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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षणसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 वाणिज्य शिक्षण - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- पाठ्य पुस्तकों में होने वाली हानियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
पाठ्य-पुस्तकों के प्रयोग से कुछ हानियाँ भी होती हैं जो निम्नलिखित हैं-
(i) अध्ययन क्षेत्र को सीमित करना - निश्चित पाठ्य-पुस्तकें अध्यापक एवं छात्र दोनों के अध्ययन क्षेत्र को सीमित कर देती हैं। वे प्रायः विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता को ही नहीं समझतीं।
(ii) रटने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करना - पाठ्य-पुस्तकों से बच्चों को सभी आवश्यक तथ्य एवं सूचनाएँ मिल जाती हैं, वे उन्हें समझने का प्रयत्न ही नहीं करते अपितु उन्हें रटकर परीक्षा में उत्तीर्ण होने का प्रयत्न करते हैं।
(iii) सैद्धान्तिक ज्ञान पर बल - इनकी सहायता से शिक्षण करने पर बच्चे पाठ्य-पुस्तकें बच्चों को सैद्धान्तिक ज्ञान अधिक देती हैं। व्यावहारिक पक्ष से वंचित रह जाते हैं।
(iv) दोषपूर्ण सामग्री - पाठ्य-पुस्तकें प्रायः दोषयुक्त सामग्री से पूर्ण होती हैं। विस्तृत अध्ययन के अभाव में छात्र इन अशुद्ध सूचनाओं को रट लेतें हैं और अज्ञानी से कुज्ञानी हो जाते हैं।
(v) ज्ञान स्थायी नहीं होता - पाठ्य-पुस्तकों की उपस्थिति में बच्चे 'करके सीखने' की आवश्यकता नहीं समझते। इनके माध्यम से वे जो ज्ञान प्राप्त करते हैं, वह स्थायी नहीं होता।
(vi) अध्यापकों द्वारा पाठ्य पुस्तकों का सही उपयोग न करना - अध्यापक पाठ्य-पुस्तकों का सही उपयोग नहीं करते। वे स्वयं पाठ्य पुस्तकों का कक्षा में पठन करके अपने कर्तव्य की इतिश्री समझते हैं। बहुत से अध्यापक तो इतना भी कष्ट नहीं करते। वे तो बच्चों को ही मौन पठन का आदेश देकर कक्षा में सो जाते हैं।
(vii) बच्चों का अध्ययन के प्रति सचेत न होना - पाठ्य-पुस्तकों के प्रयोग से सबसे बड़ी हानि यह होती है कि बच्चे अध्ययन की ओर सचेत नहीं होते, परीक्षा के समय ही वे इन पुस्तकों का अध्ययन करते हैं और कुछ थोड़ा-बहुत रटकर परीक्षा के मैदान में कूद पड़ते हैं।
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