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बी एड - एम एड >> बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्यसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बीएड सेमेस्टर-2 तृतीय प्रश्नपत्र - शिक्षा के तकनीकी परिप्रेक्ष्य - सरल प्रश्नोत्तर
प्रश्न- अभिक्रमित अनुदेशन का वर्णन कीजिए।
उत्तर-
अभिक्रमित अनुदेशन
(Programmed Instruction)
इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम सिडनी एल० प्रेसी ने किया। उन्होंने 1920 ई० में एक ऐसी शिक्षण मशीन का आविष्कार किया, जिसका प्रयोग छात्रों की कमजोरियाँ दूर करने के लिए किया जा सकता था। शिक्षण व परीक्षण, दोनों ही क्षेत्रों में, इसका प्रयोग किया गया। बी० एफ० स्किनर द्वारा भी इस दिशा में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया गया। स्किनर ने आपरेण्ट प्रतिबद्ध अनुक्रिया सिद्धान्त की खोज की। इस सिद्धान्त के आधार पर अधिगम को आसान व प्रभावशाली बनाया जा सकता है। इस सिद्धान्त के आधार पर ही, उन्होंने प्रतिबद्ध अनुक्रिया शिक्षण प्रतिमान का भी विकास किया। अभिक्रमित अनुदेशन की पद्धति स्किनर के इसी सिद्धान्त पर आधारित है।
भारत में 1963 में सर्वप्रथम पैडागाजिकल इन्स्टीट्यूट इलाहाबाद ने इस क्षेत्र में अपना योगदान दिया। इसके बाद में, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद् तथा उच्च शिक्षा संस्थान, बड़ौदा ने इस दिशा में अपने प्रयास प्रारम्भ किए और संस्थान, इस पद्धति का विकास में, आज भी सक्रिय हैं। देश के विभिन्न शिक्षा विभागों ने भी इस क्षेत्र में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
अभिक्रमित अनुदेशन विधि के द्वारा छात्रों का अपनी वैयक्तिक भिन्नताओं के अनुसार सीखने का अवसर प्राप्त होता है। इसमें पाठ्यवस्तु को, उसके तत्त्वों में विभक्त करके, छोटे-छोटे भागों में प्रस्तुत किया जाता है। इन भागों का अध्ययन करके, छात्रों को, अपेक्षित अनुक्रियाएँ करनी होती हैं। इन अनुक्रियाओं की जाँच भी छात्र को ही करनी होती है। यह विधि, छात्रों को अधिगम की दिशा में तत्पर बनाये रखती है तथा उसे अपनी ज्ञान प्राप्ति का समुचित बोध ही होता है।
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