|
बी एड - एम एड >> बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाजसरल प्रश्नोत्तर समूह
|
5 पाठक हैं |
||||||
बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज
अध्याय 14 - घरेलू हिंसा अधिनियम-2005
[Domestic Violence Act-2005]
प्रश्न- घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 का परिचय दीजिए।
लघु उत्तरीय प्रश्न
- घरेलू हिंसा किसे कहा जा सकता है?
- सरकार ने पीड़िताओं के लिए किन अधिकारों को बनाया है?
उत्तर-
घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 भारत की संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है जिसका उद्देश्य घरेलू हिंसा से महिलाओं को बचाना है और पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है। यह 26 अक्टूबर, 2006 को लागू हुआ।
शारीरिक दुर्व्यवहार अर्थात् शारीरिक पीड़ा, अपमान या जीवन या अंग या स्वास्थ्य को खतरा या लेकिन दुर्व्यवहार अर्थात् महिला को गर्भपात का उत्पीड़न, अपमान या तिरस्कार करना या अतिरिक्त करना या मानसिक और भावनात्मक दुर्व्यवहार अर्थात् अपमान, उपहास, यातना देना या आर्थिक दुर्व्यवहार अथवा वित्तीय संसाधन, जिससे वह हताश रहे, से वंचित करना, मानसिक रूप से परेशान करना, उसे घर से निकाल देना आदि घरेलू हिंसा कहलाते हैं।
इस कानून के अनुसार घरेलू हिंसा में निम्न प्रकार की हिंसा और दुर्व्यवहार आते हैं। किसी भी घरेलू संबंध या नातेदारी में किसी प्रकार का व्यवहार, आचरण या वार्तालाप जिससे (1) आपके स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन, या किसी अंग को कोई क्षति पहुँचती है, या (2) मानसिक या शारीरिक हानि होती है, घरेलू हिंसा है।
इसके अलावा घरेलू संबंधों या नातेदारी में किसी भी प्रकार का—
- शारीरिक दुरुपयोग (जैसे— मार-पीट करना, थप्पड़ मारना, दांत काटना, ठोकर मारना, लात मारना इत्यादि)।
- लैंगिक शोषण (जैसे— बलात्कार अथवा बलपूर्वक बनाए गए शारीरिक संबंध, अश्लील साहित्य या सामग्री देखने के लिए मजबूर करना, अपमानित करने के दृष्टिकोण से किया गया लैंगिक व्यवहार, और बालकों के साथ लैंगिक दुर्व्यवहार)।
- मानसिक और भावनात्मक हिंसा (जैसे— अपमानित करना, गालियाँ देना, चरित्र और आचरण पर आरोप लगाना, लड़की न होने पर प्रताड़ित करना, दहेज के नाम पर प्रताड़ित करना, नौकरी न करने या छोड़ने के लिए मजबूर करना, आपको अपने मन से विवाह न करने या किसी व्यक्ति विशेष से विवाह के लिए मजबूर करना, आत्महत्या की धमकी देना इत्यादि)।
- आर्थिक हिंसा (जैसे— आपको या आपके बच्चों को आर्थिक देखभाल देने से मना करना, संसाधन न देना, आपको अपना रोजगार न करने देना, या उसमें रुकावट डालना,आपकी आय, वेतन इत्यादि आपसे ले लेना, घर से बाहर निकाल देना इत्यादि भी घरेलू हिंसा है।
इस अधिनियम को लागू करने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उनके इस कानून के तहत कुछ कर्तव्य है जैसे— जब किसी पुलिस अधिकारी, संरक्षण अधिकारी, सेवा प्रदाता या मजिस्ट्रेट को घरेलू हिंसा की घटना के बारे में पता चलता है, तो उन्हें पीड़ित को निम्न अधिकारों के बारे में सूचित करना है—
- पीड़िता इस कानून के तहत किसी भी राहत के लिए आवेदन कर सकती है जैसे कि— संरक्षण आदेश, आर्थिक राहत, बच्चों के अस्थायी संरक्षण (कस्टडी का आदेश), निवास आदेश या मुआवजे का आदेश।
- पीड़िता आधिकारिक सेवा प्रदाताओं की सहायता ले सकती है।
- पीड़िता संरक्षण अधिकारी से संपर्क कर सकती है।
- पीड़िता निःशुल्क कानूनी सहायता की मांग कर सकती है।
- पीड़िता भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत क्रिमिनल याचिका भी दाखिल कर सकती है।
- घरेलू हिंसा प्रवर्तियों को तीन साल तक की जेल हो सकती है, इसके तहत पीड़िता को गंभीर श्रेणी में श्रेणि करने की आवश्यकत होती है।
|
|||||










