त्रियों द्वारा दिये गये तर्कों का वर्णन कीजिए।
  44. प्रश्न- असंतुलित विकास को परिभाषित कीजिए।
  45. प्रश्न- असंतुलित विकास के सम्बन्ध में विभिन्न अर्थशास्त्रियों द्वारा परिलक्षित किये गये विचारों को प्रकट कीजिए।
  46. प्रश्न- संतुलित तथा असंतुलित विकास पद्धति में कौन बेहतर है?
  47. प्रश्न- हर्षमैन के असन्तुलित विकास सिद्धान्त की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए तथा विकासशील देशों के लिए इसकी उपयुक्तता का विवेचन कीजिए।
  48. प्रश्न- संतुलित एवं असंतुलित विकास की व्याख्या कीजिए। भारत जैसे विकासशील देश के लिए किस प्रकार का विकास अपेक्षित है?
  49. प्रश्न- असंतुलित विकास सिद्धान्त को समझाइये |
  50. प्रश्न- सन्तुलित विकास के सम्बन्ध में रोजेन्स्टीन रोडान के विचार को स्पष्ट कीजिए।
  51. प्रश्न- हर्षमैन द्वारा संतुलित विकास के विचार की किस प्रकार आलोचना की गयी है?
  52. प्रश्न- रोस्टोव की आर्थिक विकास की अवस्थाओं का वर्णन एवं आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
  53. प्रश्न- हैरोड तथा डोमर के विकास मॉडल की आलोचनात्मक व्याख्या करते हुए बताइए कि भारत जैसे अल्पविकसित देश में यह कहाँ तक लागू किया जा सकता है?
  54. प्रश्न- हैरोड द्वारा प्रस्तुत विकास दरों व समीकरण बताइए।
  55. प्रश्न- हैरोड के विकास मॉडल की आलोचनायें बताइए।
  56. प्रश्न- हैरोड का विकास मॉडल डोमर के विकास मॉडल से किस प्रकार भिन्न है?
  57. प्रश्न- हैरोड के विकास प्रारूप का संक्षेप में परीक्षण कीजिए। भारत जैसे विकासशील देशों में यह कहाँ तक लागू होता है?
  58. प्रश्न- हैरोड - डोमर मॉडल में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  59. प्रश्न- व्यष्टि स्तर पर नियोजन समझाइए।
  60. प्रश्न- हैरोड - डोमर मॉडल में छुरी-धार सन्तुलन की परिकल्पना को स्पष्ट कीजिए।
  61. प्रश्न- भारत के जनसंख्या वृद्धि की बदलती हुई विशेषताओं पर एक नोट लिखिए।
  62. प्रश्न- जनांकिकी से क्या अभिप्राय है? जनांकिकी संक्रमण सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए।
  63. प्रश्न- जनसंख्या एवं पर्यावरण किस प्रकार एक-दूसरे से सम्बन्धित हैं तथा आर्थिक विकास को कैसे प्रभावित करते हैं? मूल्यांकन कीजिए।
  64. प्रश्न- "जनसंख्या वृद्धि आर्थिक विकास में सहायक है अथवा बाधक।" इस कथन की व्याख्या कीजिए।
  65. प्रश्न- जनसंख्या का आर्थिक विकास पर तथा आर्थिक विकास का जनसंख्या पर पड़ने वाले प्रभाव का मूल्यांकन कीजिए।
  66. प्रश्न- पर्यावरण क्या है? इसके कार्यों को स्पष्ट कीजिए?
  67. प्रश्न- जनसंख्या नीति 2000 की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
  68. प्रश्न- समावेशी विकास की आवधारणा या महत्व क्या है?
  69. प्रश्न- समावेशी विकास के समक्ष चुनौतियाँ क्या हैं?
  70. प्रश्न- समावेशी विकास की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।
  71. प्रश्न- बाजार विफलता का अर्थ स्पष्ट कीजिए एवं बाजार विफलता के कारण बताइये।
  72. प्रश्न- सरकार की विफलता के कारण बताइए।
  73. प्रश्न- बाजार विफलता को ठीक करने के उपाय बताइये।
  74. प्रश्न- सरकार की विफलता का अर्थ क्या है तथा इसके क्या कारण हैं?
  75. प्रश्न- सरकार की विफलता का अर्थ बताइए।
  76. प्रश्न- मानव पूँजी क्या है? आर्थिक विकास में मानवीय पूँजी निर्माण की भूमिका एवं महत्व की विवेचना कीजिए।
  77. प्रश्न- "जनसंख्या राष्ट्र के लिये सम्पत्ति है और दायित्व भी।" इस कथन पर टिप्पणी कीजिए।
  78. प्रश्न- मानवीय पूँजी निर्माण का क्या अर्थ है तथा मानवीय संसाधनों के विकास में क्या महत्व है? स्पष्ट कीजिए।
  79. प्रश्न- मानवीय पूँजी निर्माण की समस्याओं पर प्रकाश डालिए।
  80. प्रश्न- मानवीय साधनों में विनियोग कितने मदों में किया जाता है? स्पष्ट कीजिए।
  81. प्रश्न- मानव पूँजी निर्माण के उपायों पर चर्चा कीजिए।
  82. प्रश्न- मानव पूँजी निर्माण के घटकों तथा अर्धविकसित देशों में मानव पूँजी के निम्न स्तर होने के कारणों का स्पष्ट विवेचन कीजिए।
  83. प्रश्न- मानवीय पूँजी निर्माण के क्या-क्या मापदण्ड हैं? तथा इसके मापदण्डों का मूल्यांकन कीजिए।
  84. प्रश्न- आर्थिक विकास से आपका क्या तात्पर्य है? किसी विकासशील (अल्पविकसित ) देश की क्या विशेषताएँ हैं?
  85. प्रश्न- भारत जैसे एक अल्पविकसित देश के प्रमुख लक्षणों पर प्रकाश डालिए। भारत के अल्पविकसित होने के प्रमुख कारणों को बताइए।
  86. प्रश्न- विकसित एवं विकासशील अर्थव्यवस्था के मध्य अन्तर स्पष्ट करते हुए आर्थिक विकास के सूचकांकों पर प्रकाश डालिए।
  87. प्रश्न- अल्पविकास के प्रमुख मापदण्ड़ों को स्पष्ट कीजिये।
  88. प्रश्न- अल्पविकास के कारणों को स्पष्ट कीजिये।
  89. प्रश्न- विकसित एवं विकासशील अर्थव्यवस्था में अन्तर स्पष्ट करें।
  90. प्रश्न- क्या भारत एक अल्पविकसित देश है? स्पष्ट कीजिये।
  91. प्रश्न- अल्पविकसित अर्थव्यवस्था की प्रमुख विशेषतायें लिखिये।
  92. प्रश्न- आर्थिक संवृद्धि एवं आर्थिक विकास में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
  93. प्रश्न- मिर्डल के चक्रीय कार्यकरण का सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए।
  94. प्रश्न- विकास के फाई एवं रेनिस सिद्धान्त की व्याख्या कीजिए।
  95. प्रश्न- फाई- रेनिस सिद्धान्त की मान्यताएँ बताइए।
  96. प्रश्न- फाई- रेनिस के सिद्धान्त को रेखाचित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए।
  97. प्रश्न- फाई-रेनिस सिद्धान्त की आलोचनाएँ बताइए।
  98. प्रश्न- प्रो. हिणिन्स द्वारा प्रतिपादित औद्योगिक द्वैतवाद सिद्धान्त की आलोचनात्मक विवेचना कीजिए।
  99. प्रश्न- तकनीकी द्वैतवाद पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  100. प्रश्न- 'द्वैतवाद' एक विकासशील अर्थव्यवस्था के विकास की किस प्रकार बाधित कर सकती है?
  101. प्रश्न- बोइके का सामाजिक दुहरापन सिद्धान्त समझाइये।
  102. प्रश्न- मिन्ट का वित्तीय दुहरेपन को दूर करने का विकास सिद्धान्त क्या है?
  103. प्रश्न- अल्पविकास का निर्भरतापरक सिद्धान्त स्पष्ट कीजिए।
  104. प्रश्न- काल्डोर का आर्थिक वृद्धि मॉडल की व्याख्या कीजिए।
  105. प्रश्न- हैरड की तटस्थ तकनीकी प्रगति को स्पष्ट कीजिए।
  106. प्रश्न- तटस्थ एवं गैर तटस्थ तकनीकी प्रगति क्या है? तटस्थता के सम्बन्ध में हिक्स की धारणा स्पष्ट कीजिए।
  107. प्रश्न- आर्थिक विकास में तकनीकी प्रगति का महत्व स्पष्ट कीजिए।
  108. प्रश्न- सोलो के दीर्घकालीन वृद्धि मॉडल की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए [
  109. प्रश्न- सोलो मॉडल की सीमाएँ लिखिए।
  110. प्रश्न- सोलो के वृद्धि मॉडल के अनुसार एक अर्थव्यवस्था में उत्पादन किन तत्वों पर निर्भर करता है? संक्षेप में व्याख्या कीजिए।
  111. प्रश्न- करने से जानकारी (कौशल अर्जन) (Learning By Doing) को स्पष्ट कीजिए।
  112. प्रश्न- तकनीकी प्रगति का अभिप्राय क्या है?
  113. प्रश्न- स्टिग्लिट्ज का असममित सूचना सिद्धान्त स्पष्ट कीजिए।
  114. प्रश्न- शोध एवं विकास (Research and Development ) पर टिप्पणी कीजिए।
  115. प्रश्न- किसी देश के आर्थिक विकास में शिक्षा, शोध एवं ज्ञान की भूमिका पर प्रकाश डालिए।
  116. प्रश्न- अन्तर्जात संवृद्धि सिद्धान्त को स्पष्ट कीजिए।
  117. प्रश्न- एक विकासशील अर्थव्यवस्था में विदेशी पूँजी की आवश्यकता महत्व तथा खतरों की विवेचना कीजिए।
  118. प्रश्न- बहुराष्ट्रीय निगम से आप क्या समझते हैं? भारत जैसे विकासशील देश में निजी क्षेत्र एवं बहुराष्ट्रीय निगमों की क्या भूमिका है?
  119. प्रश्न- विश्व बैंक के क्या कार्य हैं? विकासशील देशों के सम्बन्ध में विश्व बैंक की क्या नीति है?
  120. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष की स्थापना कब हुई थी तथा विकासशील देशों के सम्बन्ध में अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष की नीतियों की स्पष्ट विवेचना कीजिए।
  121. प्रश्न- मौद्रिक नीति के प्रमुख उद्देश्यों की व्याख्या कीजिए।
  122. प्रश्न- बहुराष्ट्रीय निगम क्या है? उनके पक्ष एवं विपक्ष में तर्क दीजिए।
  123. प्रश्न- भारत के बाह्य ऋण' समझाइये |
  124. प्रश्न- 'प्रत्यक्ष विदेशी निवेश' पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  125. प्रश्न- निजी विदेशी निवेश के विचार से आप क्या समझते हैं?
  126. प्रश्न- आर्थिक विकास में घाटे का वित्त प्रबंधन की भूमिका की व्याख्या कीजिए [
  127. प्रश्न- किसी देश के आर्थिक वृद्धि में विदेशी व्यापार की भूमिका की व्याख्या कीजिए।
  128. प्रश्न- एक विकासशील अर्थव्यवस्था में मौद्रिक नीति किस प्रकार कार्य करती है? स्पष्ट कीजिए।
  129. प्रश्न- विश्व बैंक के कार्यों की प्रगति को स्पष्ट कीजिए।
  130. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की सफलताओं एवं असफलताओं को स्पष्ट कीजिए।
  131. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से भारत को होने वाले लाभों का विश्लेषण कीजिए।
  132. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के कार्यों को स्पष्ट कीजिए।
  133. प्रश्न- अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राकोष के उद्देश्यों का विवेचन कीजिए।
  134. प्रश्न- विश्व बैंक से भारत को क्या लाभ हुए हैं? समझाइये |
  135. प्रश्न- विश्व बैंक की प्रमुख आलोचनायें लिखिये।
  136. प्रश्न- विश्व बैंक के उद्देश्यों को स्पष्ट कीजिए।
  137. प्रश्न- विश्व बैंक के कार्यों का विश्लेषण कीजिए।

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book