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बी एड - एम एड >> बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाजसरल प्रश्नोत्तर समूह
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बी.एड. सेमेस्टर-1 प्रश्नपत्र- IV-C - लिंग, विद्यालय एवं समाज
अध्याय 11 - भारत में (मुख्यतः उत्तर प्रदेश) लड़कियों की शिक्षा की समीक्षा
[Overviewing of girls education in India with special reference to U. P.]
प्रश्न- उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा की प्रगति के क्षेत्र में कौन-कौन से योजनाएँ चल रही हैं?
लघु उत्तरीय प्रश्न
- दोपहर भोजन योजना क्या है?
- जिला प्राइमरी शिक्षा परियोजना का उद्देश्य क्या है?
उत्तर-
प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति की योजनाएँ:
- ऑपरेशन ब्लैक बोर्ड (1986-87) में शुरू किया गया। इसका उद्देश्य प्राथमिक स्कूलों को पर्याप्त सुविधाएँ तथा कम-से-कम दो अध्यापक और ज़रूरी अध्ययन-शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना था। 2000-01 में इस योजना की मद में 10378 लाख रुपये का बजट पास किया गया।
- शिक्षा गारंटी योजना का उद्देश्य शैक्षिक रूप से अनुपयुक्त क्षेत्रों में विद्यालय केंद्र नामक शिक्षा केंद्र खोलना था, जहाँ 6 से 11 वर्ष आयु समूह के कम से कम 30 बच्चे होने चाहिए। इन केंद्रों में पंचायत संविदा पर अध्यापक नियुक्त करती है और केंद्र के लिए भौतिक स्तर पर स्थान उपलब्ध कराया जाता है।
- दोपहर का भोजन केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई योजना छात्रों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने वाली योजना है, जिसके तहत मान्यता प्राप्त प्राथमिक स्कूल के हर बच्चे को न्यूनतम प्रमाणित उपस्थिति के आधार पर प्रतिदिन अनाज दिया जाता है।
- कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (के. जी. बी. वी.) ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों की बालिकाओं की शिक्षा को बेहतर करने के लिए यह योजना 25 क्षेत्रों में लागू की गई। इसके अंतर्गत 31 के. जी. बी. वी. स्कूल खोले गए जिनमें 7 स्कूल गैर सरकारी संस्थाओं की मदद से खोले गए। यह योजना उन बच्चों के लिए चलाई गई, जिनकी शिक्षा बाधित हो चुकी थी।
- सर्वशिक्षा अभियान सन 2001-02 में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई यह योजना उत्तर प्रदेश के 16 जिलों में चलाई गई तथा 2002-03 में यह योजना सभी जिलों में लागू कर दी गई। 30 सितंबर, 2005 तक इस योजना के अंतर्गत 8957 नए प्राथमिक स्कूल और 12167 नए जूनियर हाई स्कूल खोले गए। इस योजना में स्कूल भवनों का निर्माण एवं मरम्मत, शिक्षकों को ट्रेनिंग, जरुरी संसाधन तथा पढ़ने कीसामग्री को भी सम्मिलित किया गया है, जिनमें मुफ्त स्कूल बैग, स्कूल ड्रेस और किताबें भी बच्चों को दी जाती हैं।
- बेसिक शिक्षा परियोजना (I और II) राज्य सरकार ने विश्व बैंक की सहायता से 1993 में उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में यूपी बेसिक शिक्षा परियोजना शुरू की। इसका उद्देश्य सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा है। यूपी बी.ई.पी. I और II को इन्हीं 17 जिलों में स्कूलों, अध्यापकों और शिक्षण कक्षाओं की जरूरत पूरी करने के लिए चलाया गया था। जरूरतमंद नामांकन में हुई बढ़त के फलस्वरूप पैदा हुई थीं।
- जिला प्राथमिक शिक्षा परियोजना (डी. पी. ई. पी.-II) यह योजना 1997 में 18 जिलों में शुरू की गई। इसका उद्देश्य सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा देना था। इस योजना का लक्ष्य शिक्षा की पहुंच बढ़ाना, स्कूलों में बने रहने की दर बढ़ाना, गुणवत्ता में सुधार तथा संस्थानिक क्षमता का निर्माण है।
विशेष लक्ष्य:
- नामांकन, ड्रॉप आउट और शैक्षिक उपलब्धि में लिंग तथा सामाजिक समूहों के बीच अंतर को घटाकर 5 प्रतिशत से 2 प्रतिशत करना।
- प्राथमिक स्तर पर औसत ड्रॉप आउट रेट को घटाकर 10 प्रतिशत से कम करना।
- आधार अनुमान-स्तर पर आंतरिक औसत उपलब्धि स्तर को कम-से-कम 25 प्रतिशत तक बढ़ाना।
- यूनिसेफ समर्थित प्राथमिक शिक्षा परियोजना: राज्य में एक संयुक्त यूएन परियोजना शुरू की गई है, जो खास क्षेत्रों में छात्राओं और छात्राओं के लिए रचनात्मक कार्य जैसे कार्यक्रम के जरिए डी. पी. ई. पी. के अनुरूप के रूप में काम करेगी। इसके अलावा एक यूनिसेफ समर्थित परियोजना शुरू की गई है। यह राज्य के उन 6 जिलों में लागू की गई है, जो डी. पी. ई. पी. - II परियोजना में नहीं थे।
- शिक्षा मित्र योजना: राज्य ने शिक्षा मित्र या अर्धशिक्षक योजना शुरू की है, जिसके तहत 10+2 उत्तीर्ण युवकों को अर्धशिक्षक के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। इनमें से आधी नियुक्तियाँ महिलाओं की होंगी। इस योजना के तहत स्थानीय शिक्षित व्यक्तियों को 1450 रुपये प्रति माह पर नियुक्त किया जाता है।
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